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कारगिल के शहीदों की शौर्य गाथा मधेपुरा में भी गूंजी

भारतीय सैनिकों ने अपने शौर्य एवं पराक्रम के बूते भारत-पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध में विजय पताका आज (यानी 26 जुलाई) के दिन ही फहराया था। उसी कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष में स्थानीय बड़ी दुर्गा मंदिर में प्रांगण रंगकर्मी सुनीत साना, श्रीकांत राय एवं विक्की विनायक सरीखे जज्बाती देश भक्तों के नेतृत्व में शुक्रवार की शाम को बैठक आयोजित कर उन शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान उपस्थित सभी युवाओं ने कैंडल जलाकर कारगिल के शहीद सैनिकों के शौर्य को नमन किया।

बता दें कि मौके पर मधेपुरा के भीष्म पिता कहलाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार एवं सुलझे सोच के इंसान डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि स्वाधीन भारत के लिए यह एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिवस है। इसे प्रतिवर्ष 26 जुलाई को मधेपुरा के जज्बाती युवा देश प्रेमियों द्वारा मनाया जाता है।

डॉ.मधेपुरी ने कैंडल लहराते हुए अति भावुक होकर कारगिल युद्ध का संक्षिप्त इतिहास बताया तथा युवाओं से कहा कि कारगिल युद्ध हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच लगभग 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई 1999 को भारतीय सैनिकों ने जीत का परचम लहराया। तभी से प्रति वर्ष इसी दिन कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों को याद किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कारगिल कश्मीर का एक जिला है जहाँ यह युद्ध लगभग 2 महीने चला। भारतीय सैनिक 32 हज़ार फीट की ऊँचाई वाले बर्फीले  पहाड़ पर चढ़कर युद्ध में जीत हासिल करने के लिए दुस्साहस पूर्ण शौर्य का प्रदर्शन किया था तथा पाक सैनिकों को वापस भागने पर विवश कर दिया था।

मौके पर प्रांगन रंगमंच के रीढ़ सुनीत साना, विक्की विनायक, कुंदन सिंह सोनू, मिथिलेश वत्स, श्रीकांत राय, अमर कुमार, विपुल भारती, सौरभ कुमार, शानू भारद्वाज, ठाकुर विवेश, आशीष सिंह, शेखर आकाशदीप, विष्णु कुमार, आर्या रोशन, सूरज कुमार सोनू , आशीष सत्यार्थी, कुंदन कुमार सोनी, सागर कुमार, राजा कुमार, आकाश कुमार, शशि भूषण आदि ने एक स्वर से कहा कि भारतीय सैनिक हमारा गौरव है, आन-बान और शान है….. हमें उनके सम्मान में हमेशा तैयार रहना है…… तत्पर रहना है।

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बंद करें मृत्यु भोज यह सामाजिक कलंक है…. बुराई है…. अभिशाप है- डॉ.मधेपुरी

मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत सुखासन पंचायत के सरकार भवन परिसर में वरिष्ठ नागरिक सेवा संगठन के चतुर्थ स्थापना दिवस पर वृहद समारोह सह सामाजिक कुरीति से जुड़े “मृत्यु भोज का औचित्य” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस आयोजन की रीढ़ बने सिंहेश्वर प्रखंड मुखिया संघ के अध्यक्ष सह मुखिया किशोर कुमार पप्पू।

बता दें कि आयोजन के उद्घाटनकर्ता पूर्व प्रमुख उपेंद्र नारायण यादव, अध्यक्ष डॉ.शिव नारायण यादव, मुख्य वक्ता डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, विशिष्ट अतिथि प्रो.शचिंद्र, प्रो.श्यामल किशोर यादव आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का श्रीगणेश किया। आरंभ में स्कूली बच्चियों ने नृत्य के साथ स्वागत गान की प्रस्तुति दी।

