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‘वर्ल्ड हेल्थ डे’ को कोरोना युग में यूँ याद किया डॉ.मधेपुरी ने

जब लॉकडाउन के दरमियान कोरोना वायरस के उत्पात की व्यथा-कथा टेलीविजन में देखते-देखते, अखबारों में पढ़ते-पढ़ते तथा घर में सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते-करते दिमाग थकने लगा तो समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने स्वामी रामदेव द्वारा दिए गए निर्देशानुसार इम्यूनिटी बढ़ाने हेतु योगासन-प्राणायाम के साथ-साथ व्यायाम भी करना शुरू कर दिया।

इसी क्रम में डॉ.मधेपुरी को अपना विद्यार्थी जीवन याद आया और उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में उन्हें टीएनबी कॉलेज भागलपुर के तत्कालीन एथलेटिक प्रसिडेंट प्रो.एस ए नसर द्वारा शरीर सौष्ठव (Muscle Control) प्रदर्शित करने तथा मुंह से फूंक-फूंक कर फुटबॉल के ब्लैडर को फोड़ने हेतु पुरस्कृत भी किया गया था।

चलते-चलते यह भी बता दें कि डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रतिवर्ष 7 अप्रैल को “विश्व स्वास्थ्य दिवस” मनाया जाता है तथा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम भी किए जाते हैं। परंतु, इस  बार तो कोरोना के कहर के कारण  भारत के साथ-साथ विश्व के सर्वाधिक देशों ने 15 से 30 दिनों का लाॅकडाउन घोषित कर दिया है। तभी तो “Health is Wealth”  का संदेश बच्चों एवं बड़ों तक पहुंचाने के लिए डॉ.मधेपुरी ने अपने निवास ‘वृंदावन’ में अकेले “विश्व स्वास्थ्य दिवस” मनाया जबकि 10 वर्ष पूर्व ही लगातार दो बार उनका बायपास सर्जरी किया जा चुका है। संकल्प और संयम से कुछ भी जीता जा सकता  है।

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जहाँ गरजती थी कभी बंदूकें, वहाँ अब पेंटिंग व पढ़ाई से संवरने लगा है जीवन

मधेपुरा जिले के कुमारखंड प्रखंड के टेंगराहा-सिकयाहा में जहाँ कभी गरजती थीं बंदूकें वहीं सिकयाहा के आदित्य आनंद के यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन में कम्पीट करने के बाद से गांव में सजीव बदलाव का श्रीगणेश हो गया है। जहां की गली-सड़क पर गरजती थी बंदूकें वहीं अब कूची से निकले रंग से मधुबनी पेंटिंग बनने लगी है और जीवन सँवरने लगा है। गांव की माली हालत में सुधार होने लगा है और आर्थिक समृद्धि आने लगी है।

Madhubani Painting made by Tengraha-Sikiyaha village women.
Madhubani Painting made by Tengraha-Sikiyaha village women.

यह भी जानिए कि यही वह क्षेत्र है जहां हजारों एकड़ बंजर भूमि है। जहां कभी सैकड़ों एकड़ जमीन जंगल जैसे दृष्टिगोचर होते थे। लोग बंदूके थामे रहते थे। कई बार हथियार समर्पण कराए गए। लोकनायक जयप्रकाश नारायण और जननायक कर्पूरी ठाकुर के प्रयास से हथियारबंद लोगों ने आत्मसमर्पण यह सुनकर किया कि सरकार आपके रोजगार का बंदोबस्त करेगी, परंतु ऐसा नहीं हो पाया।

बता दें कि 70 के दशक में उस इलाके में भ्रमण करने के अनुभवों को समाजसेवी प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने मधेपुरा के एक सांसद के समक्ष रखते हुए यही कहा था कि यदि केंद्रीय सरकारी सरकार की ‘बंजर भूमि सुधार आयोग’ की टीम को लाकर इस बंजर भूमि को सुधारा जाए, जिसके बीचों-बीच एक नदी बहती है, तो यह इलाका उपजाऊ बन जाएगा और लोग बंदूक की जगह हल चलाने लगेंगे… लेकिन वैसा नहीं हो पाया।

