मधेपुरा के किसानों की चुनौतियाँ ही उनके लिए अवसर पैदा करेंगी

कोसी नवनिर्माण मंच के संस्थापक महेन्द्र यादव 2008 के राष्ट्रीय आपदा कुसहा-त्रासदी से लगातार कोसी के किसानों को जगाते रहे हैं और उनकी समस्याओं से अहर्निश जूझते रहे हैं। हाँ ! किसानों की चुनौतियों से जूझने में इन्हें समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सरीखे अनेक बुद्धिजीवियों एवं आद्यानंद यादव व शंभू शरण भारतीय जैसे किसानों के हित के लिए सकारात्मक सोच रखने वालों से निरंतर सहयोग मिलता रहा है।

बता दें कि भले ही राजनीतिक रूप से मधेपुरा जिला देश व प्रदेश में चर्चा में रहता हो परंतु इस जिले के किसानों को दोहरी चुनौतियों से जूझना पड़ता है। उनके जीवन से जुड़े सवाल राजनीतिक फलक पर नहीं आ पाते हैं। इसलिए यहाँ के किसानों को अपने अस्तित्व के लिए जीवन संघर्ष के साथ-साथ नवनिर्माण की नई इबादत अपने बल पर लिखनी होगी वरना किसानों का पलायन रुकने का नाम नहीं लेगा।

यह भी जानिए कि यहाँ के तकरीबन साढ़े चार सौ गाँवों में बसनेवाले किसान अपनी लगभग दो लाख एकड़ उपजाऊ जमीन पर खुद ही मेहनत के बल पर गेहूँ, धान, मक्का , मूंग , आलू , पटुआ आदि फसलें भारी पैमाने पर तो उगा ही लेते हैं परंतु छोटी खेती वाले लोग यूपी, पंजाब और हरियाणा में जाकर मौसमी मजदूरी करने लगते हैं। क्योंकि सीट के आधार पर न्यूनतम लाभकारी मूल्यों की बात तो दूर……. वर्तमान निर्धारित समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पाता है किसानों को। तभी तो महंगी होती जा रही है खेती की लागत के बीच इस वर्ष के निर्धारित मक्के के बाजार मूल्य ₹9 प्रति किलो पर बेचने को किसान मजबूर होते रहे हैं।

जानिए कि ऐसी ही चुनौतियों के बीच अवसर पैदा करने की जरूरत है। किसान भाइयों ! संगठित होकर खेती आधारित उद्योगों को खड़ा करें और बाजार से मुकाबला करने का अवसर ढूंढ निकाले। सोचिए, किसानों के घर से छोटे व्यापारी धान लेजाकर बड़े व्यापारी को देते हैं जो चावल बनाकर पुनः बाजार में भेजते हैं। इस प्रक्रिया में कई जगह लोग मुनाफा कमाते हैं। यदि किसान फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी या सहकारिता के माध्यम से ऐसा ही करें तो आधे दर्जन से अधिक जगहों पर तैयार फसल पर मुनाफा कमाने वाले व्यापारियों का मुनाफा रुक जाएगा। ऐसी ही छोटी-छोटी कोशिशें बड़ी-बड़ी संभावनाओं को जन्म दे सकती हैं।

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बिहार का सम्मान बनेगा वाल्मीकिनगर: नीतीश कुमार

रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दो दिवसीय दौरे पर अपनी पसंदीदा जगह वाल्मीकिनगर पहुंचे और यहां के प्राकृतिक और दर्शनीय स्थलों का दीदार किया। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि यहां पर्यटन को लेकर ऐसी स्थिति बने कि पूरा बिहार वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व को अपने सम्मान के साथ जोड़े। बिहार का एक-एक निवासी यहां की सुंदरता के बारे में जाने और देश-दुनिया के पर्यटक यहां आकर इसकी प्राकृतिक छटा से रू-ब-रू हो सके।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वाल्मीकिनगर में इको टूरिज्म के तहत हुए कार्यों को देखकर खुशी जाहिर की। उन्होंने यहां हरी झंडी दिखाकर साइकिल सफारी का शुभारंभ भी किया। इस मौके पर वाल्मीकि विहार होटल परिसर में आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि बिहार से जब झारखंड अलग हुआ था, तब बिहार में सिर्फ 9% हरित क्षेत्र बचा था। हमने हरियाली मिशन की शुरुआत की और 24 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा। आज पूरे बिहार में 22 करोड़ से अधिक पौधे लग चुके हैं। सर्वेक्षण रिपोर्ट आने वाली है, संभावना है कि अब हरित क्षेत्र 15% होगा। लेकिन इसे 17% करने का लक्ष्य रखा गया है।

