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बिहार को मिला मधेपुरा रेल इंजन कारखाने का उपहार

‘सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह’ कार्यक्रम के तहत बिहार के मोतिहारी आए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को बिहारवासियों को दो बड़े उपहार दिए। मधेपुरा के लिए विशेष खुशी की बात यह कि इनमें से एक उपहार के साथ उसका नाम भी जुड़ा है। जी हाँ, सर्वप्रथम जानें कि प्रधानमंत्री मोदी ने मधेपुरा स्थित देश का पहला विद्युत रेल इंजन कारखाना राष्ट्र को समर्पित किया और दूसरा यह कि उन्होंने दिल्ली के लिए एक नई ट्रेन हमसफर एक्सप्रेस और नए स्वरूप में बापूधाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन का भी लोकार्पण किया। बता दें कि प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कटिहार-नई दिल्ली के बीच हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई और फिर मधेपुरा रेल इंजन फैक्ट्री का भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ही लोकार्पण किया। इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, राज्यपाल श्री सत्यपाल मलिक, केन्द्रीय मंत्री श्री रामविलास पासवान व सुश्री उमा भारती सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।

मधेपुरा विद्युत रेल इंजन फैक्ट्री के लोकार्पण का इंतजार यूं तो पूरे बिहार को था, लेकिन मधेपुरा के लिए इस इंतजार के मायने कुछ ज्यादा ही खास थे। हो भी क्यों ना! अब इसमें भला किसे दो राय हो सकती है कि इस फैक्ट्री के चालू होने से कोसी के इलाके में औद्योगिक विकास की रफ्तार और तेज होगी। उल्लेखनीय है कि दस साल के लंबे इंतजार के बाद यह कारखाना शुरू होने जा रहा है और इस संदर्भ में जमीन अधिग्रहण को लेकर लगातार उत्पन्न विवादों के बाद भी कारखाना निर्माण में बाधा उत्पन्न नहीं होने देने में जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बता दें कि मधेपुरा के श्रीपुर चकला में बने इस कारखाने में पांच लोकोमोटिव इंजन साल 2019 में, 35 इंजन 2020 में और 60 लोकोमोटिव इंजन साल 2021 में बनाये जाएंगे। इसके बाद 800 लोकोमोटिव्स का लक्ष्य पूरा होने तक हर साल 100 लोकोमोटिव इंजन का निर्माण कारखाने में किया जाएगा। 26 हजार करोड़ की इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत 12 हजार हॉर्स पावर वाले लोकोमोटिव इंजन का निर्माण होगा और इस कारखाने से निकलने वाले इंजन 9000 टन वजनी मालगाड़ी को लेकर चलने की क्षमता वाले होंगे। चलते-चलते बता दें कि वित्तीय वर्ष 2007-08 में तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने मधेपुरा में विद्युत रेल इंजन कारखाना लगाने की घोषणा की थी।

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क्या प्रैक्टिकल बिना किये ही अब बनेंगे इंजीनियर ……!

सरकारी तंत्र अपनी छाती चौड़ी कर यही कहता है कि जहाँ दिन में भी लोग नहीं जाते थे वहाँ आजकल रात में भी घूमते नजर आते हैं | परंतु, दूसरी ओर हाल यह है कि जहाँ पढ़कर और कठिन से कठिन प्रैक्टिकल करके छात्र डॉक्टर-इंजीनियर बनते थे वहीं अब बिना पढ़े और प्रैक्टिकल किये ही डिग्री मिलने वाली है | सोचिये तो सही जहाँ बिना नदी, पोखर या स्विमिंग पुल में उतरे ही तैरने की ट्रेनिंग और तैराकी की डिग्री दे दी जाती हो तो उस राज्य और देश के भविष्य का क्या होगा ?

यह भी जानिये कि ऐसा छात्र जो पढ़ते समय एक भी प्रैक्टिकल किये बिना ही इंजीनियर बनकर किसी नदी में पुल बना डाले, तो वैसे पुल को पार करते समय बच्चों से भरा स्कूल बस सहित पुल भी नदी में बहेगा नहीं….. तो और क्या होगा….! वैसे इंजीनियरों द्वारा बनाये गये स्कूली भवनों के अंदर बच्चे दबकर मरेंगे नहीं तो और क्या करेंगे |