मालूम हो कि टेंगराहा-सिकयाहा की गूंजती बंदूकों को शांत करने के लिए 2006 में सूबे बिहार के सीएम नीतीश कुमार के पहल पर 60 लोगों को आत्मसमर्पण कराकर मुख्यधारा में लाया गया। 26 भूमिहीनों को जमीन भी दी गई तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी… फिर भी माली हालात नहीं सुधर पाई।

डीएम बनने की तमन्ना लिए गांव के स्कूल में पढ़ने वाला उसी धरती का बेटा आदित्य आनंद जब यूपीएससी कम्पीट कर दिखाया तो बच्चे पढ़ने लगे और अचानक गांव में बदलाव की हवा भी बहने लगी। आज गांव की महिलाएं मधुबनी पेंटिंग एवं डगरा निर्माण करने लगी है। वर्तमान में सौ से अधिक महिलाएं  एक-एक पेंटिंग 1200 से 1500 तक में बेच लेती है। हाल में जिला प्रशासन की अनुशंसा पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया गया है।

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कोरोना ने भारत के वसुधैव कुटुंबकम को भी जगाया

भारत में लोगों ने कोरोना को किसी युद्ध से कम नहीं माना है। इस युद्ध को लड़ने में सभी एकजुट दिख रहे हैं। विकसित देशों के समक्ष भारत मिसाल पेश करता दिख रहा है। युद्ध काल में पहले भी माताएं और बहनें अपना नाक-कान के आभूषण उतार कर देश के नाम दान करते देखी जाती रही हैं।

बता दें कि आज जहाँ भारत के लोग एकजुट होकर 1 दिन का वेतन दे रहे हैं वहीं हमारे सारे सांसदों ने 30% वेतन कटौती कर कोरोना को भगाने हेतु डोनेट किया है। यह 30% वेतन की कटौती मात्र 1 महीने के लिए नहीं बल्कि 1 वर्ष तक यह कटौती जारी रहेगी। इस बाबत महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल आदि के द्वारा भी 30% वेतन कटौती से कोरोना से लड़ने वाले उपकरणों की खरीदारी की जाएगी।

यह भी बता दें कि प्रत्येक सांसद के क्षेत्रीय विकास मद के 2 वर्षों (20-21 एवं 21-22) के 10-10 करोड़ की राशि को भी कोरोना से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री ने कैबिनेट की बैठक में आज मंजूरी दी है जबकि पिछले महीने मधेपुरा के एमएलसी ललन कुमार सर्राफ ने मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास निधि से कोरोना वायरस के रोकथाम एवं इलाज में प्रयुक्त होने वाली विभिन्न सामग्रियों जिसमें थर्मल स्केनर, मास्क, साबुन-सैनिटाइजर, ग्लब्स, स्प्रे-मशीन, चिकित्सा पदाधिकारी एवं स्वास्थ्य कर्मियों के लिए पर्सनल प्रोटेक्शन किट के लिए 3 करोड़ 25 लाख रुपए की अनुशंसा एवं सहमति पत्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रेषित कर दी है। उन्होंने लाॅकडाउन के समय लोगों को अपने घर में रहने की अपील की तथा सबों के स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन की कामना की। कई स्वयंसेवी संस्थाएं गरीबों के साथ-साथ जानवरों को भी भोजन उपलब्ध कराने में तत्पर दिखे। कई जगह बंदर और कुत्ता को भी खाना खिलाते हुए देखा गया।

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कोरोना के विरुद्ध संकल्प की दीवाली

कोरोना के खिलाफ जंग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर रविवार, 5 अप्रैल 2020 को बिहार समेत पूरे देश ने एकजुटता दिखाई। शहरों से लेकर गांवों तक करोड़ों लोगों ने रात नौ बजे 9 मिनट तक घरों की लाइट बुझाकर और दीये, मोमबत्ती, टॉर्च और मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर इस महामारी से मुक्ति की दुआ की।

