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“आईजी अंकल” की कहानी

कौन जानता था कि 9 मई, 1981 को पदभार ग्रहण करनेवाले मधेपुरा जिले के प्रथम एसपी अभयानंद, जिन्हें स्थानीय टी.पी.कॉलेज के फिजिक्स के लोकप्रिय प्रो.भूपेन्द्र मधेपुरी द्वारा सम्मानित किया गया था, आगे चलकर सुपर-30 एवं रहमानी सुपर-30 के आईजी अंकल बनेंगे तथा देश के बच्चों को मोबाइल पर फिजिक्स के सवाल सॉल्व कराएंगे |

First SP of Madhepura Mr.Abhayanand is being garlanded by the then Vice-Chairman Prof.Bhupendra Madhepuri in presence of First DM S.P.Seth and Sri Bholi Pd.Mandal First Chairman, Madhepura Municipality.
First SP of Madhepura Mr.Abhayanand is being garlanded by the then Vice-Chairman Prof.Bhupendra Madhepuri in presence of First DM S.P.Seth and Sri Bholi Pd.Mandal First Chairman, Madhepura Municipality.

बिहार के 28वें डी.जी.पी. पिता जगदानंद के योग्य पुत्र 48वें डीजीपी अभयानंद केवल IPS ऑफिसर ही नहीं बल्कि एडूकेशनिष्ट एवं सोशल एक्टिविस्ट के रूप में उस ऊंचाई को प्राप्त कर लिए हैं कि समस्त भारत के मेधावी छात्रों के बीच वे आज भी ‘आईजी अंकल’ कह कर ही पुकारे जाते हैं |

यह भी बता दें कि लगभग 15 वर्ष पूर्व आईपीएस अभयानंद का तबादला बीएमपी में हुआ था जहां व्यस्तता कम रहने की वजह से उन्होंने अपने बेटे को फिजिक्स पढाया और उसने आईआईटी क्रैक कर लिया | लगे हाथ उनके अंदर यह पवित्र विचार आया कि बेटे के अतिरिक्त अन्य बच्चों को क्यों न पढ़ाकर आईआईटीयन बनने में मदद करूं !

यहीं से जन्म हुआ आनंद कुमार के नाम चर्चित सुपर-30 में फिजिक्स पढाने वाले ‘आईजी अंकल’ का | बता दें कि एडीजी और फिर बिहार के डीजीपी बनने के बाद भी भारत के प्रतिभासंपन्न छात्र अभयानंद को सदैव ‘आईजी अंकल’ ही कहते रहे |

जब अवकाश ग्रहण करने के बाद IPS अभयानंद ने मुस्लिम बच्चों को पढ़ाने की योजना बनाई कि रहमानी सुपर थर्टी ने जन्म ग्रहण किया | इस वर्ष रहमानी सुपर-30 के 300 में से 270 बच्चों ने आईआईटी क्रैक किया जिसे बिहार ही नहीं, समस्त भारत द्वारा “आईजी अंकल” का कमाल करार दिया गया |

आज भी सरस्वती पुत्र अभयानंद के पढ़ने और पढ़ाने का सिलसिला जारी है |  बच्चों के पास उनका मोबाइल नंबर है | बच्चे जब चाहें प्रॉब्लम पूछते हैं और वे मोबाइल पर ही प्रॉब्लम सॉल्व करा देते हैं |

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पूर्णिया में खुलेगा विश्वविद्यालय

भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय क्षेत्राधीन फिलहाल दो कमिश्नरी है एक कोसी और दूसरा पूर्णिया | मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि पूर्णिया में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सभी कानूनी अड़चने जल्द ही दूर कर ली जाएंगी | सीएम ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो विधानसभा के अगले सत्र यानि मानसून सत्र में विधेयक भी लाए जाएंगे | यह सुनकर सीमांचल के छात्र, शिक्षक एवं बुद्धिजीवियों में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई | परंतु मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय का क्या नाम होगा इस बाबत कुछ नहीं कहा |

मधेपुरा अबतक द्वारा जब बी.एन.एम.यू के पूर्व परीक्षा नियंत्रक व विश्वविद्यालय विभागाध्यक्ष फिजिक्स डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से पूछा गया तो उन्होंने कोसी अंचल के महान साहित्यकार एवं स्वतंत्रता सेनानी फणीश्वर नाथ रेणु के नाम की चर्चा की |

