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मधेपुरा में क्रान्तिवीर रासबिहारी लाल मंडल की 100वीं पुण्यतिथि मनी !

26 अगस्त 1918 को यानि 100 वर्ष पूर्व महात्मा कबीर की नगरी ‘काशी’ में इहलीला समाप्त कर चुके इस महाप्राण रासबिहारी लाल मंडल को हम आज भी शिद्दत से याद करते हैं। सौ साल के बाद भी उनके नाम की आभा कम नहीं हुई, पर इस बीच आये-गये मौसमों से उनकी आकृति धुंधला जरूर गई थी। जिस धुंधलेपन को समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी अपनी साधना के बल पर हटाने में लगे रहे।

बता दें कि उनके देहावसान के लगभग 85 वर्ष बाद उन्हीं के नाम वाले रासबिहारी उच्च विद्यालय परिसर में जन सहयोग से उनकी प्रतिमा स्थापित कराई डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने……. और आज 100वीं पुण्यतिथि पर डॉ.मधेपुरी द्वारा लिखित पुस्तक – “रासबिहारी लाल मंडल : पराधीन भारत में स्वाधीन सोच” को जल्द ही लोकार्पित कराने की घोषणा भी कर दी गई है |

Paying homage to the statue of Babu Rasbihari Lal Mandal.
Paying homage to the statue of Babu Rasbihari Lal Mandal.

डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि रासबिहारी बाबू विद्यानुरागी थे। वे बांग्ला, अंग्रेजी, फ्रेंच, हिन्दी, संस्कृत , कैथी,  उर्दू , फारसी आदि के सर्वमान्य ज्ञाता थे। उन्होंने बंग-भंग के समय ‘भारत माता का संदेश’ पुस्तक लिखी थी। वे अंग्रेजों से कभी नहीं डरे… तभी तो लोग उन्हें यदाकदा ‘साहेब’ कहकर पुकारा करते और कभी ‘तिरहुत का राजा’। दरभंगा महाराज तो उन्हें “मिथिला का शेर” कहते थे ।

इस अवसर पर प्रो.प्रभाष चन्द्र यादव, डॉ.विनय चौधरी एवं डॉ.अरुण कुमार मंडल ने उनके द्वारा दलितों , शोषितों एवं पिछड़ों के उत्थान के लिए किए गये महत्वपूर्ण कार्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि इन कार्यों को भुलाया नहीं जा सकता। प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.सुरेश भूषण, संतोष कुमार, प्राण मोहन यादव, डॉ.आलोक कुमार आदि वक्ताओं ने एक स्वर से यही कहा कि रासबिहारी बाबू स्वतंत्रता संग्राम के निर्भीक सेनापति तो थे ही, साथ ही वे सामाजिक परिवर्तन के प्रखर अगुआ भी थे।

जानिए कि इस बार रासबिहारी क्विज प्रतियोगिता एवं उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर निबंध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था। कार्यक्रम का श्रीगणेश उनकी प्रतिमा पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण कर किया गया। पुन: अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के बाद विद्यालय के संगीत शिक्षक गांधी कुमार मिस्त्री द्वारा ‘रास बिहारी गीत’ की प्रस्तुति दी गई।

अंत में क्विज में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय आये छात्रों क्रमशः दिलखुश-भूषण-राहुल को पुरस्कृत किया गया। निबंध प्रतियोगिता में राहुल प्रथम, आनंद द्वितीय एवं तृतीय हर्षराज को डिक्शनरी दे-देकर पुरस्कृत किया गया।

मौके पर जिला खेल प्रशिक्षक खेलगुरु संत कुमार, बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के संयुक्त सचिव डॉ.अरुण कुमार, जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार एवं शिक्षक डॉ.अमलेश कुमार, कृष्ण कुमार, मुर्तजाअली, उर्वशी कुमारी, रंजना झा, बीरबल यादव आदि अंत तक मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य अनिल कुमार चौहान ने किया तथा मंच संचालन सेवानिवृत्त विज्ञान शिक्षक राजेंद्र प्रसाद यादव ने।

