बिहार विधान परिषद की 4 सीटें-कोसी शिक्षक, सारण स्नातक एवं गया के दोनों यानि ये चारों सीटें 8 मई को रिक्त हो रही हैं | जिनके कार्यकाल पूरे हो रहे हैं- वे हैं गया स्नातक से विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, कोसी शिक्षक से संजीव कुमार सिंह, गया शिक्षक से संजीव श्याम सिंह और सारण स्नातक सीट से महाचंद्र सिंह जिनके इस्तीफे से सीट पूर्व से ही रिक्त है |
यह भी जानिये कि सारण स्नातक से 18, गया स्नातक से 17, गया शिक्षक से 10 और कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से मात्र 3 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला आज देर शाम तक होगा |
Dr.Indubala Singh , former Vice Chancellor of BN Mandal University & Principal of Purnea Mahila College Purnea & others celebrating the grand victory of MLC Dr.Sanjeev Kumar Singh.
कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 14 जिले शामिल हैं | कुल 157 मतदान केंद्रों पर 14040 मतदाताओं ने 3 उम्मीदवारों के बीच 87% (यानि 12,015 वोट डाले | यह भी जानिए कि किये गये मतदान के बाबत इन चौदहों जिलों में प्रथम आया किशनगंज (89.62%) और न्यूनतम लाया मधेपुरा (79.42%) |
जब इन आंकड़ों के साथ डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से टिप्पणी करने को कहा गया तो डॉ.मधेपुरी ने कहा कि “डॉ.संजीव कुमार सिंह अपने पिताश्री की तरह ही चुनाव जीतने के दूसरे दिन से अगले चुनाव की तैयारी में मौन तपस्वी की तरह साधनारत हो जाता है | वह कभी नहीं सोचता कि अगला चुनाव कई वर्षों के बाद होगा बल्कि हर रोज वह यही सोचा करता है कि अगले चुनाव में केवल……. इतने ही दिन शेष रह गए हैं | पिता-पुत्र के जीवन का मूल-मंत्र भी यही रहा है ……….जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय ||”
…….तो लीजिए रिजल्ट सुना ही दिया रिटर्निंग ऑफिसर ने | कुल मतदाताओं की संख्या- 14,040 ; कुल वैध मत 11029
डॉ.संजीव कुमार सिंह को मिला- 8309 मत
डॉ.जगदीश चन्द्रा को मिला- 2296 मत
श्री नीतेश कुमार को मिला- 424 मत
कुल तीन प्रत्याशियों में से एक ने तो अपनी जमानत गवां दी और दूसरे ने जमानत किसी तरह बचा ली | महागठबंधन ने शानदार तरीके से कोसी में अपना परचम लहराया |
ये है जोगीरा की एक बानगी, जिसे लिखा है कबीर की परम्परा के जनकवि आचार्य रामपलट दास ने। आप भारत में हों, होली के रंगों को पहचानते हों और आपके कानों में जोगीरा की थाप न पहुँची हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। जोगीरा ना हो तो होली कैसी..? होली का असली रंग तो जोगीरा के साथ ही चढ़ता है। आखिर दिल में उत्साह और दिमाग में सवाल उतार देने वाला, हमारी रग-रग में तैर जाने वाला ये जोगीरा है क्या? चलिए, आज इसी पर बात करते हैं।
उत्तर भारत के जिन क्षेत्रों में नाथपंथी योगी (जोगी) सक्रिय रहे वहाँ जोगीरा गाने की परम्परा विशेष रूप से पाई जाती है। सम्भवत: इसकी उत्पत्ति जोगियों की हठ-साधना, वैराग्य और उलटबाँसियों का मजाक उड़ाने के लिए हुई हो। यह मूलत: एक समूह-गान है जिसमें प्रश्नोत्तर शैली में एक समूह सवाल पूछता है तो दूसरा उसका जवाब देता है। जवाब प्राय: चौंकाने वाले होते हैं।
समय बदला तो जोगीरा भी बदलता गया। धीरे-धीरे यह रोजमर्रा की घटनाओं से जुड़ता चला गया। घर का आंगन हो, गांव का चौपाल हो या फिर राजनीति का गलियारा इसने हर जगह अपनी पहुँच बना ली। सम्भ्रान्त और शासक वर्ग पर अपना गुस्सा निकालने या यूँ कहें कि उन्हें ‘गरियाने’ का अनूठा जरिया बन गया जोगीरा।
होली में तो वैसे भी खुलकर और खिलकर कहने की परम्परा है। यह एक तरह से सामूहिक विरेचन का पर्व है। आज इस परम्परा को स्वस्थ रूप देते हुए इसे फिर से व्यक्तिगत और संस्थागत, सामाजिक और राजनीतिक विडम्बनाओं और विद्रूपताओं पर कबीर की तरह तंज कसने और हमले करने के अवसर में बदलने की जरूरत है। आचार्य रामपलट दास के ही शब्दों में कुछ इस तरह –
चिन्नी चाउर महंग भइल, महंग भइल पिसान
मनरेगा का कारड ले के, चाटा साँझ बिहान
जोगीरा सा रा रा रा
या फिर कुछ ऐसे –
खूब चकाचक जीडीपी बा चर्चा बा भरपूर
चौराहा पर रोज सबेरे बिक जाला मजदूर
जोगीरा सा रा रा रा।
चलने से पहले हम ये न कहेंगे कि ‘बुरा न मानो होली है’। हम तो कहेंगे ‘अब बुरा मान भी लो होली है’… जोगीरा सा रा रा रा…
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जिले के अधिकाधिक प्रखंडों में विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक संगठनों द्वारा भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही महिलाओं को सम्मानित करने हेतु आयोजनों की झड़ी लगा दी गई |
यह भी बता दें कि सिंहेश्वर, शंकरपुर, बिहारीगंज, ग्वालपाड़ा, मधेपुरा आदि कई प्रखंडों में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया | नन्हीं बच्चियों द्वारा झांकियां निकाली गई | ग्रामीण क्षेत्रों की जीविका दीदियाँ परिवर्तन की वाहक बनी- “जहां नारी की पूजा होती है, वहीं देवता बास करते हैं” |
इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जहां मधेपुरा के हॉली क्रॉस स्कूल में आयोजित बालिका जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्या डॉ.वंदना कुमारी ने बालिकाओं को शिक्षित बनाने पर बल दिया और माया विद्या निकेतन की प्राचार्या चंद्रिका यादव द्वारा इस अवसर पर समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया वहीं कोशी वूमेन डिग्निटी फोरम की अध्यक्षा डॉ.शांति यादव ने कहा कि नारी अब अबला नहीं रही, बल्कि वह हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है |
ऐसी ही महिला विदुषियों की रचनात्मक भावनाओं के कारण अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जहाँ राज्य के माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा महिलाओं को राशन दुकानों में 35% आरक्षण का बड़ा तोहफा देकर सम्मानित किया गया वहीं महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा घर-परिवार एवं पिता मो.इस्माइल की इच्छा के विरुद्ध प्रथम महिला डीजल इंजन चालक यानि 45 वर्षीया मुमताज काजी को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया |
बता दें कि इस अवसर पर मधेपुरा जिला परिषद सभागार में जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल की टीम के डीपीओ (साक्षरता) सुरेन्द्र प्रसाद, उत्पाद अधीक्षक शैलेश चौधरी, प्रारंभिक काल से ही साक्षरता से जुड़े प्रो.सच्चिदानंद यादव, डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, मुरलीधर, जानेश्वर शर्मा, सुमित कुमार सोनू सहित जीविका की दीदीयों एवं जिप के उपाध्यक्ष रघुनंदन दास आदि की उपस्थिति में जिला परिषद अध्यक्षा श्रीमती मंजू देवी की अध्यक्षता में जिप सभागार में ‘नशामुक्ति’ पर संगोष्ठी आयोजित की गयी |
जहां जिप अध्यक्षा मंजू देवी ने अपने संबोधन में यही कहा कि शराब बंदी से खुशहाली आई है वहीं उपाध्यक्ष रघुनंदन दास ने कहा कि शराबबंदी से महिलाओं पर हो रहे अत्याचार में कमी आयी है और टी.पी. कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व अर्थशास्त्री प्रो.सच्चिदानंद यादव ने अपने संबोधन में यही कहा कि शराब बंदी से आर्थिक सुधार का श्रीगणेश हुआ है तथा नशा बंदी लागू हो जाय तो आर्थिक सुधार को पंख लगने में देर नहीं लगेगी | समाज के विकास में महिलाएं बराबर की भागीदारी निभायेगी |
इसके अलाबे शिक्षा विभाग के डी.पी.ओ. सुरेन्द्र प्रसाद ने जहां समाज और राष्ट्र-निर्माण में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया वहीं उत्पाद अधीक्षक शैलेश चौधरी ने कहा कि आधी आबादी के पीछे रहने से समाज का कभी भी समग्र विकास नहीं हो सकता है |
आरंभ में मुरलीधर के कला जत्था की टीम द्वारा अतिथियों के लिए जहां स्वागतगान प्रस्तुत की गयी वहीं अंत में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विस्तार से महिलाओं के आत्मनिर्भर एवं सफल होने के बाबत- एवेरेस्ट पर एक ही वर्ष में दो बार भारतीय तिरंगा फहराने वाली विश्व की प्रथम महिला पद्मश्री संतोष यादव एवं नेत्रहीन दिव्यांग कंचन गावा आदि की कहानियाँ सुनाई ताकि आधी आबादी का घर-परिवार और समाज मजबूत हो सके | डॉ.मधेपुरी ने जीविका दीदीयों को अपने अतीत को याद करने की सीख देते हुए यही कहा कि पुरुष को जब भी ज्ञान, शक्ति और संपत्ति की जरूरत पड़ी तो वह सरस्वती, दुर्गा और लक्ष्मी के शरण में शीश झुकाते रहे | अंत में कला जत्था के कलाकारों द्वारा प्रसाद वितरण के साथ धन्यवाद ज्ञापित किया गया |
पूर्वी वायपास में श्री शिव होण्डा शो-रुम के पास ‘सीता सदन’ परिसर में बच्चों के लिए विद्या भारती फाउंडेशन स्कूल का शुभारंभ किया गया | समाज में कबीर के विचारों को फैलाने वाले समाजसेवी दीनेश प्रसाद यादव की अध्यक्षता में सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित किया- उद्घाटनकर्ता के रूप में बिहार सरकार के पूर्व विधि मंत्री व वर्तमान विधायक (आलमनगर) श्री नरेन्द्र नारायण यादव, मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि के रुप में शहर के जाने-माने शिक्षाविद व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, डॉ.ब्रहमदेव प्रसाद ( प्रख्यात चिकित्सक, पूर्णिया ), प्रो.जटाशंकर प्रसाद आदि ने |
बता दें कि संरक्षक व चेयरपर्सन डॉ.गणेश प्रसाद एवं निदेशिका श्रीमती साधना प्रसाद द्वारा बच्चों को उनकी नींव-निर्माण काल में अतुलनीय स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करनेवाला एक नवीन संकल्पनायुक्त विद्या भारती फाउंडेशन स्कूल की स्थापना की गई है | यह स्कूल तत्काल स्टैंडर्ड 1 से स्टैंडर्ड 5 तक का ही होगा और प्रत्येक वर्ग में मात्र 24 बच्चे-बच्चियों का नामांकन हो पायेगा | वर्ग 3 से लेकर 5 तक के बच्चों के लिए छात्रावास की सुविधा भी उपलब्ध है |
Dr.Bhupendra Madhepuri addressing students, guardians and teachers of different schools & colleges present in the inaugural function of Vidya Bharti Foundation School, Madhepura.
