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नेताजी सुभाष चन्द्र बोसमय हुआ मधेपुरा

आजादी के दीवाने सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिवस 23 जनवरी को मधेपुरा के बीचो-बीच अवस्थित उनकी प्रतिमा पर सर्वप्रथम नगरपालिका के प्रथम उपाध्यक्ष समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी सहित किसान मजदूर-शिक्षक-व्यापारी सभी मिलजुलकर आज सबेरे माल्यार्पण किये एवं शेष सबों ने पुष्पाञ्जलि की।

डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित बच्चों से नेताजी के बाबत यही कहा कि उनका जन्म 1897 ई. में उड़ीसा के कटक में अपने पिता जानकी बोस एवं माता प्रभावती की नौवीं संतान के रूप में हुई थी। कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर उन्होंने IAS की परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने नौकरी नहीं की। देश सेवा में लग गये। 1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया। लगे हाथ उन्होंने पूरी दुनिया का भ्रमण किया। रासबिहारी बोस के आजाद हिन्द फौज का पुनर्गठन किया। महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता कहकर सर्वप्रथम उन्होंने ही संबोधित किया था। अंत में डॉ.मधेपुरी ने अपनी ‘आजादी’ शीर्षक कविता की चन्द पंक्तियाँ बच्चों के साथ साझा किया।

गोखले तिलक गाँधी सुभाष, नेहरु लोहिया जयप्रकाश।

सभी दीवाने आजादी के, कर दिया एक क्षिति महाकाश।।

आओ सब मिलकर करें बंधु, आजादी का शत् अभिनंदन।

इनके ललाट पर करें नित्य, अपने अनंत श्रम का चंदन।।

DM Navdeep Shukla paying his tributes to Neta Jee Subhash Chandra Bose at Samaharnalaya Madhepura.
DM Navdeep Shukla paying his tributes to Neta Jee Subhash Chandra Bose at Samaharnalaya Madhepura.

पुनः दिन के 11 पूर्वाह्न में समाहरणालय सभाकक्ष में नेताजी सुभाष चंद्र की भव्य तस्वीर पर डीएम नवदीप शुक्ला एवं एसपी संजय कुमार की टीम के सारे पदाधिकारी एडीएम शिवकुमार शैव, उपेंद्र कुमार झा, डीडीसी मुकेश कुमार, खेल पदाधिकारी मुकेश कुमार, एनडीसी रजनीश कुमार एवं कार्यालय कर्मियों सहित समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी द्वारा पुष्पांजलि की गई। दिनभर शहर के प्रायः सभी स्कूलों एवं कॉलेजों में छात्रों एवं शिक्षकों द्वारा नेताजी को श्रद्धांजलि दी गई, उन्हें याद किया गया।

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कोसी के महान कवि पं.यदुनाथ झा यदुवर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर व्याख्यान

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अंबिका सभागार में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महान योद्धा एवं महाकवि पं.यदुनाथ झा यदुवर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। मुख्य व्याख्यानकर्ता डॉ.ललितेश मिश्र, पूर्व विभागाध्यक्ष , स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग (बीएनएमयू) ने कोसी अंचल के कवियों के काव्य-कुसुमों की चर्चा करते हुए कहा कि महाकवि यदुवर राष्ट्रीय चेतना के काव्य सृजन में अग्रगण्य रहे हैं। इन्हें साहित्य एवं राष्ट्रप्रेम विरासत के रूप में प्राप्त हुआ था क्योंकि पं.यदुवर जी महान स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक बाबू रास बिहारी लाल मंडल के अभिन्नतम मित्र थे। उनकी भाव साधना के समान ही शब्द साधना भी विलक्षण रही है।

डॉ.मिश्र ने आगे कहा कि पं.यदुनाथ झा यदुवर की यशस्वी कृति ‘मिथिला गीतांजलि’ है जो उनकी राष्ट्रीय चेतना का सशक्त संवाहक है। यदुवर जी में राष्ट्रीयता की गंगा ताजिंदगी प्रवाहित होती रही। पूर्व में विषय प्रवेश करते हुए अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने ऐसी परिचर्चा की उपादेयता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाकवि यदुवर कोसी अंचल के काव्य मुकुटमणि हैं। यदि कहीं स्वर्ग है तो मिथिला की धरती पर ही है क्योंकि मिथिला की नदियों का तीर नंदन-कानन से कम रमणीक नहीं है। यह यदुवर जी की राष्ट्रीय भावना की उद्ददाम अभिव्यक्ति है। उनकी कविताओं में कालचक्र का स्वभाविक रूप से मौलिक चित्रण मिलता है जिस कारण पाठक देश पर मर मिटने को तत्पर हो उठते थे। वे काव्य जगत में नवीन चेतना लेकर प्रादुर्भूत हुए थे।

सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि लोगों के अंतर्मन में राष्ट्रीयता का संचार करना ही राष्ट्रीय कविता का लक्ष्य है। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि महाकवि यदुवर सामाजिक समस्याओं को लेकर ही राष्ट्रीय कविताओं का सृजन किया है। याद रहे कि सामाजिक सद्भाव एवं पारस्परिक एकता ही तत्कालीन भारत की सामायिक समस्याएं थी।

अपने संबोधन में पूर्व कुलसचिव शचीन्द्र, प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, सुबोध कुमार सुधाकर, सुरेंद्र भारती, ध्रुव नारायण सिंह राई, डॉ.अरविंद श्रीवास्तव, डॉ.विश्वनाथ विवेका, प्रो.मणि भूषण. डॉ.विनय कुमार चौधरी आदि ने प्रायः यही कहा कि महाकवि यदुवर की राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत कविताओं में स्थायित्व का समावेश है और समाजिकता का प्रतिबिंब भी। सबों ने यही कहा कि सुंदर, कोमल एवं भावाभिव्यंजक शब्दों के चयन करने में कविवर यदुवर सिद्धहस्त रहे तथा अपने हृदय का रस व रंग भरकर सहज ही राष्ट्रीय काव्य संस्कार को अलंकृत करते रहे।

द्वितीय सत्र में कविवर द्वय परमेश्वरी प्रसाद मंडल दिवाकर एवं त्रिवेणीगंज के तारा नंदन तरुण की स्मृति में आयोजित काव्यगोष्ठी का संचालन किया प्रो.मणि भूषण वर्मा ने और इस काव्य गोष्ठी में जिन कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं का मन मोह लिया तथा तालियां बटोर ली, वे हैं- सुबोध कुमार सुधाकर, डॉ.सिद्धेश्वर, राई,  सुरेंद्र भारती , उल्लास मुखर्जी , सियाराम यादव मयंक, राकेश कुमार द्विजराज, संतोष कुमार सिन्हा , डॉ.कौशल कुमार, डॉ.आलोक कुमार, विकास रंगकर्मी, डॉ.विश्वनाथ विवेका, मोहम्मद मुख्तार आलम, रघुनाथ प्रसाद यादव, श्यामल कुमार सुमित्र, डॉ.हरिनंदन यादव आदि। मौके पर बैजनाथ रजक, संजय भारती, तारा शरण, प्राण मोहन यादव, किशोर श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे। अंत में सचिव डॉ.मधेपुरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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मुख्यमंत्री ने किया सहरसा विद्युत उपकेन्द्र का शिलान्यास

शनिवार, 19 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड के सिंहौल में 300 करोड़ की लागत से बनने वाले 400/220/132 केवी विद्युत उपकेंद्र का शिलान्यास किया। दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत करने के बाद अपने संबोधन में सर्वप्रथम केन्द्रीय विद्युत और नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री आरके सिंह को सहरसा में पावर ग्रिड निर्माण करवाने के लिए बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में बिजली के क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर काम किया गया है। जहां वर्ष 2005 में 24 लाख उपभोक्ता थे और मात्र सात सौ मेगावाट बिजली की खपत थी, वहीं वर्ष 2017 में 4,535 मेगावाट बिजली की खपत हुई और अभी 5,139 मेगावाट बिजली की खपत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 2012 के भाषण के दौरान मैंने कहा था कि अगर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कराउंगा तो वर्ष 2015 के चुनाव में वोट मांगने नहीं जाऊॅगा। तब से बिजली के क्षेत्र में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए। 2015 में सात निश्चय के अंतर्गत हर घर तक बिजली पहुंचाने के लक्ष्य को समय से पूर्व ही 25 अक्टूबर 2018 को प्राप्त कर लिया गया। अब हर इच्छुक व्यक्ति जिसने बिजली का कनेक्शन लेना चाहा, उन तक बिजली पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना पर काम कर रही है और केन्द्र सरकार के सहयोग से हमें इस लक्ष्य को प्राप्त करने में और सहुलियत हुई। समय से पूर्व लक्ष्य प्राप्ति के लिए उन्होंने राज्य सरकार के ऊर्जा मंत्री और ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव के योगदान की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि 31 दिसंबर 2019 तक सभी जर्जर तारों को बदलने का नया लक्ष्य रखा गया है। हर किसान के खेतों तक सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये 31 दिसंबर 2019 तक अलग कृषि फीडर के निर्माण का भी लक्ष्य रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगले तीन साल में बिहार में सभी बिजली कनेक्शन प्रीपेड हो जाएगा। इससे लोगों को बिल भुगतान में सुविधा होगी। बिजली बिल में गड़बड़ी संबंधी शिकायतों के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिक बिल आने पर लोक शिकायत निवारण कानून के तहत शिकायत करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम काम के आधार पर वोट मांगते हैं, न्याय के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। हर तबके और हर इलाके के विकास में लगे हैं। बिहार की जनता जब तक मौका देगी हमारी प्रतिबद्धता बिहार की जनता के प्रति एवं काम के प्रति रहेगी। उन्होंने कहा कि बिजली के आने से अंधेरा, भूत का डर खत्म हो गया है और ढिबरी और लालटेन की उपयोगिता समाप्त हो गयी है।

