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चार श्रेणी में बंटेंगीं शहर की सड़कें

एक तो जनसंख्या का दिशाहीन विस्फोट और दूसरा लोगों का गांवों से शहरों की ओर पलायन। ऊपर से प्रत्येक शहर में प्रतिदिन सौ से लेकर हजारों की संख्या में मोटर साईकिल एवं अन्य सवारियों का रोड पर आना। इसके अतिरिक्त बेरोजगारों को बहुत कुछ करने के लिए सड़क ही तो सहारा होता है।

फिर भी इतनी परेशानियों के बावजूद सरकारी दफ्तरों से अधिक अनुशासन सड़कों पर ही नज़र आता है। लेकिन इस सत्य को भी झुठलाया नहीं जा सकता कि हर शहर में सुबह या शाम – जाम ही जाम एक कहावत बनता जा रहा है।

तभी तो नीतीश सरकार द्वारा बिहार अर्बन रोड पॉलिसी-2016 में यह प्रावधान किया गया है कि राज्य के शहरों की सड़कें कम-से-कम दस मीटर और चौड़ी होंगी और न्यूनतम 30 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ेंगी।

इसके अतिरिक्त बिहार शहरी अभिकरण एवं इंडियन रोड कांग्रेस आदि के मद्देनज़र रोड पॉलिसी के मौजूदा प्रारूप के अनुसार चार श्रेणियों में बंटेंगी शहर की सड़कें – पहली श्रेणी – 50 से 60 मीटर चौड़ी होंगी सड़कें जिस पर 80 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ेंगे, दूसरी श्रेणी – 30 से 40 मीटर चौड़ी होंगी सड़कें जिस पर 60 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ेंगे, तीसरी श्रेणी – 20 से 30 मीटर चौड़ी होंगी सड़कें जिस पर 50 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ेंगे और चौथी श्रेणी – 10 से 20 मीटर चौड़ी होंगी सड़कें जिस पर 30 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ेंगे।

इसके अतिरिक्त वन वे के लिए भी नियम बनाए गए हैं। नियम चाहे जितने बना दिए जाएं परन्तु उनको सफल बनाना तो जनमानस पर ही निर्भर होता है। एक भारतीय जापान में होता है तो रद्दी कागज के एक टुकड़े को सड़क पर चलते रहने के बाद डस्टबिन में ही फेंकता है, परन्तु वही जब भारत की धरती पर उतरता है तो सब कुछ भूल कर सड़क को गन्दा करने में लग जाता है।

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किरण पब्लिक स्कूल ने धूमधाम से मनाया अपना स्थापना दिवस

मधेपुरा में विद्या की किरण फैलाने  में लगे किरण पब्लिक स्कूल ने समारोहपूर्वक अपना स्थापना दिवस मनाया। ये स्कूल का दसवां स्थापना दिवस था जिसका उद्घाटन उप विकास आयुक्त मिथिलेश कुमार ने किया। समारोह के मुख्य अतिथि जिला मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मिथिलेश कुमार और विशिष्ट अतिथि मधेपुरा कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अशोक कुमार व बीएनएमयू के पूर्व परीक्षा नियंत्रक आर.के.पी. रमण थे।

उप विकास आयुक्त मिथिलेश कुमार ने अपने संक्षिप्त संबोधन में स्कूल के छात्र-छात्राओं के अनुशासन की प्रशंसा की और कहा कि पंचायत चुनाव के बाद मौका मिला तो मैं इस स्कूल में अवश्य आऊँगा। जिला मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मिथिलेश कुमार ने स्कूल की व्यवस्था की सराहना की। डॉ. अशोक कुमार व बीएनएमयू के पूर्व परीक्षा नियंत्रक आर.के.पी. रमण ने स्कूल के संस्थापक जयप्रकाश नारायण को याद करते हुए उनके योगदान की चर्चा की।

मौके पर अतिथियों ने स्कूल द्वारा प्रकाशित स्मारिका ‘प्रकाश-पुंज’ का विमोचन भी किया। सभी अतिथियों ने मुक्त कंठ से स्कूल की निदेशिका किरण प्रकाश और प्रबंध निदेशक अमन प्रकाश की सराहना की।

Students of Kiran Public School, Madhepura attending the Cultural Program.
Students of Kiran Public School, Madhepura attending the Cultural Program.

