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हॉकी सम्राट ध्यानचंद की जयंती पर क्रिकेट एवं अन्य खिलाड़ियों को किया गया पुरस्कृत

आज बीपी मंडल इंडोर स्टेडियम में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के 115वीं जन्म जयंती पर मधेपुरा नेहरू युवा केन्द्र द्वारा खेलकूद से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन जिला खेल पदाधिकारी सच्चिदानंद, एनवाइसी समन्वयक अजय कुमार गुप्ता एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार के संयुक्त नेतृत्व में किया गया। सर्वप्रथम प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छ भारत के बाद ‘स्वस्थ भारत अभियान’ के तहत राष्ट्रीय खेल दिवस पर देश के खिलाड़ियों एवं नर-नारियों के लिए दिये गये प्रसारण “फिट होगा इंडिया तो हिट होगा इंडिया” को सबों ने सुना।

Dr.Madhepuri addressing players at BP Mandal Indoor Stadium.
Dr.Madhepuri addressing players at BP Mandal Indoor Stadium.

बता दें कि खिलाड़ियों को मेजर ध्यानचंद की जयंती पर सम्मानित करते हुए मुख्य अतिथि के रुप में समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि जब देश गुलाम था तब हाॅकी के इस जादूगर ध्यानचंद ने 4 वर्षों पर होने वाले ओलंपिक खेल में वर्ष 1928, 1932 एवं 1936 में गोल्ड मेडल जीतकर भारत को हॉकी विश्व गुरु का सम्मान दिलाया था। डॉ.मधेपुरी ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि यह कितनी बड़ी विडंबना है कि जिसने भारत को दुनिया में गौरवान्वित किया, भारत के उस रत्न को आज तक भारतरत्न सरीखे सम्मान से वंचित रखा जा रहा है…… क्या यही समुचित न्याय है ?

इस अवसर पर भौतिकी के विद्वान डॉ.मधेपुरी ने भौतिकी के प्रोफेसर व वैज्ञानिक डॉ.होमी जहांगीर भाभा को संदर्भित करते हुए अवरुद्ध कंठ से कहा कि जिस भाभा ने एशिया का पहला परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थापित कर भारत को “परमाणु युग” के शीर्ष तक ले गया….. तथा फादर ऑफ न्यूक्लियर पावर कहलाने वाला वह वैज्ञानिक डॉ.भाभा “Atom for Peace” के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करने हेतु जेनेवा जाने के क्रम में 24 जनवरी 1966 को कालकलवित हो गया…… आजतक भारत के वैसे रत्न को भी भारतरत्न हम सबों का भारत नहीं दे सका, जिसके लिए उन्होंने सर्वस्व निछावर कर दिया।

चलते-चलते यह भी बता दें कि आज ध्यानचंद जयंती पर बीपी मंडल स्टेडियम में मधेपुरा एवं खगड़िया जिला क्रिकेट टीमों के बीच एकदिवसीय मैच का शुभारंभ अध्यक्ष मुन्ना बाबू, जिला खेलकूद पदाधिकारी ध्यानी यादव, संतोष कुमार झा, अरुण कुमार आदि द्वारा किया गया जिसमें जीत मधेपुरा टीम की हुई। डॉ.मधेपुरी ने दोनों टीमों के खिलाड़ियों से यही कहा-

न हारना और….. न जीतना जरूरी है।

जीवन खुद खेल है, खेलना जरूरी है।।

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इस तरह कलक्टर आशीष सक्सेना बने उच्च कोटि के समाज सुधारक

वर्तमान में आशीष सक्सेना (IAS) बतौर अपर आयुक्त, नगरीय प्रशासन व विकास संचनालय, भोपाल (मध्य प्रदेश) में कार्यरत हैं | मध्यप्रदेश के झाबुआ में दहेज प्रथा पर अंकुश लगाने वाले तत्कालीन कलक्टर आशीष सक्सेना कुशल प्रशासक ही नहीं सर्वाधिक संवेदनशील हृदय के व्यक्ति हैं |

बता दें कि झाबुआ क्षेत्र में ‘वधू मूल्य प्रथा’ का चलन जोरों पर था  | वधू मूल्य प्रथा में होता यही है कि वर पक्ष लड़की के पिता को अच्छी खासी राशि देता है और लड़की के पिता राशि के लालच में कम उम्र में ही बेटी की शादी तय कर देता है | वर्षों पुरानी इस कुरीति से झाबुआ का समाज ग्रसित होता चला आ रहा था |