बता दें कि सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल के नाम पर मधेपुरा में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज 3 वर्ष पहले खुला है जिसमें आजतक लैब व इंस्ट्रक्टर की कोई व्यवस्था नहीं हो पायी है जैसा प्राचार्य डॉ.एम.के.झा ने मधेपुरा अबतक से कहा उन्होंने यह भी कहा कि दो सत्रों में लगभग 400 छात्र-छात्राओं का नामांकन हो चुका है | सभी थ्योरी का क्लास करते हैं, लेकिन प्रैक्टिकल क्लास नहीं होता है | सोचिये, बिना प्रैक्टिकल किये ही ऐसे इंजीनियर अपने बिहार में तैयार हो रहे हैं जहाँ के मुख्यमंत्री स्वयं इंजीनियर हैं |

जरा विचार करें हम सभी, इन 400 छात्र-छात्राओं के भविष्य के बारे में, जो पढ़ते तो हैं बिहार के निर्माता व बिहार के प्रथम विधि मंत्री के नाम वाले शिवनंदन प्रसाद मंडल +2 विद्यालय के भवन में और उन्हें प्रेक्टिकल करने के नाम पर खानापूरी कराने के लिए भागलपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज में ले जाने हेतु सोचा जा रहा है | तीन साल में एक भी प्रेक्टिकल नहीं….. केवल थ्योरी का क्लास यानी बोर्ड पर ही तैरने के तरीके सीखते रहे छात्र और सिखाते रहे शिक्षक |

मधेपुरा अबतक द्वारा बी.पी.मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ.एम.के.झा से इस बाबत जानकारी मांगने के दरमियान उन्होंने बताया कि लैब के अभाव में तीन साल से छात्रों को प्रैक्टिकल नहीं कराया जाता है | डॉ.झा ने पुनः यही कहा कि तीसरे सत्र में नामांकन के साथ ही क्लास रूम का भी अभाव हो जायेगा और थ्योरी का क्लास लेने की भी समस्या सामने खड़ी हो जायेगी | उन्होंने अवरुद्ध कंठ से यही कहा कि बच्चे प्रैक्टिकल ज्ञान के अभाव में न तो असली इंजीनियर बन पायेंगे और ना हीं दिखाई देंगे उनके कार्यों में इंजीनियरिंग के गुर एवं गुणवत्ता |

यह भी बता दें कि जब मधेपुरा के कलाम कहे जानेवाले शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से उच्च शिक्षा के भविष्य के बारे में मधेपुरा अबतक द्वारा पूछा गया तो उन्होंने यही कहा कि +2 तक के माध्यमिक विद्यालयों में प्रैक्टिकल का बहुत बुरा हाल है | क्योंकि, बीच के 20-25 वर्षों तक न जाने किस मनहूस सरकारी समिति की रिपोर्ट पर माध्यमिक स्कूलों में प्रैक्टिकल समाप्त कर दिया गया था | बाद में कॉलेज में सायंस पढ़ने वाले छात्र जब ‘मीटर स्केल’ भी नहीं पहचानने लगे तब फिर से स्कूलों में प्रेक्टिकल शुरू किया गया | लेकिन, तब तक सूबे के स्कूलों में करोड़ों-करोड़ के रसायन(Chemical) मिट्टी में मिल चुके थे तथा लोहे के उपकरणों को जंग खा चुके थे |

डॉ.मधेपुरी ने कहा कि वर्तमान में स्थिति यह है कि बिना शिक्षक और इन्फ्रास्ट्रक्चर के ही मिडल स्कूलों में +2 की पढ़ाई शुरू कर दी गई है- सरकारी शिक्षा विभाग द्वारा | हाँ ! ऐसे उत्क्रमित +2 विद्यालय में न तो शिक्षक हैं, न लैब है….. न इंफ्रास्ट्रक्चर है…… बस यही है कि बिना पढ़े-पढ़ाए और बिना प्रैक्टिकल कराये ही परीक्षा लेना और सर्टिफिकेट देना | तभी तो आज कल किसी डिग्री पर विश्वास करना मुश्किल है | हर क्षेत्र में अलग से ‘इलिजिबिलिटी टेस्ट’ लेकर ही नौकरी के लिए चयन की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है | फिलहाल सारी व्यवस्थाएं शिक्षा को पंगु बनाने में लगी है | यह केवल बिहार की ही नहीं, कमोवेश पूरे देश की यही स्थिति है |

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मधेपुरा को अब प्रतिदिन जगाने लगा है डॉ.कलाम पार्क

भारत के साथ-साथ संपूर्ण विश्व को जगानेवाला गांधीयन मिसाइल मेन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम अब मधेपुरा को कलाम पार्क बनकर सवेरे-सवेरे जगाने लगा है | जी हाँ ! सुबह होते ही मधेपुरा का हर व्यक्ति चाहे वह मर्द हो या औरत, बच्चा हो या बूढा या फिर नौजवान ही क्यों ना हो सभी चल देते हैं डॉ….कलाम पार्क की ओर……! इस नजारे को देखते हुए कोई बुजुर्ग अपने ही पोते से कहते हैं- चल पड़े कोटि पग उसी ओर…..!