कार्यक्रम के प्रारम्भ में सभी अतिथियों ने मिलकर दीप प्रज्वलित किया। विद्यालय परिवार की ओर से अतिथियों को स्मृति-चिह्न प्रदान किया गया। छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश कर दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा।

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बी.पी.एस.सी. मुख्य परीक्षा की तिथि बढ़ी

बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) की मुख्य परीक्षा अब 15 जुलाई 2016 से होगी। पूर्व में यह परीक्षा 11 जून से 30 जून तक होने की अधिसूचना जारी की गई थी।

बता दें कि मुस्लिम समुदाय के अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा आयोग के अधिकारियों से परीक्षा की तिथि बढ़ाने की मांग की थी। उनका कहना था कि जून का महीना पाक रमजान का महीना होगा। अप्रैल में ही जब ऐसी प्रचंड गर्मी है तो जून का हाल क्या होगा? बेहाल कर देने वाली गर्मी में मुस्लिम समुदाय के परीक्षार्थियों को परीक्षा देने में काफी परेशानियाँ होंगी।

इस मांग के आलोक में बिहार सरकार एवं बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा संयुक्त रूप से विचार मंथन के बाद बी.पी.एस.सी. मुख्य परीक्षा की तिथि बढ़ाने का फैसला लिया गया। अब बी.पी.एस.सी. की मेंस परीक्षा 15 जुलाई 2016 से होगी। इसकी अधिसूचना अविलम्ब जारी कर दी जाएगी।

परीक्षा विशेषज्ञों ने इसे छात्रों के हित में सराहनीय फैसला बताते हुए ‘मधेपुरा अबतक’ से कहा कि इससे अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को ना केवल प्रचंड गर्मी से राहत मिलेगी बल्कि रमजान के बाद परीक्षा में उनके बेहतर करने की संभावनाएँ भी बढ़ेंगी।

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मो. कुदरतुल्लाह ने बनाया था मधेपुरा को ताड़ी-शराबबंदी का अगुआ..!

प्रखर गांधीवादी, अमर स्वतंत्रतासेनानी एवं बारह वर्षों तक एम.एल.सी. रहे मो. कुदरतुल्लाह काजमी मधेपुरा की उस अजीम शख्सियत का नाम है जिन्होंने बापू के आह्वान पर नशाबंदी के लिए मधेपुरा की धरती पर सत्याग्रह किया था और इसकी शुरुआत उन्होंने अपने ही पिता की ताड़ी-शराब की दूकान बन्द करवा कर की थी। जी हाँ, अपने ही पिता की दूकान के आगे कई दिनों तक अनशन पर वे बैठे रहे और उठे तो पिता को राजी करने के बाद ही। आगे चलकर मधेपुरावासियों ने उनकी स्मृति को कायम रखने के लिए कुदरतुल्लाह यूनानी दवाखाना का निर्माण किया जो आज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है और अपने पुनरुद्धार के लिए सरकार की ओर टुकुर-टुकुर देख रहा है।

लगता है बिहार की वर्तमान नीतीश सरकार ने मो. कुदरतुल्लाह सरीखे गांधीवादियों एवं स्वतंत्रतासेनानियों की आत्मा की आवाज सुनकर ही बिहार के गरीबों की दशा सुधारने हेतु राज्य में पूर्ण नशाबन्दी का संकल्प और साहस दिखाया है। सभी तबके के लोगों ने दिल खोल कर सराहना भी की है इस कदम की परन्तु शराब छोड़ने के बाद लोग अक्सर अल्कोहल विड्राल सिंड्रोम से पीड़ित हो जाते हैं। हाल ही में आयोजित ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कॉन्फ्रेंस में उपस्थित विशेषज्ञों ने इस पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे लोगों के लिए सौंफ का अर्क लाभप्रद होता है।

उक्त कॉन्फ्रेंस में मौजूद बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ. अब्दुल गफूर ने कहा कि यूनानी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने की जरूरत है। प्राचीन काल से ही इस विधि द्वारा उपचार होता आ रहा है। शराब छोड़ने के बाद नींद ना आना, हाथ काँपना, भूख ना लगना आदि शिकायत होने लगती है। सौंफ का अर्क पीने के बाद लोगों को शराब पीने जैसी अनुभूति होती है जिससे वह शान्त हो जाता है।