कलेक्टर आशीष बताते हैं कि झाबुआ की एक 13 वर्षीय रेखा नाम की आदिवासी लड़की की पीड़ा ने उनके संवेदनशील हृदय को इस कदर परेशान कर दिया कि उन्होंने अपने 28 महीने (सितंबर 2016 से दिसंबर 2018) तक के कार्यकाल में इस दहेज दापा के कलंक से हजारों-हजार बालिकाओं को मुक्ति दिलाने का सराहनीय काम कर दिखाया |

जानिए कि यह सब हो कैसे गया ? वह 13 वर्षीय रेखा भूरिया जब तमिलनाडु में आयोजित “राष्ट्रीय योग प्रतियोगिता” में पदक जीतकर लौटी और अपने प्रशिक्षक के साथ वह कलेक्टर आशीष सक्सेना से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंची तो सक्सेना ने रेखा से उसके भविष्य के बारे में कुछ बातें की और उसी दरमियान आशीष ने जब यह पूछा कि बड़ी होकर तुम क्या बनना चाहती हो ….. यह सुनते ही रेखा की आंखें डबडबा गईं |

खामोशी को तोड़ते हुए रेखा के प्रशिक्षक जितेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि इसकी शादी उसके पिताजी द्वारा तय कर दी गई है….. इसलिए वह दुखी है | कलक्टर आशीष रेखा के परिजनों से मिलकर उसकी शादी के शगुन के रूप में पिता ने जो राशि वर पक्ष से ली थी वह लौटाने के लिए उन्हें राजी कर लिया | रेखा को छात्रावास में भर्ती करवाया गया और उसने आगे की पढ़ाई शुरू कर दी | बस यहीं से कलेक्टर आशीष सक्सेना ने दहेज दफा के खिलाफ कमर कस ली |

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बी.पी.मंडल के 101वीं राजकीय जयंती समारोह पर लगा ब्रेक, लोगों ने मनाई जयंती

मंडल कमीशन के अध्यक्ष बी.पी.मंडल की 101वीं जयंती के मौके पर उनके पैतृक गाँव मुरहो में कोसी के विद्वतजनों, राजनीतिक महकमों के कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों ने समारोहपूर्वक जयंती मनाई। भला क्यों न मनाते…… सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े समाज के मजबूत स्तंभ थे बीपी मंडल। गरीबों एवं दलितों के नेता थे बीपी मंडल।

बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री रह चुके अरुण जेटली के निधन के फलस्वरूप दो दिवसीय राजकीय शोक (24-25 अगस्त) के कारण बी.पी.मंडल के 101 वीं राजकीय जयंती समारोह पर ब्रेक लग गया।

इस अवसर पर उनके पैतृक गाँव मुरहो स्थित उनकी समाधि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विस्तृत संबोधन में डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि 1 वर्ष 8 महीना 22 दिनों तक कश्मीर से कन्याकुमारी एवं राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक घड़ी की सूई की तरह चलते रहने वाले बीपी मंडल द्वारा समर्पित रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन पीएम बीपी सिंह के द्वारा इस रिपोर्ट को लागू किया गया…..  पिछड़ों को 27% आरक्षण का लाभ दिया गया….. जिसके फलस्वरूप देश के सभी धर्मों के 3743 जातियों के उपेक्षित लोगों को मंडल आयोग का लाभ मिला।

मौके पर पूर्व विधायक मणीन्द्र कुमार मंडल उर्फ ओमबाबू, प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.अरुण कुमार मंडल, डॉ.शान्ति यादव, आनंद मंडल, जदयू अध्यक्ष प्रो.बिजेन्द्र नारायण यादव, प्रो.सुजीत मेहता, डॉ.आलोक कुमार, नरेश पासवान , अशोक चौधरी, प्रो.नारायण प्रसाद यादव, डॉ.नीलाकांत, डॉ.नीरज कुमार, महानंद ठाकुर, शौकत अली , छठू ऋषिदेव, उमेश ऋषिदेव, सरोजिनी देवी, मुर्तुजा अली, शशि कुमार, वीरेंद्र सिंह, भानु प्रताप मंडल आदि ने कहा कि मंडल के आदर्शों पर चलकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो.श्यामल किशोर यादव ने की। अध्यक्ष श्री यादव ने कहा कि ग्रामीणों व अतिथियों की भारी संख्या में उपस्थिति इस बात का सबूत है कि अभी भी लोगों के दिलों में मंडल जी के लिए अगाध प्रेम है।