घड़ी में जैसे ही 9 बजे कश्मीर से कन्याकुमारी तक लोगों ने कोरोना से लड़ने का संकल्प लिया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। खुद प्रधानमंत्री ने दीप जलाते हुए अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की और एक श्लोक साझा किया जो इस प्रकार है:

शुभं करोति कल्याणमारोग्यो धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोsस्तुते।।

अर्थात् जो शुभ करता है, कल्याण करता है, आरोग्य करता है, धन संपदा करता है, ऐसे दीप की रोशनी को मैं नमन करता हूँ।

इधर बिहार में भी रात नौ बजे करोड़ों लोगों ने कोरोना के खिलाफ एकजुटता का शानदार उदाहरण पेश किया। लॉकडाउन से उकताए लोग अपने-अपने घरों के दरवाजे, बालकनी और छतों पर निकल आए। लोगों ने न केवल दीप-मोमबत्ती जलाए बल्कि पटाखे भी फोड़े। लगा जैसे दीवाली आ गई हो।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अपने सरकारी आवास 1, अणे मार्ग में रात नौ बजे 9 मिनट तक दीप जलाकर कोरोना संक्रमण के विरुद्ध अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। यह एक तरह से सम्पूर्ण बिहार के संकल्प का प्रदर्शन था। उन्होंने कहा कि इससे हमारी दृढ़ इच्छाशक्ति और भी मजबूत हुई है। हमें विश्वास है कि देशवासियों की एकजुटता से हम कोरोना से मुक्ति पाने में सफल होंगे।

 

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देश ने बच्चियों के कोरोना–सहयोग को किया सलाम

एक ओर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की छोटी-छोटी बच्चियों ने अपना गुल्लक तोड़ कर जमा राशियां ले आई और पुलिस व पदाधिकारियों से बोलीं- अंकल ये लो मेरी ओर से करोना मरीज और गरीबों को खाना खिला देना। वहीं दूसरी ओर लखनऊ के पीजीआई में भर्ती बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर की चार बार हुई जांच में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने से वह घबरा गई। पुनः पांचवीं बार उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टरों ने कहा कि कनिका कपूर में हाई-लोड पाया जा रहा है, फिर भी स्टाफ, नर्स एवं डाक्टर सेवा में लगे हैं।

यह भी बता दे कि संपूर्ण देश का एक-एक व्यक्ति कोरोना को परास्त करने के लिए उस नन्हीं चिड़िया की तरह जंगल की आग बुझाने में लगा है। मधेपुरा की सामाजिक संस्था सृजन दर्पण के अध्यक्ष डॉ.ओम प्रकाश एवं सचिव विकास कुमार ने बाहर से आने वाले मजदूरों के बीच मास्क वितरण की जानकारी दी तो संरक्षक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उन्हें हाथ धोने हेतु डेटॉल साबुन वितरण करने के लिए सहयोग किया और कुछ करने के लिए- उत्साह भी दिखाया।

यह भी जानिए कि आज देश भर में जहाँ जिसे जो बन पड़ता है उसी से वह कोरोना को भगाने में लगा दिखता है तथा कोरोना पीड़ित मजदूरों को मदद करता दिखता है। तभी तो संवेदनशील प्रियंका गांधी वाड्रा ने एयरटेल, रिलायंस, वोडाफोन… आदि टेलीकॉम कंपनियों के प्रधान को अलग-अलग पत्र लिखकर राष्ट्र निर्माण में लगे मजदूरों को खाना, आश्रय व दवा के अतिरिक्त एक-दो महीने के लिए फोन सेवाएं फ्री कराने की बात कही है ताकि वह मजदूर श्रमिक अपने करीबियों से संपर्क कर सके… बातें कर सकें।

 

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नीतीश ने प्रधानमंत्री से कही बिहार के मन की बात