सर्वप्रथम उद्घाटनकर्ता ने मृत्यु भोज को गरीब तबके के लोगों के लिए सत्यानाश बताते हुए कहा कि मृत्यु भोज के जाल में फसकर गरीब जीवन भर के लिए कर्ज के बोझ से लद जाता है। इस अंधविश्वास को मिटाने के लिए वरिष्ठ नागरिक सेवा संगठन के अध्यक्ष दुर्गानंद विश्वास, सचिव भरत चंद्र भगत एवं विश्व नशा उन्मूलन को समर्पित संत गंगादास को तत्पर देखे जाते हैं। अध्यक्षता करते हुए डॉ.शिव नारायण यादव ने समाज के सभी वर्गों से मृत्यु भोज के अपव्यय एवं व्यर्थ के आडंबर से धीरे-धीरे मुख मोड़ने की अपील की।

इस आयोजन के मुख्य वक्ता समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने अपने विस्तृत संबोधन में अध्यात्म और विज्ञान दोनों ही दृष्टिकोण से ‘मृत्यु भोज के औचित्य’ का विश्लेषण करते हुए यही कहा कि मृत्यु भोज सामाजिक कलंक है ….बुराई है….. अभिशाप है। डॉ.मधेपुरी ने बार-बार समाज को लीक से हटकर इस कुप्रथा को जड़ से समाप्त करने हेतु विचार करने को कहा। साथ ही आँखें मूंदकर अंधविश्वास के मकड़जाल में नहीं जीने के लिए लोगों से उन्होंने अपील की…. और यही कहा कि मानव-विकास के रास्ते में ऐसी गंदगी कैसे पनप गई….. यह समझ से परे है। मरने पर सगे-संबंधी भोज करें, उसमें मिठाइयाँ बांटे एवं खुद मिठाइयाँ खाएं- यह तो एक सामाजिक बुराई है जिसके खात्मा के लिए हम सभी को जागरूक होना पड़ेगा।

मौके पर प्रो.शचिंद्र, प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.शेखर कुमार, उपेंद्र रजक, शशि सिन्हा आदि ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मृत्यु भोज का परित्याग हो। इस बावत आयोजन में उपस्थित हरिप्रसाद टेकरीवाल, सोहन कुमार वर्मा, ब्रह्मदेव यादव, सुबोध शर्मा, अशोक मेहता, मोहन मिश्रा, राजेश कुमार रंजन, शिवचंद्र चौधरी, तनीक चौधरी, राहुल कुमार आदि उपस्थित जनों ने माता-पिता व श्रेष्ठ जनों की सेवा करने तथा मृत्यु भोज न करने की शपथ ली।

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मंडल विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में होगा हर्बल गार्डन का निर्माण

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में वन महोत्सव माह में जहाँ कालेजों में लगेंगे ढेर सारे पौधे और मनाये जाएंगे वृक्षारोपण सप्ताह…… वहीं विश्वविद्यालय में इस महोत्सव का आयोजन 1-15 अगस्त तक किया जाएगा। इस बाबत मंडल विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों एवं वन विभाग के अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक कुलपति डॉ.अवध किशोर राय की अध्यक्षता में हुई।

बता दें कि वन महोत्सव वह सप्ताहिक पर्व है जिसे कुलपति डॉ.के.एम.मुंशी द्वारा जनमानस के बीच “वन संरक्षण एवं पौधरोपण” के रूप में वर्ष 1950 के जुलाई माह में सर्वप्रथम आरंभ किया गया था। यह महोत्सव लोगों के बीच वनसंरक्षण एवं नये पौधरोपण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए शुरू किया गया था।

जानिये कि कुलपति डॉ.एके राय की अध्यक्षता में यह निर्णय लिया गया कि मंडल विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में एक हर्बल गार्डन का निर्माण किया जाएगा। साथ ही यह भी कि विश्वविद्यालय के अधीनस्त सारे अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों में भूमि की उपलब्धता के अनुसार पौधे लगाये जाएंगे।

