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आप ‘कृष्ण’ को कितना जानते हैं?

कृष्ण को सभी जानते हैं, पर महत्वपूर्ण यह है कि कितना जानते हैं। आप ही बताएं कि क्या हैं कृष्ण? देवकीसुत, यशोदानंदन या राधाकांत? सुदामा के सखा, अर्जुन के सारथि या द्वारका के अधिपति? महाभारत की धुरी, गीता के उपदेशक या विष्णु के अवतार? कृष्ण के अनंत रूप हैं और हर रूप की अनगिनत छवियां हैं। हम अपने मिथक से लेकर इतिहास तक खंगाल लें, कृष्ण से अधिक पूर्ण, कृष्ण से अधिक जीवंत, कृष्ण से अधिक विराट व्यक्तित्व ना तो हुआ है, ना होगा।

कृष्ण को जानने के लिए हमें श्रीमद्भागवत का ये प्रसंग जरूर जानना चाहिए। कृष्ण की इच्छा थी कि उनके देह-विसर्जन के पश्चात् द्वारकावासी अर्जुन की सुरक्षा में हस्तिनापुर चले जाएं। सो अर्जुन अन्त:पुर की स्त्रियों और प्रजा को लेकर जा रहे थे। रास्ते में डाकुओं ने लूटमार शुरू कर दी। यह देख अर्जुन ने तत्काल गाण्डीव के लिए हाथ बढ़ाया। पर यह क्या! गाण्डीव तो इतना भारी हो गया था कि प्रत्यंचा खींचना तो दूर, धनुष को उठाना तक संभव नहीं हो पा रहा था। महाभारत के विजेता, सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी विवश होकर अपनी आँखों के सामने अपना काफिला लुटता देख रहे थे। विश्वास कर पाना मुश्किल था कि ये वही अर्जुन हैं जिन्होंने अजेय योद्धाओं को मार गिराया था। अर्जुन अचरज में डूबे थे कि तभी कृष्ण के शब्द बिजली की कौंध की तरह उनके कानों में गूंजे – “तुम तो निमित्त मात्र हो पार्थ।”

श्रीमद्भागवत का ये प्रसंग अकारण नहीं है। यहाँ अर्जुन को माध्यम बना हमें इस अखंड सत्य से अवगत कराया गया है कि जीवन में जब-जब ‘कृष्ण तत्व’ अनुपस्थित होता है, तब-तब मनुष्य इसी तरह ऊर्जारहित हो जाता है। कृष्ण के ना रहने का अर्थ है – जीवन में शाश्वत मूल्यों का ह्रास। प्राणी हो या प्रकृति, ‘प्राणवायु’ कृष्ण ही थे, कृष्ण ही हैं, कृष्ण ही रहेंगे।

कृष्ण का अवतरण मानवता के लिए एक क्रान्तिकारी घटना थी। वे हुए तो अतीत में लेकिन हैं भविष्य के। इतना अनूठा था उनका व्यक्तित्व कि हम आज भी उनके समसामयिक नहीं बन सके हैं। मनुष्य अभी भी इस योग्य नहीं कि उसकी सोच और समझ में कृष्ण अंट जाएं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कृष्ण अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो धर्म की परम गहराइयों और ऊंचाइयों पर होकर भी गंभीर नहीं हैं। किसी भी बिन्दु पर रत्ती भर भी और पल भर के लिए भी उदास नहीं होते कृष्ण। उन्हें आप हमेशा हंसते हुए, नाचते हुए, जीवन का गीत गाते हुए पाएंगे। कृष्ण को छोड़ दें तो अतीत का सारा धर्म दुखवादी था। उदास और आँसुओं से भरा था। हंसता हुआ धर्म, जीवन को समग्र रूप से स्वीकार करने वाला धर्म अभी पैदा होने को है। जाहिर है कि वैसा जीवंत धर्म कृष्ण-तत्व से ही संभव है।