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सीएम नीतीश कुमार के आगमन से मंडलमय हुआ मुरहो

आज 25 अगस्त 2018 का दिन जहाँ सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल के शताब्दी जन्म जयंती राजकीय समारोह के रूप में मधेपुरा-मुरहो में शानदार तरीके से मनाया गया वहीं बिहार के जानदार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं केबिनेट मंत्री मंगल पाण्डेय, डॉ.रमेश ऋषिदेव तथा मंत्रीमंडल की रीढ़ मानेजाने वाले ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव का आगमन इस समारोह को ऊँचाई दे गया। माननीय मुख्यमंत्री की टीम द्वारा मंडल की समाधी पर पुष्पांजलि की गई एवं सर्वधर्म प्रार्थना सभा में सम्मिलित होने के बाद मंडल साहब की जीवनी पर आधारित “कॉफी टेबल बुक” का लोकार्पण भी किया गया। लोकार्पण कार्यक्रम में सांसद राजेश रंजन उर्फ़ पप्पु यादव, विधायक निरंजन मेहता, विधान पार्षद ललन सर्राफ , समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, पूर्व विधायक मनिन्द्र कुमार मंडल एवं पूर्व मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव आदि सम्मिलित हुए।

बता दें कि माननीय मुख्यमंत्री की कार्यव्यस्ता के चलते आसपास से आये नर-नारियों एवं पूरे जिले के कार्यकर्ताओं-नेताओं की भीड़ चाहकर भी कुछ सुन नहीं सकी…… परन्तु मुरहो छोड़ने से पूर्व ही समस्त सुधि जनों के बीच समाजसेवी-साहित्यकार एवं मधेपुरा के डॉ.कलाम कहलाने वाले डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने समस्त उपस्थित जनों का प्रतिनिधित्व करते हुए सूबे के मुखिया नीतीश कुमार से बस यही कहा-

मान्यवर ! मै डॉ.मधेपुरी आपको सुनने आये समस्त लोगों की भावनाओं का कद्र करते हुए उनकी ओर से यही अनुरोध करता हूँ कि बी.पी.मंडल जैसे उदार एवं विशाल ह्रदय वाले मंडल कमीशन के अध्यक्ष के लिए श्रीमान द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारतरत्न” देने हेतु अनुशंसा करने की महती कृपा की जाय।

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राजकीय जन्मशताब्दी जयन्ती की पूर्व संध्या का परिदृश्य

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं मंडल कमीशन के अध्यक्ष बी.पी.मंडल का जन्म 25 अगस्त 1918 को महात्मा कबीर की नगरी काशी में हुआ था। इस अवसर पर जन्म शताब्दी समारोह की पूर्व संध्या पर बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम में खेल-गुरु संत कुमार एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार की देखरेख में बालक एवं बालिकाओं के ग्रुपों के बीच कबड्डी प्रतियोगिता, शतरंज, बैडमिंटन, वॉलीबॉल आदि खेलों के साथ-साथ बी.पी.मंडल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला की टीम के सौजन्य से किया गया।

बता दें कि जहां अब तक की प्राप्त जानकारी के अनुसार भाषण प्रतियोगिता में प्रथम आए उ.उ.वि. मलिया के छात्र एमरोज कुमार, द्वितीय स्थान पर रही योगेंद्र उच्च विद्यालय मुरहो की रूचि कुमारी एवं तृतीय स्थान पर रही टी.पी.कॉलेजिएट की मुस्कान रानी, वहीं कबड्डी में बालिका ग्रुप में चैंपियन रही मलिया की टीम। शेष खेलों की जानकारी प्राप्त होने पर दी जा सकेगी।

इस बीच समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी से बालक वर्ग की कबड्डी टीमों के खिलाड़ियों से सचिव अरुण कुमार ने परिचय कराया और फिर विधिवत खेल का शुभारंभ किया गया।