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पूर्व सांसद व शिक्षा मंत्री रह चुके डॉ.महावीर के नाम बॉटनिकल गार्डन बनाने की स्वीकृति दी सिंडिकेट ने

मधेपुरा के सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक व प्रखर राजनीतिक गतिविधियों में अपनी भागीदारी निभाने के साथ-साथ शैक्षिक जगत में परचम लहराने वाले डॉ.महावीर प्रसाद यादव के नाम भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस स्थित विज्ञान भवन के पीछे खाली पड़ी भूमि पर उनके पुत्र डॉ.अरुण कुमार (विभागाध्यक्ष, स्नातकोत्तर जन्तु विभाग, बीएनएमयू) द्वारा दिये गये “डॉ.महावीर बॉटनिकल गार्डन व पार्क” बनाने के प्रस्ताव को सिंडिकेट द्वारा सर्वसम्मति से गत बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई ।

बता दें कि टी.पी.कॉलेज के विश्वकर्मा कहे जाने वाले प्राचार्य डॉ.महावीर प्रसाद यादव भिन्न-भिन्न रूपों में मधेपुरा की सेवा करते रहे। डॉ.यादव यहीं से विधायक बनकर राज्य शिक्षा मंत्री बने…… सांसद रहे और दो-दो विश्वविद्यालयों के प्रतिकुलपति और अंत में बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर सेवारत रहते हुए मधेपुरा को अलविदा कह दिये। ताजिंदगी प्राचार्य डॉ.महावीर बाबू छात्रों एवं उनके अभिभावकों से यही कहते रहे कि भोज-भगैत-भंडारा आदि से रिश्ता तोड़ो और शिक्षा से नाता जोड़ो।

ऐसे समाजसेवी-शिक्षाविद् डॉ.महावीर प्रसाद यादव के नाम पर बॉटनिकल गार्डन व पार्क निर्माण के बाबत सिंडिकेट द्वारा दी गई स्वीकृति पर उनके निकटतम सहकर्मी प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने यही कहा कि ऐसे शिक्षाविद डॉ.महावीर बाबू की स्मृति को कायम रखने हेतु कुलपति डॉ.ए.के.राय व उनकी पूरी टीम सहित सिंडिकेट के सभी सदस्य साधुवाद के पात्र हैं।

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कला संस्कृति युवा विभाग द्वारा जिलास्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ

मधेपुरा के मनभावन कीर्ति नारायण मंडल क्रीड़़ा मैदान, जिसे खेल को समर्पित संत कुमार और अरुण कुमार द्वारा दुल्हन की तरह सजाया गया, में त्रिदिवसीय जिला स्तरीय विद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता (2019-20) का शानदार शुभारंभ किया गया। जिला स्तरीय इस खेलकूद प्रतियोगिता का उद्घाटन सदर एसडीएम वृंदालाल, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, डीईओ उग्रेश प्रसाद मंडल, उपाध्यक्ष शारीरिक शिक्षा सच्चिदानंद झा, मंडल विश्वविद्यालय क्रीड़ा विभाग के सचिव डॉ.ए.फजल, उपसचिव डॉ.शिवशंकर मिश्र आदि ने संयुक्त रूप से मशाल जलाकर किया।

बता दें कि इस त्रिदिवसीय खेलकूद प्रतियोगिता में जहाँ बालक-बालिका (अंडर-14 से लेकर अंडर-19 तक) द्वारा खो-खो, वाॅलीबाल, कुश्ती, रग्बी जैसे खेल में जोर आजमाए जाएंगे संतअवध कीर्ति मैदान में, वहीं कराटे, ताइक्वांडो एवं बुशु प्रतियोगिता में भाग लेने जायेंगे बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम में। इसके अलावे संत कुमार व अरुण कुमार द्वारा उद्घोषित कार्यक्रम के अनुसार बैडमिंटन, फुटबॉल, हैंडबॉल, कबड्डी एवं क्रिकेट आदि का आयोजन किया जाएगा।

Athletes at Kirti Narayan Mandal Krida Maidan, Madhepura.
Athletes at Kirti Narayan Mandal Krida Maidan, Madhepura.