कार्यक्रम को केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री आरके सिंह, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, लघु जल संसाधन मंत्री दिनेश चंद्र यादव, एससी-एसटी कल्याण मंत्री रमेश ऋषिदेव, सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, प्रधान सचिव ऊर्जा प्रत्यय अमृत एवं अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक पावर ग्रिड आईएस झा ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू, विधायक डॉ. अब्दुल गफूर, विधायक रत्नेश सदा, विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, नॉर्थ बिहार कॉरपोरेशन के एमडी संदीप कुमार, कोसी प्रमंडल की आयुक्त सफीना एन., मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, सहरसा की जिलाधिकारी शैलजा शर्मा, पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सहित अन्य अधिकारीगण, पावर ग्रिड इंडिया लिमिटेड के अधिकारीगण, अभियंतागण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

चलते-चलते बता दें कि सहरसा विद्युत उपकेन्द्र 300 करोड़ रूपये की लागत से 36 माह में बनकर तैयार होगा। इसके अलावा राज्य सरकार इसके संचरण के लिए रिंग नेटवर्क के निर्माण में 354 करोड़ 45 लाख रुपए खर्च करेगी। यह भी जानें कि केन्द्र सरकार द्वारा बिहार में तीन पावर ग्रिड का शिलान्यास किया गया है। बकौल मुख्यमंत्री इससे बिजली आपूर्ति में काफी सहूलियत होगी और बढ़ी हुई बिजली की आवश्कताओं को पूरा किया जा सकेगा। लोगों को पूरी गुणवत्ता के साथ बिजली मिलेगी। बात जहां तक कोसी की है, यह सुखद संयोग है कि केन्द्रीय विद्युत राज्य मंत्री और राज्य सरकार के विद्युत मंत्री दोनों इसी कोसी क्षेत्र के हैं। इससे इस क्षेत्र में ऊर्जा संबंधी समस्याओं का समाधान और आसानी से हो सकेगा।

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मधेपुरा के वृद्धों एवं दिव्यांगों के लिए भूकम्प सुरक्षा सप्ताह !

मधेपुरा के बीपी मंडल इंडोर स्टेडियम में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं जिला आपदा प्रबंधन के द्वारा 18 जनवरी को माॅक ड्रिल यानि State Disaster Response Force (SDRF) की टीम के नेतृत्व में मधेपुरा के डॉ.कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने खासकर जिले के प्रायः सभी प्रखंडों से आये हुए दिव्यांग बच्चों एवं उनके माता-पिता व वृद्धों से इंस्पेक्टर हंसलाल गुप्ता व एसआई राम लखन की टीम के विंध्याचल प्रसाद, सिकन्दर कुमार, प्रमोद राय, अशोक शर्मा, सुनील पाल, कुंदन भारती आदि की उपस्थिति में यही कहा –

हौसले बुलंद एवं इरादे मजबूत हो तो दुनिया में कुछ भी पाना आसान हो जाता है |

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri observing demonstrations given by State Disaster Response Force (S.D.R.F.) Team to the Divyangs and old age people during Bhukamp Shuraksha Saptaah at B.P.MANDAL Indoor Stadium Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri observing demonstrations given by State Disaster Response Force (S.D.R.F.) Team to the Divyangs and old age people during Bhukamp Shuraksha Saptaah at B.P.MANDAL Indoor Stadium Madhepura.

इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने दोनों पैरों से विकलांग विल्मा रूडोल्फ जैसी ओलंपिक में 4 गोल्ड मेडल जीतने वाली धाविका, कंचन गोवा जैसी नेत्रहीन पर्वतारोही जो दर्जनों अंतरराष्ट्रीय मेडल जीत चुकी है……. के साथ-साथ अन्य दिव्यांगों की कहानी को विस्तार पूर्वक सुना-सुनाकर खूब तालियां बटोरी और तमाम दिव्यांगों के चेहरे पर मुस्कान ला दिया | उन्होंने उपस्थित जनों से यही कहा कि भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के संदेश को आप तक पहुंचाने आया हूं- जैसा उन्होंने मुझसे कई बार कहा था-

ये आँखे दुनिया को दोबारा नहीं देख पायेगी…….