The Crowd of Dr.Kalam Park during morning time.
The Crowd of Dr.Kalam Park during morning time.

सूरज निकलते-निकलते इस कलाम पार्क का नजारा ऐसा हो जाता है कि कोई कहता- खड़ा होने की जगह नहीं है….. तो बगल से आवाज आती कि कहीं पैर रखने की भी जगह नहीं है…….. कोई यह भी कि तिल रखने की जगह नहीं है |

यह भी जानिए कि जहाँ कल तक इस बिना नाम वाले पार्क को प्रतिदिन लोगों का इंतजार रहता था वहीं समाजसेवी डॉ.मधेपुरी की कोशिश पर नगर परिषद व जिला प्रशासन द्वारा ‘स्त्री-पुरुष ओपन जिम’ एवं ‘बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के झूलों के साथ कलाम पार्क नाम रखते ही अब लोगों को प्रवेश पाने के लिए इंतजार करना पड़ता है |

कभी डॉ.कलाम पार्क में खड़े कुछ सज्जनों की नजरें ज्योंही डॉ.मधेपुरी पर पड़ती है कि वे उनके पास जाकर बिना देर किये कुछ यूँ अपनी बातें कहने लगते हैं- कोई कहते हैं- 5 रु. एंट्री फी होनी चाहिए तो कोई 20रु एंट्री फी निर्धारित कराने की बात कहते हुए कि तभी मेंटेनेंस हो पायेगा और केयर टेकर व कोच का भुगतान भी | एक ने तो यहाँ तक कह सुनाया कि बगल वाले शहीद पार्क में महिलाओं को नई जिम सामग्रियों के साथ शिफ्ट करा दीजिए और कलाम पार्क को पूरा का पूरा जेंट्स के लिए छोड़ दीजिए | आगे और भीड़ बढ़ेगी क्योंकि लोग अब स्वास्थ्य के प्रति तेजी से जागरुक हो रहे हैं |

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मधेपुरा में बनने वाले इंजन पर ‘मधेपुरा’ अंकित होगा – सीएओ आर.के.गुप्ता

यह सच है कि मधेपुरा के किसानों की जमीन पर मधेपुरा के ही सांसद रहे लालू प्रसाद के रेल मंत्रित्वकाल में मधेपुरा को रेल इंजन कारखाना बनाने की स्वीकृति मिली जिसे डायनेमिक डीएम मो.सोहैल एवं समस्त रेल पदाधिकारियों व कर्मियों की मेहनत व लगन ने समय से पूर्व तैयार कर दिया और इंजन को पटरी पर दौड़ा दिया |

यह भी बता दें कि फैक्ट्री से निकलकर ट्रायल के लिए मधेपुरा स्टेशन तक आये इंजन पर ‘मधेपुरा’ अंकित नहीं देखने पर मधेपुरा के युवाओं के दिल की धड़कन को महसूस किया मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने | फिर क्या था, समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने इस आशय- “मधेपुरा रेल फैक्ट्री से निकले इंजन पर मधेपुरा अंकित हो” का आवेदन जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) को प्रेषित करने से पूर्व ही मधेपुरा अबतक को हस्तगत करा दिया |

जानिए कि मधेपुरा अबतक द्वारा इस दिशा में पहल किये जाने पर रेल कारखाना के मुख्य प्रशासनिक पदाधिकारी आर.के.गुप्ता ने जहां मधेपुरा अबतक को आश्वस्त किया कि मधेपुरा रेल इंजन कारखाना में बनने वाले प्रत्येक इंजन पर अब मधेपुरा का नाम अंकित रहेगा, वहीं श्री गुप्ता ने यह भी बताया कि फिलहाल भारतीय रेल एवं अल्सटॉम कंपनी द्वारा एसम्बल्ड इस इंजन को कारखाना परिसर में 30 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से ही चलाया जा रहा है | आगे मेन लाइन पर 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाकर ट्रायल किया जाएगा | फिर अप्रैल-मई में यूपी के सहारनपुर भेजकर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की फुल स्पीड से चलाकर ट्रायल किया जायगा, क्योंकि वहां पर इंजन के मेंटेनेंस के लिए फ्रांस की एल्सटॉम कंपनी द्वारा डिपो बनाया गया है | उन्होंने मधेपुरा अबतक को यह भी बताया कि सहारनपुर में आरडीएसओ की टीम की देख-रेख में और कई प्रकार के ट्रायल किये जायेंगे |