यह भी बता दें कि उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों एवं शिक्षाविदों के बीच माननीय उद्घाटनकर्ता एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा स्कूली-व्यवस्था, शिक्षक-छात्र और अभिभावकों को संदर्भित करते हुए विस्तार से संबोधित किया गया | साथ ही प्रो.त्रिवेणी प्रसाद यादव, डॉ.मनोरंजन सिन्हा, महासचिव डॉ.अशोक कुमार, डॉ.आलोक कुमार, SBI के संतोष झा, डॉ.अरुण कुमार, वार्ड पार्षद ध्यानी यादव, प्रो.विनोद कुमार सिंह, हर्षवर्धन सिंह राठौड़, प्रो.अतुल कुमार मल्लिक एवं रतन अलीना कासमी आदि ने भी मौके पर उद्गार व्यक्त किया |
इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि जब मधेपुरा 1845 में अनुमंडल बना था तो 50 वर्षों के बाद ही एक स्कूल की स्थापना हुई थी और आज यहां बच्चों के लिए 50 स्कूल्स पूर्व से चल रहे हैं | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि यहाँ तब तक स्कूल खुलते रहना चाहिए जब तक महान स्वतंत्रता सेनानी, आधुनिक बिहार के निर्माता और बिहार के प्रथम विधि मंत्री शिवनंदन प्रसाद मंडल की संकल्पना पूरी होती न दिखे जिन्होंने कहा था- “No soul should remind uneducated on the earth”.
अंत में अध्यक्ष के निर्देशानुसार स्कूल प्रधान ने धन्यवाद ज्ञापित किया | मंच संचालन पृथ्वीराज यदुवंशी ने किया |
चुनाव की तिथि 9 मार्च आने में अभी 3 दिन बांकी है और कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से खड़े त्रिदेवों- डॉ.संजीव कुमार सिंह, प्रो.जगदीश चन्द्र और नीतेश कुमार- में से किसी एक को विधान पार्षद चुनने के बाबत अभी से ही शिक्षक मतदाताओं के बीच चुनावी सरगर्मी परमान चढ़ने लगी है । इस चुनाव में 14 जिले (यानी 65 विधानसभा अथवा 12 लोकसभा क्षेत्र) में फैले 157 मतदान केंद्रों पर कुल 14 हज़ार 40 शिक्षक मतदाताओं द्वारा 9 मार्च को प्रातः 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग किया जायेगा ।
यह भी बता दें कि स्कूल, कॉलेज एवं विश्वविद्यालय के सभी मतदातागण अपने वर्तमान विधान पार्षद सह प्रत्याशी डॉ.संजीव कुमार सिंह की जीत सुनिश्चित करने के लिए आपस में चर्चाएं शुरु कर दी हैं । तभी तो किसी महाविद्यालय के प्राचार्य को अपने यहाँ के मतदाता शिक्षकों से यह कहते हुए सुना जा रहा है कि वोट के दिन आधार कार्ड, वोटर आईकार्ड, पेन कार्ड आदि में से कोई ‘एक’ साथ में रख लेना है तो सामने खड़ा कोई मतदाता शिक्षक बोलता है- सर ! मेरे साथ तो ड्राइविंग लायसेंस हमेशा रहता है । लगे हाथ तीसरा मतदाता शिक्षक ऊंची आवाज में कह उठता है- सावधान ! मतदान कक्ष के भीतर अपनी कलम का प्रयोग कोई नहीं करेगा बल्कि चुनाव आयोग द्वारा वहाँ रखी गई ‘कलम’ से ही संजीव कुमार सिंह या अन्य नाम के आगे प्रथम वरीयता का मत [।] यूँ अंकित करना होगा ।
चारों ओर यह भी चर्चा है कि वर्तमान विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह को दो तिहाई से अधिक मतदाताओं ने जहाँ हैट्रिक लगाने के लिए खुलकर हामी भरी है वहीं जीत के फासले का नया रिकॉर्ड बनाकर मतदाताओं के मनोबल को ऊंचाई प्रदान करने हेतु संजीव ने पूरी ताकत झोंक दी है ।
लोकतांत्रिक क्षरण के इस हालिया दौर में भी प्रत्याशी संजीव कुमार सिंह को अपने शिक्षकों अथवा रिटायर्ड अध्यापकों-प्राध्यापकों के दुख-दर्द में पिता शारदा प्रसाद सिंह की तरह संजीवनी बनकर हर परिस्थिति में खड़ा देखकर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने शारदा बाबू की तरह उसे भी आदि से अंत तक सहयोग देते रहने का निश्चय कर लिया है ।