बता दें कि कुछ समय पूर्व कुदरतुल्लाह साहब की 48वीं पुण्यतिथि समारोह के दरम्यान बिहार सरकार के आपदा-प्रबंधन मंत्री प्रो. चन्द्रशेखर ने समाजसेवी डॉ. मधेपुरी, राजद नेता मो. खालिद, बिजेन्द्र प्रसाद यादव व मो. शौकत अली आदि कि उपस्थिति में मधेपुरा के यूनानी दवाखाना को नवजीवन देते हुए यहाँ आयुष चिकित्सालय निर्माण कराने की बात कही थी। समाजसेवी लोग लगे रहेंगे और कोसी के मंत्री जगे रहेंगे तो क्षेत्र का विकास देर-सवेर होगा ही।

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मधेपुरा को मिला आठ करोड़ का ऑडिटोरियम

यहाँ वर्षों से क्रियाशील हैं कई सभा भवन और एक ऑडिटोरियम – बी.पी. मंडल टाउन हॉल, टी.पी. कॉलेज सभा भवन, बी.एन. मंडल कला भवन, झल्लू बाबू सभागार, मधेपुरा कॉलेज मीटिंग हॉल और मंडल वि.वि. का एक विशाल ऑडिटोरियम। परन्तु, किसी में जगह की कमी तो कहीं आवाज गूंजने की समस्या। ए.सी. की सुविधा तो कदाचित् कहीं भी नहीं। लेकिन अब बहुत जल्द मधेपुरा को एक भव्य ऑडिटोरियम मिलने जा रहा है और वो भी उच्च स्तरीय सुविधाओं से युक्त।

बता दें कि बिहार की नीतीश सरकार ने मधेपुरा में लगभग एक बीघे के क्षेत्रफल में आठ करोड़ एक लाख की लागत से बनने जा रहे इस ऑडिटोरियम हेतु राशि भी आवंटित कर दी है। बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री एवं मधेपुरा के विधायक प्रो. चन्द्रशेखर ने ‘मधेपुरा अबतक’ को जानकारी दी कि युवा एवं खेल मंत्रालय से इसकी स्वीकृति मिल गई है और जिला मुख्यालय में इसके लिए 18 कट्ठा जमीन भी चिह्नित कर ली गई है। अन्य तकनीकी प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर एक वर्ष के अन्दर निर्माण कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा।

प्रो. चन्द्रशेखर ने कहा कि जिला मुख्यालय में बड़े आयोजन हेतु पर्याप्त जगह और सुविधा वाले ऑडिटोरियम के अभाव में काफी कठिनाई होती थी। इसे ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने यहाँ अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एक विशाल ऑडिटोरियम बनाने का निर्णय लिया। वैसे वर्तमान में यहाँ जो भी सभा व कला भवन मौजूद हैं उन्हें डी.एम. मो. सोहैल द्वारा और बेहतर बनाया जा रहा है।

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मधेपुरा में बिहार के प्रथम विधिमंत्री शिवनंदन बाबू की जयंती मनी

स्थानीय शिवनंदन प्रसाद मंडल उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में 18 अप्रैल को बिहार के प्रथम विधिमंत्री, प्रखर स्वतंत्रता सेनानी व प्रज्ञापुरुष बाबू शिवनंदन प्रसाद मंडल की भव्य जयंती मनाई गई। इस अवसर पर जयंती समारोह के उद्घाटनकर्ता डायनेमिक डी.एम. मो. सोहैल ने कहा कि मधेपुरा में शिक्षा का अलख जगाने वाले इतिहासपुरुष शिवनंदन प्रसाद मंडल के बताए गए मार्ग पर युवाओं को चलने की जरूरत है।

समारोह के मुख्य वक्ता समाजसेवी व साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने विस्तार से आधुनिक बिहार के निर्माता के रूप में शिवनंदन बाबू के जीवन-वृतान्त के विभिन्न पहलुओं से श्रोताओं को रू-ब-रू कराया। डॉ. मधेपुरी ने कहा कि कृष्ण के ज्ञान एवं अर्जुन के कर्मों से अपनी जीवन-गीता को संवारने वाले प्रज्ञापुरुष शिवनंदन बाबू के जीवन-दर्शन की ऊँचाई को मापा नहीं जा सकता। वे लोगों के बीच यही कहा करते – “No soul should remain uneducated on the Earth”.