आप यह भी जाने की तत्काल बिहार में कुल 18 विश्वविद्यालय हैं- 2 सेंट्रल यूनिवर्सिटी 15 स्टेट यूनिवर्सिटी एवं एक डीम्ड विश्वविद्यालय | पूर्णिया विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ बिहार को कुल 19 विश्वविद्यालय हो जाएंगे |

भारत में कुल मिलाकर हर तरह की यूनिवर्सिटीज की संख्या 754 है,  जिसमें 237 प्राइवेट यूनिवर्सिटी हैं |  वही विश्व में विश्वविद्यालयों की कुल संख्या 23364 हैं | यह भी जानिए की अमेरिका में सबसे अधिक विश्वविद्यालय है जिसकी संख्या- 3280 दूसरे, तीसरे और चौथे नंबर पर कनाडा, ब्राजील और रूस आता है |

यदि विश्व के टॉप 100 विश्वविद्यालयों की सूची बने तो अकेले अमेरिका का 59, ब्रिटेन-कनाडा का 5-5 चीन- ऑस्ट्रेलिया का 4-4 और जर्मनी का 3…….. और मेक्सिको का एक विश्व विद्यालय होगा | प्राचीन काल में विश्वगुरु कहलाने वाले भारत के पास आज एक भी विश्वविद्यालय वैसा नहीं है जिसे विश्व के टॉप 100 में स्थान मिल सके |

इसके लिए छात्र-शिक्षक-अभिभावक सबों का संयुक्त प्रयास अनिवार्य है- अकेले पीएम-सीएम-डीएम के चाहने से संभव नहीं होगा | सोचिए तो सही टॉपर घोटाले करते कौन है ?

मुख्यमंत्री द्वारा मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के नाते सीमांचल के अल्पसंख्यक छात्रों के लिए मदरसा बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की आवश्यकता महसूस की गई और उन्होंने विश्वविद्यालय के साथ-साथ पूर्णिया कमिश्नरी की झोली में दोनों सौगातें डाल दी |

इन्हें अमली जामा पहनाने के लिए सीएम ने उपस्थित सांसदों एवं विधायकों से सहयोग करने का अनुरोध किया और जिला पदाधिकारी सहित सभी पदाधिकारियों को अविलंब जमीन चिन्हित करने का आदेश भी दिया |

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क्या तीसरा विश्वयुद्ध पानी के लिए होगा ?

टी.वी. के विभिन्न चैनलों पर खासकर Zee News में सुधीर चौधरी के DNA  (डेली न्यूज़ एनालिसिस) के तहत लातूर एवं दिल्ली सहित लगभग-लगभग देश-दुनिया के सर्वाधिक स्थानों पर जल के वास्ते जीवन की आहुति भी देने की आशंकाएं जताई जाती हैं- जबकि कहावत यही है कि जल ही जीवन है यानी जल है तो जीवन है |

फिलहाल दैनिक जागरण द्वारा चलाए जा रहे अभियान- “तलाश तालाबों की” की चर्चाएं शीर्ष पर है | जल संकट की समस्याओं से निजात पाने के लिए देश-प्रदेश के युवाओं द्वारा तालाबों के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया गया है तथा तेजी से लिया भी जा रहा  है |

तभी तो कहीं पर पोखर से जलकुंभी निकालते हुए युवजनों को देखा जा रहा है तो कहीं जागरूक ग्रामीणों द्वारा सफाई अभियान शुरु करते हुए अवलोकन किया जा रहा है | जीविका से जुड़ी महिलाएं भी तालाब के जीर्णोद्धार को लेकर लगातार पहल कर रही हैं |

कुसहा त्रासदी के दरमियान कोसी अंचल के पोखरों एवं तालाबों की दुर्दशा से निपटने के लिए ग्रामीणों ने मधेपुरा अबतक को बताया कि हम लोगों की मेहनत के साथ-साथ यदि “मनरेगा योजना” से कुछ मदद मिल जाए तो पोखोरों का जीर्णोद्धार जल्द संभव हो जाएगा | ग्रामीणों ने यह भी कहा कि बरसात के बाद भी यदि तालाब में पानी जमा रहता है तो आजू-बाजू के कुँए एवं चापाकलों में पानी का लेवल सदा बरकरार रहेगा, कभी सुखेगा नहीं | भला क्यों नहीं, अब तो युवा वर्ग भी अनुपम मिश्र की पुस्तक- “आज भी खरे हैं तालाब” का अध्ययन करने लगे हैं |