बता दे कि यह वही डॉ.मधेपुरी हैं जो बीएन मंडल विश्वविद्यालय में विकास पदाधिकारी, परीक्षा नियंत्रक, कुलानुशासक आदि अन्य कई महत्वपूर्ण पदों पर वर्षों कार्यरत रहकर सातो जिला मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया के कॉलेज शिक्षकों के बीच अपनी निष्ठा एवं सत्कर्मों की बदौलत उनके दिलों में जगह बना ली और संजीव की जीत के लिए विगत दो चुनावों में विनम्र आह्वान किया तो शिक्षक मतदाता बन्धुओं ने जीत भी दर्ज कराई ।
वर्तमान चुनाव प्रचार के दरमियान जब प्रत्याशी के रूप में संजीव कुमार सिंह मधेपुरा आए और डॉ.मधेपुरी के ‘वृन्दावन’ निवास पर पधारे तो बातें करते हुए मधेपुरी ने संजीव से यही कहा- “महागठबंधन में रहकर भी शिक्षकों के हित में अनुकूल निर्णय लागू कराने की दिशा में हमेशा अपनी बातें निर्भीकतापूर्वक रखें तथा अपने पिताश्री की तरह हमेशा बौद्धिक सजगता प्रदर्शित करते रहें । तभी तो “समान कार्य-समान वेतन” के लिए किए जा रहे संघर्ष को सुप्रीम कोर्ट भी सार्थक संघर्ष कबूल किया है ।”
अंत में डॉ.मधेपुरी ने चलते-चलते हैट्रिक बनाने हेतु शुभाशीष देते हुए उन्हें यही जीवन-संदेश दिया- “संसार के प्रत्येक व्यक्ति पर माता,पिता एवं गुरु-ऋण के अतिरिक्त समाज का ऋण भी होता है । जो व्यक्ति राष्ट्रपथ पर कठोर कर्मयोगी बनकर कर लोकऋण चुकाता रहेगा वही विजेता बनेगा और वैसे ही व्यक्ति के जीवन में सदा फूल खिलते रहेंगे ।” विदा होते वक्त डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने भावुक होकर डॉ.संजीव कुमार सिंह के माथे पर हाथ रखते हुए बस इतना ही कहा- कर्मयोगी पिता के यश और कीर्ति की ऊंचाइयों को उर्ध्वगामी बनाये रखना……….!!
ऋष्य श्रृंग की पावन धरती पर एक ओर स्थानीय राम जानकी हनुमान ठाकुरबाड़ी में द्विदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल द्वारा विद्वानों, शिक्षाविदों एवं कुलपतियों के बीच धर्म एवं दर्शन के बाबत यह कहा जाता है कि- किसी भी संप्रदाय के लोग क्यों न हो, उसके अंदर बैठी जीवात्मा हमेशा उसे सही सलाह देती है, सत्य से रू-ब-रू कराती है…… सत्य के रास्ते पर चलने के लिए आवाज देती है….. आत्मा की उसी “आवाज” को अनुसरण करना धर्म है……. तथा उसकी विस्तृत व्याख्या ‘दर्शन’ है |
वहीं दूसरी ओर महाशिवरात्रि के अवसर पर मवेशी हाट में त्रिदिवसीय सिंहेश्वर महोत्सव के भव्य समापन के साथ ही उसी स्थल पर त्रिदिवसीय (3-5 मार्च) संगीतमय श्रीराम कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है | सिंहेश्वर की गतिविधियों में सदा सहयोग करते रहने वाले हरिप्रसाद टेकरीवाल, विजय कुमार सिंह, मदन मोहन सिंह, जय प्रकाश यादव, महानंद झा, मनोज सिंह, यदुनंदन यादव, अमन सिंह, मुखिया जी पप्पुजी आदि द्वारा दीप प्रज्वलित कर आचार्य श्री सुदर्शन जी महाराज के संगीतमय श्रीराम कथा का विधिवत उद्घाटन किया गया |
बता दें कि रसमय एवं संगीतमय भक्तिकथा में आचार्यश्री सुदर्शन ने श्रीराम के मर्यादित चरित्र को वर्णन करते हुए भारत के गौरवोज्जवल अतीत की विस्तार से चर्चा की और कहा कि यदि राम जैसा बेटा चाहते हो तो पति-पत्नी को दशरथ और कौशल्या जैसा बनना होगा |
अपने संबोधन में आचार्यश्री ने कहा कि भक्ति के लिए धन-संपत्ति की कोई जरूरत नहीं होती है | भक्ति तो भाव से होती है | उसी भक्ति में अथाह शक्ति होती है | उन्होंने श्रद्धालुओं को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी तथा अपनी दृष्टि और सोच बदलने की बात कही |
अंत तक आचार्यश्री सुदर्शन जी महाराज ने श्रद्धावनत श्रोताओं से यही कहा कि परिवार में आपसी प्रेम एवं भाईचारा बढ़ाने के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करना ही होगा | बीच-बीच में ‘आचार्यश्री’ ने राम भक्तों को श्रीराम पर आधारित भक्ति संगीत में डुबोने का काम किया |
समाप्ति पर आयोजक मंडली के सदस्य द्वय विजय कुमार व विपिन कुमार ने भक्तों को यह बताया कि शेष 2 दिनों यानी शनिवार व रविवार को आचार्यश्री अपराहन 3:00 बजे से संध्या 6:00 बजे तक प्रवचन देंगे |