इस बाबत अहम निर्णय यह लिया गया कि 1 दिन बाद विश्वविद्यालय के पदाधिकारीगण तथा वन विभाग के अधिकारीगण विश्वविद्यालय के क्षेत्रान्तर्गत विभिन्न महाविद्यालयों में संयुक्त रूप से जा-जाकर नए पौधरोपण के लिए स्थल चिन्हित करेंगे तथा विश्वविद्यालय मुख्यालय के नार्थ कैंपस में हर्बल गार्डन निर्माण हेतु कार्य योजना तैयार करेंगे।

यह भी बता दें कि लंबी चली इस बैठक में कुलपति डॉ.राय ने कोसी क्षेत्र की जैव विविधता को संरक्षित करने हेतु ठोस प्रयास करने के तहत एक कार्यशाला के आयोजन का भी सुझाव दिया जिसे DSW डॉ.शिवमुनि यादव, CCF मनोज कुमार सिंह (पूर्णिया), DFO सुनील कुमार (सुपौल), RFO पी.आर.सहाय (मधेपुरा), प्रिंसिपल डॉ.संजीव कुमार सिंह (बीएसएस कॉलेज सुपौल) सहित NSS समन्वयक डा.अभय कुमार यादव आदि ने सर्वसम्मति से हर्ष के साथ पारित किया।

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समस्त भारत को नई ऊर्जा से भर दिया है चन्द्रयान- 2

इसरो द्वारा 22 जुलाई (सोमवार 2:43 बजे दोपहर) को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से चन्द्रयान-2 की सफल लाँचिंग के गवाह बने महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा दोनों सदनों के सदस्यगण सहित समस्त भारतवासी। आज 130 करोड़ भारतीय नर-नारियों की उम्मीदों को चाँद के ऐतिहासिक सफर पर निकले चन्द्रयान-2 ने पंख लगा दिया है।

इस चंद्रयान-2 मिशन में 5 हज़ार महिला वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसरो के इतिहास में पहली बार चंद्रयान-2 मिशन में परियोजना निदेशक एवं मिशन डायरेक्टर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दो महिलाओं बी.मुथैया एवं रितु करिधाल को सौंपी गई है। सही मायने में भारत को नारी शक्ति ने ही बना दिया है अंतरिक्ष विज्ञान की हस्ती। जहाँ नासा में अबतक 15% महिलाओं ने ही ग्रहीय अभियानों में योगदान दिया है वहीं इसरो के अभियानों में लगभग 30% महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बता दें कि भारतरत्न डॉ.कलाम के करीबी रह चुके भौतिकी के प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी के अनुसार कभी इसरो-प्रमुख रह चुके गाँधीयन मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम ने 2008 में चंद्रयान-1 की लांचिंग से चन्द घंटे पहले यही कहा था-

“चन्द्रयान के जरिये चंद्रमा पर की गई खोज समस्त भारत के युवा, वैज्ञानिकों एवं बच्चों को नई ऊर्जा से भर देगी….. बाहरी दुनिया की खोज में यह चन्द्रयान-1 शुरुआत भर है”

आज इसी इसरो के वर्तमान प्रमुख एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव के.सिवन की टीम द्वारा 2020 की पहली छमाही के अंतर्गत चाँद के बाद सूरज मिशन की तैयारी आदित्य एल-1 के जरिये शुरू की जाएगी। जानिए की आदित्य एल-1 द्वारा सूरज के कोरोना यानि बाहरी परत का अध्ययन किया जाएगा जो कई हजार किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इसरो प्रमुख के.सिवन ने पिछले महीने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मधेपुरा अबतक से यही कहा था-

“सूरज का कोरोना पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर है…. जिसके बाहरी परत का अध्ययन करना इसलिए जरूरी है कि जलवायु परिवर्तन पर इसका बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। आदित्य एल-1 के जरिए कोरोना के अलावे सूर्य के बाह्यमंडल एवं वर्णमंडल के भिन्न-भिन्न प्रकार के विश्लेषणों का भी पता लगाया जा सकता है।”