यह भी बता दें कि वन महोत्सव के तहत सभी आगत अतिथियों द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया एवं तत्पश्चात स्वागत गान, स्वागत भाषण एवं अंगवस्त्रम व मोमेंटो आदि प्रदान कर अतिथियों का भरपूर स्वागत किया गया…… उपस्थित खेल प्रेमियों डॉ.वंदना कुमारी, डॉ.किशोर कुमार, मानव कुमार सिंह, रूपेश कुमार, अनिल राज, कंचन कुमार कुंज, राजू-अमित-दिलीप आदि द्वारा।

इस अवसर पर जहाँ एसडीएम वृंदालाल ने खेल को प्रोत्साहन देने हेतु कीर्ति नारायण मंडल के नाम से स्टेडियम के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी यूपी मंडल ने खेल के साथ पढ़ाई को भी आवश्यक बताया। साथ ही अतिथिगण एसएन झा, डॉ.ए.फजल, डॉ.एसके मिश्र आदि ने अपने संबोधन में प्रतिभागियों को खूब प्रोत्साहित किया।

अंत में मधेपुरा के अभिभावक माने जाने वाले समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कीर्ति क्रीड़ा मैदान में उपस्थित अतिथियों एवं खिलाड़ियों को शुभाशीष देते हुए यही कहा-

न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धा,

न तो वृद्ध ये न वदन्ति धर्मम्।

यानि वह सभा नहीं है जहाँ वृद्ध पुरुष न हों और वे वृद्ध नहीं हैं जो धर्म की बात न बतावें……..। यहाँ उन्होंने यही कहा कि भारतीय रेल और भारतीय खेल विकास की गाड़ी के दो ऐसे पहिए हैं जो विकास को गति देने के साथ-साथ भारत की एकता एवं अखंडता को जहाँ बल प्रदान करता है, वहीं जातियों व संप्रदायों के बीच की दीवारों को कमजोर करने में सदा लगा रहता है। डॉ.मधेपुरी ने प्रतिभागियों से कहा कि खेल में कोई हारता नहीं है…… जीतता वही है जिसके अंतर्मन का संकल्प बलवान होता है।

चलते-चलते बता दें कि जहाँ एथलेटिक्स अंडर-14 बालक वर्ग के 600 मीटर में दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल, डॉ.मधेपुरी मार्ग, वार्ड नं.-1, मधेपुरा के अवनीश कुमार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया वहीं मध्य विद्यालय मिठाई के रितेश कुमार एवं मध्य विद्यालय महेशपुर के प्रशांत कुमार द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहे……!

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स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय में समारोह पूर्वक मनाई गई 10वीं वर्षगांठ

स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय में मधेपुरा के अभिभावक व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, बीएनएमयू के डॉ.एचएलएस जौहरी, डॉ.एम आई रहमान, डॉ.फजल, डॉ.शंकर कुमार मिश्र, डॉ.अशोक कुमार व संगीत को ऊँचाई देने वाली प्रो.रीता कुमारी, प्रो.अरुण कुमार बच्चन, डॉ.रवि रंजन सहित निर्देशिका डॉ.हेमा कश्यप ने महाविद्यालय की दसवीं वर्षगांठ पर 18 अगस्त को आयोजित भव्य समारोह का श्रीगणेश संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके साथ ही स्वागत गान के अलावे अंगवस्त्रम, पुष्पगुच्छ  व मोमेंटो आदि से अतिथियों का भरपूर सत्कार किया गया।

Dr.Bhupendra Madhepuri addressing at Swar Sobhita Sangeet Mahavidyalaya.
Dr.Bhupendra Madhepuri addressing at Swar Sobhita Sangeet Mahavidyalaya.