कोसी जैसे पिछड़े इलाके में होने और सीमित संसाधनों के बावजूद मधेपुरा कॉलेज, मधेपुरा ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, और अब जिला मुख्यालय स्थित यह पहला कॉलेज बन गया है जिसने नैक (NAAC – National Assessment & Accreditation Council) से ग्रेड हासिल किया हो। गौरतलब है कि 22 फरवरी को नैक की ओर से जारी की गई सूची में बिहार के नौ संस्थानों को ग्रेडिंग दी गई है, जिनमें मधेपुरा कॉलेज भी एक है। मधेपुरा कॉलेज को नैक ने पहले प्रयत्न में ही बी ग्रेड दिया है, जो कि अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार इसे मधेपुरा कॉलेज के इतिहास और विकास में मील का पत्थर बताते हैं। कहने की जरूरत नहीं कि इसके साथ ही कॉलेज उच्च शिक्षा के राष्ट्रीय मानचित्र से जुड़ गया है।
मधेपुरा कॉलेज की इस सफलता के क्या मायने हैं, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिन नौ संस्थानों को नैक की इस विशिष्ट सूची में जगह मिली है उसमें भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय से केवल दो महाविद्यालय हैं। पहला, बी ग्रेड हासिल करने वाला मधेपुरा कॉलेज, मधेपुरा और दूसरा अररिया कॉलेज, अररिया जिसे सी ग्रेड मिला है। बहरहाल, इन दो कॉलेजों के अतिरिक्त जिन अन्य सात कॉलेजों को नैक की ग्रेडिंग मिली है, वे हैं – सुखदेव महतो जनता महाविद्यालय (मधुबनी), खेमचंद ताराचंद कॉलेज (पूर्वी चंपारण), श्रीनारायण सिंह कॉलेज (मोतिहारी), महिला शिल्प कला भवन कॉलेज (मुजफ्फरपुर), ललित नारायण तिरहुत महाविद्यालय (मुजफ्फरपुर), डॉ. एलकेवीडी कॉलेज (समस्तीपुर) एवं कुंवर सिंह कॉलेज (दरभंगा)। नैक से मान्यता मिलने के साथ ही ये सभी कॉलेज 13वीं पंचवर्षीय योजना में फंड सहित केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त कई सुविधाओं के हकदार हो गए हैं।
मधेपुरा कॉलेज की इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर ‘मधेपुरा अबतक’ ने मधेपुरा के वरिष्ठ शिक्षाविदों से बात की। भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति, मधेपुरा के पूर्व सांसद एवं राज्यसभा में दो बार बिहार का प्रतिनिधित्व कर चुके डॉ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि ने कहा कि मधेपुरा कॉलेज ने अपनी इस उपलब्धि से न केवल मधेपुरा बल्कि सम्पूर्ण कोसी के क्षेत्र में उच्च शिक्षा का अद्भुत प्रतिमान गढ़ दिया है। इस विश्वविद्यालय का संस्थापक कुलपति होने के नाते यह मेरे लिए विशेष गौरव का विषय है। यह महाविद्यालय इस इलाके में नई शिक्षा-क्रांति का अगुआ बने, ऐसी मेरी शुभकामना है।
प्रख्यात शिक्षाविद्-साहित्यकार एवं भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के पूर्व परीक्षा-नियंत्रक डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने ‘मधेपुरा अबतक’ से बात करते हुए बताया कि मैंने इस ‘पूत’ के पांव ‘पालने’ में ही देख लिए थे। उन्होंने कहा कि मैं इस महाविद्यालय के कई महत्वपूर्ण पलों का साक्षी रहा हूं। इस महाविद्यालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सेमिनारों में शिरकत करते हुए मैंने एक बार नहीं कई बार कहा है कि एक दिन यह महाविद्यालय विश्वविद्यालय का स्वरूप लेगा। नैक से मान्यता हासिल करना वास्तव में उसी दिशा की ओर बढ़ा कदम है।
गौरतलब है कि नैक से मान्यता प्राप्त करने के लिए संस्थापक प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार के नेतृत्व में कॉलेज के शिक्षकों व शिक्षकेतर कर्मचारियों ने दिन-रात एक कर कॉलेज के हर विभाग को नैक के मापदंडों के अनुरूप अपडेट किया था। विगत 6 और 7 फरवरी को कॉलेज के दो दिवसीय दौरे और निरीक्षण के लिए आई नैक की पीयर टीम कॉलेज के तमाम प्रयासों से संतुष्ट दिखी थी। अब जबकि इस कॉलेज को नैक की विधिवत मान्यता मिल गई है, कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार का कहना है, “अब हमारी नैतिक और व्यावहारिक जिम्मेदारी बढ़ गई है। अब कॉलेज को न केवल नैक के ए व ए प्लस ग्रेड के लिए कार्य करना है, बल्कि भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के विकास में भी अपनी भूमिका निभानी है।”