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2025 तक टी.बी. रोग से मुक्त होगा बिहार- बिहार सरकार

मधेपुरा सदर अस्पताल में विश्व यक्ष्मा दिवस पर दिन भर कार्यक्रम चलता रहा | प्रथम सत्र में सवेरे-सवेरे स्वास्थ्य कर्मियों एवं स्कूली स्काउट एंड गाइड द्वारा जागरूकता रैली निकाली गई | इस रैली को  डी.एस. डॉ.शैलेंद्र कुमार गुप्ता, डॉ.अखिलेश कुमार, डॉ.अशोक कुमार, डॉ.फूल कुमार, डी.पी.एम. आलोक कुमार एवं संचारी रोग पदाधिकारी डॉ.हरिनंदन प्रसाद सहित नवनीत चन्द्रा, गौतम कुमार, मो.नसीम अख्तर, तेजेंद्र कुमार आदि की उपस्थिति में सिविल सर्जन डॉ.गदाधर पांडे एवं समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया |
बता दें कि रैली में स्वास्थ्य कर्मियों एवं बैंड-बाजे के साथ तुलसी पब्लिक स्कूल के स्काउट एंड गाइड वाले छात्रों के हाथों में तख्तियों पर लिखे हुए निम्नांकित नारों को भारी संख्या में सड़क किनारे खड़े लोगों द्वारा मोबाइल के कैमरों में कैद करते देखा गया – वे नारे यही हैं……
टीबी हारेगा- देश जीतेगा ! पूरा कोर्स- पक्का इलाज !!

सबके सहयोग की शक्ति से- टीबी भागेगा बस्ती से !!!

Attending Tberculosis awareness Workshop, C.S. Dr.Gadadhar Pandey, DS Dr.Shailendra Kumar Gupta, Dr.Akhilesh Kumar, Dr.A Kumar , Dr.Bhupendra Madhepuri, Dr.H.N.Prasad , Md.Shaukat Ali, Dr.Minakshi Verma & others including Rangkarmi Team of Vikas Kumar (Srijan Darpan).
Attending Tberculosis awareness Workshop, C.S. Dr.Gadadhar Pandey, DS Dr.Shailendra Kumar Gupta, Dr.Akhilesh Kumar, Dr.A Kumar , Dr.Bhupendra Madhepuri, Dr.H.N.Prasad , Md.Shaukat Ali, Dr.Minakshi Verma & others including Rangkarmi Team of Vikas Kumar (Srijan Darpan).

दुसरे सत्र में यक्ष्मा कार्यालय के सामने सीएस डॉ.गदाधर पांडे की अध्यक्षता में एक कार्यशाला का वृहद् आयोजन किया गया | इसमें जिले के समस्त आशा कर्मियों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को भी बुलाया गया था | चिकित्सकों के अलावे समाजशास्त्री डॉ.आलोक कुमार, समाजसेवी मो.शौकत अली, विदुषी डॉ.मीनाक्षी वर्मा सहित रंगकर्मी विकास कुमार की पूरी टीम को सर्वप्रथम समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी द्वारा संबोधित करने के क्रम में टी.बी. रोग के इतिहास पर प्रकाश डाला गया |
डॉ.मधेपुरी ने कहा कि यह रोग मनुष्यों में 5000 वर्ष पूर्व से ही चिन्हित किया गया है | आरंभ में इसे ‘क्षय रोग’ तथा बाद में ‘तपेदिक’ कहा जाने लगा  | आगे ऋग्वेद में इसे ‘यक्ष्मा’ और अथर्ववेद में ‘बालसा’ कहा गया…… कालांतर में ‘खूनी खांसी’ व ‘पिशाची रोग’ के नाम से भी प्रचलित होता रहा | पहली बार 1839 में जे.एल.स्कर्लिन  द्वारा इस बीमारी को T.B. नाम देकर इसे फेफड़े से जुड़ी बीमारी कहा गया | वर्ष 1906 में वैक्सीन बना जिससे आज भी 80% इलाज किया जा रहा है |
सदर अस्पताल के सभी चिकित्सकों सहित समाजशास्त्री डॉ.आलोक कुमार, समाजसेवी मो.शौकत अली, विदुषी डॉ.मीनाक्षी वर्मा आदि ने भी विस्तार से इस रोग के कारण व निवारण की चर्चाएं की | अध्यक्षीय संबोधन में सीएस डॉ.पांडे ने कहा कि भारत की 40% आबादी में टी.बी. के जीवाणु पाये जाते हैं तभी तो प्रतिदिन 1000 लोगों की मृत्यु हो जाती है | उन्होंने कहा कि टीबी की रोकथाम के लिए मुफ्त जांच एवं मुफ्त दवा की व्यवस्था है |
अंत में संचारी रोग पदाधिकारी डॉ.प्रसाद ने कहा कि नियमित दवाखाने से यह रोग पूरी तरह समाप्त हो जाता है | उन्होंने अतिथियों को लाखों रुपए वाली सीबीनेट मशीन भी दिखाई जिससे एक साथ 4 मरीजों को “टी.बी. है या नहीं”  की जांच हो जाती है |

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मधेपुरा रेल फैक्ट्री से निकले इंजन पर ‘मधेपुरा’ तो अंकित हो !