बता दें कि एक ओर जहां उमस के बावजूद बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम में विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों एवं दर्शकों के बीच उत्साह का माहौल देखा गया, वहीं दूसरी और यह जानकारी भी दी गई कि डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं प्रो.श्यामल किशोर यादव द्वारा स्थानीय मंडल के कार्यक्रमों में व्यस्त होने के कारण डॉ.अमोल राय के नेतृत्व में डॉ.इंद्र नारायण यादव, अनिल कुमार यादव, सियाराम यादव मयंक, बिजेंद्र प्रसाद यादव, बिंदेश्वर ठाकुर, अमरेंद्र कुमार, दीपक कुमार मंडल आदि की टीम को शताब्दी वर्ष के अवसर पर ‘काशी’ के लिए विदा किया। 25 अगस्त को तो संपूर्ण जिला बी.पी.मंडलमय दिखेगा- प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक।

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मधेपुरा में मनी महापंडित तुलसीदास की भव्य जयन्ती

मधेपुरा के सर्वाधिक पुराने साहित्यिक संस्थान कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अम्बिका सभागार में स्थानीय कवि-साहित्यकारों एवं बुद्धिजीवियों के बीच भव्यता के साथ गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर शहर के शिक्षक-प्रोफेसर, अधिवक्ता-साहित्यकार एवं तुलसी सहित रामचरितमानस पर साधिकार अपने विचारों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले दो-दो विद्वान वक्ताओं को आमंत्रिक किया गया था- एक तिलका माँझी , भागलपुर वि.वि में प्रतिकुलपति रह चुके डॉ.के.के.मंडल और दूसरे भू.ना.मंडल वि.वि. में स्नातकोत्तर हिन्दी के विभागाध्यक्ष रह चुके डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप।

बता दें कि मंच संचालन करते हुए सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कोसी अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार-इतिहासकार श्री हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ से कार्यक्रम का शुभारम्भ ‘तुलसी की तस्वीर’ पर पुष्पांजलि के साथ करने का अनुरोध किया। अध्यक्षता कर रहे श्री शलभ ने कहा-

मानव कल्याण, धर्म, नीति और सदाचार का जितना प्रचार तुलसी के ग्रन्थों द्वारा हुआ है उतना किसी अन्य ग्रन्थों द्वारा नहीं। चौतरफे हमले से हमारी धर्म-संस्कृति की रक्षा की तथा पंच मकारी प्रयोग से हमारे समाज को बचाया भी। तुलसी के समग्र काव्य को विश्व-साहित्य की सर्वोत्तम धरोहर तथा म्रियमान समाज के लिए संजीवनी कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी |

यह भी जानिए कि प्रखर वक्ता पूर्व प्रतिकुलपति डॉ.के.के.मंडल द्वारा मानस के सुन्दर कांड की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए यह कहा गया कि सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड ज्ञानगुणसागर हनुमान जी की कृतिगाथा से समन्वित है | बजरंगवली का समुद्र पार करना….माँ जानकी से मिलना…..लंका दहन के बाद विभीषण का राम की शरण में आना….एवं पुल निर्माण के साथ ही यह सुन्दर काण्ड समाप्त होता है ।

दूसरे प्रमुख वक्ता के रूप में BNMU के स्नातकोत्तर हिन्दी के पूर्व विभागाध्यक्ष रहे हिन्दी प्राध्यापक डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप ने तुलसी के रामचरितमानस में युगीन सच को उकेरते हुए कहा कि मानस में इस देश की सनातन भाव द्वंदता की अभिव्यक्ति है जो अमरता प्रदान करती है | उन्होंने कहा कि इस युग की सच्चाई को लगभग 5 सौ वर्ष पहले ही तुलसी ने मानस के उत्तरकांड में अभिव्यक्त कर दिया था |

अंत में सम्मलेन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने रामचरितमानस को संदर्भित करते हुए विज्ञान के अनेक-प्रसंगों का उल्लेख किया। इसे विश्व का सर्वश्रेष्ठ काव्य ग्रन्थ कहा और गोस्वामी तुलसीदास को सर्वाधिक समन्यवयकारी महामानव बताया। अन्य वक्ताओं में हिन्दी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ.इन्द्र नारायण यादव , डॉ.आलोक कुमार, डॉ.सुरेश भूषण, साहित्यकार दशरथ प्रसाद सिंह कुलिश , रघुनाथ प्र. यादव , सुकवि उल्लास मुखर्जी, निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र, प्राणमोहन प्रसाद द्विजराज, आनंद आदि। अंत में तुलसी जयंती के अवसर पर कुछ प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत भी किया गया। सम्मलेन के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो.श्यामल किशोर यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया और अंत में कवि ह्रदय प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के निधन पर उन्हें दो मिनट का मौन श्रद्धांजलि अर्पित किया गया।