बता दें कि इस स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय के कण-कण में कलात्मकता की खुशबू निकलने का एहसास अतिथियों द्वारा महसूस किया जाता रहा तभी तो डॉ.मधेपुरी ने संगीत व कला को ऊँचाई प्रदान करने वाली निर्देशिका डॉ.हेमा को आगे बढ़ते रहने का शुभ आशीष देते हुए विशाल प्रशाल में उपस्थित कला-प्रेमी बच्चों एवं उनके अभिभावकों व सुधी श्रोताओं से यही कहा-

साहित्य संगीत कला विहीन:, साक्षात पशु पुच्छ विश्रहीनः डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि साहित्य यदि समाज का दर्पण है तो कला उसकी धड़कन है। संगीत ऐसी कला है जो मन की चिंता, शोक, खेद व व्यथा को हरण कर लेती है। जितने भी बड़े-बड़े वैज्ञानिक हुए हैं वे भी संगीत से जुड़े रहे हैं….. यहाँ तक कि मिसाइल मैन भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम भी वाद्य वीणा बजाते थे और श्रीराम राग में गाते व गुनगुनाते थे।

Dr.Madhepuri & Principal Dr.Hema Kashyap amidst kids.
Dr.Madhepuri & Principal Dr.Hema Kashyap amidst kids.

यह भी बता दें कि डॉ.एचएलएस जौहरी की अध्यक्षता में आयोजित- चित्रकला, हस्तकला, भाषण, लेखन सहित नृत्य व मेहंदी आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से डॉ.रहमान, डॉ.फजल, डॉ.अशोक, डॉ.शंकर सहित अन्य अतिथियों ने विस्तार पूर्वक प्रोत्साहित करते हुए यही कहा कि प्रतियोगिता से बच्चों की प्रतिभा में निखार आती है….. अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ.जौहरी ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं बराबर आयोजित होती रहनी चाहिए।

अंत में निदेशिका डॉ.हेमा कश्यप ने आगामी 1 सितंबर 2019 को समापन समारोह में पुरस्कार वितरण करने की सूचना देते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। मंच संचालनकर्ता अरुण कुमार ने अध्यक्ष की सहमति से उद्घाटन कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

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कुसहा त्रासदी के 11वें वर्ष पूरा होने पर 150 गाँवों में किया जाएगा संवाद

वर्ष 2008 के 18 अगस्त को कुसहा में कोसी का बांध टूटा। जन जीवन तबाह हो गया। कितने गाँव और घर सहित गृहपति जल समाधि ले लिए। 11 वर्ष गुजर गये। कुसहा त्रासदी के जख्म आज तक भरे नहीं, बल्कि आज भी हरे हैं।

बता दें कि न तो कुसहा के दोषियों को सजा मिली और ना कोसी की समस्याओं का निराकरण के कोई ठोस उपाय ढूंढें गये। तब के राहत से लेकर अब तक के पुनर्वास का लाभ सभी पीड़ितों को नहीं मिल पाया है। जिसके लिए आज तक कोसी नवनिर्माण मंच के संचालक महेन्द्र यादव एड़ी चोटी एक कर रहे हैं…… वे 50% पीड़ितों को ही पुनर्वास का लाभ दिलाने में सफल हुए हैं। आज भी कितनी टूटी हुई सड़कें और टूटे हुए पुल निर्माण कार्य की बाट जोह रहे हैं।

इस अवसर पर मयंक सभागार में मुख्य अतिथि के रूप में मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने संबोधन में मधेपुरा-सहरसा-सुपौल तीनों जिले से आए मंच के कार्यकर्ताओं से कहा कि कुसहा त्रासदी से पूर्णरूपेण निपटने के लिए आज की तारीख में मजबूत जन संगठन निर्माण करने के साथ-साथ जन आंदोलन खड़ा करना भी मौजूदा समय की मुकम्मल जरूरत है। आगे उन्होंने कहा कि यह कैसे होगा जबकि यहाँ के लोग वृक्ष के हरे पत्ते भी खाकर गुजारा करना पसंद करते रहेंगे ?

डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि सरकारी महकमे में एमएलए, एमपी-लोकसभा, राज्यसभा सबका पेंशन अलग-अलग भुगतान हो वह सही…… परंतु 35 वर्षों तक नौकरी करने वाले बिना पेंशन के ही रिटायर करें…… यह कैसा न्याय है ? उन्होंने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन जैसे प्राकृतिक न्याय को सम्मान नहीं देना कितना बड़ा अन्याय है- पाप है। देश की जनता जिस मिठाई को बाजार में ₹10 में प्राप्त करे वही विधानसभा व लोकसभा के कैंटीन में आठ आने में रहनुमाओं को मिले……. यही हमारी न्याय व्यवस्था है। अंत में डॉ.मधेपुरी ने 2008 की आपबीती मर्मस्पर्शी घटनाएं सुनाते हुए विस्तार से वर्तमान सन्दर्भों को जोड़ा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रखर वक्ता आकाश यदुवंशी, मुन्ना पासवान, माधव प्रसाद, दुनियादत्त सहित शंभू यादव, पिरबत पासवान, एसके सुमन, रमन कुमार, सतीश कुमार, संदीप कुमार आदि ने पुनर्वास की हकीकत बयां करते हुए पर्यावरण के सवालों और इस त्रासदी से जुड़े सवालों व बाढ़ के संभावित खतरों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए यही कहा कि महात्मा गांधी के जन्म के 150 वर्षों को यादगार बनाने हेतु कोसी क्षेत्र के 150 गाँव में इन सवालों पर अगले 2 अक्टूबर तक संवाद किया जाय। कार्यक्रम का संचालन राजू खान ने किया और धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कोसी नवनिर्माण मंच के संस्थापक महेंद्र यादव ने सूचना दी कि संध्या 6:00 बजे भूपेन्द्र चौक पर कुसहा त्रासदी में अकारण बह गये किसान-मजदूर व समस्त नर-नारियों को मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि देने हेतु आयोजन किया गया है। जिसमें सबने अपनी उपस्थिति दर्ज की। प्रेरणा के गीत और कृति का पर्यावरण-प्रेम में सबों को कुरेदा।

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स्वतंत्रता दिवस के दिन 11 पौधे लगाकर पर्यावरण सुरक्षा का दिया संदेश डॉ.मधेपुरी ने

दैनिक भास्कर की पहल यानि “एक पेड़ एक जिंदगी” वाले अभियान से जुड़कर ‘श्रृंगी ऋषि सेवा मिशन’ के कार्यकर्ताओं ने अगले 1 महीने में जिले के विभिन्न भागों में 500 पौधे लगाने का संकल्प लिया है।

बता दें कि 15 अगस्त की शाम को सबैला के डीएल पब्लिक स्कूल में इस सर्वाधिक प्रशंसनीय कार्यक्रम का उद्घाटन बीएन मंडल विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक, कुलानुशासक व कुलसचिव रह चुके डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने किया और उन्होंने 11 पौधे लगाकर पर्यावरण सुरक्षा का संदेश भी दिया तथा पर्यावरण को बचाने का संकल्प भी सभी शिक्षकों, छात्रों व अभिभावकों को दिलाया। इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने कहा कि यह कार्यक्रम समाज में रह रहे पर्यावरण प्रेमियों के लिए अपनी जिम्मेदारी का अहसास करने जैसा है।

डॉ.मधेपुरी ने एक पेड़ की उपयोगिता गिनाते हुए बच्चों से कहा कि एक सामान्य पेड़ जहाँ प्रतिवर्ष 20 टन कार्बन डाइऑक्साइड को सोखता है वहीं वह पेड़ लगभग 20 किलो धूल को भी सोख लेता है। इसके अलावा वही पेड़ 80 किलो ग्राम पारा, लिथियम, लेड आदि जैसी जहरीली धातुओं के मिश्रण को सोखने की क्षमता रखता है। यहाँ तक कि वह शोर/ध्वनि को भी सोख लेता है। डॉ.मधेपुरी ने अभिभावकों से कहा कि घर के पास 10 पेड़ हो तो मानसिक तनाव व अवसाद तो घटती ही है….. बल्कि आसपास रहने वालों का जीवन लगभग 7 साल तक बढ़ जाता है।

डीएलपी स्कूल के डायरेक्टर एलएन यादव ने जहाँ पर्यावरण संरक्षण को अपनी दैनिक जिम्मेदारी के अभिन्न अंग बनाने की नसीहत दी वहीं श्रृंगी ऋषि सेवा मिशन के संस्थापक भास्कर कुमार निखिल ने अपने संक्षिप्त संबोधन में यही कहा कि भारतीय संस्कृति में पर्यावरण और प्रकृति को पूजनीय माना गया है। श्री भास्कर ने उपस्थित जनों से कहा कि आइए अपने-अपने जन्मदिन या परिवार-समाज के अन्य किसी भी शुभ अवसर पर पौधरोपण जरूर करें और देखभाल की जिम्मेदारी भी उठाएं।