कृष्ण अकेले हैं जो समग्र जीवन को पूरा ही स्वीकार कर लेते हैं। जीवन की समग्रता की स्वीकृति उन्हीं के व्यक्तित्व में फलित हुई है। इसीलिए इस देश ने सभी अवतारों को आंशिक अवतार कहा है और कृष्ण को पूर्ण अवतार। राम भी अंश ही हैं परमात्मा के लेकिन कृष्ण पूरे ही परमात्मा हैं। पुरानी मनुष्य-जाति के इतिहास में वे अकेले हैं जो दमनवादी नहीं हैं। उन्होंने जीवन के सब रंगों को स्वीकार कर लिया है। वे प्रेम से भागते नहीं। वे पुरुष होकर स्त्री से पलायन नहीं करते। वे करुणा और प्रेम से भरे होकर भी युद्ध में लड़ने की सामर्थ्य रखते हैं। अमृत की स्वीकृति है उन्हें लेकिन विष से कोई भय भी नहीं है।

हम जब-जब ‘पूर्णता’ की बात करेंगे, हमारे सामने ‘कृष्ण’ ही होंगे, क्योंकि पूर्णता के पूर्ण प्रतिमान केवल वही हैं, और जिसे हम ‘जन्माष्टमी’ कहते हैं, वो वास्तव में उसी पूर्णता का प्रतीक पर्व है। वर्ष में एक बार ये दिन आता है तो हमें ये एहसास दिलाने कि ‘अधूरेपन’ से लड़ने की ताकत हममें से हर किसी में है और जब तक कृष्ण हैं ‘पूर्णता’ की हर संभावना शेष है। मजे की बात तो यह कि पूर्णता की ये यात्रा ‘कृष्ण’ के साथ है और ‘कृष्ण’ तक ही पहुँचने के लिए है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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खेल के माध्यम से याद किए गये  बी.पी.मंडल

25 अगस्त को पटना-मधेपुरा-मुरहो में वर्षों से बी.पी.मंडल की राजकीय जयंती मनाई जाती रही है, परन्तु इस बार मधेपुरा के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल की अध्यक्षता में 24 अगस्त को भी मधेपुरा के भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न खेलों व भाषण प्रतियोगिताओं के माध्यम से  बी.पी.मंडल को याद करते हुए प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले पुरुष एवं महिला खिलाड़ियों को मेडल, कप व शिल्ड देकर पुरस्कृत किया गया समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं जिला नजारत उपसमाहर्ता मुकेश कुमार द्वारा |

दोनों वर्गों के चैंपियन खिलाड़ियों को जिलाधिकारी मो.सोहैल द्वारा चैंपियन ट्रॉफी दिया गया | इस अवसर को जहां अखबार नबीसों ने कैमरों में कैद किया वहीं दर्शकों एवं खिलाड़ियों की तालियों की गूंज से बी.एन.मंडल स्टेडियम हिल गया | लड़कियों का इटालियन साइकिल रेस दर्शकों को खूब भाया जिसे पहली बार खेलगुरु संत कुमार एवं अरुण कुमार द्वारा बी.पी. मंडल जयंती पर आयोजित किया गया था |

The President of B.P.Mandal Rajkiya Jayanti cum DM Madhepura Md.Sohail along with Dr.Bhupendra Madhepuri giving prizes and encouraging the girl players at BN Mandal Stadium Madhepura on 24th August 2016
The President of B.P.Mandal Rajkiya Jayanti cum DM Madhepura Md.Sohail along with Dr.Bhupendra Madhepuri giving prizes and encouraging the girl players at BN Mandal Stadium Madhepura on 24th August 2016

यह भी बता दें कि इस बार मधेपुरा को जिलाधिकारी मो.सोहैल द्वारा 24 अगस्त को ही बी.पी. मंडलमय कर दिया गया | बी.एन.मंडल स्टेडियम व कला भवन से लेकर शहीद चुल्हाय मार्ग स्थित बी.पी. मंडल नगर भवन में भी खेल ही खेल- कहीं शतरंज तो कहीं टेबल टेनिस, कहीं लड़कियों का भोलीबाल तो कहीं लड़कों का | कहीं स्कूली लड़कियों की दौड़ तो कहीं भाषण प्रतियोगिता…… कहीं कोच प्रदीप श्रीवास्तव तो कहीं रेफरी अनिल राज…… कहीं संचालक संजीव कुमार तो कहीं मंच संचालक अरुण कुमार…… और खेल को समर्पित संत कुमार की नजर तो सब तरफ समान रूप से |