अतः तुम्हारे अंदर जो बेहतरीन है वह दुनिया को

देकर जाना…… बच्चों को देकर जाना |

भला क्यों नहीं, सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक व वरीय उपसमाहर्ता एवं खेल पदाधिकारी मुकेश कुमार एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार के अनुरोध पर तीनों जिले (मधेपुरा-सहरसा-सुपौल) के लिए आये हुए SDRF के 40 सदस्यों वाली कंपनी की एक टुकड़ी के सदस्यों द्वारा दिव्यांगों को भूकंप आने पर घर के अंदर छिपने की जानकारियां दी गई और सबों को यह भी बताया गया कि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को उठाने के तरीके क्या होंगे…… जिसमें एक व्यक्ति, दो व्यक्ति या तीन व्यक्ति द्वारा उठाने के तरीकों को भी डिमोंस्ट्रेट कर दिखाया गया | अन्त में डॉ.मधेपुरी ने दिव्यांगों के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील डॉ.कलाम के बाबत यही कहा-

वह गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.कलाम अंतिम सांस तक दिव्यांग बच्चों के जीवन संवारने में, वृद्धों एवं रोगियों के चेहरों पर मुस्कान लाने में लगे रहे | उन्हें सर्वाधिक प्रसन्नता तब होती जब भी हृदय रोगियों की धमनियों में “कलाम- राजू कोरोनरी स्टेंट” तथा विकलांग बच्चों को “लाइटवेट फ्लोर रिएक्शन ऑर्थोसिस कैलिपर्स” लगाने के पश्चात उनकी तकलीफों को कुछ हल्का होते देखा करते | उनकी मान्यता रही कि विज्ञान के दरवाजे ऐसे हरेक व्यक्ति के लिए खुले रहेंगे जो मानवता की भलाई के लिए कार्यरत हैं | कार्यक्रम के अंत में सचिव अरुण कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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अमर शहीद चुल्हाय की 99वीं जयन्ती उत्साहपूर्वक मनी

15 जनवरी 2019 (मंगलवार) को अमर शहीद चुल्हाय यादव की 99वीं जयंती समारोह पूर्वक प्रो.श्यामल किशोर यादव की अध्यक्षता में मनाई गई। समारोह के उद्घाटनकर्ता बिहार सरकार के पूर्व आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चंद्रशेखर एवं मुख्यवक्ता के रूप में बीएनएमयू के पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी के अतिरिक्त सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र की हस्तियों के रूप में बिजेंद्र प्रसाद यादव, कृष्ण कुमार यादव, राजकिशोर यादव….. सहित शहीद चुल्हाय स्मारक समिति मनहरा-बराही-सुखासन के पूर्व मुखिया जनार्दन प्रसाद यादव, सचिव डॉ.नरेश कुमार, अध्यक्ष प्रो.जयकृष्ण यादव व अन्य क्रांतिकारी युवाओं की उपस्थिति देखी गई।

Dr.Madhepuri and others paying their tributes to Shahid Chulhai.
Dr.Madhepuri and others paying their tributes to Shahid Chulhai.

बता दें कि मनहरा चौक पर गत वर्ष स्थापित शहीद चुल्हाय की प्रतिमा पर मंगलवार को माल्यार्पण व पुष्पांजलि के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। शहीद चुल्हाय के स्मारक के निकट अवस्थित प्राथमिक विद्यालय मनहरा के परिसर में शहीद चुल्हाय के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया- उद्घाटनकर्ता पूर्व मंत्री एवं मधेपुरा विधान सभा के वर्तमान विधायक प्रो.चंद्रशेखर ने। अपने संबोधन में उन्होंने आसपास के ग्रामीणों, बच्चों एवं युवाओं से यही कहा कि शहीद चुल्हाय ने अपनी शहादत देकर हमें आजादी दिलाई परन्तु सरकारी हाथों से शहीदों के सपनों को चकनाचूर किया जा रहा है और अब भी लोग चुप हैं….. उन्हें गुस्सा क्यों नहीं आता है ?

मुख्यवक्ता के रूप में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने संबोधन में लोहिया, जयप्रकाश, रास बिहारी लाल मंडल, शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, राम बहादुर सिंह (पंचगछिया), परमेश्वर कुंवर, कार्तिक प्रसाद सिंह, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल (सुखासन), मो.कुदरतउल्लाह सहित सभी क्रांतिकारियों की विस्तार से चर्चा करते हुए 26 जनवरी 1943 को आजादी के दीवाने चुल्हाय द्वारा मधेपुरा के ट्रेजरी बिल्डिंग पर तिरंगा फहराने से लेकर गोरों द्वारा पकड़े जाने व पीट-पीटकर मौत के घाट उतारने तक की संवेदनायुक्त चर्चा की। कोसी के साहित्य में हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ, डॉ.मधेपुरी एवं क्रांति गाथा के कवि डाॅ.जीपी शर्मा द्वारा शहीद चुल्हाय की विस्तृत चर्चा की गई है। डॉ.मधेपुरी ने क्रांतिगाथाा की इन पंक्तियों को सुना कर सबको भावुक कर दिया-