प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार ने कॉलेज की इस उपलब्धि के लिए कुलपति डॉ. बिनोद कुमार, कुलसचिव डॉ. केपी सिंह, सीसीडीसी डॉ. अनिलकांत मिश्रा, नोडल अधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह एवं प्रॉक्टर डॉ. बीएन विवेका सहित विश्वविद्यालय के तमाम वरीय अधिकारियों के योगदान का उल्लेख करते हुए उनका आभार जताया है। साथ ही नैक के दौरे के दौरान कॉलेज की स्टीयरिंग कमिटी के कॉर्डिनेटर श्री पंकज कुमार, उपप्राचार्य डॉ. भगवान कुमार मिश्रा, दिन-रात कॉलेज की मॉनिटरिंग में लगीं गृहविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम यादव, प्रो. मनोज भटनागर, प्रो. सच्चिदानन्द सचिव, परीक्षा नियंत्रक डॉ. मुश्ताक मोहम्मद, डॉ. अमरदीप, डॉ. सोनी सहाय, डॉ. सुनील कुमार सिंह, प्रो. मणिभूषण वर्मा, प्रो. अभय कुमार, प्रो. चन्देश्वरी यादव, प्रो. ब्रह्मदेव यादव, प्रो. जयनारायण साह, प्रो. निखिलेश कुमार, बीएड प्रभारी विज्ञानानंद सिंह, आईक्यूएसी के डॉ. संजय कुमार, एनसीसी के लेफ्टिनेंट गौतम कुमार, कार्यक्रम पदाधिकारी विवेकानंद कुमार, संगीत विभाग की प्राध्यापिका भारती, एनएसएस के प्रो. बिजेन्द्र मेहता, आरती झा, प्रो. अरविंद कुमार तथा बीसीए कॉर्डिनेटर संदीप शांडिल्य समेत सभी वरिष्ठ शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों, पूर्ववर्ती छात्रों एवं तमाम अभिवावकों की सराहना की है।
‘हर हर महादेव’ के जयघोष के बीच त्रिदिवसीय (25-27 फरवरी) सिंहेश्वर महोत्सव का शानदार समापन किया तृप्ति शाक्या ने | जी हाँ, वही शाक्या जो इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. की डिग्री लेने के बाद संगीत की दुनिया का अनमोल सितारा बन गयी……… और कभी राम बनके, कभी श्याम बनके….. विभिन्न टीवी चैनलों पर आती रही, लोगों के दिल में जगह बनाती रही और यादगार बनती रही |
यह भी बता दें कि 3 दिनों तक सिंहेश्वर की हर गली, हर मोड़ पर देवाधिदेव महादेव की धूम रही | कभी उद्घाटन किया नीतीश सरकार की पर्यटन मंत्री श्रीमती अनीता देवी व आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चंद्रशेखर, पूर्व मंत्री नरेंद्र नारायण यादव, सिंहेश्वर विधायक डॉ. रमेश ऋषिदेव सहित डी.एम. मो.सोहैल एवं एसपी विकास कुमार ने तो समापन किया आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चंद्रशेखर व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सहित डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल की टीम के जांबाज एसपी विकास कुमार, एएसपी राजेश कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला एवं आयोजन के सर्वेसर्वा डी.डी.सी. मिथलेश कुमार ने | सिंहेश्वर के विधायक प्रो. (डॉ)रमेश ऋषिदेव , बी.डी.ओ., सीओ व थानाध्यक्ष एवं सिंहेश्वर युवा संघ के अध्यक्ष पंकज भगत, रोहित कुमार, मनीष कुमार आदि युवाओं की उपस्थिति ही महोत्सव को जानदार व शानदार बनाता रहा |
Singheshwar Temple Trust Member Dr.Bhupendra Madhepuri congratulating Tripti Shakya for her memorable performance at Singheshwar Mahotsav 2017 .
यह भी बता दें कि 3 दिनों तक स्थानीय कलाकारों एवं बाहर से आये नामचीन कलाकारों द्वारा धुनों एवं सुरों का ऐसा बेहतरीन प्रदर्शन किया गया कि अंतिम दिन सिंहेश्वर की धरती पर संगीत-प्रेमियों द्वारा भी इंडियन आइडल, ॐ शान्ति ॐ के उपविजेता केशव त्योहार के साथ- सभी गाने लगे…….. ‘रंग बरसे भींगे चुनरवाली रंग बरसे…..!