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मधेपुरा का सपूत संजीव कुमार सज्जन बना बीपीएससी टॉपर

आदमी के भीतर यदि जुनून की आग सदैव जलती रहे तो बड़ा-से-बड़ा सपना साकार करने में देर नहीं लगती | इसे ही पूरा कर दिखाया मधेपुरा का सपूत संजीव कुमार सज्जन ने BPSC की 56….59वीं परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर यानि टॉपर बनकर |

जानिए कि संजीव कुमार सज्जन अब अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) के रूप में अपनी सेवा बिहार में प्रारंभ करेंगे जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग इलाहाबाद द्वारा वर्ष 2015 में चयनित होकर यू.पी. के रामपुर जनपद में DSP के पद पर कार्यरत हैं | अपनी इस सर्वश्रेष्ठ सफलता का श्रेय मुरलीगंज प्रखंड के भेलाही गांव निवासी अधिवक्ता पिताश्री जनेश्वर प्रसाद यादव एवं माताश्री नीता देवी सहित गुरुओं व बड़े बुजुर्गों को देते हैं |

DSP से SDM यानि पुलिस सेवा से प्रशासनिक सेवा में आने के बारे में संजीव कुमार सज्जन ने मधेपुरा अबतक को बताया कि वे देश एवं प्रदेश की सरकारी योजनाओं को आम आदमी तक पहुंचाने हेतु बेहतरीन व्यवस्था उपलब्ध कराना चाहते हैं | उन्होंने यही भी बताया कि उनकी शिक्षा-दीक्षा भेलाही-मुरलीगंज के बाद मधेपुरा के पार्वती सायंस कॉलेज सहित दिल्ली आदि अन्य जगहों पर कई शिक्षण संस्थानों में हुई |

यह भी बता दें कि संजीव ने प्रतियोगी छात्रों से यही कहना चाहा कि सफल होने के लिए सटीक विषयों का चयन एवं एकाग्रचित होकर नियमित अध्ययन करते रहने पर असफलता के बाद मिली हुई सफलता का स्वाद सर्वाधिक मीठा होता है…….. क्योंकि तीसरे प्रयास में BPSC का टॉपर बनने वाला संजीव कुमार सज्जन अपने प्रथम प्रयास के प्रारंभिक परीक्षा में ही अनुत्तीर्ण हो गये थे |

चलते-चलते यह भी बता दें कि मधेपुरा जिले का नाम रोशन करने वालों की कमी नहीं है अब | प्राप्त जानकारी के अनुसार सिंहेश्वर प्रखंड के गौरीपुर निवासी श्री शत्रुघ्न चौधरी (अवकाश प्राप्त कर्मचारी बीएनएमयू) एवं श्रीमती राजकुमारी देवी के पुत्र दीपक कुमार ने सामान्य श्रेणी में 273वाँ रैंक लाकर सर्विस में 5वाँ रैंक Executive Officer का प्राप्त किया | कई बार असफल होने पर भी दीपक ने हिम्मत नहीं हारी….. अंततः सफलता खुद चलकर आती है और दीपक के गले लग जाती है | उसी तरह गढ़िया मधेपुरा के प्रेम शंकर कुमार पिता श्री कृष्णानंद यादव (अवकाश प्राप्त रासायन प्रदर्शक) ने सरकारी सेवा में रहते हुए BPSC कम्पिट  कर Election Officer बन जिला का नाम रोशन किया |