वाल्मीकिनगर क्षेत्र में पर्यटकों के आने की अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वाल्मीकिनगर क्षेत्र बिहार में पर्यटन की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ है। केवल जरूरत है कि इसे प्रचारित किया जाये। उन्होंने वाल्मीकिनगर का महत्व बताते हुए कहा कि पुराने जमाने में इसका नाम भैंसा लोटन था। यहां वाल्मीकि आश्रम होने के कारण इसका नाम बदल दिया गया। अब सब लोग इसे वाल्मीकिनगर के नाम से जानते हैं। हरियाली से युक्त इस जगह की प्राकृतिक विशेषता है कि इसके एक ओर जहां पहाड़ है, वहीं दूसरी ओर यह जंगल से आच्छादित है और तीसरी ओर यह क्षेत्र नदी से भी गिरा है। इतना रमणीक स्थल पूरे देश में शायद ही कहीं हो।

वाल्मीकिनगर में मुख्यमंत्री की इस खास यात्रा के दौरान उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, जलसंसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, सांसद सतीश चंद्र दुबे, विधायक भागीरथी देवी, मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह, वन विभाग के प्रधान सचिव त्रिपुरारि शरण, आयुक्त नर्मदेश्वर लाल, आईजी सुनील कुमार, डीआईजी ललन मोहन प्रसाद सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।

चलते-चलते बता दें कि इस दौरान उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के आग्रह को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने वाल्मीकिनगर में कैबिनेट की बैठक आयोजित करने की घोषणा भी की। साथ ही कहा कि यहां बोधगया और राजगीर की तरह कन्वेंशन सेंटर का भी निर्माण कराया जायेगा। वहीं, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने पटना से वाल्मीकिनगर तक सप्ताह में एक दिन टूरिस्ट बस चलाने और यहां नौकायन के लिए 12 सीटर दो बोट उपलब्ध कराने की घोषणा की।

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भारतीय रेल की पैंट्रीकार में अब परोसा जाएगा गरमागरम ताजा भोजन !

भारतीय रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्री अश्विनी लोहानी की मंजूरी के बाद से सभी रेलवे जोन के महाप्रबंधकों को निर्देश जारी कर दिए गये हैं कि आई आर सी टी सी के लिए चलती ट्रेन में पैसेंजरों को गर्म, ताजा और स्वच्छ भोजन परोसने बड़ी चुनौती है। इस चुनौती को सभी स्वीकार करें और तेजी से काम करें।
बता दें कि इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने सभी मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की पैंट्रीकार को नया स्वरूप देने हेतु मरम्मत व रखरखाव का काम आईआरसीटीसी (Indian Railway Catering and Tourism Corporation Ltd.) को सौंपने का निर्णय लिया है। जबकि पूर्व में भारतीय रेल के पैंट्रीकार में यांत्रिकी, तकनीकी व विद्युतीय आदी प्रकार की कोई खराबी होने पर उसकी मरम्मत व ठीक करने का काम भारतीय रेल द्वारा किये जाने वाले नियम के तहत ठीक होने में काफी वक्त लग जाया करता क्योंकि रेलवे में अलग-अलग दर्जनों विभाग होने से कौन करे……. कौन ना करे….. इसमें विलंब होना स्वाभाविक हो जाता।
अब भारतीय रेल की पैंट्रीकार में बर्तन धोने, रखने और खाना पकाने की नहीं होगी समस्या, क्योंकि पेंट्रीकार को नया स्वरूप देने वाले फैसले के अनुरूप कार्य प्रगति पर है। और हाँ ! यदि पैसेंजरों द्वारा रेल को सहयोग किया जाए तो और गुणवत्तापूर्ण भोजन उन्हें सदैव मिलता रहेगा।
रेल यात्रियों को यह जानना और मानना होगा कि जिस वेज खाने का आप ₹120 बिना बिल लिए भुगतान करते हैं वह वास्तव में ₹50 का होता है और नॉनवेज मात्र ₹55 का जिसके लिए आप ₹140 बिना रसीद लिए देते हैं। भारतीय रेल द्वारा आरंभ से ही मेनूकार्ड और रेट जारी किया गया है…… जानकारी के अभाव में पैसेंजर मांगते नहीं और यदि मांगने पर वह बहाना बनाता तो यह कह कर छोड़ देते कि अरे  चलो साल में दो-तीन बार ही तो रेल यात्रा करता हूं…… थोड़ा ले ही लिया तो क्या हुआ ?
बता दें कि भारत में रोजाना लगभग 7000 पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं ….. यदि दो हज़ार में ही पैंट्रीकार हो तो आप हैरत में पड़ जाएंगे की गणना अनुसार भारतीय रेल में प्रतिदिन 20 से 30 करोड़ का काला धन जनरेट होता है…… 1 महीने में अरबों…… वर्ष की गिनती संभव नहीं ….। ये सारे पैसे बिना टैक्स दिये ठेकेदारों की जेब में चले जाते हैं।
यदि हम और आप छोटी सी कोशिश करें तो बदलाव ला सकते हैं ….. रेलवे से रशीद लेना न भूलें तो ….. आने वाली पीढ़ी को काले धन की बुराइयों से बचा सकते हैं। हम अपने बच्चों को गरमा-गरम, ताजा और शुद्ध भोजन उचित दाम पर खिला सकते हैं….. चाय-कॉफ़ी के बाबत लिए जा रहे डबल चार्ज को आधा करा सकते हैं….।