मधेपुरा जिले के किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन पर इलेक्ट्रिक रेल इंजन कारखाना बनाने की स्वीकृति तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद के कार्यकाल में मिली थी | फिर मधेपुरा जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल के सफल सहयोग एवं डिप्टी चीफ इंजीनियर के.के.भार्गव सहित उच्चाधिकारियों व सभी कनीय पदाधिकारियों के कठिन परिश्रम के चलते यह रेल फैक्ट्री निर्धारित समय से 6 माह पूर्व ही सारा कार्य पूरा कर लिया | फ्रांस की अल्सटॉम कंपनी के सहयोग से तैयार किया गया | 12 हज़ार HP का विद्युत रेल इंजन राष्ट्र को समर्पित होने के लिए भारत के PM मोदी और फ्रांस के प्रेसिडेंट मैक्रॉन का 28 फरवरी से इंतजार कर रहा है |

बता दें कि 28 फरवरी 2018 को उद्घाटन होना था लेकिन मानसी-सहरसा के बीच रेल विद्युतीकरण कार्य अधूरा रहने के कारण उद्घाटन नहीं हो सका | इस बीच रेल फैक्ट्री से दौरम मधेपुरा स्टेशन तक लगभग 2 किलोमीटर की रेल पटरी पर इंजन दौड़ लगाती हुई आई-गई |

यह कि युवाओं द्वारा जहाँ खुशी जाहिर करते हुए नये रेल इंजन के फोटो को कैमरे में कैद किया जाने लगा वहीं इंजन पर ‘मधेपुरा’ लिखा नहीं देखने पर सभी मायूस हो गये | जानिये कि कुछ बोल गये कि दिल्ली से आते समय कहीं इंजन पर गोंडा अंकित देखा तो कहीं ‘गोरखपुर’….. ‘सहारनपुर’ या ‘समस्तीपुर’ भी |

यह भी जानिये कि जिस तरह भारत के विकसित होने की चिंता भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम को हुआ करती थी उसी तरह डॉ.कलाम के करीबी रह चुके व मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी को इस बात की चिन्ता सता रही है कि मधेपुरा रेल फैक्ट्री में उद्घाटन के लिए रखे गये तैयार दो इलेक्ट्रिक रेल इंजन के किसी कोने में भी ‘मधेपुरा’ क्यों नहीं लिखा गया है |

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पुरस्कार व्यक्ति को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है- एस.डी.एम. निराला

‘हिन्दी शब्द स्पर्धा’ (2017-18) में जिले के सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों के चयनित प्रतिभागियों के बीच ‘पुरस्कार वितरण’ का आयोजन स्थानीय वेदव्यास महाविद्यालय में राज मैनेजमेंट द्वारा किया गया | हिन्दी शब्द स्पर्धा के पुरस्कार वितरण समारोह में अभिभावकों, शिक्षकों एवं बुद्धिजीवियों की भारी भीड़ देखी गई |

बता दें कि इस पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में मौजूद सदर एसडीएम संजय कुमार निराला ने अपने संबोधन में बच्चों से यही कहा कि पुरस्कार का कोई मूल्य नहीं होता बल्कि इसका विशेष महत्व होता है | उन्होंने कहा कि इसे तो कोई भी बाजार से खरीद सकता है, परंतु किसी संस्था के द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में चयनित होकर मंचासीन अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किये जाने पर एक अलग तरह की खुशी होती है जो पुरस्कृत बच्चों को आगे बढ़ने के लिए सदा उत्साहित एवं प्रोत्साहित करता है |

Principal Dr.Bandna Kumari from Holy Cross School is receiving 'Momento of Honour' by SDM Sanjay Kumar Nirala and others on the occasion of 3rd Inter School Hindi Word Championship and Vedvyas College Madhepura.
Principal Dr.Bandna Kumari from Holy Cross School is receiving ‘Momento of Honour’ by SDM Sanjay Kumar Nirala and others on the occasion of 3rd Inter School Hindi Word Championship and Vedvyas College Madhepura.