और अन्त में यह कि मधेपुरा जिले की एक बेटी मीनाक्षी ने बिहार लोक सेवा आयोग के वित्तीय सेवा में सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है | मीनाक्षी सेवानिवृत्त अपर सचिव जयशंकर प्रसाद यादव की बेटी है जो मुरलीगंज प्रखंड के ही गंगापुर निवासी हैं | मीनाक्षी की शिक्षा पटना व दिल्ली में हुई है | नेट कर मीनाक्षी पाटलीपुत्रा यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) के पद पर कार्यारंभ करने वाली थी | बिहार प्रशासनिक सेवा के लिए मीनाक्षी को सीटीओ पद हेतु चयनित की गयी है | मीनाक्षी ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को दी है |

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कुसहा त्रासदी के 10 वर्ष बाद भी 26% पीड़ितों को ही मिला है घर

सूबे की सरकार की कोसी फ्लड नीड्स एवं एसेसमेंट रिपोर्ट स्वयं इस बात की पुष्टि करती है कि कुसहा त्रासदी- 2008 में 2,36,632 (दो लाख छत्तीस हजार छह सौ बत्तीस) घर पूर्णरूपेण ध्वस्त हो गए थे जिनमें से आज तक मात्र 62000 (बासठ हजार) के लगभग ही घर बन पाए हैं जो  कुल ध्वस्त घरों की संख्या के लगभग 26% हैं।

बता दें कि स्थानीय भूपेन्द्र चौक  पर कैंडल मार्च निकालकर कुसहा त्रासदी के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के क्रम में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.आलोक कुमार एवं कोसी नव निर्माण मंच को अपनी जिंदगी देने वाले महेंद्र यादव ने सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि दो-दो बार विश्व बैंक से कर्ज लिए जाने के बाद भी आज तक सरकारी स्तर से कोसी वासियों का दर्द कम नहीं किया जा सका।

यह भी जानिये कि सरकार द्वारा कुसहा त्रासदी एवं पुनर्वास हेतु कोसी फ्लड रिकवरी प्रोजेक्ट नाम से 220 मिलियन अमेरिकन डॉलर का कर्ज पहली बार विश्व बैंक से लिया गया तथा दूसरी बार कोसी बेसिन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के नाम से 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर का। बावजूद इसके आज भी कुसहा त्रासदी में मरे हुए लोगों के परिजन अपने हिस्से के अनुग्रह अनुदान राशि के लिए सरकारी कार्यालयों एवं बैंकों का चक्कर लगा रहे हैं। कितनों के हाथ में तब का दिया गया चेक भी फटने लगा है।

यह भी बता दें कि पुनर्वास हेतु 28,000 (अट्ठाईस हजार) रुपया में घर बनाने की योजना चली थी उसे भी अब बंद करा दिया गया जबकि पूर्ण क्षति एवं आंशिक क्षति वाले घरों की संख्या को जोड़ दें तो अभी भी 1,01,462 (लगभग  एक लाख) लोग बेघर हैं….।

संयोजक महेंद्र यादव, सुभाष चंद्र, तुर्वसु, वासीम, मुन्ना-रमन-मनोज, अजय-शंभू-माधव, संदीप-राजेश-रणधीर, सहित अन्य इप्टाकर्मियों ने आपदाग्रस्त कोसी की समस्याओं के दीर्घकालिक हल निकालने, पीड़ितों के बीच सहायता राशि वितरित करने एवं किसानों को फसल के समर्थन मूल्य दिलाने के साथ-साथ पलायन कर रहे मजदूरों के लिए बंद पड़े सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने हेतु सरकार से मांग की।

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मधेपुरा ने अटल को यूँ कहा ‘अलविदा’…..!

मधेपुरा के सर्वश्रेष्ठ प्रतिष्ठान भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अवध किशोर राय एवं प्रतिकुलपति डॉ.फारुख अली द्वारा दो और विश्वविद्यालयों- शिलांग विश्वविद्यालय में कुलपति रहे डॉ.ए.एन.राय एवं टी.एम.भागलपुर विश्वविद्यालय में कुलपति रहे डॉ.आर.एस.दुबे की उपस्थिति में आयोजित “अटल श्रद्धांजलि सभा” में विश्वविद्यालय सीनेट सदस्य डॉ.नरेश कुमार से लेकर सिंडिकेट सदस्यों सहित सभी विभागाध्यक्षों, पदाधिकारियों, विश्वविद्यालय कर्मियों पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर , पीए टू वीसी शंभू नारायण यादव सहित सभी बारी-बारी से अटल जी की तस्वीर पर पुष्पांजलि करते रहे और कुलपतियों द्वारा उद्गार व्यक्त करने के बाद 2 मिनट का मौन रखकर विश्वविद्यालय के सभी कार्यालयों को बंद कर दिया कुलपति के निर्देशानुसार कुलसचिव कर्नल नीरज कुमार ने।