यह भी बता दें कि नावार्ड के जिला विकास प्रबंधकों द्वारा गोष्ठी आयोजित कर जल संरक्षण के संबंध में आम लोगों को विस्तार से जानकारी दी जा रही है |

फ़िलहाल जल को लेकर विभिन्न देशों एवं प्रदेशों के बीच संघर्ष एवं टकराहट की स्थिति देखी जा रही है | समय रहते यदि हम जागरुक नहीं होते हैं तो निकट भविष्य में धरती के अन्य हिस्सों की तरह हमें भी जल संकट का सामना करना पड़ेगा | यदि जल ही जीवन है तो तीसरा विश्वयुद्ध इसी के लिए होना अवश्यंभावी है | कई दिग्गज नेताओं ने इस बाबत भविष्यवाणी भी की है |

इसे टालने के लिए विश्व स्तर पर जल संचय को लेकर प्राचीन व्यवस्थाओं को जीवन्त करने के लिए जन-जन को “बूंद-बूंद पानी बचाओ” आंदोलन से जोड़ना होगा तथा पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की तरह हर किसी के मन में यह विश्वास पैदा करना  होगा- हम होंगे कामयाब एक दिन ……..!!

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मधेपुरा औद्योगिक क्रान्ति की राह पर

राज्य की नई औद्योगिक नीति के प्रावधानुसार डीएम मो.सोहैल ने मधेपुरा के स्वरुप को बदलने तथा विकास की राह पर आगे ले जाने हेतु पूरी रणनीति तैयार कर ली है | तभी तो 8 जुलाई को आयोजित ‘Investors Meet’ में देश-विदेश के लगभग 65 निवेशकों को आमंत्रित किया जा सका है |

अधिक संख्या में निवेशकों से प्रस्ताव प्राप्त होने की संभावनाओं के मद्देनजर डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने 11 सदस्यीय कमिटी का गठन भी कर दिया है | डीएम की अध्यक्षता वाली उक्त कमिटी में एसपी विकास कुमार उपाध्यक्ष होंगे और सदस्य होंगे- डीडीसी, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, उपायुक्त वाणिज्यिक कर पदाधिकारी, वन प्रमंडल पदाधिकारी सहित अनुमंडल पदाधिकारी मधेपुरा एवं उदाकिशुनगंज | साथ ही टेक्निकल साइड से 5 सदस्य बनाए गए हैं- वे हैं, विद्युत विभाग, पथ निर्माण विभाग, उच्च पथ प्रमंडल विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग एवं लघु जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता | डीएम द्वारा जिला उद्योग विभाग के महाप्रबंधक को इस कमिटी का सदस्य सचिव बनाया गया है | इस कमिटी की बैठक आवश्यकतानुसार आहुत की जाएगी |

यह भी जान लें कि आमंत्रित किए गए प्रमुख निवेशकों के नाम हैं- इम्पीरियल ट्यूब्स प्रा.लि., सिकेम नेक्सन, नॉर ब्रेम्स, टिकमेन इंडिया लि., मयूर ग्लास इंडस्ट्रीज लि., आर.के. फोम्स, स्टोन इंडिया लि., हिन्दुस्तान फाइबर्स ग्लास वर्क्स, वी. इंटर टेक्नोलॉजी, वी.ओ. मेटलस प्रा.लि., ए.इंजीनियर्स, ए. इक्यूपमेंट्स सहित अन्य ढेर सारे |

यहाँ यह भी बता देना जरूरी है कि जो कोई भू-धारी न्यूनतम 2 एकड़ से अधिक अविवादित जमीन निवेशकों के हाथ बेचना चाहते हैं उन्हें भी 8 जुलाई की बैठक में आमंत्रित किया गया है | साथ ही विकास के लिए समर्पित जिला पदाधिकारी मो.सोहैल द्वारा निवेशक एवं भू-दाताओं को सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उद्योग केन्द्र में ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ स्थापित करा दिया गया है ताकि समस्याओं का त्वरित निष्पादन किया जा सके |

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सिर्फ खेती के लिए ही सूबे में बनेंगे 480 पावर सबस्टेशन

राज्य के अनुभवी एवं डायनेमिक ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने जिले के हरैली गांव के निकट “ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग फैक्ट्री” का उद्घाटन करते हुए कहा कि सूबे में किसानों के लिए अलग से 480 पावर सब स्टेशन बनाए जाएंगे |