गुरुवार, 02 अप्रैल 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि भारत में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जो काम हुआ है उसे देखते हुए हमलोगों को भरोसा है कि जल्द ही हम इससे मुक्ति पा जाएंगे। प्रधानमंत्री ने जो निर्णय लिया है उसका हमलोग अनुपालन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। लोगों को सचेत किया गया है। बीच में कुछ परेशानी आई थी क्योंकि लॉकडाउन के दौरान भी दिल्ली से लोगों को यहां भेज दिया गया था। जितने लोग बिहार के बाहर से आए उन्हें उनके गांव तक पहुंचाया गया। उनके लिए अलग रहने, भोजन व चिकित्सा आदि का प्रबंध किया गया। उन्होंने बताया कि बिहार के दूसरे राज्यों से यहां आए लोगों को चिह्नित किया गया है। ऐसे लोगों की संख्या 1 लाख 74 हजार 470 है। इनमें 12 हजार 51 लोग विदेश से आए हैं। सभी को होम क्वारंटाइन में रखा गया है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार के लिए मेडिकल सॉफ्टवेयर की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि हमारा आग्रह दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता को लेकर है। लेबोरेट्री टेस्ट को प्रभावी बनाने के लिए भारत सरकार से अधिकृत टेस्टिंग किट और उसके साथ उपयोग में आने वाली अन्य सामग्री जैसे बीपी, आरएनए एक्सट्रैक्शन किट आदि को समाहित करते हुए एक सेट के रूप में दिया जाए। इसका काफी अच्छा परिणाम होगा। मुख्यमंत्री ने कोविड-19 की रोकथाम और उपचार की सामग्री जैसे एन-95 मास्क, पीपीई किट, वेंटिलेटर आदि के इंतजाम की बात भी कही।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि कोरोना संक्रमण खत्म करने के लिए हमलोगों ने कोरोना उन्मूलन कोष का गठन किया है। इसमें विधायक-विधानपार्षद अपने-अपने कोष से कम-से-कम 50 लाख की राशि हस्तांतरित करा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब बिहार के राज्यसभा और लोकसभा सांसद एक करोड़ की राशि अपने-अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसा कर रहे हैं, लेकिन इस राशि का उपयोग नहीं हो पाएगा, क्योंकि कोरोना को लेकर जो कुछ किया जा रहा है वह किसी क्षेत्रविशेष में नहीं हो रहा है। ऐसे में उनका पैसा यूं ही बचा रह जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि गृह मंत्रालय इस पर विचार करे कि राज्य के सांसद यदि मदद करना चाहते हैं तो वे कोरोना उन्मूलन कोष में मदद करें। सांसदों को इसकी अनुमति मिलनी चाहिए।

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नीतीश कुमार ने जनप्रतिनिधियों के साथ की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग

बुधवार, 1 अप्रैल 2020 को 1, अणे मार्ग, पटना स्थित ‘नेक संवाद’ में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना संक्रमण के प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर ग्राम पंचायत एवं नगर निकाय प्रतिनिधियों तथा जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इस दौरान अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में कोरोना वायरस से बचाव के लिए प्रारंभ से ही सरकार के द्वारा कदम उठाए गए हैं। इसको लेकर कई स्तरों पर प्रयास किया जा रहा है और सभी लोग सचेत हैं। उन्होंने कहा कि हर कोरोना पीड़ित का इलाज राज्य सरकार अपने संसाधन से करेगी।
अपने संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 4-5 दिनों में दूसरे राज्यों में फंसे लगभग 3000 लोगों के फोन कॉल आए। विभिन्न राज्यों में फंसे ऐसे लगभग एक लाख साठ हजार लोगों के लिए वहां की सरकारों से समन्वय बनाकर बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके साथ ही हाल ही में दिल्ली से बड़ी संख्या में आए लोगों को परिवहन विभाग के माध्यम से उनके गांवों तक पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण से निपटने में राज्य सरकार लोगों की हरसंभव सहायता करेगी।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि बिहार में कुल एक करोड़ अड़सठ लाख राशन कार्डधारी हैं, जिनके खाते में एक हजार रुपए की राशि अंतरित की जा रही है। इसके साथ ही एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि रबी फसल की कटनी के समय को देखते हुए उसे लॉकडाउन से मुक्त रखा गया है, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी होगा।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा, मुख्य सचिव दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद रहे।

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30 मार्च को बिहार में कोई नया कोरोना पॉजिटिव केस नहीं