Dr.Bhupendra Madhepuri after giving prizes to winner Riyanshi-Hansraj & Runner Riya and Ankit along with T.T. Coach Pradeep Shrivastava
Dr.Bhupendra Madhepuri after giving prizes to winner Riyanshi-Harshraj & Runner Riya and Ankit along with T.T. Coach Pradeep Shrivastava

यह भी जानें कि जहां बी.पी.मंडल नगर भवन में टेबल टेनिस को समर्पित प्रदीप श्रीवास्तव की उपस्थिति में लड़कियों के सिंगल में विनर के रूप में रियांशी और रनर के रूप में रिया को तथा लड़कों के सिंगल के विनर हर्षराज एवं रनर अंकित को डॉ.मधेपुरी ने कप देकर पुरस्कृत किया वही बी.एन.मंडल स्टेडियम में संजीव कुमार की देखरेख में लड़कियों के शतरंज में विजेता बनी केशव कन्या की जयश्री को और दूसरे नंबर पर बनी रहने वाली जूही कुमारी (पी.एस.कॉलेज) को भी डॉ.मधेपुरी ने कप देकर हौसला बढ़ाया | सभी विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार से नवाजा गया |

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पी.जी. परीक्षाएं शुरु होंगी अगस्त के अंतिम सप्ताह में

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर 2015 के सभी विषयों की परीक्षाएं अगस्त 2016 के अंतिम सप्ताह में शुरू होने जा रही है |

यह  भी जान लें कि पी.जी. प्रीवियस-2015 एवं पी.जी. फाइनल-2015 की परीक्षाएं 29 अगस्त 2016 से आरम्भ होंगी जबकि पी.जी. सेमेस्टर की परीक्षाएं 26 अगस्त 2016 से ही आरम्भ होगी |

यहाँ यह भी बता दें कि विश्वविद्यालय परीक्षा विभाग द्वारा केवल 2 केंद्रों पर ही परीक्षाएं ली जाएंगी | कोसी प्रमंडल के सभी पी.जी. छात्रों के लिए भूपेन्द्र नारायण मंडल वाणिज्य महाविद्यालय (बी.एन.एम.वी. सहुगढ़ मधेपुरा) को केंद्र बनाया गया है वहीं पूर्णिया प्रमंडल के सभी पी.जी. छात्रों के लिए एम.एल. कॉलेज, कसबा पूर्णिया को केंद्र बनाया गया है |

यह भी जान लें कि पी.जी. सेमेस्टर की परीक्षाएं भी 26 अगस्त से इन्हीं दोनों केंद्रों पर उसी अनुरूप आरंभ होगी यानी कोसी के परीक्षार्थी बी.एन.एम.वी. कालेज केंद्र पर और पूर्णिया प्रमंडल के परीक्षार्थी एम.एल. कालेज कसबा केंद्र पर परीक्षा देंगे |

विशेष जानकारी के लिए परीक्षा विभाग से संपर्क करेंगे |

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इंटर स्कूल स्पेलिंग बी. प्रतियोगिता में 100 प्रतिभागी हुए पुरस्कृत

पार्वती विज्ञान कॉलेज सभा कक्ष में स्पेलिंग बी. एसोसिएशन के बैनर तले तृतीय स्पेलिंग स्पर्धा में लगभग सौ सफल प्रतिभागियों को एसोसिएशन के संरक्षक व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं अध्यक्ष सह कुलानुशासक डॉ.बी.एन.विवेका ने अपने संबोधन में जमकर प्रोत्साहित किया तथा पुरस्कार के रूप में मेडल-कप व प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित भी किया |

समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉ.विश्वनाथ विवेका, दमयंती-शत्रुघन एकेडमी के प्राचार्य अरुण कुमार सिंह तथा हॉली क्रास स्कूल के सचिव गजेंद्र कुमार को प्रिय शिष्य बताते हुए डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित प्रतिभागियों से भरे सभा-भवन में भारतरत्न डॉ.कलाम की चर्चा करते हुए बच्चों को खूब प्रोत्साहित किया | उन्होंने एसोसिएशन के सचिव सावंत कुमार रवि, कोषाध्यक्ष सोनीराज सहित संचालक मंडली के अन्य सभी सदस्यों को हृदय से साधुवाद दिया व सम्मानित किया |

Patron Dr.Bhupendra Madhepuri giving medal-momento and certificate to 'Naisa' from Little Bird School, Shahid Chulhai Marg, Madhepura.
Patron Dr.Bhupendra Madhepuri giving medal-momento and certificate to ‘Naisa’ from Little Bird School, Shahid Chulhai Marg, Madhepura.

यह भी बता दें कि कार्यक्रम को सहयोग देकर शानदार बनाने वाले राज इन्फोटेक के श्याम जी, एम.सी.ए. के अध्यक्ष प्रशांत कुमार, टी.भी.एस. के पुष्पेंद्र कुमार, सोनी पुस्तक के कुंदन जी., ऑटोजोन के मौनी सिंह एवं सैफ्टी जोन के सद्दाम साहब सहित विनोद कुमार,पत्रकार संजय परमार आदि को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सम्मानित किया संरक्षक डॉ.मधेपुरी एवं अध्यक्ष डॉ.विवेका आदि ने |

उद्घाटन भाषण में डॉ.मधेपुरी ने प्रतिभाओं को प्रेरित करनेवाले प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि बच्चों में प्रतियोगिता की भावना जगाना जरूरी है | उन्होंने भारत की बेटियाँ सिंधु एवं साक्षी सहित मधेपुरा की बेटियों सोनीराज-प्रियांशी-पायल की चर्चा करते हुए कहा कि आज बाजार से सब्जी लाने एवं ओलंपिक से मेडल लाने हेतु बेटियों को ही जाना पड़ता है |

यह भी जानें कि मधेपुरा के पूर्व एसपी कुमार आशीष (वर्तमान एसपी नालंदा) ने कन्फेरेंसिंग के जरिये समारोह में उपस्थित बच्चों एवं उनके अभिभावकों को शुभकामनाएं दी, जिसमें तीस स्कूलों के बच्चों ने भाग लिया था | डी.एस एकेडमी के ‘प्रशान्त’ एवं लिटल वर्ड्स की ‘नायसा’ को सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार प्राप्त हुआ | उपस्थित सभी सहयोगियों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया….. और……

Chief Editor - Kosi Times , Advocate , Aakashvani and TV Channel Reporter and Social Activist - Dr.Devashish Bose is no more. He left the world leaving Old Mother Shaifalee Bose , Wife Sapna Bose and Daughter Mehul Bose.
Chief Editor – Kosi Times , Advocate , Aakashvani and TV Channel Reporter and Social Activist – Dr.Devashish Bose is no more. He left the world leaving Old Mother Shaifalee Bose , Wife Sapna Bose and Daughter Mehul Bose.

अंत में डॉ.मधेपुरी द्वारा अपने संघर्षशील पड़ोसी, आकाशवाणी संवाददाता, अधिवक्ता एवं कोसी टाइम्स के प्रधान संपादक डॉ.देवाशीष बोस के आकस्मिक निधन की जानकारी देते हुए समारोह में उपस्थित सभी जनों को उनकी आत्मा की शांति हेतु दो मिनट के मौन के लिए आग्रह किया गया और मिनट-दो-मिनट के संवेदनशील मौन के साथ सभा समाप्ति की घोषणा कर दी गई |

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अनोखे रक्षाबंधन का साक्षी बना मधेपुरा