पंजाब के प्रताप सिंह कैरो के नक्शे कदम पर चलने वाले ऊर्जा मंत्री श्री यादव ने कहा कि 2017 तक बिहार बिजली के मामले में आत्मनिर्भर हो जायेगा और हर खेत को पानी मिलने लगेगा | उन्होंने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि तीन फसलों के लिए विख्यात उत्तर बिहार के किसानों के घर में तभी तो खुशहाली आएगी और चेहरे पर लाली होगी | बता दें कि 2005 में मात्र 500 मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाला बिहार आज 4000 मेगा वाट बिजली उत्पन्न  कर रहा है |

समारोह की अध्यक्षता करते हुए जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मधेपुरा के पूर्व सांसद व वर्तमान राज्यसभा सांसद शरद यादव ने कहा कि प्रत्येक प्रखंड में पावर सब स्टेशन बनाए जाएंगे जिसके लिए अलग से एक हजार करोड़ की राशि दी जाएगी | उन्होंने कहा कि हर घर और हर खेत में बिजली पहुंचने से संपन्नता आएगी, बहुत बड़ा बदलाव आएगा- तभी तो राज्य में बिजली के क्षेत्र में हुए बेहतर काम की तारीफ प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं |

समारोह में उपस्थित सूबे के आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चंद्रशेखर, विधायक प्रो.रमेश ऋषिदेव एवं पूर्व विधानसभा पार्षद विजय कुमार वर्मा ने भी विचार व्यक्त किए | मौके पर डायनेमिक डी.एम. मोहम्मद सोहैल ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए जिले में हो रहे समस्त विकास कार्यो की चर्चा की | इस अवसर पर एसपी विकास कुमार, एसडीएम मुकेश कुमार, डीएसपी रहमत अली सहित जदयू एवं राजद के नेतागण उपस्थित थे |

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महिलाओं ने 10-10 रुपए जमा कर 33 करोड़ बनाये

‘स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी कोसी अंचल के मधेपुरा, सहरसा एवं सुपौल जिले की महिलाओं ने तो कमाल कर दिया है | कोसी के 36 हजार 700 समूहों से जुड़े 42 हजार परिवार की महिलाएं प्रति सप्ताह Rs.10 जमा करती है | आपको बता दें कि प्रत्येक समूह में न्यूनतम 8 और अधिकतम 10 महिलाएं होती हैं |

अब भी तो मानेंगे आप कि “बूंद-बूंद से घड़ा भरने वाली कहावत” में कितना दम है | सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जहां कोसी प्रमंडल की महिलाओं ने 2 वर्षों में 33 करोड़ की बचत की है वहीं सूबे में 4 लाख 70 हजार ‘स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी महिलाओं ने 250 करोड़ से अधिक की बचत की है | इतना ही नहीं, जहां महिलाओं द्वारा जमा की गई राशि से सामूहिक रोजगार शुरू किया जाता है वही सर्वाधिक जरूरतमंद महिलाओं को जमा राशि से ऋण भी दी जाती है और बैंक की तरह उसकी वसूली सूद के साथ भी की जाती है |

यह योजना महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए मधेपुरा जिले के कुमारखंड प्रखंड में सर्वप्रथम 2 अक्टूबर 2009 को शुरू की गई थी | साल लगते-लगते मधेपुरा के 5, सहरसा के 3 एवं सुपौल के 3 प्रखंडों को इस से जोड़ा गया | और आज ! पूछिए मत !!

अब तो मुख्यमंत्री कोसी मलबरी परियोजना के तहत कोसी की महिलाओं द्वारा 199 एकड़ भूमि पर शहतूत की खेती शुरू कर दी गई है | क्या इसे हम महिला सशक्तिकरण योजना के तहत् उन्नत कृषि कार्य की संज्ञा नहीं देंगे ? बिहार आगे बढ़ रहा है नहीं कहेंगे ?