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प्रबन्ध काव्य ‘सृष्टि का श्रृंगार’ का लोकार्पण

मधेपुरा की ऐतिहासिक धरोहर ‘जीवन सदन’ के सभागार में सुकवि मणिभूषण वर्मा द्वारा रचित स्वामी विवेकानंद की जीवनी पर आधारित प्रबन्ध काव्य ‘सृष्टि का श्रृंगार’ का लोकार्पण किया गया। भव्य लोकार्पण समारोह में उद्घाटनकर्ता के रूप में प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव राजेंद्र राजन, अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठतम प्राध्यापक डॉ.के.एन.ठाकुर, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, अभिषद सदस्य डॉ.रामनरेश सिंह, पीयू के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ.सुरेंद्र नारायण यादव, साहित्यकार देव नारायण पासवान देव, प्रिंसिपल डॉ.अशोक कुमार आलोक, प्राचार्य श्यामल किशोर यादव एवं सिद्धहस्त मंच संचालक डॉ.के.के.चौधरी आदि ने संयुक्त रूप से ‘सृष्टि का श्रृंगार’ का लोकार्पण किया और किया दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ।

बता दें कि सर्वप्रथम कोसी के स्थापित गीतकार व संगीतकार प्रो.अरुण कुमार बच्चन एवं प्रो.रीता कुमारी द्वारा प्रबन्ध काव्य की पंक्तियों को लयबद्ध कर सुरुचिपूर्ण स्वर के साथ सुधी श्रोताओं के बीच परोसी गयी। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अतिथियों का भरपूर सम्मान मंच की ओर से किया गया। स्वागत भाषण प्रवीण कुमार ने दिया।

मौके पर ‘सृष्टि का श्रृंगार’ पुस्तक की महत्ता पर विस्तार से चर्चा करते हुए रचयिता प्रो.मणिभूषण वर्मा ने कहा कि आज हिन्दी अपने सर्वोच्च शिखर को छू रही है। जहाँ डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप ने इस कृति के बाबत यही कहा कि इसमें राग और विराग, कर्म और सन्यास तथा काम और आध्यात्म का समन्वय है वहीं डॉ.विनय कुमार चौधरी ने इस कृति को मधेपुरा की सबसे बड़ी उपलब्धि कहा तथा पुस्तक में वर्णित विवेकानंद के चरित्र को नए विवेकानंद अर्थात युगीन विवेकानंद बताया।

उद्घाटन व लोकार्पण करने के बाद प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव राजेंद्र राजन ने अपनेे विस्तृत संबोधन में यही कहा कि स्वामी विवेकानंद के जीवन से हमें सीख लेने की जरूरत है तभी भारतीय युवाओं के अंदर नित नई-नई ऊर्जा का संचार होगा। श्री राजन ने कहा कि अपनी प्रतिभा, पौरुष व पुरुषार्थ के बल पर स्वामी विवेकानंद ने हमेशा भारत की गरिमा को देश और दुनिया में ऊँचाई देने का काम किया है।

जहाँ डॉ.सुरेंद्र नारायण यादव ने लोकार्पित पुस्तक के विभिन्न पक्षों को व्याख्यायित करते हुए इसे हिन्दी साहित्य जगत की विशिष्ट उपलब्धि करार दिया, वहीं डॉ.देव नारायण पासवान देव ने यही कहा कि यह कृति महाकाल, राग भैरव और प्रेम का समन्वय है।