जयंती समारोह को सम्बोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि के रूप में एम.एल.टी. कॉलेज, सहरसा के प्रधानाचार्य डॉ. के.पी. यादव एवं प्रो. श्यामल किशोर यादव, संस्थापक प्राचार्य वाणिज्य महाविद्यालय, साहुगढ़, मधेपुरा ने शिवनंदन बाबू के जनसेवा के प्रति समर्पण एवं शिक्षण संस्थाओं के प्रति त्याग की विस्तृत चर्चा की।

अध्यक्षीय भाषण में उद्गार व्यक्त करते हुए शिवनंदन प्रसाद मंडल उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य डॉ. निरंजन कुमार ने कहा कि शिवनंदन बाबू इसी स्कूल के छात्र थे, इसी स्कूल में उन्होंने शिक्षण-कार्य भी किया और आजादी के आंदोलन में सक्रिय होने पर निष्काषित भी हुए। उन्होंने कहा कि वे सौभाग्यवान हैं कि आज वे उसी स्कूल के प्राचार्य हैं। उन्होंने जिला पदाधिकारी मो. सोहैल, जिला शिक्षा पदाधिकारी बद्री नारायण मंडल, डॉ. मधेपुरी एवं विशिष्ट अतिथिद्वय के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कोसी के विभिन्न जिलों से वीक्षण कार्य के लिए आए शिक्षकों व सुकवि राजन बालन, स्काउट गाइड आयुक्त जयकृष्ण यादव, डॉ. सुरेश भूषण, डॉ. अरुण कुमार आदि को साधुवाद दिया।

समारोह का श्रीगणेश स्कूली छात्राओं द्वारा अतिथियों को बुके देकर सम्मानित करते हुए किया गया। जिला पदाधिकारी सहित सभी अतिथिगण द्वारा शिवनंदन बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। समारोह का संचालन शिक्षक मो. शकील अहमद ने किया।

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मधेपुरा और भारतीय रेल यानि एक और ‘कोसी’ की गाथा

वर्ष 2008 का अगस्त माह। कुसहा बाँध टूटने से बाढ़ की त्रासदी ने ऐसी धूम मचाई कि कोसी अंचल के जल-प्रलय को तत्कालीन केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया गया। चारों ओर सड़कें टूटीं, बड़े-बड़े पुल बह गए एवं रेल की पटरियाँ ध्वस्त हो गईं। हाल तक मधेपुरा से रेल द्वारा यात्रा करना सपना बना रहा, जबकि यहाँ पर दो दिग्गज सांसद हैं – एक शरद यादव और दूसरे राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और जनता बापू के बन्दर जैसे मुख बन्द किए बैठी है।

हाल में एक ट्रेन चलने लगी है – कोसी एक्सप्रेस। मुरलीगंज से मधेपुरा पहुँचती है सुबह के साढ़े तीन बजे। अब इसे सुबह कहा जाय कि रात, कहना मुश्किल है। बहरहाल, इस ट्रेन में ए.सी. का एक ही डब्बा होता है। मधेपुरा के लोग अपने परिवार के साथ उस ट्रेन से यात्रा करने हेतु कन्फर्म टिकट तो ले लेते हैं परन्तु स्टेशन पर गाड़ी उतनी देर (दो मिनट) भी नहीं ठहरती कि यात्री सपरिवार डब्बे में चढ़ सके। एक ही परिवार के कुछ लोग चढ़ जाते हैं और कुछ देखते हुए रह जाते हैं। कारण यह भी कि ट्रेन बड़ी लाईन वाली और प्लेटफॉर्म छोटी लाईन वाला। ट्रेन और प्लेटफॉर्म में अंतर इतना कि चढाई एवरेस्ट पर चढ़ने जैसी और उस पर तुर्रा यह कि रेल कर्मचारी एक-डेढ़ मिनट लगा देते हैं ए.सी. डब्बे के दोनों गेट खोलने में। तब तक ए.सी. के अधिकांश पैसेंजर को छोड़ गाड़ी सहरसा के लिए खुल जाती है। ऐसे में कुछ लोग तो किसी तरह अगल-बगल के नॉन ए.सी. डब्बे में चढ़ जाते हैं पर चढ़ने में असफल साबित हुए लोगों के सामने अब चुनौती होती है ट्रेन को सहरसा जाकर पकड़ने की।