बता दें कि व्यापार संघ एवं केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट  संघ द्वारा “अटल शोक सभा” का आयोजन ‘जीवन सदन’ में किया गया तथा वहाँ भी 2 मिनट का मौन- मनीष सर्राफ, राजेश, संजय, प्रमोद अग्रवाल एवं सचिव रविंद्र प्रसाद यादव आदि ने रखा।

यह भी बता दें कि नगर परिषद के अन्य पार्षदों एवं जिला परिषद पार्षदों के अतिरिक्त वार्ड नंबर 14 के पूर्व वार्ड पार्षद ध्यानी यादव ने सपत्निक (रेखा यादव – वार्ड पार्षद )व बाल-बच्चे सहित दिनभर उपवास रखकर अटल जी को श्रद्धांजलि दी…।

यह भी जानिए कि जिले के तेरहो प्रखंडों में कहीं कैंडल जलाकर तो कहीं चित्र पर पुष्पांजलि करके अटल जी के चाहने वालों ने शोकोद्गार व्यक्त किया। जिले की सभी राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्षों ने अटल जी को  अजातशत्रु कह कर श्रद्धांजलि दिया। हर ओर से यही आवाज आती रही कि देश में ऐसा नेता ना हुआ है और ना होगा जो विरोधी पार्टी के लोगों के दिलों पर भी अंत तक राज करता रहा। किसी ने अटल जी को जननेता कहा तो किसी ने कवि ! कोई पत्रकार कहा तो कोई कहीं बेहतरीन इंसान कहा। दलगत भावना से ऊपर उठकर लोगों ने अटल जी को दी श्रद्धांजलि…..  और करता रहा अश्रुपूरित नेत्रों से पुष्पांजलि !

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पंचतत्व में विलीन हुए अटल

भारतरत्न, कविहृदय जननेता, देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शुक्रवार शाम पंचतत्व में विलीन हो गए। दिल्ली के स्मृति स्थल पर राष्ट्र ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। उनकी दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य ने उन्हें मुखाग्नि दी। उससे पहले नातिन निहारिका ने उनके पार्थिव शरीर पर से तिरंगा ग्रहण किया। बेटी, नातिन और परिवार के लोग ही नहीं स्मृति स्थल पर मौजूद ऐसा कोई नहीं था जिसकी आंखों में आंसू ना हो। अटल थे ही कुछ ऐसे। सियासत की दुनिया का उन्हें ‘अजातशत्रु’ कहा जाता था क्योंकि उन्होंने हमेशा दोस्त बनाए, दुश्मन उनका कोई नहीं था।

Leaders at Smriti-Sthal
Leaders at Smriti-Sthal

मुखाग्नि देने से पूर्व स्मृति स्थल पर तीनों सेनाओं की ओर से अटल जी को अंतिम सलामी दी गई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वाजपेयी के पुराने साथी रहे लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, संघ प्रमुख मोहन भागवत, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सपा नेता मुलायम सिंह यादव समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं सभी विपक्षी दलों के नेता अंतिम विदाई देने मौजूद रहे। पड़ोसी देशों की ओर से भूटान नरेश जिग्मे नामग्याल वांग्चुक, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और वाजपेयी के मित्र रहे हामिद करजई भी श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के विदेश मंत्री और पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने भी इस मौके पर उपस्थिति दर्ज की।