यह भी जानिए की अध्यक्षता कर रहे डॉ.के.एन. ठाकुर सहित प्राचार्य डॉ.ए.के.आलोक व प्रो.श्यामल किशोर यादव एवं डॉ.रामनरेश सिंह व प्रो.शचिंद्र ने भी जहाँ इस कृति के प्रति उद्गार व्यक्त किया वहीं समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने धन्यवाद देने के क्रम में कौशिकी के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ सहित उनके गुरु परमेश्वरी प्रसाद मंडल दिवाकर एवं इंदुबाला सिन्हा व तारकेश्वर सिन्हा आदि को मणिभूषण वर्मा का मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि लगभग 30 वर्षों से सुकवि मणिभूषण वर्मा की साहित्यिक प्रतिभा की गहराई को जानने के बाद से वे भी उन्हें निरंतर उत्साहित एवं प्रोत्साहित करते रहे हैं। डॉ.मधेपुरी ने सुकवि वर्मा को इस धरती का सफल शिक्षक, साहित्य साधक व सुकवि बताया। अतिथियों सहित मधेपुरा का नाम रोशन करने वाली बेटियों प्रो.रीता कुमारी, अधिवक्ता संध्या कुमारी, श्वेता कुमारी, प्रो.गणेश प्रसाद यादव, प्रो.शंभू शरण भारतीय, दशरथ प्रसाद सिंह, सुपौल से आए विश्वकर्मा जी, डॉ.अरविंद, डॉ.आलोक आदि को धन्यवाद देते हुए डॉ.मधेपुरी ने कहा कि चन्द पंक्तियाँ ही किसी कवि को अविस्मरणीय बना देती हैं….. वैसी ही हैं- “सृष्टि का श्रृंगार”  की ये पंक्तियाँ-

कितना भी हो तमस-जाल आलोक निकल आता है।

अंधकार को चीर धरा को उज्ज्व्ल कर जाता है।।

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बिहार के 40वें महामहिम राज्यपाल बने फागू चौहान

चार नये गवर्नर के पदस्थापन और दो के स्थानांतरण की विज्ञप्ति जारी हुई राष्ट्रपति भवन से। जिन चारों राज्यों में नये राज्यपालों की नियुक्तियाँ की गई, वे हैं – बिहार, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और नागालैंड।

बता दें कि जहाँ बिहार के 40वें राज्यपाल बनेंगे पिछड़ों के शीर्ष नेताओं में गिने जाने वाले 71 वर्षीय फागू चौहान, वहीं पश्चिम बंगाल के गवर्नर नियुक्त किये गये हैं हरियाणा के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील 68 वर्षीय जगदीप धनकड़।

यह भी बता दें कि जहाँ त्रिपुरा के राज्यपाल बनाये गये पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश बैस, वहीं नागालैंड का गवर्नर बनाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा उप सलाहकार आर.एन.रवि।

यह भी जानिए कि बिहार में बतौर 331 दिन गवर्नर रहकर जिनने कई बड़ी लकीरें खींची उसी लालजी टंडन का स्थानांतरण मध्य प्रदेश किया गया हैं….. जहाँ की राज्यपाल 77 वर्षीय आनंदी बेन पटेल को उत्तर प्रदेश के गवर्नर की जिम्मेदारी दी गई है।

नई पहल जो लालजी टंडन ने अपने सालभर से भी कम कार्यकाल में की , वे हैं- (1) राजभवन में संविधान दिवस का आयोजन (2) शंकराचार्य व मंडन मिश्र की तर्ज पर शास्त्रार्थ का आयोजन (3) राजभवन में उद्यान प्रदर्शनी का आयोजन (4) विश्वविद्यालयों को गाँवों को गोद लेने के लिए प्रेरित करना (5) संगीतज्ञों को सम्मान दिलाने की पहल और (6) चांसलर्स अवार्ड की शुरुआत की पहल….. जो प्रक्रियाधीन है।

अब देखना यह है कि यूपी के मऊ जनपद की घोसी विधान सभा सीट पर विभिन्न पार्टियों से 6 बार विधायक रह चुके तथा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन रह चुके फागू चौहान बिहार जैसे पिछड़े परंतु विकासोन्नमुखी राज्य के व्यापक सुधार हेतु क्या-क्या करते हैं……..?