मौके पर उप-प्राचार्य अखिलेश कुमार, व्यवस्थापक अनुज सिंह, शिक्षकगण रमण कुमार , अभिषेक कुमार, मालिक झा, रंजीत कुमार सहित सत्यम, शिवम, विदुर, दीनबंधु , तेजस्वी, आयुष, मुन्ना आदि उपस्थित थे।

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स्वतंत्र भारत में चौथी बार 15 अगस्त को ध्वजोत्तोलन और रक्षाबंधन एक साथ

वर्ष 1947 के 15 अगस्त यानी आजादी के बाद यह चौथी दफा है जब आजादी के जश्न के साथ-साथ संपूर्ण देश के युवाओं द्वारा रक्षाबंधन का त्योहार सर्वाधिक उमंग व उत्साह से मनाया गया है। दोनों त्योहार एक साथ मिलकर अभूतपूर्व एवं अद्वितीय रहा।

यह भी जानिए कि प्रत्येक 19 वर्षों के बाद ही यह सुखद संयोग आता है। आजाद भारत में अब तक 4 बार यह अवसर आया है।

यह भी बता दें कि वर्ष 1905 में बंगाल के पृथक्करण के खिलाफ रवीन्द्र नाथ टैगोर से लेकर…. रास बिहारी लाल मंडल आदि ने “राखी महोत्सव” शुरू किया था। उन दिनों रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं रह गया था बल्कि एकीकरण के लिए हिन्दू और मुस्लिम एक दूसरे को राखी बांध रहे थे… तब यह रक्षाबंधन का पर्व केवल एक दिन का नहीं बल्कि दोनों समुदायों के बीच महीना भर चलता रहा था…. तभी तो 1911 में विवश होकर अंग्रेजों को बंगाल का विलय करना पड़ा।

और इस बार गुरुवार को श्रावण पूर्णिमा के साथ-साथ रक्षाबंधन और जश्न-ए-आजादी का पर्व एक साथ हो गया- जहाँ एक देश, एक झंडा, एक विधान, एक संविधान… चारो तरफ एकीकरण ही एकीकरण…  चतुर्दिक शांति और सद्भाव का वातावरण ! कश्मीर से कन्याकुमारी और राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक इस बार का 73वां स्वतंत्रता दिवस नए किस्म से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मनाया जा रहा है- पहाड़ से लेकर पोखर तक… सरहद से लेकर समंदर तक…. जहाँ भी देखिए… जिधर भी देखिए… चारों ओर तिरंगा ही तिरंगा।

यह भी कि एक ओर सियाचिन की बर्फीली ऊँचाई से भी ऊपर आसमान के सीने पर लहराता हुआ दिखता है तिरंगा….  वहीं दूसरी ओर देश की शान बनकर फहरता है तिरंगा। कहीं देशवासियों का अरमान बना रहा तिरंगा…. और कहीं 360 फीट के पोल पर फहरता रहा तिरंगा…… तो कहीं लहराता रहा 60 फीट चौड़ा और 90 फीट लंबा रेशमी तिरंगा…. । दिल्ली के लाल किले से लेकर कश्मीर के लाल चौक तक पी वेंकैया द्वारा डिजाइन किया गया वही तिरंगा इस बार शान से लहराया।

चलते-चलते यह भी कि इस बार के 73वें स्वतंत्रता दिवस समारोह पर मधेपुरा जिले के युवाओं ने खूब लहराया तिरंगा। एक ओर जहाँ बीएन मंडल स्टेडियम में जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला ने और बीएन मंडल विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ अवध किशोर राय ने तिरंगे को सलामी दी वहीं दूसरी ओर बीएन मंडल चौक पर एवं डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क में राष्ट्रीय ध्वज को समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने सलामी दी तथा याद किया उन वीर सपूतों को जिनकी शहादत के कारण आज हम आजाद हैं। संपूर्ण राष्ट्र बापू सहित उनके सेनानियों को नमन करता रहा…. उनके ‘अमर रहे’ के नारे लगाता रहा….. और ‘भारत माता की जय’ करता रहा….. !!