यह भी बता दें कि संस्था के संरक्षक सह समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने बच्चों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के ‘हिन्दी शब्द स्पर्धा’ से बच्चों के अंदर आत्मविश्वास तो बढ़ता ही है साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित होने यानि प्रतिभागी बनने की सद्भावनाएं भी विकसित होती चली जाती है |

आगे डॉ.मधेपुरी ने कहा कि आजकल जीवन के हर मोड़ पर प्रतियोगिताओं का दौर है | हर जगह प्रतियोगिता ही प्रतियोगिता है | प्रतियोगिता के इस दौर में ‘हिन्दी शब्द स्पर्धा’ जैसा आयोजन बेशक इन बच्चों के मन से परीक्षा को लेकर उत्पन्न भय को दूर भगाता है |

यह भी जानिये कि जहाँ एमएलटी सहरसा के प्राचार्य डॉ. के.पी.यादव ने इस प्रतियोगिता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन से बच्चों का मानसिक विकास होता है वही वेदव्यास के प्राचार्य डॉ.आलोक कुमार एवं हॉली क्रॉस की प्राचार्य डॉ.वंदना कुमारी ने अपने संबोधन में छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित किया और कहा कि अक्षर से शब्द और शब्द से वाक्य बनता है जो पढ़ाई का आधार बनता है |

इस अवसर पर सचिव सावंत कुमार रवि, सहयोगी सोनी राज एवं अमित अंशु की पूरी टीम द्वारा विभिन्न ग्रुपों से चयनित 62 बच्चे-बच्चियों के बीच पुरस्कार वितरण से लेकर आयोजन में सहयोग करने वाले शिक्षकों एवं मीडिया कर्मियों को भी सम्मानित किया गया | सर्वाधिक सम्मान के भागीदार बनी हॉली क्रॉस की प्राचार्या डॉ.वंदना कुमारी जिनके विद्यालय से सुपर सीनियर कोटि में क्रमशः प्रथम-द्वितीय एवं तृतीय तीनों पुरस्कार हासिल किया- वागीश गर्ग, अंजलि एवं रिया राज ने |

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बिहार दिवस पर मधेपुरा को मिला- शहीद पार्क, डॉ.कलाम पार्क व झल्लू उद्यान- डॉ.मधेपुरी

जहाँ एक ओर बी.एन.मंडल स्टेडियम में आयोजित बिहार दिवस समारोह की अध्यक्षता कर रहे डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने पिछड़ेपन के दंश को पूर्व में झेलते रहने वाले मधेपुरा जिला की उपलब्धि- “यह कि PM द्वारा कराये गये ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट में देश के सूचीबद्ध किये गये 115 पिछड़े जिलों में मधेपुरा का नाम नहीं है” पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इसमें सभी पंचायतों व नगर परिषदों के कर्मठ सदस्यों से लेकर प्रशासनिक कर्मियों-पदाधिकारियों सहित सभी जनप्रतिनिधियों की भागीदारी है, वहीं इससे पूर्व समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उसी मंच से मधेपुरा एवं बिहार के विस्तृत ऐतिहासिक तथ्यों सहित महान लोगों की जानकारियां देते हुए आह्वान किया कि हमें फिर से गौरवशाली इतिहास बनाना है | तभी तो जिलापदाधिकारी मो.सोहैल छोटे-बड़े जलसों में भी डॉ.मधेपुरी को मधेपुरा का भीष्म पितामह कहकर संबोधित करने में न तो कोई गुरेज करते और न उपलब्धियों का श्रेय अपने हिस्से में समाहित होने देते जबकि एक नहीं दो-दो बार मधेपुरा जिला को शीर्ष तक ले जाने पर CM द्वारा पुरस्कृत भी किए जा चुके हैं डीएम मो.सोहैल |

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri addressing people on the occasion 106th Bihar Diwas Samaroh at B.N. Mandal Stadium , Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri addressing people on the occasion 106th Bihar Diwas Samaroh at B.N. Mandal Stadium , Madhepura.