प्रखर ग्राम मनहरा-सुखासन फूलचन्द थे एक किसान।

जिनका पुत्र चुल्हाई यादव ने रखा धरती का मान।।

मधेपुरा में बीच सड़क पर सत्याग्रही युवक को मार।

गोरों ने सूरपुर पहुंचाया गई है अहिंसा सचमुच हार।।

कंठ-कंठ में आज चुल्हाई की उज्जवल गौरव गाथा।

इस शहीद ने किया कौशिकी अंचल का ऊंचा माथा।।

अंत में अपने संबोधन में डॉ.मधेपुरी ने मनहरा-सुखासन की त्रिमूर्ति बाबू कीर्ति नारायण मंडल को कोसी के मदन मोहन मालवीय, शहीद चुल्हाय को भगत सिंह एवं सुखासन के कमलेश्वरी प्रसाद मंडल को कबीर कह कर सम्मानित किया। साथ ही मधेपुरा में जो डॉ.मधेपुरी ने शहीद चुल्हाय के नाम-  शहीद चुल्हाय मार्ग, शहीद चुल्हाय उद्यान एवं शहीद पार्क बनवाया है उसकी जानकारी उपस्थित दर्शकों को दी और दो जगहों पर उनकी प्रतिमाएं स्थापित करने की भी चर्चाएं की। इन घोषणाओं पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाई।

समारोह को शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, सचिव एवं बाहर से आए अतिथि बिजेंद्र प्रसाद यादव, कृष्ण कुमार यादव, राजकिशोर यादव, जनार्दन प्रसाद यादव, जगदीश प्रसाद यादव आदि ने भी संबोधित किया। नीतेश कुमार, अमित कुमार…….. व सारे युवाओं की टीम अंत तक लगे रहे। अध्यक्षीय संबोधन में बी एन मंडल वाणिज्य महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव ने समिति के समक्ष यह प्रस्ताव रखा कि आगामी वर्ष शहीद चुल्हाय की शताब्दी जन्मशती जयंती को यादगार जयंती के रूप में मनाने की तैयारी के लिए तैयार रहें। इसी के साथ धन्यवाद ज्ञापित करते हुए समापन की घोषणा कर दी गई।

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भारत में हिन्दी के बाद उर्दू सबसे अधिक बोली जाती है

मधेपुरा के भूपेन्द्र स्मृति कला भवन में “फरोग-ए- उर्दू सेमिनार” का एक दिवसीय समारोह आयोजित किया गया जिसका विधिवत उद्घाटन एनर्जेटिक डीएम नवदीप शुक्ला (IAS), आरक्षी अधीक्षक संजय कुमार, डीडीसी मुकेश कुमार, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी शिव कुमार शैव, डीईओ  उग्रेश प्रसाद मंडल, एनडीसी रजनीश कुमार, शौकत अली, मुर्तुजा अली के द्वारा सामूहिक रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। यह सेमिनार उर्दू निदेशालय एवं जिला प्रशासन के बैनर तले रविवार को जिले के कोने-कोने से आए छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों की भारी भीड़ की उपस्थिति में दिन भर चला।

डीएम नवदीप शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि उर्दू हमारी तहजीब है। हम दिन-प्रतिदिन अपनी संस्कृति व मूल्यों को भूलते जा रहे हैं जबकि हमें अपने सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के साथ-साथ भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन में निरंतर लगे रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उर्दू हमारी साझी संस्कृति का हिस्सा है और उसे धर्म के आईने से कभी ना देखें। अंत में डीएम शुक्ला ने यही कहा कि हिन्दी व उर्दू भाषा के विकास से ही देश तरक्की करेगा।

इस अवसर पर जिला उर्दू भाषा कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी वरीय उप समाहर्ता अल्लामा मुख्तार ने कार्यक्रम संचालन के दौरान प्रथम वक्ता के रूप में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी  को आवाज दी। डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि भारत में उर्दू, हिन्दी के बाद, सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है जो किसी वर्ग विशेष की भाषा नहीं…… बल्कि आम आदमी की भाषा रही है। गंगा-यमुनी संस्कृति की तरह हिन्दी-उर्दू दोनों सगी बहने हैं। दोनों हिंदुस्तानी भाषा से भारत में ही जन्म ग्रहण की है। इन दोनों भाषाओं को एक साथ देखने पर ही हिंदुस्तान की परिकल्पना पूरी हो सकती है। जैसे कथाकार प्रेमचंद आरंभ में उर्दू में लिखते थे और अमीर खुसरो हिन्दी के लिए बहुत कुछ करते रहे….. रहीम और रसखान को हिन्दी जगत कभी नहीं भूलेगा।