इससे पहले वाजपेयी की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। वाजपेयी की अंतिम यात्रा में भाजपा मुख्यालय से उनके पार्थिव शरीर को लेकर जा रहे वाहन के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पैदल चल रहे थे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री और विजय रूपाणी, शिवराज चौहान, योगी आदित्यनाथ और देवेंद्र फडणवीस समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी वाहन के पीछे चल रहे थे। अटल जी के अंतिम दर्शन के लिए 7 किलोमीटर लंबे मार्ग पर उमस भरी गर्मी के बावजूद हजारों हजार की संख्या में लोग उमड़े चले आ रहे थे। ‘अटल बिहारी अमर रहे’ जैसे नारे लगातार गूंजते रहे।

अटल जी का शरीर भले ही अब इस दुनिया में नहीं है पर उनके अटल विचार, सिद्धांत और नैतिक मूल्य हमेशा देशवासियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। अटल ने कविता के जरिए पहले ही अपने अंतिम सफर का जिक्र करते हुए कहा था, ‘मौत की उम्र क्या है? दो पल भी नहीं, जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?’ अपनी ऐसी ही पंक्तियों, सम्मोहित कर देने वाले भाषणों और अनगिनत अवदानों की बदौलत युगों-युगों तक याद किए जाते रहेंगे हम सबके अटल जी। उन्हें हृदय की सम्पूर्ण श्रद्धा अर्पित करते हुए सादर नमन..!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप’

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लौटकर आइएगा अटलजी..!

भारत के अनमोल रत्न, देश के सार्वकालिक महान व्यक्तित्वों में एक, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे। देश भर की दुआएं काम ना आईं। कल हमलोगों ने राष्ट्रीय उत्सव मनाया और आज नियति ने सवा सौ करोड़ भारतवासियों को राष्ट्रीय शोक दे दिया। अटल जी पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे थे और 11 जून को तबीयत अधिक बिगड़ने के बाद उन्हें एम्स लाया गया था। दो दिनों से वे वेंटिलेटर पर थे और आज 94 वर्ष की उम्र में शाम 5 बजकर 5 मिनट पर यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली।

किसी बड़े व्यक्ति के जाने पर आमतौर कहने का चलन है कि ये ‘अपूरणीय क्षति’ है, पर अटल बिहारी वाजपेयी नाम के शख्स के जाने से बनी रिक्तता सचमुच कभी नहीं भरी जा सकती। भारत के मानचित्र पर जैसे हिमालय जैसा दूसरा संबल नहीं हो सकता, हमारी अंजुलि में जैसे गंगा जैसा दूसरा जल नहीं हो सकता, वैसे ही इस वसुंधरा पर दूसरा अटल नहीं हो सकता। संवेदना से ओतप्रोत कवि, विचारों से लबालब बेजोड़ वक्ता, विनम्रता और शालीनता की प्रतिमूर्ति, नेताओं की भीड़ में अद्वितीय स्टेट्समैन जिसकी भव्यता ना तो किसी पार्टी में समा सकती थी ना प्रधानमंत्री जैसे पद में – काजल की कोठरी कही जाने वाली राजनीति में जैसे तमाम अच्छी चीजें उन्होंने समेट रखी हो अपने भीतर।

आज जबकि राजनीति पर विश्वसनीयता का संकट आन पड़ा है, ‘सांकेतिक’ ही सही अटलजी की मौजूदगी की बेहद जरूरत थी हमें। बहरहाल, पूरा देश शोकाकुल है आज। राजनेताओं से लेकर तमाम क्षेत्रों के दिग्गज उन्हें भाव-विह्वल श्रद्धांजलि दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “उनका जाना पिता का साया सिर से उठने जैसा है।” बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “देश ने सबसे बड़े राजनीतिक शख्सियत, प्रखर वक्ता, लेखक, चिंतक, अभिभावक एवं करिश्माई व्यक्तित्व को खो दिया।” उनके निधन को लेकर सात दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। कई राज्यों ने भी राजकीय शोक और अवकाश की घोषणा की है। बिहार में सात दिनों के राजकीय शोक और शुक्रवार 16 अगस्त के अवकाश की घोषणा की गई है।