कोई महामानव इस धरती पर शोर मचाकर नहीं आता। वो बड़ी खामोशी से अपना काम करता है और चला जाता है। उसके जाने के बाद मानव-जाति को ये एहसास होता है कि वो अपने समय और समाज की दशा और दिशा बदल कर गया है। कुछ ऐसा ही कहा जा सकता है इस धरती पर डेढ़ सौ वर्ष  पूर्व अवतरित होने वाले लेखराज खूबचन्द कृपलानी के बारे में। इस महामानव ने माउंटआबू में प्रजापिता ब्रह्माबाबा का रूप लेकर ‘प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय’ की स्थापना की। आज इस विश्वविद्यालय की शाखाएं दुनिया के 135 देशों में हैं और करोड़ों श्रद्धालुओं के मन और मस्तिष्क को ईश्वरीय ज्ञान और वरदान से सींच रही है।

मधेपुरा शाखा की ब्रह्माकुमारी रंजु दीदी उसी महामानव के कार्यों को विस्तार देने के निमित्त समर्पित हैं। इसी क्रम में रक्षाबंधन पर्व को अपने पुनीत उद्देश्य का माध्यम बनाते हुए उन्होंने ब्रह्मा बाबा में आस्था, श्रद्धा एवं विश्वास रखने वाले भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, उनका तिलक किया और ‘ओमशांति’ का उद्घोष करते हुए सबका मुँह मीठा किया।

Brahmakumari Ranju Didi tying Rakhi to Dr. Madhepuri .
Brahmakumari Ranju Didi tying Rakhi to Dr. Madhepuri .

बता दें कि इस अनोखे रक्षाबंधन के अवसर पर समाजसेवी साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी, पूर्व प्राचार्य श्यामल किशोर यादव, घैलाढ़ प्रखंड के पूर्व प्रमुख विनयवर्द्धन उर्फ खोखा बाबू, सदर अस्पताल के सीएस डॉ. गदाधर पांडेय, प्रमुख व्यापारी दिनेश सर्राफ, सहयोगी ओम प्रकाश एवं दिनेश प्रसाद यादव आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

कार्यक्रम का श्रीगणेश दीप प्रज्वलित कर किया गया। फिर ब्रह्माकुमारी रंजु दीदी ने डॉ. मधेपुरी को तिलक कर उन्हें राखी बांधी और उनका मुँह मीठा किया। इस अनोखे पल ने मानो भाई-बहन के वैश्विक रिश्ते को अमरत्व प्रदान कर दिया हो। डॉ. मधेपुरी ने इस पल को स्वामी विवेकानंद से जोड़ते हुए कहा कि उस महापुरुष ने भी तो अमेरिका के अपने इतिहारृसप्रसिद्ध संबोधन की शुरुआत “लेडीज एंड जेंटलमैन” की जगह “ब्रदर्स एंड सिस्टर्स” से की थी। एक तरह से यह उन विचारों पर मुहर ही तो थी जिसकी नींव महामानव कृपलानी ने रखी थी।

अंत में “मधेपुरा अबतक” से बात करते हुए डॉ. मधेपुरी ने कहा कि अगर रक्षाबंधन को ऐसा ही विस्तार मिलता रहा तो ये धरती सचमुच रहने लायक बन जाएगी, जिसकी चिन्ता करते हुए महामानव डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम यहाँ से कूच कर गए थे।

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स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन

इंग्लिश स्टडी सेंटर एवं लाइफ साइंस क्लासेज द्वारा मधेपुरा कॉलेज के विशाल सभा भवन में प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार की अध्यक्षता में 70 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए जानदार एवं शानदार बनाने की पुरजोर कोशिश की गईं |
इस अवसर पर उद्घाटनकर्ता के रुप में हिन्दी व अंग्रेजी साहित्य के मर्मज्ञ, बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि, पूर्व सांसद ने दोनों भाषाओं में विस्तार से प्रकाश डालते हुए आजादी एवं इंग्लिश स्टडी सेंटर की प्रशंसा की | उन्होंने शहीदों एवं सेनानियों की विस्तार से चर्चाएं की |
यह भी बता दें कि मुख्य अतिथि के रुप में बी.एन.एम.यू. के पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने आजादी के लिए अंग्रेजों द्वारा 15 अगस्त चुनने के बाबत कहा कि अंग्रेज चाहते थे कि 1948 में भारत को आजादी दी जाय लेकिन बापू के सत्य एवं अहिंसा ने अंग्रेजो को इस कदर मजबूर कर दिया कि ब्रिटिश सरकार ने मित्र देश जापान के द्वितीय समर्पण वर्षगांठ यानी 15 अगस्त 1947 को ही हमें आजाद कर दिया | ज्ञातव्य हो कि जापान ने 15 अगस्त 1945 को दक्षिण कोरिया को आजादी दी थी |
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रो.श्यामल किशोर यादव प्रो.विज्ञानानंद सिंह एवं डॉ.आलोक कुमार, मो.मुस्ताक सहित निदेशक सत्य प्रकाश व ओम प्रकाश ने अपने संबोधन में इंग्लिश स्टडी सेंटर एवं साइंस क्लासेज की कामयाबी के साथ-साथ आजादी के जश्न की जमकर चर्चाएं की |
आरंभ में बच्चों ने अतिथियों को स्वागतगान से एवं बुके देकर सम्मानित किया और अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया | अंत में बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रमों द्वारा 70 वां स्वतंत्रता दिवस को यादगार बनाने की भरपूर चेष्टा की | गीत-संगीत एवं नाटक का निर्देशन विकास कुमार ने किया |

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मधेपुरा ने धूमधाम से मनाया स्वतंत्रता दिवस

गंगा-यमुनी तहजीब में महारत हासिल कर चुका मधेपुरा अपना 70वां स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों को याद किया एवं संस्थाओं व चौक-चौराहों पर तिरंगा लहराया |

यह भी जानिये कि वर्तमान भूपेन्द्र चौक (कॉलेज चौक) पर आरंभ में वार्ड आयुक्त मो.महमूद आलम द्वारा तिरंगा लहराया जाता रहा | बाद में स्वतंत्रता सेनानी शिवनंदन राय और वर्तमान में प्रतिवर्ष भूपेन्द्र प्रतिमा निर्माण समिति के संयोजक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी अपने सहयोगी मो.युनूस, डॉ.आलोक कुमार, समाजसेवी शौकत अली, आनंद आदि के साथ श्रद्धापूर्वक अन्य कार्यक्रमों से बढ़-चढ़ कर राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते आ रहे हैं |

Dr.Bhupendra Madhepuri paying tribute before the statue of Great Freedom Fighter and Socialist Leader Bhupendra Narayan Mandal at Bhupendra Chowk Madhepura.
Dr.Bhupendra Madhepuri paying tribute before the statue of Great Freedom Fighter and Socialist Leader Bhupendra Narayan Mandal at Bhupendra Chowk Madhepura.

इस 70वां स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सामाजिक-साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में निरंतर अपनी भागीदारी देने वाले डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने भूपेन्द्र चौक पर तिरंगा लहराने एवं राष्ट्रगान समाप्ति के बाद अपने संक्षिप्त संबोधन में यही कहा कि 15 अगस्त 1947 भारतीय इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है जिस दिन भारत को ब्रिटिश राज से आजादी मिली थी | भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है | आज की तारीख में हम भारत का 70वां जन्मोत्सव मनाते हैं | आजादी पाने के लिए आंदोलनकारियों एवं सेनानियों ने एक लंबी यात्रा तय की जिसमें अनेक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय आंदोलन हुए और उन आंदोलनों में बापू के दो ही प्रमुख अस्त्र उपयोग में लाये गये- सत्य और अहिंसा |

इस अवसर पर भूपेन्द्र चौक के झंडोत्तोलन के बाद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने यह घोषणा की कि आगामी भूपेन्द्र जयंती के अवसर पर जिले के वैसे विकास प्रेमी समाजसेवी या शिक्षाप्रेमी जो जनहित में लाखों की जमीन, सड़क या स्कूल के निमित महामहिम राज्यपाल के नाम रजिस्ट्री करेंगे- उन्हें जयंती के अवसर पर डॉ.मधेपुरी द्वारा श्रद्धापूर्वक सम्मानित किया जायेगा |

Principal Dr. H.L.S.Jauhari delivering speech after flag hoisting at T.P. College Madhepura campus .
Principal Dr. H.L.S.Jauhari delivering speech after flag hoisting at T.P. College Madhepura campus .