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समाजवादी चिन्तक भूपेन्द्र नारायण मंडल की 42वीं पुण्यतिथि मनी

जिला मुख्यालय के भूपेन्द्र चौक पर प्रखर स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजवादी चिन्तक भूपेन्द्र नारायण मंडल की 42वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक भूपेन्द्र विचार मंच के बैनर तले प्रो. श्यामल किशोर यादव की अध्यक्षता में मनाई गई। शहर के समाजसेवियों एवं समाजवादी सोच के पूर्व विधायकों राधाकान्त यादव एवं परमेश्वरी प्रसाद निराला की उपस्थिति में बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो. चन्द्रशेखर ने उनकी प्रतिमा पर सर्वप्रथम माल्यार्पण किया और फिर उपस्थित गणमान्यों प्रो. सच्चिदानन्द यादव, डॉ. आलोक कुमार, गणेश मानव, समाजसेवी शौकत अली आदि ने भी पुष्पांजली अर्पित कर संक्षेप में अपने-अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो. चन्द्रशेखर ने कहा कि भूपेन्द्र बाबू जैसे समाजवादी नेता केवल सैद्धांतिक रूप में गरीबों के हक की लड़ाई नहीं लड़ते थे बल्कि अपने जीवन की कार्यशैली में भी इसका बखूबी पालन करते थे। वे विधायक व सांसद रहते हुए सोशलिस्ट पार्टी को मजबूत आधार देने के लिए बैलगाड़ी की सवारी कर गांव-गांव में लोगों के बीच अलख जगाते रहे।

अन्त में विचार मंच के सचिव डॉ. आलोक कुमार द्वारा विशेष रूप से आनंद, विकास, दिलखुश, धीरेन्द्र कुमार आदि युवाओं सहित सभी अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

बता दें कि इस अवसर पर जिला मुख्यालय की कई संस्थाओं द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही विभिन्न प्रखंडों में भी भूपेन्द्र बाबू की पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया गया।

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कोसी त्रासदी 2008 के बाद भी अब तक क्यों नहीं बना ध्वस्त पुल- बापू के गांवों का

2008 के इस कुसहा जल-प्रलय में ध्वस्त हुए हजारों-हजार घर, सड़कों के अनेक पुल एवं वह गई रेल की पटरियों में कुछ-कुछ सुधार व कार्य तो हुए हैं- फिर भी केंद्र सरकार द्वारा घोषित इस राष्ट्रीय आपदा में पुनर्वास के लिए हजारों लोग प्रखंड की ओर, कई गाँवों के लोग पुल के लिए प्रतिनिधियों की ओर तथा क्षेत्रीय जनता मधेपुरा से पूर्णिया रेल की सवारी करने के लिए केंद्र सरकार की ओर टकटकी लगाकर देख रही है|

जल-प्रलय के 8 वर्ष बीत गए | आज की तारीख में भी यदि आप किसी पार्क आदि सार्वजनिक स्थल पर जाएंगे तो आपको सुलझे सोच वाले व्यक्तियों से यही सुनने को मिलेगा –

यह कि जापान भी तो एक छोटा सा देश है जो क्षेत्रफल में अमूमन हमारे राजस्थान जैसा और जनसंख्या में लगभग यू.पी. जैसा माना जा सकता है | वहीं के हिरोशिमा एवं नागाशाकी को 6 एवं 9 अगस्त 1945 को अमेरिका द्वारा परमाणु बम से ध्वस्त ही नहीं बल्कि राख में तब्दील कर दिया गया | जब उसी राख पर एक महिला कुछ बच्चों को पढ़ाती हुई नजर आई तो दुनिया ने जापान एवं जापानियों के हौसलों को सलाम किया |

आखिर हमारे भारत को, भारतीय प्रदेशों को तथा विधायक, सांसद व जनप्रतिनिधियों को हो क्या गया है ? राष्ट्रवाद की भावना कहां खो गई है ?  हमारे भारत में जापान की तरह सूरज की प्रथम किरण कब आएगी जो यहां के नर-नारियों व बच्चे-बूढ़ों को जगाती रहेगी |

सोचिए तो सही, राष्ट्रीय आपदा घोषित किए जाने के बावजूद आज भी 20% लोग पुनर्वास के लिए भटक रहे हैं |

मुरलीगंज प्रखंड के रघुनाथ-भेलाही स्थित बेंगा नदी का यह ध्वस्त पुल 8 साल बाद भी विधायक-सांसद द्वारा कोई पहल नहीं किए जाने पर आंसू बहा रहा है | और गांव के लोगों को प्रखंड मुख्यालय तक जाने के लिए आज तक कई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है |

मधेपुरा के लोग तो 8 साल में रेल से मुरलीगंज ही पहुंच पाए हैं | पता नहीं कब तक पूर्णिया पहुंच पाएंगे | एक अकेला क्या करेगा ? पार होने के लिए कोटि करों में जबतक नहीं होगा पतवार  !