आगे तृप्ति शाक्या की पूरी टीम द्वारा संगीत की स्वर लहरियों की ऐसी यादगार प्रस्तुति की गई कि अधिकांश संगीत प्रेमियों ने अपने मोबाइल का स्विच ऑफ कर लिया और खो गया शाक्या की संगीत वाली दुनिया में- जहाँ संगीत को अंग्रेजी में यूं परिभाषित की जाती है-
Music is such an art Killing care grief of heart……
क्या बता दूं ! 8:00 बजे से 10:00 बजे रात तक तृप्ति शाक्या की सुरीली आवाजों के साथ लोग झूमते रहे….. कभी शिव के विभिन्न रूपों के साथ, तो कभी विद्यापति के गीतों के साथ……. अपनी सुरीली आवाज से अपने दर्शकों का दिल जीत लिया शाक्या ने |
अंत में एसपी विकास कुमार, एएसपी राजेश कुमार, डीडीसी मिथिलेश कुमार आदि की गरिमामयी उपस्थिति के बीच संगीत की दुनिया में तहलका मचानेवाली तृप्ति शाक्या को एक सुंदर प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर एवं समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने |
चलते-चलते यह भी बता दें कि मंच से उतरने के बाद सिंहेश्वर मंदिर न्यास परिषद के सदस्य एवं जिले के स्थाई कला समिति के सदस्य डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने तृप्ति शाक्या से बातचीत के क्रम में सुंदर कार्यक्रम की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भोलेनाथ की कृपा होगी तो अगले महोत्सव में हमलोग फिर मिलेंगे ऋष्य श्रृंग की इसी पावन भूमि पर 5 गुने उत्साह के साथ |
इस धरती पर जहाँ जीव होगा वहाँ शिव होगा। क्योंकि सारी शक्तियों का स्रोत है शिव। योग का जनक है शिव। निर्विकार एवं निर्विचार योगी है शिव।
उसी कल्याणकारी शिव की नगरी सिंहेश्वर स्थान में इस महाशिवरात्रि के अवसर पर जिला प्रशासन की देखरेख में एक माह तक चलने वाला, सोनपुर के बाद बिहार का दूसरा सबसे बड़ा मेला, शुक्रवार से शुरू हो गया, जिसके उद्घाटन कार्यक्रम की शुरुआत सिंहेश्वर विधानसभा के माननीय विधायक तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण समिति के माननीय अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रमेश ऋषिदेव ने ‘धन्यवाद गेट’ पर डीएम मो. सोहैल, एसपी विकास कुमार, एएसपी राजेश कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला एवं समाजसेवी डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी सहित सिंहेश्वर के गणमान्यों की उपस्थिति में रिबन काटकर की।
तत्पश्चात् इन्हीं गणमान्यों की उपस्थिति में शिवभक्तों की भारी भीड़ के बीच और डायनेमिक डीएम मो. सोहैल की अध्यक्षता में भव्य मंच से मेला का विधिवत् शुभारंभ माननीय विधायक प्रो. (डॉ.) रमेश ऋषिदेव, डीएम, एसपी, एएसपी, एसडीएम सहित मंदिर न्यास समिति के सचिव डीडीसी मिथिलेश कुमार व सदस्यगण डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी, सरोज सिंह, कन्हैया ठाकुर, मुन्ना ठाकुर आदि द्वारा सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
Dr. Bhupendra Narayan Madhepuri along with MLA Dr. Ramesh Rishideo & DM Md.Sohail inaugurating Agriculture Stall at Singheshwar Mela.
उद्घाटन भाषण में माननीय विधायक प्रो. (डॉ.) रमेश ऋषिदेव ने कहा कि ऋष्य श्रृंग की पावन भूमि पर आयोजित इस मेले की बड़ी महत्ता है। उन्होंने कहा कि मेला का उद्घाटन माननीय मुख्यमंत्री के द्वारा होना था परन्तु अपरिहार्य कारणवश वे नहीं आ सके। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को नाम के साथ संबोधित करते हुए अनुरोध किया कि बाहर के जिले और नेपाल आदि से आए हुए श्रद्धालुओं का अतिथियों की तरह स्वागत करें, सम्मान करें। सिंहेश्वर स्थान को पर्यटन के मानचित्र पर ऊँचाई प्रदान करने वाली नीतीश सरकार की उपलब्धियों को विधान परिषद् चुनाव की आचार संहिता के कारण वे चाहकर भी नहीं गिना पाए। उन्होंने केवल इतना ही कहा कि इस पावन धरती को उच्च स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए नीतीश सरकार गंभीर है।
यह भी बता दें कि अध्यक्षता कर रहे डायनेमिक डीएम मो. सोहैल ने अपने संबोधन से पूर्व समस्त श्रद्धालुओं के साथ देवाधिदेव महादेव का जयकारा लगाया। उन्होंने लोगों से शांति और सद्भाव के साथ मेले में शामिल होने की अपील की। डीएम ने सांकेतिक रूप से इशारे में कहा कि मंदिर जीर्णोद्धार एवं अन्य कार्यों को पूरा कर लिया जाएगा। डीएम मो. सोहैल (भा.प्र.से.) ने शिव के प्रति श्रद्धा निवेदित करते हुए कहा कि यहाँ भी सावन में देवघर की तरह एक महीने का मेला लगेगा।