यह भी बता दें कि जहाँ अपर समाहर्ता शिव कुमार शैव ने कहा कि हिन्दी पहले उर्दू के नाम से जानी जाती थी और उर्दू हिन्दी के नाम से…… वहीं डॉ.शांति यादव ने गजल की चंद पंक्तियां सुनाकर अपने संबोधन में यही कहा कि उर्दू रुमानियत व नजाकत वाली भाषा है। प्रो.गुलहसन, मो.शौकत अली, मुर्तुजा अली सहित सारे वक्ताओं ने कहा कि हिन्दी-उर्दू गंगा-यमुनी संस्कृति की भाषा है जिसे धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। सभी लोग उर्दू से नाता जोड़ें और इसे अपनाएं।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जिले के सभी प्रखंडों से आए छात्र-छात्राएं भाषण प्रतियोगिता में भाग लिए और बेहतर प्रदर्शन करने पर उन्हें आयोजक मंडल की ओर से पुरस्कार स्वरूप नकद राशि प्रदान किया गया। मोमेंटो व प्रमाण पत्र भी जिला प्रशासन की ओर से दिया गया। जिले के कोने-कोने से आए प्रतिभागियों की इतनी भीड़ थी कि कला भवन का हाल छोटा पड़ गया और कुछ छात्रों को उर्दू भाषा के विकास पर बोलने का अवसर चाहकर भी नहीं मिल पाया।

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मधेपुरा के कला भवन में सर्वोत्कृष्ट कलाकारों का चयन शुरू

मधेपुरा के भूपेन्द्र स्मृति कला भवन में बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग व जिला प्रशासन मधेपुरा के बैनर तले विभिन्न कलाओं….. यथा लोकगीत, लोकनृत्य व नाटक के साथ-साथ शास्त्रीय गीत एवं शास्त्रीय नृत्य आदि में केवल प्रथम स्थान प्राप्त कलाकारों की सूची 15 जनवरी तक विभाग को उपलब्ध कराने हेतु दो दिवसीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में भाग लेनेवाले प्रतियोगियों पर उम्र सीमा के बाबत कोई प्रतिबंध नहीं है।

बता दें कि जिला स्तर पर सर्वोत्कृष्ट कलाकारों को चिन्हित करने हेतु दो दिवसीय प्रतियोगिता का उद्घाटन बिहार सरकार के एससी-एसटी कैबिनेट मंत्री प्रो.(डॉ.) रमेश ऋषिदेव, समाज सेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, अपर समाहर्ता सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी शिव कुमार शैव, डीडीसी मुकेश कुमार, एनडीसी रजनीश कुमार, डॉ.शांति यादव आदि द्वारा संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उद्घोषक जयकृष्ण प्रसाद यादव, अरुण कुमार, ध्यानी यादव का सहयोग सराहनीय रहा।

जिला स्तरीय युवा उत्सव के उद्घाटन के बाद अपने सारगर्भित संबोधन में मंत्री डॉ.रमेश ऋषिदेव ने कलाकारों को प्रोत्साहित करते हुए बिहार सरकार की उपलब्धियों एवं युवाओं के हितार्थ किए गए कार्यों की बुनियादी जानकारियां दी और खूब तालियां बटोरी। इस अवसर पर अपर समाहर्ता शिव कुमार शैव ने संगीत एवं संगीत के घरानों की विलक्षण व बारीक चर्चाओं केे माध्यम से श्रोताओं का दिल जीत लिया वहीं डॉ.मधेपुरी द्वारा भारतरत्न शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खाँ के संगीत के प्रति समर्पण की चर्चा पर हाॅल तालियों से गूंज उठा। डॉ.शांति यादव के संबोधन के बाद जिला प्रशासन की ओर से डीडीसी मुकेश कुमार ने उद्घाटन सत्र के समापन पर संचालन, पर्यवेक्षण एवं निर्णायक मंडल के सदस्यों के साथ-साथ प्रतिभागियों को भी इस आयोजन को सफल बनाने हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।

अगले सत्र में निर्णायक मंडल के सदस्यगण- वरीय उप समाहर्ता अल्लामा मुख्तार, अरुण कुमार बच्चन, रवि रंजन, रेखा यादव, गांधी कुमार मिस्त्री एवं शशिप्रभा जायसवाल द्वारा अपर समाहर्ता शिव कुमार शैव, डॉ.मधेपुरी एवं डॉ.शांति यादव के अनुसार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों का चयन शुरू कर दिया गया।

जिला स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम दिन लोक संगीत, लोक नृत्य में प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। जहाँ शिवाली की प्रस्तुति पर दर्शक झूमने पर मजबूर दिखे वहीं सृजन दर्पण के कलाकारों की प्रस्तुति एवं विकास कुमार के निर्देशन की “बधैया समूह लोक नृत्य” में जमकर सराहना होती देखी गई। एक से बढ़कर उत्कृष्ट प्रदर्शन से गदगद हुए  संगीत एवं कला प्रेमी दर्शक। आगे दूसरे दिन शास्त्रीय गीत एवं शास्त्रीय नृत्य के साथ चयनित सभी विधाओं के सर्वोत्कृष्ट कलाकारों को सम्मानित करते हुए राज्यस्तर पर होने वाले आयोजन के लिए निर्णायक मंडली के सभी सदस्यों की स्वीकृति व सहमति के साथ सूची प्रेषित कर दी जाएगी।