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मैं भी पिछले जन्म में बिहारी था- ऋतिक रोशन

एक ओर जहाँ सुपर-30 के आनंद कुमार को इस सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने KBC के स्पेशल एपिसोड में बुलाकर 25 लाख जीतने का अवसर प्रदान किया वहीं दूसरी ओर बॉलीवुड के महान नायक ऋतिक रोशन ने गणितज्ञ आनंद कुमार पर सुपर-30 फिल्म बनाकर आनंद के जीवन के एक-एक पल को बखूबी जिया और किरदार भी निभाया। यह सुपर-30 फिल्म ऐसी बनी कि एक साथ दर्जनों जगहों पर चली और पहले ही दिन लगभग 11 करोड़ की कमाई की।

बता दें कि जितने भी लोग फिल्म देखने के बाद आनंद से मिले सबों ने यही कहा कि आनंद सर में और ऋतिक रोशन में कोई अंतर नहीं पाया…. वहीं ऋतिक जब आनंद सर से मिले तो पहले उनका पैर छूकर आशीर्वाद लिया और पुनः ऋतिक ने आनंद सर के भाई प्रणव से यही कहा-

अभी तक मैने वो काम किया है जो आनंद सर करते आ रहे हैं….. अब आनंद सर वो काम करें जो मैं करता आ रहा हूँ- इसी वार्तालाप के साथ दोनों ने “एक पल का जीना” गाने का सिग्नेचर स्टेप डांस शुरू कर दिया।

यह भी कि जहाँ बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने ऋतिक रोशन से मुलाकात के क्रम में फिल्म में जीवंत किरदार निभाने के लिए साधुवाद दिया वहीं ऋतिक ने इस फिल्म को Tax Free घोषित कर छात्रों में फिल्म देखने की ललक बढ़ाने हेतु सीएम नीतीश कुमार को हृदय से बधाई दी।

Anand Kumar is being honoured by Dr.Bhupendra Madhepuri, VC Dr.A.K.Ray, DM Navdeep Shukla at BN Mandal auditorium during his visit.
Anand Kumar is being honoured by Dr.Bhupendra Madhepuri, VC Dr.AK Ray, DM Navdeep Shukla at BN Mandal auditorium during his recent visit.

चलते-चलते बता दें कि गुरु पूर्णिमा के दिन ऋतिक ने आनंद सर के गुरुओं का जमकर सम्मान किया इसलिए कि आनंद ने शिक्षा के क्षेत्र में सपरिवार अपना बहुमूल्य योगदान देकर बिहार को गौरवान्वित किया है। चंद महीने कबल बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के ऑडिटोरियम में आनंद कुमार ने छात्रों की भारी भीड़ को संबोधित किया था। उस अवसर पर डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उन्हें डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पर लिखी अपनी पुस्तक “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” भेंट की थी तथा कुलपति डॉ.एके राय, डीएम नवदीप शुक्ला (आईएएस) एवं डॉ.मधेपुरी  आदि द्वारा “बाबा सिंहेश्वर धाम” का प्रतीक चिन्ह सम्मिलित रूप से ससम्मान हस्तगत कराया गया था।

अंत में यह भी कि किसी व्यक्ति के जीवन काल में ही उसके कृतित्व पर फिल्म बने, लोग देखे और सराहे…. ऐसा बिरले होता है…..। जब ऋतिक ने सुपर-30 के बच्चों में सादगी और इंटेलिजेंस के साथ-साथ पैशन व टैलेंट देखा तो सर्वाधिक भावुक होकर बोले….. मैं भी पिछले जन्म में बिहारी था।

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‘एमी’ की कहानी

बिना हाथ-पैर की पैदा हुई एमी से उसके माता-पिता ने तुरंत अपना संबंध विच्छेद कर लिया और जिस अस्पताल में एमी जन्म ग्रहण की थी उस अस्पताल के स्टाफ से कहा कि एमी को एक कमरे में बंद कर दें और खाने-पीने के लिए कुछ नहीं दें….. ऐसे भी होते हैं माँ-बाप !