जहाँ बिहार दिवस पर सजा-धजा मधेपुरा, वहीं कहीं निकली प्रभातफेरी तो कहीं हुआ विकास दौड़ | कहीं चिल्ड्रेन पार्क के अंदर शहीद पार्क में आधे दर्जन शहीदों-  शहीद बाजा शाह (किसुनगंज), शहीद चुल्हाय यादव (मनहरा), शहीद सदानंद (धुरगाँव), शहीद प्रमोद कुमार (फुलकहा), शहीद प्रमोद कुमार (चामगढ़) एवं शहीद शंकर प्रसाद रजक (मधेपुरा) – के नामांकित शिलालेख का अनावरण किया- डॉ.मधेपुरी, अध्यक्षा मंजू देवी, मो.शौकत अली व ध्यानी यादव, डीडीसी मुकेश कुमार, वरीय उपसमाहर्ता मो.अल्लाह मुख़्तार, डिप्टी कलक्टर रजनीश, सहायक अभियंता मधुसूदन कुमार कर्ण, कार्यपालक अभियंता (भवन) Er.मनोज कुमार सिंह आदि की उपस्थिति में- डीएम मो.सोहैल ने तो कहीं नगर परिषद् के अनाम पार्क को विभिन्न प्रकार के झूलों एवं ओपन जिम उपकरणों से सजाकर भारतरत्न डॉ.कलाम पार्क नामित करते हुए वार्ड पार्षद अहित्या देवी, पार्षद पति-ध्यानी यादव, सुनिल साह, मनीष कुमार मिंटू, कार्यपालक पदा. मनोज कुमार पवन, प्रधान लिपिक मो.सलाम आदि कि उपस्थिति में मधेपुरा को समर्पित किया डायनेमिक डीएम ने |

Dr.Bhupendra Madhepuri , Zila Parishad Adhyaksha Manju Devi and others paying homage to martyrs at Shahid Park Madhepura.
DM Md.Sohail , Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri , Zila Parishad Adhyaksha Manju Devi and others paying homage to martyrs at Shahid Park Madhepura.

बता दें कि 106वाँ बिहार दिवस के मौके पर डीएम-डीडीसी, डॉ.मधेपुरी, मो.अल्लामा मुख्तार, मुकेश कुमार आदि सबों ने अध्यक्षा मंजू देवी, जिला पार्षद डिंपल कुमारी आदि मातृशक्ति द्वारा सर्वप्रथम दीप प्रज्वलित करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया | पंचायत से जिला स्तर के सभी प्रतिनिधियों को विचार व्यक्त करने का अवसर दिया गया | स्टेडियम में लगे कृषि-उद्योग मेला स्टाल का उद्घाटन डीएम-डीडीसी आदि ने किया | अंत में सबों ने संयुक्तरूप से डीआरडीए परिसर स्थित झल्लू उद्यान में झाल्लुबाबू की प्रतिमा स्थापना मंडल का शिलान्यास किया | संध्या 5:00 बजे तक लड़कियों/लड़कों की दौड़ एवं खेल-कूद, कबड्डी-वॉलीबॉल आदि खेल सम्पन्न हुए और 5:30 बजे से देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झड़ी लगा दी स्कूली बच्चे बच्चियों ने…..

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शहीद सदानंद का 45वाँ शहादत दिवस सादगी के साथ मना

मधेपुरा अनुमंडल कार्यालय के सन्निकट 1974 के जे.पी. आन्दोलन में 19 मार्च को शहीद हुए धुरगांव के सदानंद का 45वाँ शहादत दिवस सभी आंदोलनकारियों की उपस्थिति में सादगी के साथ मनाया गया |

बता दें कि पूर्व विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, इन्द्रनारायण यादव, प्रधान, विजेंद्र प्रसाद यादव, डॉ.नरेश कुमार, जयकिशोर यादव, रमण कुमार सिंह, प्रसन्न कुमार, कमल दास, जयकांत, डॉ.विजेंद्र, गोपाल, फुलेन्द्र, गणेश, प्रो.शोभाकान्त, सदरुल होदा, मो.जुमन, अजय-अनिल-उमेश-दिनेश व नवीन आदि युवाओं द्वारा शहीद सदानंद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित किया गया |

इस अवसर पर उपस्थित आंदोलनकारियों द्वारा ‘सदानंद अमर रहे’ के नारे लगाये गये | डॉ.मधेपुरी ने Ex-MLC एवं Ex-MLA सहित मीडिया के लोगों को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी कि संवेदनशील डीएम मो.सोहैल द्वारा बिहार दिवस (22 मार्च) के दिन जिला अतिथि गृह के सामने वाले चिल्ड्रन पार्क को “शहीद पार्क” नामित कर जिले के सभी शहीदों के नाम के साथ शहादत तिथियों को अंकित कर सम्मानित किया जायगा |

यह भी जानिए कि देश की रक्षा एवं सीमा की सुरक्षा में हुए शहीदों की सूची उपलब्ध कराने की जवाबदेही डॉ.मधेपुरी को दी गई है जो निम्न प्रकार है- (1) शहीद बाजा शाह, किसुनगंज (20 अगस्त 1942) (2) शहीद चुल्हाय यादव, मनहरा (30 जनवरी 1943), (3) शहीद सदानंद , धुरगाँव (19 मार्च 1974) (4) शहीद प्रमोद कुमार, फुलकहा (9 मई 2001) (5) शहीद प्रमोद कुमार, चामगढ़ (25 सितंबर 2002) (6) शहीद शंकर प्रसाद रजक, मधेपुरा (13 सितंबर 2003)