अटलजी का पार्थिव शरीर कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके आवास पर रातभर रखा जाएगा। सुबह 9 बजे पार्थिव देह भाजपा मुख्यालय ले जाई जाएगी। दोपहर 1 बजे अंतिम यात्रा शुरू होगी, जो राजघाट तक जाएगी। वहां महात्मा गांधी के स्मृति स्थल के नजदीक 4 बजे अटलजी का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अटलजी की अस्थियां प्रदेश की सभी नदियों में प्रवाहित की जाएंगी।

25 दिसंबर 1924 को जन्मे अटलजी 10 बार लोकसभा के सदस्य, दो बार राज्यसभा के सदस्य और तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। उनके प्रशंसक भारत ही नहीं दुनिया के हर कोने में मिल जाएंगे। उन जैसे नेता सदियों में होते हैं और इतिहास के पन्नों पर अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं। अटलजी, श्रद्धांजलि शब्द छोटा है आपके लिए, श्रद्धा का पूरा घट ही अर्पित करता हूँ आपको… बस अपना कहा पूरा करिएगा – मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं? – लौटकर आइएगा अटलजी..!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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एक बार फिर तिरंगे संग तिरंगा हुआ मधेपुरा

मधेपुरा जिले में 72वें स्वतंत्रता दिवस को पूरे उत्साह के साथ समारोह पूर्वक मनाया गया। बता दें कि मधेपुरा में नवनिर्मित डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के नाम वाले पार्क में समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने 72वें स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार  राष्ट्रीय ध्वजोत्तोलन करने के बाद उपस्थित स्कूली बच्चे-बच्चियों एवं बुजुर्गों के बीच अपने संक्षिप्त संबोधन में यही कहा कि सबसे पहले 1905 ई. में यह तिरंगा कलकत्ता के ग्रीन पार्क में पी.वेंकैया नामक व्यक्ति द्वारा फहराया गया था और 1906 ई. में भीकाजी कामा नामक एक साहसी पारसी महिला द्वारा जर्मनी में फहराया गया था।

For the first time on the occasion of 72nd Independence Day, Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri showing victory sign along with girl-students after National Flag hoisting at Dr.A.P.J.Abdul Kalam Park, Madhepura .
For the first time on the occasion of 72nd Independence Day, Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri showing victory sign along with girl-students after National Flag hoisting at Dr.A.P.J.Abdul Kalam Park, Madhepura .

बता दें कि डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क से सटे बी.एन.मंडल स्टेडियम में जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला (भाप्रसे) द्वारा झंडोत्तोलन किया गया।  वहीं बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय में विद्वान कुलपति डॉ. (प्रो.) अवध किशोर राय द्वारा, टीपी कॉलेज में प्रधानाचार्य डॉ.के.पी.यादव द्वारा एवं किरण पब्लिक स्कूल में निदेशक अमन प्रकाश द्वारा 72वां  स्वतंत्रता दिवस  पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। कुलपति ने अपने सारगर्भित संबोधन में ज्ञान की विस्तृत चर्चाएं करते हुए कहा कि आगे किसी विशेष अवसर पर विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे प्रत्येक विधा के वैसे छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा जो प्रदेश एवं देश के स्तर पर इस विश्वविद्यालय का नाम रोशन करेंगे।

अन्य वर्षो की भांति इस वर्ष भी समाजसेवी डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने समाजवादियों के रहवर मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल के नामवाले भूपेन्द्र चौक पर डॉ.आलोक कुमार, डॉ.लल्लन प्रसाद अद्री, संतकुमार, आनंद सहित शांति मध्य विद्यालय की छात्राओं एवं विद्यालय प्रधान श्रीमती लता देवी की टीम के बीच राष्ट्रीय ध्वजोत्तोलन किया और कहा कि सैकड़ों वर्षो तक हमारे पुरखों ने कुर्बानियां दी तब हमें 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली और हम आजाद भारत में तिरंगा लहराते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी, भूपेन्द्र नारायण मंडल, डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम जैसे कुछ लोग तो ऋषि का जीवन जीते हुए अपना सब कुछ देश के लिए न्योछावर कर दिया……. बच्चों ! उनकी जय करो…… उनके आचरण को जीवन में उतारो….. तथा सूरज की तरह चमकने के लिए सूरज की तरह जलना सीखो।

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