कोरोना संकट के बीच बिहार के लिए सोमवार, 30 मार्च 2020 का दिन बहुत बड़ी राहत लेकर आया। जी हाँ, इस दिन बिहार में कोई नया कोरोना पॉजिटिव केस सामने नहीं आया। बता दें कि सोमवार देर शाम तक संभावित कोरोना मरीजों के टेस्ट सैंपल की कुल संख्या 1056 हैं। इनमें निगेटिव 1041 और पॉजिटिव 15 हैं। सोमवार को एक भी पॉजिटिव केस नहीं मिलना घने अंधेरे में उम्मीद की बहुत बड़ी किरण है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार जिस मजबूती से कोरोना का सामना कर रहा है उसे देख लगता है कि यह महामारी बिहार में अपने पांव नहीं पसार पाएगी।
ध्यातव्य है कि सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 1, अणे मार्ग, पटना में उच्चस्तरीय बैठक की और निर्देश दिया कि बिहार के जो लोग बाहर फंसे हुए हैं उनसे फीडबैक लेकर उनकी परेशानियों को अविलंब दूर करें, जो लोग बाहर से बिहार आ गए हैं उनकी स्क्रीनिंग, भोजन, आवासन की व्यवस्था के साथ-साथ उन्हें समुचित चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराएं तथा कोरोना के संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले संदिग्ध लोगों की गहन ट्रैकिंग करें एवं टेस्टिंग में तेजी लाएं।
पाठकों को बता दें कि अब तक मिली जानकारी के मुताबिक बिहार के बाहर से आए 13000 से अधिक लोगों को उनके गांव के विद्यालय तक पहुँचाने की कार्रवाई की गई है, जहां उन्हें 14 दिन क्वारंटाइन में रखा जाएगा। सीमा आपदा राहत केन्द्रों के अलावा राज्य के शहरी इलाकों में निर्धनों, निराश्रितों के लिए कुल 120 आपदा राहत केन्द्र खोले गए हैं। उधर नई दिल्ली स्थित बिहार भवन के नियंत्रण कक्ष से 207974 व्यक्तियों की समस्याओं पर कार्रवाई की गई है और मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरू, सिक्किम आदि स्थानों पर 5015 अप्रवासी बिहारियों को राहत पहुँचाई गई है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर राज्यवासियों से अपील की है कि कोरोना संक्रमण की गंभीरता को देखते हए प्रत्येक व्यक्ति सचेत रहें। जो जहाँ हैं, सोशल डिस्टेंसिंग अपनाएं। हम सब मिलकर इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम होंगे।

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लॉकडाउन में फंसे लोगों के लिए ‘आपदा सीमा राहत शिविर’

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार, 28 मार्च 2020 की शाम 1, अणे मार्ग, पटना में समीक्षा बैठक कर सीमावर्ती क्षेत्रों में लॉकडाउन में फंसे लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से ‘आपदा सीमा राहत शिविर’ की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इस शिविर में दूसरे राज्यों से आने वाले बिहार के लोगों अथवा अन्य राज्यों के फंसे लोगों को भोजन, आवासन एवं चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस व्यवस्था की समीक्षा एवं अनुश्रवण मुख्यमंत्री स्वयं कर रहे हैं।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कोरोना संक्रमण के कारण लोगों के लॉकडाउन में फंसे होने की स्थिति को आपदा मान रही है और ऐसे लोगों की मदद उसी तरह की जाएगी जैसे अन्य आपदा पीड़ितों के लिए की जाती है।
मुख्यमंत्री के इस निर्देश के आलोक में मुख्य सचिव दीपक कुमार ने राज्य के सभी सीमावर्ती जिलों – पश्चिमी चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, गया, औरंगाबाद, भोजपुर, कैमूर, बक्सर, छपरा, सीवान एवं गोपालगंज के जिलाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को एक बार फिर कोरोना संक्रमण, एईएस, बर्ड फ्लू एवं स्वाइन फ्लू को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने आज एक बड़ी पहल करते हुए मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत कोरोना उन्मूलन कोष में 7 करोड़ रुपए भी दिए।