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संस्थापक कुलपति डॉ.रवि ने किया लोकार्पित- ‘उजाले का सफर’

बी.एन.मंडल वि.वि. के संस्थापक कुलपति व पूर्व सांसद डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि ने डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप के गीत-संग्रह ‘उजाले का सफर’ का लोकार्पण किया | लोकार्पणकर्ता डॉ.रवि ने कहा कि अंधेरे की त्रासदी में ‘उजाले का सफर’ करनेवाले सिद्धहस्त कवि डॉ.सिद्धेश्वर परिवर्तन के मार्ग को प्रशस्त करने में सक्षम हैं| उन्होंने कहा कि डॉ.काश्यप की मानवीय प्रतिबद्धता और मूल्यपरकता  सराहनीय है |

मुख्य अतिथि के रुप में प्रधानाचार्या डॉ.रेणु सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ.काश्यप रचनात्मक धर्म को नया स्वर देते हैं | उन्होंने यह भी कहा कि डॉ.सिद्देश्वर मानवीय जिजीविषा और मुक्ति चेतना को अभिव्यक्त करने में सिद्धहस्त है और सक्षम भी |

लोकार्पण समारोह के संचालक डॉ.विनय कुमार चौधरी ने कहा कि डॉ.काश्यप रचनात्मक प्रतिभा के साथ-साथ आलोचनात्मक प्रतिभा से भी संपन्न हैं | उन्होंने कहा कि निरंतर रचनात्मक लेखन सुकवि सिद्धेश्वर की मूल पहचान है |

हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ.इंद्र नारायण यादव ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि डॉ.सिद्धेश्वर समय का साक्षात्कार करते हैं और अनुभूत सत्य का उद्घाटन भी | उन्होंने संस्थापक कुलपति एवं मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी का श्रीगणेश किया | काव्य गोष्ठी में डॉ. रवि, डॉ.रेणु एवं डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप सहित संचालक डॉ.चौधरी ने अपनी प्रतिनिधि कविता का पाठ किया |

जिले के उद्यान पदाधिकारी राजन बालन ने अपनी कविता से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और बटोर ली तालियां भी | काव्य पाठ करने वालों में डॉ.सीताराम शर्मा, प्रो.गीता यादव, डॉ.आलोक कुमार, सियाराम यादव मयंक, डॉ.प्रवीण, रश्मि-प्रीति-विकास आदि प्रमुख रहे | सुधी श्रोताओं के रुप में सोमनाथ, सियाराम, कृष्ण मुरारी, राम कृष्ण, सुनील, आनंद जी आदि अंत तक कविता का रसास्वादन करते रहे |प्रो.इंद्र नारायण यादव के धन्यवाद के साथ ही समारोह के समापन का उद्घोष किया गया |

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अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर ने

स्थानीय विधायक एवं बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर ने मधेपुरा अबतक को चंद रोज पूर्व ही बताया था कि बिहार को भूकंप, बाढ़, सुखाड़, आग आदि अन्य विभिन्न तरह की आपदाओं से सुरक्षित रखने एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप के क्रियान्वयन के लिए दो दिवसीय (20-21 मई) कार्यशाला का आयोजन राजधानी पटना के होटल पाटलिपुत्र अशोका में आयोजित किया जाएगा |

आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यासजी ने बताया कि कार्यशाला का उद्घाटन माननीय विभागीय मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर द्वारा किया जाएगा | उन्होंने यह भी कहा कि कार्यशाला में रोडमैप के क्रियान्वयन के लिए विभिन्न योजनाओं पर चर्चाएं होंगी जिससे ‘सुरक्षित बिहार’ बनाने के कार्यक्रमों का निर्धारण एवं कार्यान्वयन द्रुत गति से किया जा सकेगा |

साथ ही नीतीश कुमार द्वारा ‘सुरक्षित बिहार’ बनाने हेतु जो कार्यक्रम निर्धारित किए जायेंगे उसमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्यों श्री आर.के.जैन, कमल किशोर सहित संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रो.संतोष कुमार व अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों के मूल्यवान विचारों को बिहार आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा प्राथमिकता के आधार पर अमलीजामा पहनाने का संकल्प प्राधिकरण के अधिकारियों अनिल कुमार सिन्हा, डॉ.उदयकांत मिश्र व प्रो.आनंद स्वरुप आर्य आदि द्वारा लिया जाएगा |

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