यह भी बता दें कि भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ.विनोद कुमार ने, बी.एन.मंडल स्टेडियम में डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल ने, टी.पी. कॉलेज में प्रधानाचार्य डॉ.एच.एल.एस. जौहरी ने तथा मधेपुरा नगरपरिषद में डॉ.विशाल कुमार बबलू सहित सभी छोटी-बड़ी संस्थाओं में अत्यंत धूम-धाम से श्रद्धापूर्वक भारतीय तिरंगा लहराया गया |

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मधेपुरा के बुद्धिजीवियों व छात्रों ने की सड़क की सफाई

प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान के मद्देनजर मधेपुरा के गणमान्यों-बुद्धिजीवियों-चिकित्सकों एवं छात्रों द्वारा शहर की मुख्य सड़कों की सफाई की गयी | जहां एक ओर सौ छात्रों के हाथों में झाड़ू थे वहीं दूसरी ओर तीन जे.सी.बी. और एक दर्जन ट्रैक्टर भी सफाई अभियान में लगे थे | मधेपुरा के अतिरिक्त सिंहेश्वर के पूर्व प्रमुख उपेंद्र प्रसाद यादव भी पांच ट्रैक्टर ईंट के टुकड़े दान स्वरूप लाये तो 5 ट्रैक्टर पैसे देकर- जिन्हें हॉस्पिटल गेट, बस स्टैंड आदि जल जमाव वाले स्थानों पर डाला गया |

यह भी जानिये कि दो दिन बाद संपूर्ण देश अपना 70वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाने वाला है | अस्तु आज प्रातः 8:00 बजे भूपेन्द्र चौक से शहर सफाई अभियान को हरी झंडी दिखाकर विदा किया- आरक्षी अधीक्षक विकास कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला, समाजसेवी डॉ.मधेपुरी, शौकत अली, वुमन डिग्निटी की अध्यक्षा डॉ.शांति यादव, डॉ.नायडू-श्री चन्द्रशेखर आदि |

बता दें कि केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान के तर्ज पर राज्य सरकार भी “स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार योजना” का ऐलान किया है जिसमें सूबे के 20 प्रारंभिक एवं 20 माध्यमिक विद्यालयों को निर्धारित 5 मानकों के आधार पर चुनकर पुरस्कृत किया जायगा | वे 5 मानक हैं- स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ शौचालय, स्वच्छ स्कूल परिसर, स्वच्छ पोशाक एवं छात्रों की स्वच्छ आदतें |

काश ! मधेपुरा के चिकित्सकों डॉ. डी.के.सिंह, डॉ. एस.एन.यादव, वार्ड आयुक्तों ध्यानी यादव, रविंद्र कुमार यादव के साथ-साथ स्काउट गाइड के आयुक्त जय कृष्ण यादव, कृष्ण मंदिर के सचिव चंद्रशेखर एवं समाजसेवी शौकत अली सहित किसान-मजदूर, छात्र-नौजवान, व्यापारी-व्यवसायी आदि ह्रदय से चाह ले तो मधेपुरा भी प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान के बाबत अपनी पहचान बनाने में सफल होगा और आने वाले दिनों में कभी न कभी पुरस्कृत भी होगा |

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विद्यालयों में टैगोर-स्मृति-दिवस आयोजित

गुरुदेव नाम से सुविख्यात तथा नोबेल पुरस्कार प्राप्त रविन्द्र नाथ टैगोर 80 वर्ष की उम्र में 7 अगस्त 1941 को दुनिया को अलविदा कह गये | इसलिए तो भारत सरकार द्वारा 7 अगस्त को इस बार सभी माध्यमिक विद्यालयों में ‘रविन्द्र स्मृति दिवस’ आयोजित करने हेतु निर्देश दिया गया | कुछ स्कूली छात्र-छात्राओं के बीच उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित किया गया तो कुछ में भाषण प्रतियोगिता | कहीं-कहीं तो स्थल चित्रकारी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई |

यह भी बता दें कि 1896 में स्थापित वर्तमान शिवनंदन प्रसाद मंडल उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य डॉ.निरंजन कुमार द्वारा इस अवसर पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया जिसमें लगभग दो दर्जन छात्र-छात्राओं ने भाग लिया | जहाँ वर्ग 10 की छात्रा पूजा कुमारी प्रथम, निशा कुमारी द्वितीय एवं नवम वर्ग के छात्र नीतान्शु तृतीय स्थान प्राप्त कर पुरस्कृत किए गये, वहीं विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों की उपस्थिति में 10 छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करने हेतु सांत्वना पुरस्कार दिया गया |

इस अवसर पर प्राचार्य डॉ.कुमार ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वकवि रविन्द्रनाथ टैगोर केवल महान साहित्यकार, कवि एवं स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं थे बल्कि ‘एकलाचलो’ का संदेश देकर युवाओं को आंदोलित करने का भी काम करते रहे थे | उन्होंने यह भी कहा कि उनकी अद्वितीय रचनाएं- गीतांजली, गोरा, आमार सोनार बांग्ला एवं रविन्द्र संगीत उन्हें अमरत्व प्रदान करता रहेगा |

रविन्द्र स्मृति दिवस पर शिक्षक विजय कुमार झा, डॉ.संतोष कुमार, रमेश कुमार रमण आदि ने भी अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि टैगोर की रचनाएं युवाओं को समर्पित है, इसलिए सभी छात्र-छात्राएं उनकी रचनाओं को पढें | इस मौके पर गौतम कुमार, राज कुमार, शिव नारायण पंडित, अमरनाथ दास, आनंद रंजन व अरुण कुमार आर्य आदि अंत तक मौजूद रहे |

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आलमनगर में अहर्निश एंबुलेंस सुविधा

जिले के आलमनगर प्रखंड मुख्यालय के पीएचसी परिसर में निर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का बुधवार (10 अगस्त) को शुभारंभ किया गया जिसका उद्घाटन विधायक व पूर्व विधि मंत्री नरेंद्र नारायण यादव, डायनेमिक डीएम मो.सोहैल एवं सीएस डॉ.गदाधर पांडेय ने किया |

यह भी जान लें कि इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चौबीसों घंटे मरीजों को 21 तरह की स्वास्थ सुविधाएं तब तक मिलती रहेंगी जब तक इन त्रि-मूर्तियों की चौकसी बनी रहेंगी और आंखें खुली रहेंगी | विकास पर पैनी नजर रखने वाले जिलाधिकारी मो.सोहैल के रहते हुए इस स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव सुविधा के अतिरिक्त पैथोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल सुविधाओं के साथ-साथ नि:शुल्क नास्ता-खाना तो मिलेगा ही मिलेगा, इसके अतिरिक्त चौबीसों घंटे आपातकालीन सुविधा के साथ-साथ मरीजों के लिए ओ.पी.डी व आई.पी.डी दवाओं की उपलब्धता भी रहेगी |

यह भी बता दें कि पुरुष व महिलाओं के लिए अलग-अलग स्नानागार व शौचालय की व्यवस्थाएं रहेंगी तथा विकलांग मरीजों के लिए व्हीलचेयर की | सभी प्रकार के प्रमाण-पत्रों यानि जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रादि के साथ-साथ परिवार कल्याण व विकलांग प्रमाण-पत्र भी दिए जाएंगे |

इस मौके पर सी.एस. की पूरी टीम, प्रखंड प्रमुख वर्षा कुमारी, जिप सदस्य रेखा देवी व समाजसेवी राजेश्वर राय के साथ-साथ थानाध्यक्ष सर्वेश्वर सिंह व पीएचसी प्रभारी डॉ.बी.के.वर्मा और डॉ.एस.एन.यादव आदि अंत तक मौजूद रहे |

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