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ब्रह्माकुमारी दादी जानकी का माउंट आबू में 104 साल में परिनिर्वाण

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय संचालिका रह चुकी 104 वर्षीय राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी दादी डॉ.जानकी का जन्म अविभाज्य भारत के सिंध प्रांत में 1 जनवरी 1916 को हुआ था। उन्हें बचपन में ही अपने माता-पिता से आध्यात्मिक संस्कार विरासत के रूप में मिला था।

बता दें कि ब्रम्हाकुमारी विश्वविद्यालय की संचालिका दादी जानकी ने 140 देशों में ब्रम्हाकुमारी की स्थापना पर विश्व की लगभग 20 लाख नर-नारियों को अपने संस्थानों से जोड़कर… सुगंधयुक्त प्रेम लुटाते हुए दिनांक 27 मार्च 2020 को माउंट आबू की एक निजी चिकित्सालय (ग्लोबल हॉस्पिटल) में अंतिम सांस ली।

जानिए कि मात्र चार क्लास तक पढ़ी एवं 14 साल की गुप्त तपस्या करने वाली दादी जानकी निरंतर आध्यात्मिक प्रेम प्रवाहित करती हुई आज अपनी दैहिक लीला समाप्त कर ली। वह हमें छोड़कर दूर भले हो गई लेकिन योग शक्ति की अद्भुत मिसाल बनकर दादी जानकी लाखों नर-नारियों के जीवन में उजाला भरकर आसमान का सर्वाधिक चमकता सितारा बन गई। तभी तो एक विश्वव्यापी संस्थान ने उनके नाम की है- “दुनिया की सबसे स्थिर मन की महिला” का विश्व कीर्तिमान।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri, popularly known as Bhishma Pitamah of Madhepura along with Rajyogini Ranju Didi and others inaugurating the function at Brahmakumari Ishwariya Vishwavidyalaya at Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri, popularly known as Bhishma Pitamah of Madhepura along with Rajyogini Ranju Didi and others inaugurating the 100th Birthday Celebration of Dadi Janki at Brahmakumari Ishwariya Vishwavidyalaya at Madhepura. (File Photo)

यह भी बता दें कि दादी जानकी के निधन की खबर ने कोरोना लाॅकडाउन के बावजूद देश और दुनिया में शोक की लहर पैदा कर दी। ध्यातव्य है कि दादी जानकी ने 91 वर्ष की उम्र में ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मुखिया का पदभार संभाली और पूरी दुनिया को प्रेम, योग एवं ध्यान का संदेश दिया। वह 46 हजार ब्रम्हाकुमारियों की अलौकिक माँ होने के साथ-साथ 12 लाख साधकों की प्रेरणापुंज भी बनी रही… भला क्यों नहीं, उम्र के इस पड़ाव पर भी दादी माँ 12 घंटे जन की सेवा में सक्रिय रहती थी। 60 वर्ष की उम्र में वह लंदन गई और 37 वर्षों तक विदेशी जमीन पर आध्यात्मिकता के बीज बोती रही….. 140 देशों के लोग को मेडिटेशन सिखाती रही। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत स्वच्छता मिशन का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया था। आज उनके नहीं रहने पर देश-विदेश के सारे ब्रम्हाकुमारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। दादी जानकी के निधन पर भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष सहित सारे उच्चाधिकारियों व श्रद्धालुओं ने ट्वीट के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की।

चलते-चलते यह भी कि ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मधेपुरा शाखा की संचालिका राजयोगिनी रंजू दीदी बराबर दादी जानकी के शताब्दी जन्मोत्सव पर शिक्षाविद् व मधेपुरा के सुप्रसिद्ध समाजसेवी प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करती रही और डॉ.मधेपुरी ने विस्तार से दादी जानकी द्वारा किए गए जन की सेवा की विस्तृत व्याख्यान से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करते रहे। कोरोना के कारण दादी जानकी की पुण्यतिथि पर विश्व के सभी श्रद्धालुओं ने उन्हें सादगी के साथ अपने-अपने घरों में श्रद्धांजलि दी।

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