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200 वर्ष पूर्व बनी पटना की पेंटिंग लंदन संग्रहालय की जान

विश्व का सबसे बड़ा म्यूजियम (संग्रहालय) लंदन में है जिसका नाम है- ‘द विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम’। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान पटना के कई कलाकारों की पेंटिंग्स भी लगाई गई है उस म्यूजियम में।

बता दें कि पटना में मुहर्रम के दृश्य पर पटना के ही हिन्दू चित्रकार सेवक राम द्वारा बनाई गई पेंटिंग आज भी उस लंदन संग्रहालय की जान है। दो सौ ग्यारह साल पहले बनी मुहर्रम पर निकाले गये ताजिया जुलूस की पेंटिंग इतनी खूबसूरत है कि वह आज लंदन स्थित विश्व के सबसे बड़े डेकोरेटिव आर्ट्स एंड डिजाइन संग्रहालय ‘द विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम’ की जान बनी हुई है। मौके पर संसार के समस्त मुस्लिम देशों में बिहार की राजधानी पटना के उस हिन्दू कलाकार सेवकराम के मुहर्रम पर बनी पेंटिंग की जमकर चर्चाएं होती रहती हैं।

यह भी जानिए कि पटना में पटना सिटी स्थित दीवान मुहल्ला, लोदी कटरा और मच्छरहट्टा मुहल्ले में इस विद्या के माहिर कलाकार 18वीं शताब्दी के आरंभिक काल में हुआ करते थे। इसका विस्तार पटना, दानापुर व आरा तक था। शिवा लाल शिवा लाल की पेंटिंग्स भी ताजिए को लेकर चर्चित रही है।

आज के दिनों में जिस तरह ताजिये बनते हैं वही अंदाज 1807 में भी था। तब के इस पेंटिंग में बच्चों की मौजूदगी एवं सफेद कपड़े पहने बड़े लोगों की संख्या भी सर्वाधिक देखी जाती रही है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि 17वीं शताब्दी में स्थापित लंदन स्थित विक्टोरिया म्यूजियम में तीस लाख से भी अधिक प्रदर्श हैं जो मुख्य रूप से डेकोरेटिव आर्ट्स व डिजाइन से संबंधित हैं। पहले ताजिये के जुलूस में हिन्दुओं की सहभागिता सर्वाधिक हुआ करती जिसमें कमी होती दिखने लगी है। तब के दिनों में राजा की सहभागिता भी हाथी पर चढ़कर ताजिए के पहलाम वाले जुलूस में देखी जाती थी….।

 

 

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मधेपुरा सीट के लिए शरद ढूंढ़ रहे पप्पू का हल

लोकतांत्रिक जनता दल बनाकर नए सिरे से अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे शरद यादव परेशान हैं इन दिनों। उनकी परेशानी की वजह है मधेपुरा लोकसभा सीट जहां से वे चुनाव लड़ना चाहते हैं। दरअसल यहां एक म्यान में दो तलवार की स्थिति आन पड़ी है उनके सामने और ये दूसरी तलवार हैं मधेपुरा के वर्तमान सांसद पप्पू यादव। महागठबंधन का उम्मीदवार बनकर शरद एनडीए से लोहा लें उससे पहले उन्हें पप्पू का हल ढूँढ़ना पड़ रहा है। प्रश्न उठता है कि पप्पू उनके लिए सीट छोड़ें क्यों? वे तो स्वयं इस जुगत में हैं कि किसी तरह महागठबंधन में उनकी इंट्री हो जाए। राजनीति के माहिर खिलाड़ी शरद जानते हैं कि अगर वे एनडीए के विरुद्ध महागठबंधन के उम्मीदवार बन जाएं और पप्पू भी वहां से खड़े हो जाएं तो मुकाबला त्रिकोणीय होगा और ऐसे में एनडीए को रोकना असंभव-सा होगा क्योंकि पप्पू यादव का भी वोट बैंक कमोबेश वही है जो आरजेडी या महागठबंधन का है।
इन सारी परिस्थितियों के बीच शरद यादव इस कोशिश में हैं कि लालू प्रसाद यादव की रजामंदी से पप्पू यादव को मधेपुरा से हटाकर सुपौल या झंझारपुर से चुनाव लड़वाया जाय। बता दें कि सुपौल से पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन कांग्रेस की मौजूदा सांसद हैं। लिहाजा, इस बात की संभावना नगण्य है कि पप्पू सुपौल से लड़ें। ऐसे में झंझारपुर उनका नया ठिकाना हो सकता है। ये सभी संसदीय क्षेत्र यादव बहुल हैं और दोनों यादव नेता इसका लाभ लेना चाहते हैं। हालांकि आरजेडी सुप्रीमो ने अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं किया है।
गौरतलब है कि पप्पू यादव पूर्णिया से तीन बार सांसद रह चुके हैं और उनके लिए पूर्णिया एक बेहतर विकल्प हो सकता था लेकिन सूत्रों के मुताबिक पप्पू स्वयं वहां से चुनाव लड़ना नहीं चाहते। इसके पीछे उनकी कुछ राजनीतिक मजबूरियां बताई जा रही हैं। चलते-चलते यह भी बता दें कि साल भर पहले लालू परिवार के खिलाफ आग उगलने वाले पप्पू इन दिनों लालू के गुण गाने में लगे हैं। इसे आरजेडी खेमे से उनकी बढ़ती नजदीकी के रूप में देखा जा रहा है और यह बात भी शरद को परेशान कर रही है।