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सेनानियों एवं शहीदों को जीवंत रखने में लगे हैं डॉ.मधेपुरी

सेनानियों एवं शहीदों को जीवंत रखने में वर्षों से लगे हैं समाजसेवी डॉ.मधेपुरी। प्रखर स्वतंत्रता सेनानी भूपेन्द्र नारायण मंडल को जीवित करने के लिए उन्होंने 1975 ई. में भूपेन्द्र नारायण मंडल वाणिज्य महाविद्यालय की स्थापना की और वर्तमान भूपेन्द्र चौक (कॉलेज चौक) पर जन सहयोग से उनकी प्रतिमा लगाई। तत्कालीन मुख्यमंत्री के हाथों प्रतिमा का अनावरण कराया। दिनांक 4 फरवरी 1991 को प्रतिमा अनावरण के बाद भूपेन्द्र नारायण मंडल के नाम विश्वविद्यालय की घोषणा को लेकर संयोजक डॉ.मधेपुरी की मांग को उसी दिन एक महती जनसभा में मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने स्वीकृति दे दी।

भूपेन्द्र बाबू से पूर्व के स्वतंत्रता सेनानी  बाबू रास बिहारी लाल मंडल एवं क्रांतिवीर शिवनंदन प्रसाद मंडल को जीवंत बनाए रखने हेतु डॉ.मधेपुरी ने अपने छात्र जीवन में ही मन बना लिया था कि आगे आने वाले दिनों में उनकी प्रतिमाएं उनके नाम वाले विद्यालय में अवश्य लगेेंगी क्योंकि डॉ.मधेपुरी दोनों स्कूल के छात्र रहे हैं। अक्षर का क्षय नहीं होता इसलिए डॉ.मधेपुरी ने इन तीनों मनीषियों की जीवनी भी लिखी, जो भटक रहे समाज को राह दिखाने का काम करेगी। इन तीनों स्वतंत्रता सेनानियों पर लिखी गई पुस्तकें हैं- 1. रास बिहारी लाल मंडल : पराधीन भारत में स्वाधीन सोच 2. इतिहास पुरुष शिवनंदन प्रसाद मंडल 3. बूंद बूंद सचः एक सागर का (भूपेद्र बाबू की जीवनी)

जहाँ तक शहीदों को जीवंत रखने की बात आती है उसे बड़ी सहजता से पूरा किया है डॉ.मधेपुरी ने… वर्ष 1943 में मात्र 23 वर्ष की उम्र में शहीद हुए चुल्हाय यादव के नाम पर डाक बंगला रोड का नाम जिला परिषद व नगर परिषद के सहयोग से डॉ.मधेपुरी ने “शहीद चुल्हाय मार्ग” नामित कराया और हाल में उसी रोड के पश्चिमी बाईपास चौक को ‘शहीद चुल्हाय चौक’ नाम दिया है।

इसी जिले के किशुनगंज अनुमंडल के शहीद बाजा साह एवं जिले के अन्य शहीदों- शहीद चुल्हाय यादव, शहीद सदानंद, शहीद प्रमोद कुमार (फुलकाहा), शहीद प्रमोद कुमार (चामगढ़), शहीद शंकर रजक आदि को जीवंत रखने के लिए डॉ.मधेपुरी ने स्थानीय गांधी चिल्ड्रन पार्क के अंदर तत्कालीन डीएम मो.सोहैल (IAS) के कार्यकाल में उनके ही द्वारा शहीद पार्क का उद्घाटन कराया तथा एक अनाम पार्क को भी डॉ.मधेपुरी ने जिला प्रशासन व नगर परिषद के सहयोग से ‘डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क’ नाम घोषित कराया।

हाल-फिलहाल डॉ.मधेपुरी ने सहरसा में 29 अगस्त 1942 को शहीद हुए 6 शहीदों में एक भोला ठाकुर की सौ वर्षीया धर्मपत्नी श्रीमती बेचनी देवी से मिलने प्राचार्य डॉ.विनय कुमार चौधरी के साथ चैनपुर गाँव गए। डॉ.मधेपुरी ने अपनी ‘आजादी’ शीर्षक वाली पूरी कविता का पाठ कर सबों की आँखें नम कर दी। कुछ देर बाद आशीष प्राप्त किया और जितना बन पड़ा उनकी परेशानियों को बाँटे और आज तक उस शहीद माता की सेवा में प्रति माह एक सम्मानजनक राशि भेज रहे हैं डॉ.मधेपुरी……

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