बता दें कि आज की तारीख में एमी 37 वर्ष की है। वह जीवन से निराश सभी हाथ-पैर वालों के बीच जाकर…… मोटिवेशनल स्पीकर बन…. लोगों को हमेशा प्रेरित करती है। एमी क्या नहीं करती है….. ये वो सब कर लेती है जिसे सेल्फ-डिपेंडेंट कहा जाता है।

जानिए कि जब एमी को उसके अपने माता-पिता ने छोड़ दिया था तब किसी संवेदनशील परिवार ने उसे गोद ले लिया। एमी बड़ी होने पर अपनी शारीरिक कमजोरी को ही अपनी ताकत बना लिया और आज वह अपना यूट्यूब चैनल “हाउ इज शी डू इट” भी चलाती है।

यह भी बता दें कि एमी कुकिंग से लेकर सिलाई तथा फोटोग्राफी से लेकर डिजाइनिंग तक कर रही है। वह अपने मुंह, ठोढ़ी और कंधे की मदद से तस्वीरें भी खींचती है। एमी खुद की वीडियो भी बनाती है जिस पर लोग हर तरह के कमेंट करते हैं। परंतु, वह सिर्फ पॉजिटिव कमेंटस पर ही ध्यान देती है। नेगेटिव कमेंट पर ध्यान देने को एमी समय की बर्बादी मानती है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि एमी सिलाई सीखने को अपने सबसे बड़ी उपलब्धि मानती है। एमी हैंडबैग बनाकर ऑनलाइन बेचती है। वह अपने वर्तमान पेरेंट्स को गॉडफादर मानती है जो उसे कभी एहसास तक नहीं होने दिया की वह किसी से कम है।

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शिक्षा सामाजिक उन्नयन को गति प्रदान करती है- वीसी

शिक्षा से समृद्धि….. समृद्धि से संस्कार और संस्कार से मिलती है शांति। यही शांति हमें विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है। यही कारण है कि जहाँ शिक्षा है वहाँ का समाज उन्नति के शिखर तक पहुंच गया है। शिक्षा से ही सुधरती है समाज की दशा। शिक्षा सदैव सामाजिक उन्नयन को गति प्रदान करती है- ये बातें भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अवध किशोर राय ने ओपन विंग फाउंडेशन द्वारा आयोजित शिक्षक मुरलीधर की 70 वीं जयंती के अवसर पर कही।

इस अवसर पर कुलपति डॉ.ए.के.राय, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, लोकप्रिय चिकित्सक डॉ अरुण कुमार मंडल, डॉ.अमोल राय, डॉ.शांति यादव, डॉ.विनय कुमार चौधरी , डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ.निशांत आदि द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया | तुरंत बाद अतिथियों का स्वागत, शिक्षक मुरली बाबू की तस्वीर पर पुष्पांजलि और संक्षिप्त जीवन वृत्त के साथ डॉ.शांति यादव की रचना काव्य-संग्रह “जनसेवा एक्सप्रेस” का लोकार्पण भी संयुक्त रूप से किया गया।

बता दें कि “मधेपुरा कल आज और कल” पर आधारित संगोष्ठी में विषय प्रवेश किया डॉ.अमोल राय ने। इस विषय पर विस्तार से विचार रखा डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ.आलोक कुमार, प्रो.शचीन्द्र, डॉ.प्रज्ञा प्रसाद, डॉ.वंदना कुमारी, डॉ.चंद्रिका यादव, डॉ.रंजना कुमारी, डॉ.विश्वनाथ विवेका आदि ने।

इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने रास बिहारी लाल मंडल, शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, बीपी मंडल , जस्टिस एस.सी.मुखर्जी, जस्टिस आर.पी.मंडल आदि को संदर्भित करते हुए शिक्षा के प्रति उनके समर्पण की भरपूर चर्चा की और आज की तारीख में बेपटरी हो रही शिक्षा के बाबत यही कहा कि यदि कुलपति डॉ.एके राय को स्थानीय शिक्षाविदों का भरपूर सहयोग मिले तो आगे आने वाले दिनों में मधेपुरा पुनः अपनी खोई हुई गरिमा को प्राप्त करेगा और शिक्षा तेज गति से पटरी पर दौड़ने लगेगी।

जानिए कि समारोह की अध्यक्षता करते हुए फाउंडेशन की संरक्षक डॉ.शांति यादव ने कविता संग्रह की उपादेयता पर प्रकाश डाला। पाँच प्रतिभा संपन्न मेधावी छात्र-छात्रा रिशु कुमारी, केशव वासुदेव, संजय कुमार, सुरभि भगत सहित संगीत के शिखर पर विराजमान रोशन कुमार को डॉ.मुरलीधर मेमोरियल सम्मान से सम्मानित किया कुलपति डॉ.एके राय ने। अंत में फाउंडेशन के सचिव डॉ.नीरव निशांत ने शिक्षा सहित अन्य क्षेत्रों में बेटियों के योगदान की चर्चा करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।

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नेपाल में मानसून की सक्रियता के चलते बिहार में बाढ़ का कहर

बिहार राज्य की सीमा नेपाल से सटे होने के कारण बिहार का बाढ़ प्रभावित होना स्वाभाविक है | नेपाल में 24 घंटे में 311 मि.मी. बारिश हुई है तभी तो कोसी हुई विकराल….. सीमांचल के ढेर सारे गाँव हुए जलमग्न और पलायन शुरू |

बता दें कि बिहार के 9 जिले…..(शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, अररिया, किशनगंज, सुपौल, दरभंगा और मुजफ्फरपुर ) के लगभग 20 लाख लोग बाढ़ की चपेट में है | उत्तर बिहार की नदियों में जबरदस्त उफान आ गया है | कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है |

यह भी बता दें कि दरभंगा में कमला बलान तथा शिवहर में बागमती नदी का तटबंध कई स्थानों पर टूट गया है | लोगों के साथ-साथ जानवरों को भी भारी तबाही हो रही है | कोसी के जलस्तर में सर्वाधिक वृद्धि होने से अररिया के पांच प्रखंडों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट चुका है | अबतक बिहार में दर्जनों लोगों की जानें जा चुकी हैं |

यह भी जानिए कि इस भयावह स्थिति को कंट्रोल करने के लिए कदाचित पहली बार छप्पनों (56) फाटक (शनिवार रात 10:30 बजे से रविवार सुबह 6:00 बजे तक) खोल दिये गये | इसके बाद धीरे-धीरे 26 फाटकों को बन्द कर दिया गया….. बैरेज के 30 फाटक अभी भी खुले हैं |

सूबे बिहार के अति संवेदनशील सीएम नीतीश कुमार ने बाढ़ के मसलों पर एक हाई लेवल मीटिंग की और तुरंत हेलीकॉप्टर से दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी व मोतिहारी में बाढ़ से संघर्ष कर रहे लोगों की स्थिति का जायजा लेने हेतु हवाई सर्वेक्षण किया | बाढ़ की विभीषिका को देखकर मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्य तेज करने, राहत कैंप लगाने तथा कम्युनिटी किचेन की व्यवस्था करने को कहा |

चलते-चलते यह भी बता दें कि सीएम ने उच्चाधिकारियों से आदमी व पशुओं की दवा से लेकर पर्याप्त मात्रा में चारा का भी इंतजाम करने को कहा | साथ ही कम्युनिटी कैंप के भोजन की गुणवत्ता के साथ-साथ साफ-सफाई पर भी ध्यान दिये जाने की बात कही | सीएम ने राहत व बचाव हेतु एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीम तैनात रखने को कहा जो अपनी ड्यूटी के प्रति हमेशा चौकन्ना रहे |

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