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अंतर्राष्ट्रीय साइंस सिटी पटना के सैदपुर में दिखेंगे आर्यभट्ट से लेकर कलाम तक के विजन

तीन विदेशी एजेंसियों द्वारा बिहार की राजधानी पटना के सैदपुर में बनाई जा रही है- अंतर्राष्ट्रीय साइंस सिटी। ई.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस साइंस सेंटर में आर्यभट्ट से लेकर कलाम तक के ‘विजन’ दिखेंगे।

यह भी बता दें कि अलग-अलग थीम पर बनाई जा रही पांच दीर्घाएं वर्ष 2020 तक बनकर तैयार हो जाएंगी। इस साइंस सिटी सैदपुर में बिहार में ही जन्मे महान गणितज्ञ आर्यभट्ट से लेकर गांधीयन मिसाइल मैन व भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के विजन को प्रदर्शित करने हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा लगभग 400 करोड़ रुपए की लागत से इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का संशोधित लक्ष्य रखा गया है। डॉ.कलाम के करीबी रह चुके फिजिक्स के यूनिवर्सिटी प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से बिहार को अंतरराष्ट्रीय विज्ञान जगत में अच्छी-खासी ऊंचाई प्राप्त होगी।

यह भी जानिए कि 20 एकड़ से भी अधिक भूमि पर तैयार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट को नीतीश सरकार ने डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम का नाम दिया है। इस डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम अंतर्राष्ट्रीय साइंस सिटी में पांच महत्वपूर्ण थीम होंगे- (1) बेसिक साइंस जिसमें रोचक तरीके से साइंस को समझाने की कोशिश होगी। (2) दूसरा थीम ‘बॉडी एंड माइंड’ पर आधारित होगा जिसमें नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ.ए.कैराॅल की पुस्तक “Man The Unknown” की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की जाएगी……। (3) तीसरा थीम होगा- ‘स्पेस एण्ड  स्ट्रोनोमी’ जिसमें ग्रहों एवं उपग्रहों के साथ-साथ सेटेलाइट व मिसाइल आदि की विस्तृत जानकारी दी जाएगी (4) चौथा थीम होगा ‘एक्सपेरिमेंटल लर्निंग’ जिन्हें सीख-सीख कर युवाओं के अंदर क्रिएटिविटी पैदा होगी…. और (5) पाँचवाँ थीम होगा “बी ए साइंटिस्ट”

चलते-चलते यह भी बता दें कि साइंस सिटी में लगाए जाने वाले एक्जीबिट्स यानी प्रदर्शन हेतु चयनकर्ताओं की कमेटी के विशेषज्ञ हैं- इसरो के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक पद्मश्री मानस बिहारी वर्मा, एनसीएसएम के DG एएस मानेकर एवं रिटायर्ड डीजी आइ.के.मुखर्जी, टीआईएफआर के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ.विजय ए सिंह, कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रो.तुषारकांत घोष, कोलकाता साइंस सिटी के डायरेक्टर एडी चौधरी, आईआई टी कानपुर के पर्यावरणविद प्रोफेसर डॉ.विनोद तारे आदि।

यह भी याद कर ले की साइंस सिटी के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का काम 3 विदेशी कंपनियां संभाल रखी हैं- (1) सिंगापुर की फ्लाइंग एलीफेंट (2) कनाडा की जीएसएम कंपनी और (3) यूके की कंपनी ब्लीड्स। और हाँ ! विशेषज्ञ समिति द्वारा किए जा रहे प्रयास इस मायने में सर्वाधिक सराहनीय है कि भारतीय इतिहास में हुए तमाम बड़े वैज्ञानिकों की तकनीक एवं खोजों को इस अंतरराष्ट्रीय साइंस सिटी में जगह दी जाये।

 

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