खैर, कुछ लोग निजी मोटर गाड़ी से तो कुछ भाड़े के टैम्पू से सहरसा पहुँचकर उसी कोसी एक्सप्रेस पर सवार होते हैं परन्तु यहाँ पर उन्हे ट्रेन खुलने का इंतजार करना पड़ता है और वो भी दो-चार मिनट नहीं, लगभग घंटे भर और कई बार उससे भी अधिक। जरा सोचिए, उन यात्रियों को इस परिस्थिति में कैसा लगता होगा जो दौड़ते-हाँफते इस ट्रेन को पकड़ने सहरसा पहुँचे होंगे। कई बार तो सहरसा जाकर कोसी एक्सप्रेस पकड़ने की आपाधापी में यात्री अपनी अंतिम यात्रा पर भी चले गए हैं और सांसद-विधायक उनकी मातमपुर्सी करने और आर्थिक सहयोग देने पहुँचे हैं। पर क्या इन प्रतिनिधियों का कर्तव्य केवल इतना ही है..?

बहरहाल, इस ‘कोसी’ की ‘त्रासदी’ यहीं खत्म नहीं होती। आगे राजेन्द्र नगर टर्मिनल पर इस ट्रेन को दो मिनट से अधिक रुकना मंजूर नहीं लेकिन यहाँ से पटना जंक्शन की ढाई कि.मी. की दूरी ये आधे घंटे में तय करेगी..! तीन मिनट की दूरी ये तीस मिनट में क्यों तय करती है इसका जवाब कौन देगा..? यदि राजेन्द्र नगर में यह ट्रेन पाँच मिनट रुक जाती तो ज्यादातर यात्री यहीं उतर जाते और पटना जंक्शन पर यात्रियों और मोटर गाड़ियों का लोड स्वत: घट जाता। आखिर इसे कौन देखेगा..? क्या यात्रियों के लिए सब कुछ ‘प्रभु’ भरोसे ही छोड़ दिया जाएगा या हमारे जनप्रतिनिधि भी कुछ करेंगे..?

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. मधेपुरी से साभार

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मधेपुरा कॉलेज स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया

मधेपुरा कॉलेज परिवार द्वारा 10 अप्रैल को कॉलेज का 27वाँ स्थापना दिवस समारोह उत्सवी माहौल में मनाया गया | आरम्भ में तीन दिवसीय वार्षिक खेल-कूद प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने अपने इल्म व अभ्यास के प्रदर्शन से दर्शकों को इतना प्रभावित किया कि वि.वि. क्रीड़ा पदाधिकारी डॉ.शैलेन्द्र कुमार ने प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार-डॉ.पूनम यादव सहित कार्यक्रम संचालक गौतम कुमार व अन्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की |

स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन मंडल वि.वि. के प्रति कुलपति डॉ.जे.पी.एन.झा, प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार, प्राचार्य डॉ.माधवेन्द्र झा, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, कुलानुशासक डॉ.बी.एन.विवेका, डॉ.पूनम व अन्य ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया | कॉलेज परिवार द्वारा ‘अतिथि देवो भव:’ को चरितार्थ किया गया |

इस अवसर पर उद्घाटनकर्ता डॉ.झा ने छात्रों एवं शिक्षकों के लिए विशेष निर्देश देते हुए कहा कि शैक्षणिक माहौल को बनाये रखना हमारी प्राथमिकता है | इसके लिए सबों को मिलकर काम करना होगा | प्रभारी कुलसचिव डॉ.शैलेन्द्र कुमार, कुलानुशासक डॉ.बी.एन.विवेका, पूर्व कुलानुशासक डॉ.शिवनारायण यादव, यू.वी.के.कॉलेज के प्राचार्य डॉ.माधवेन्द्र झा ने कॉलेज स्थापना से अबतक के विकास की गाथा सुना-सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया |

दिनभर के उत्सवी माहौल के अन्त में अविस्मरणीय साँस्कृतिक कार्यक्रमों में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के बेहतरीन प्रदर्शन को चार चाँद लगाने वाले ख्याति प्राप्त गजल गायक संजीव, आगा खां सहित मनोज झा की पूरी टीम दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट में खो गयी… विलीन हो गई….. गुम हो गयी | थोड़ी देर के लिए सबकुछ ठहर सा गया…….लोगों की भूख भी मिट गई…….|

Lokarpan of College Magazine 'Rachnashree' by Guests- From LtoR- Dr.Poonam Yadav, Dr.Madhepuri, Dr.B.N.Viveka, PVC Dr.J.P.N.Jha, Dr.S.N.Yadav, Dr.Shailendra Kumar, Pr.Madhavendra, Dr.Ashok Kumar & others .
Lokarpan of College Magazine ‘Rachnashree’ by Guests- From LtoR- Dr.Poonam Yadav, Dr.Madhepuri, Dr.B.N.Viveka, PVC Dr.J.P.N.Jha, Dr.S.N.Yadav, Dr.Shailendra Kumar, Pr.Madhavendra, Dr.Ashok Kumar & others .

इस सम्पूर्ण उत्सवी माहौल को ऊँचाई प्रदान करने के लिए कॉलेज द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका- ‘रचनाश्री’ का विमोचन अतिथियों ने एक साथ मिलकर किया | स्थापना दिवस समारोह को जीवन्त करने वालों में डॉ.पूनम यादव, डॉ.भगवान मिश्रा, प्रो.मनोज भटनागर, डॉ.अभय कुमार, प्रो.मुस्ताक, रत्नाकर भारती, आरती झा, स्वाती, रानी सहित डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ.विनय कुमार चौधरी, प्रो.श्रीकान्त यादव, प्रो.रवि रंजन, अरविन्द कुमार, विजेंद्र मेहता आदि साधुवाद के पात्र हैं जो अन्त तक सतर्क रहे और मौजूद रहे |

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डॉ.रवि ने किया त्रि-दिवसीय भारतीय संस्कृति के महाकुम्भ का उद्घाटन

25 मई 1943 को आम लोगों के बीच जनवादी विचारों को ले जाने के लिए देश के कुछ कलाकारों, रंगकर्मियों एवं वैज्ञानिकों ने जिस संस्था की स्थापना की उसे नाम दिया विश्व प्रसिद्द वैज्ञानिक डॉ.होमी जहाँगीर भाभा ने- I.P.T.A यानी Indian Peoples’ Theatre Association . ie’ भारतीय जन नाट्य संघ |

मधेपुरा इप्टा द्वारा बी.एन.मंडल स्टेडियम में आयोजित त्रि-दिवसीय भारतीय संस्कृति के महाकुम्भ का उद्घाटन पूर्व सांसद व मंडल वि.वि. के संस्थापक कुलपति डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि, विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, डी.एम. मो.सोहैल, डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार, प्रो.श्यामल किशोर यादव, प्रो.योगेन्द्र नारायण यादव, समाज-सेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं अभिषद सदस्य डॉ.नरेश कुमार आदि ने दीप प्रज्वलित कर संयुक्तरूप से किया |

अपने उद्घाटन भाषण में डॉ.रवि ने विस्तार से शिक्षा मनीषी कीर्ति नारायण मंडल के त्याग एवं शिक्षा के प्रति ललक का आँखों देखा हाल दर्शकों के समक्ष परोसा जिन्हें इप्टा ने यह मंच उनके जन्मशती पर समर्पित कर दिया है | विधान पार्षद श्री वर्मा ने पूर्ण नशाबंदी के लिए सरकार की सराहना की तथा इप्टाकर्मियों द्वारा नशाबन्दी के फायदों को घर-घर तक ले जाने के लिए उन्हें साधुवाद दिया |

मुख्य अतिथि डी.एम. मो.सोहैल ने कहा की इप्टा अपने रास्ते पर अभी भी चल रहा है और जनवादी विचारों को लोगों तक पहुंचा रहा है | मौके पर डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.नायडू, प्रो.सचिन्द्र और डॉ.आलोक ने विचार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के आयोजकों का स्वागत भी किया |

समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने कहा कि कीर्ति बाबू को जानने के लिए महात्मा कबीर को जानना होगा और महात्मा गाँधी को भी जानना होगा | इस शिक्षा मनीषी को जानना हो तो गुरु नानक और पं.मदन मोहन मालवीय को जानना होगा | डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विश्वविख्यात परमाणु ऊर्जा के वैज्ञानिक डॉ.भाभा के ज्ञान-विज्ञानं तथा इप्टा के प्रति समर्पण की विस्तार से चर्चा की |

असम के बिहू एवं बंगाल के ‘कृष्णा’ सहित ज्ञान विज्ञान के सचिव मुरलीधर द्वारा मधनिषेध पर आधारित नाट्य ‘सबक’ का मंचन किया गया | अंत में मो. नौशाद एवं प्रो. योगेन्द्र ना. यादव की पुस्तकों का विमोचन किया गया |

अध्यक्षीय भाषण में कार्यकारी आध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि इप्टा के कार्यक्रमों के माध्यम से इसके लाभकारी विचारों को आम जन तक ले जायेंगे | प्रशान्त कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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पूर्ण नशाबंदी का श्रेय महिलाओं को दिया नीतीश सरकार ने

नीतीश के साहसिक फैसले को सारा बिहार सलाम करता है | चार दिनों में ही शराब न पीने की एक करोड़ सतरह लाख शपथ-पत्र तथा बारह लाख अनठावन हजार लीटर देसी शराब नष्ट किये जाने की जानकारी मिलते ही जहाँ सी.एम. के सचिव चंचल कुमार द्वारा मुख्यमंत्री सचिवालय, आवास एवं बिहार विकास मिशन के पदाधिकारियों-कर्मियों को आजीवन शराब न पीने की शपथ दिलाई गई, वहीँ मधेपुरा जिले के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल ने बी.एन.मंडल स्टेडियम में मंगलवार को पुलिस एवं प्रशासन से जुड़े पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को आजीवन नशापान नहीं करने की शपथ दिलाई | सबों के द्वारा शराब नहीं पीने का शपथ पत्र पढ़ा गया |

डी.एम. मो.सोहैल ने शपथ पत्र पढाये जाने के बाद अपने संक्षिप्त संबोधन में यही कहा कि एक भी पुलिस अथवा प्रशासन के कर्मचारी यदि शराब पीकर ड्यूटी पर आते हैं और जाँच के दौरान सही पाये जाते हैं तो उन्हें अविलम्ब नौकरी से निलंबित कर दिया जायेगा तथा अन्य कठोर दण्ड देने की अग्रेतर करवाई आरम्भ कर दी जाएगी | डी.एम. ने यह भी कहा कि जो कर्मचारी उचित कारण के बिना जानबूझकर शपथ ग्रहण में शामिल नहीं हुए – उन पर भी करवाई की जाएगी |

नीतीश सरकार की पूर्ण नशाबन्दी से दलित बस्तियों की महिलाओं में सर्वाधिक प्रसन्नता देखी जा रही है | सारी महिलाएं चहक-चहक कर नीतीश को दुआएं दे रही हैं |

कहीं शहरों में शराब नहीं पीने का संकल्प लिया जा रहा है तो कहीं गाँव को नशामुक्त गाँव बनाने का ग्रामीणों द्वारा शपथ लिया जा रहा हैं | वस्तुतः देसी-विदेशी शराब पर पूर्ण प्रतिबंध से बिहार के सामाजिक जीवन और सभ्यता-संस्कृति में बड़ा बदलाव होगा | अब ना तो शरीर का नाश होगा और ना आत्मा पथभ्रष्ट होगी | तभी तो शराब बंदी के पक्ष में सात लाख नारे लिखे गये और 84 हजार नुक्कड़ नाटक हुए |

जब नीतीश कुमार के पूर्ण शराबबंदी पर मधेपुरा अबतक द्वारा समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से प्रतिक्रिया माँगी गई तो उन्होंने बस यही कहा कि अब बिहार अपनी खोई विरासत वापस पा लेगा और हर मायने में देश का अव्वल राज्य बनेगा |

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