अंत में उपस्थित आंदोलनकारियों सहित पूर्व विधान पार्षद एवं पूर्व विधायक ने इस कृत्य के लिए संवेदनशील जिलाधिकारी मो.सोहैल को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया और जिले के शहीदों को सर्वप्रथम समुचित सम्मान देनेवाले डायनेमिक डीएम मो.सोहैल के इस नेक कार्य की भरपूर सराहना समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी सहित सभी उपस्थित जनों ने की |

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शिक्षा जगत के विश्वकर्मा रहे हैं कोसी के कीर्ति नारायण

शिक्षा जगत को अपने जीवन की आहुति देने वाले अमर पुरुष कीर्ति नारायण मंडल को कोसी अंचल ही नहीं बल्कि, आने वाले दिनों में, संपूर्ण राष्ट्र उन्हें याद करेगा, नमन करेगा | बिना किसी की बातों पर ध्यान दिये, सूरज की तरह अपने काम में लगे रहना और शिक्षा का दीप जला-जला कर अज्ञानता के अंधकार को मिटाते  रहना ही उस विश्वकर्मा के जीवन का उद्देश्य रहा |

कोसी के सातो जिलों में तीन दर्जन से अधिक महाविद्यालयों की स्थापना करने वाले उस महामना मालवीय कहलाने वाले कीर्ति बाबू की 102वीं जयंती उनकी माता श्री के नाम वाले पार्वती विज्ञान महाविद्यालय परिसर में स्थित उनकी प्रतिमा के समक्ष इप्टा कर्मियों द्वारा 18 मार्च को आयोजित किया गया |

बता दें कि श्रद्धानवत अनुयायियों द्वारा कीर्ति बाबू की प्रतिमा पर पुष्पांजलि करने के बाद उनके मानवीय गुणों को करीब से महसूसने वाले समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.) भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने सर्वप्रथम अध्यक्षता कर रहे डॉ.नरेश कुमार सहित उपस्थित शिक्षकों-छात्रों को संबोधित किया और यही कहा कि कीर्ति बाबु का जीवन महात्मा कबीर जैसा रहा- जो घर जोर आपनों चले हमारे साथ….. से लेकर….. जस की तस धर दीन्ही चदरिया तक जाकर वे दुनिया को अलविदा कह गये |

इप्टा के संरक्षक डॉ.मधेपुरी विस्तार ने उनके साथ बिताये क्षणों की चर्चा करते हुए अपने संबोधन में यही कहा कि कीर्ति बाबू को जानने के लिए राम-कृष्ण, बुद्ध-महावीर, नानक और मालवीय को जानना होगा | स्वाभिमानी व सत्यवादी कीर्ति नारायण मंडल लोगों को अति साधारण दिखते परंतु उनकी क्षमता असाधारण रही है | समाज के लिए जीना-मरना और कल करो सो आज करना- में विश्वास करने के कारण ही उन्होंने कोसी और सीमांचल के ऊसर वन में तीन दर्जन कॉलेजों की स्थापना कर शिक्षा का दीप जलाया |

मुख्य इप्टा संरक्षक प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.विनय कुमार चौधरी, दशरथ प्रसाद सिंह, डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ.एम.आई.रहमान आदि ने अपने विस्तृत संबोधनों में जहां कोई उन्हें मालवीय तो कोई सर सैयद कहा वहीं किसी ने यहां तक कह डाला कि यदि वे यूपी, महाराष्ट्र में जन्मे होते तो देश की हर चौक-चौराहे पर उनकी प्रतिमा लगी होती………!

अंत में अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ.नरेश कुमार ने कहा कि कीर्ति बाबू का रहन-सहन एवं पहनावा बिल्कुल साधारण परंतु आंतरिक व्यक्तित्व बेहद असाधारण रहा है | वे जो भी ठान लेते, सुबह होते-होते उसे आरंभ कर देते |

कार्यक्रम में अंत तक मौजूद रहने वालों में प्रमुख रहे- डॉ.बी.के.दयाल, डॉ.मधुसूदन यादव, इप्टा उपाध्यक्ष आशीष सोना, प्रदेश सचिव सुभाष चंद्र, तुर्वसु, धीरज कुमार आदि | मंच संचालन किया सुभाष चंद्र ने एवं धन्यवाद ज्ञापन किया तुर्वसु ने |

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