इस अवसर पर अनुभवी एसपी विकास कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले साल जो खामियां रह गई थीं, उन्हें दूर करते हुए इस बार के इस महामेला में सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक तैयारी कर ली गई है। जहाँ एसपी द्वारा विशेष पुलिस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई वहीं एसडीएम संजय कुमार निराला ने कहा कि मेला में किसी प्रकार का अश्लील प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि ट्रस्ट की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए समारोह की शुरुआत में डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने ऋष्य श्रृंग की इस पावन तपोभूमि को नमन किया और फिर उपस्थित तमाम श्रद्धालुओं का किया अभिनन्दन और हृदय से वंदन। डॉ. मधेपुरी ने रामायण काल एवं महाभारत काल की चर्चा करते हुए कहा कि आज ही के दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था जिसे उत्सव के रूप में हजारों हजार श्रद्धालुओं द्वारा प्रतिवर्ष मनोरम झांकियों द्वारा सम्पन्न किया जाता है। उन्होंने कहा कि तपोभूमि सिंहेश्वर की पावन माटी समस्त श्रद्धालुओं को ‘शिवमय’ होने की प्रेरणा देती है। देहधारी होते हुए विदेह भाव से रहना ही तो ‘शिवत्व’ को पाना है।
अंत में मंच संचालन करते हुए डीडीसी ने मेले की सफलता के लिए स्थानीय लोगों से सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया तथा माननीय विधायक सहित प्रशासन एवं ट्रस्ट की टीम को विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी स्टालों सहित जयकृष्ण यादव, स्काउट गाईड आयुक्त द्वारा आयोजित शिविर का उद्घाटन करने हेतु अनुरोध किया। एसडीएम संजय कुमार निराला ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
शुरू से अंत तक समारोह को सफल बनाने में सहयोग देते रहे बीडीओ अजीत कुमार, सीओ जेके सिंह, जदयू नेता भुवनेश्वरी प्रसाद यादव, प्रखंड जदयू अध्यक्ष हरेन्द्र मंडल, व्यापार संघ के अध्यक्ष अशोक भगत, मुखिया प्रतिनिधि राजेश रंजन, प्रखंड प्रतिनिधि जयप्रकाश यादव, हरि प्रसाद टेकरीवाल, विश्वनाथ प्राणसुखका, उपप्रमुख कृष्ण यादव, दिनेश सिंह, विजय सिंह, प्रमोद चौधरी, प्रकाशचन्द्र जायसवाल, शंभू मंडल, दीपक यादव, अशोक गुप्ता, प्रभाष मल्लिक, मुकेश यादव, राजीव कुमार बबलू, पंकज भगत आदि।
आज हर शिवालय में शिवभक्तों की कतार लगी है। हर गांव, हर गली, हर नगर, हर डगर धूम है तो बस देवाधिदेव महादेव की। उत्तर प्रदेश में शिव की नगरी काशी हो या उत्तराखंड में उनकी जटा से निकली गंगा की धरती हरिद्वार, मध्यप्रदेश का उज्जैन हो या गुजरात का सोमनाथ, झारखंड का देवघर हो या बिहार का सिंहेश्वर या फिर पड़ोसी देश नेपाल का विश्वप्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर… हर जगह आस्था की अजस्त्र लहरें कलकल-छलछल करती देखी जा सकती है। और ऐसा हो भी क्यों न! महाशिवरात्रि का महत्व ही कुछ ऐसा है। आज ही के दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था। कहते हैं कि फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानि फरवरी-मार्च के महीने में पड़ने वाले इस त्योहार के दिन भगवान शिव का अंश प्रत्येक शिवलिंग में पूरे दिन और रात मौजूद रहता है।
शिवपुराण के अनुसार सृष्टि के निर्माण के समय महाशिवरात्रि की मध्यरात्रि में शिव अपने रुद्र रूप में प्रकट हुए थे। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि में चन्द्रमा सूर्य के समीप होता है। इसी समय जीवनरूपी चन्द्रमा का मिलन शिवरूपी सूर्य के साथ होता है। अत: महाशिवरात्रि परमात्मा शिव के दिव्य ‘अवतरण’ की रात्रि है। देखा जाय तो यह त्योहार सम्पूर्ण सृष्टि को उनके निराकार से साकार रूप में आने की मंगल सूचना है। महाशिवरात्रि के दिन ग्रहों की दशा कुछ ऐसी होती है कि मानव शरीर में प्राकृतिक रूप से ऊर्जा ऊपर की ओर चढ़ती है।
कहने की जरूरत नहीं कि शिव इस सम्पूर्ण सृष्टि के आधार हैं। योग परम्परा में वे दुनिया के पहले गुरु माने जाते हैं जिनसे ज्ञान की उत्पत्ति हुई थी। इस मार्ग पर चलने वाले उनकी पूजा ईश्वर के रूप में नहीं बल्कि उन्हें आदिगुरु मानकर करते हैं। इतनी विशाल हैं इस ‘कैलाशवासी’ की बांहें कि उनमें सुर ही नहीं असुर भी समा जाएं। उदार इतने कि बेलपत्र और भांग-धतूरा चढ़ाकर जो चाहे मांग लो। देखा जाय तो एकमात्र शिव हैं जो सच्चे अर्थों में आपकी श्रद्धा देखते हैं केवल। आज भी संसार के हर मंदिर में उनकी पूजा, उनके भोग और उनके श्रृंगार में केवल प्रकृति-प्रदत्त और घर में सहज उपलब्ध चीजें ही चढ़ती हैं। फल न हो न सही, साग-सब्जी ही चढ़ा दो, दूध-दही-मधु न सही, लोटा भर जल ही उड़ेल दो।
शिव यूं ही नहीं हैं देवों के देव। ‘महादेव’ होने के लिए गले में विषधर और कंठ में सारे जगत का विष धारण करने की सामर्थ्य होनी चाहिए। व्यक्तित्व आपका ऐसा हो कि ‘सत्यं-शिवं-सुन्दरं’ को परिभाषा मिल जाए, हर दिशा से ठुकराए हुए को जीने की आशा मिल जाए।