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डायनेमिक डीएम मो.सोहैल बने पाँच क्षेत्रीय भाषाओं के बिहारी शब्दकोश निर्माण उपसमिति के सदस्य !

बिहार की पाँच क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दों से तैयार किये जाने वाले ‘बिहारी शब्दकोश’ (जिसमें अंगिका, बज्जिका, भोजपुरी, मगही व मैथिली के शब्द होंगे शामिल) के निर्माण हेतु 5 करोड़ कि योजना को स्वीकृति मिल गई है | साथ ही बिहारी शब्दकोश व प्राकृत संकलन की योजना को अधिष्ठात्री परिषद व उपसमिति ने हरी झंडी दे दी है |

बता दें कि इस  उपसमिति में सदस्य के रूप में शामिल किये गये हैं- मुजफ्फरपुर प्रमंडलीय आयुक्त श्री नर्मदेश्वर लाल, बी.आर.अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अमरेंद्र नारायण यादव, सदर जिलाधिकारी मो.सोहैल, बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर व डीन प्रो.के.के.जैन, प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान के निदेशक ऋषभ चंद्र जैन एवं डीडीसी उज्जवल कुमार | इस उपसमिति ने सरैया के वासोकुंड स्थित प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान को सेंटर आफ एक्सीलेंस बनाने हेतु मंजूरी दे दी है |

जानिए कि इस उपसमिति ने दो प्रस्तावों पर अपनी सहमति देते हुए मुहर लगा दी है | प्रथम प्रस्ताव के तहत क्षेत्रीय 5 भाषाओं (अंगिका, बच्चिका, भोजपुरी, मगही व मैथिली) के शब्दकोश के लिए पाँच अलग-अलग भाषाविद विद्वानों की मदद ली जायेगी जिसमें प्रत्येक भाषा के विद्वान को एक-एक लाख रु. मासिक दिये जाएंगे | इस कार्य के निष्पादन के लिए 5 साल का समय निर्धारित किया गया है | और हाँ ! बिहारी शब्दकोष के लिए जो बजट तैयार किया गया है उसमें दो डाटा एन्ट्री आपरेटरों की नियुक्ति के साथ-साथ पुस्तकों की खरीद आदि भी शामिल किये गये हैं |

यह भी कि उपसमिति द्वारा दूसरे प्रस्ताव में शौरसेनी प्राकृत भाषा के आगम ग्रंथों का मूल प्राकृत पाठ व हिन्दी अनुवाद के साथ प्रकाशित करने की भी स्वीकृति दी गई है, जिसके लिए अतिरिक्त दो करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई है |

चलते-चलते यह भी बता दें कि उपसमिति द्वारा पारित सारे प्रस्तावों का द्रुतगति से कार्यान्वयन किये जाने हेतु डायनेमिक डीएम मो.सोहैल द्वारा उसे राजभवन भेजा जाएगा ताकि निर्धारित 5 वर्ष की अवधि के अंदर ही लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा , क्योंकि मधेपुरा में डीएम रह चुके मो.सोहैल द्वारा इलेक्ट्रिक रेल इंजन एवं अन्य कई योजनाओं को निर्धारित समयावधि से पहले पूरा कर लिए जाने पर उन्हें समाजसेवी डॉ.मधेपुरी सहित अनेक शिक्षाविद आज भी याद करते हैं |

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अभूतपूर्व होगा जदयू का अतिपिछड़ा, अल्पसंख्यक और महिला सम्मेलन

21 जनवरी को जदयू के प्रमंडलीय अतिपिछड़ा सम्मेलन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सहरसा आगमन को लेकर कोसी प्रमंडल में पार्टी की तीनों इकाई – मधेपुरा-सहरसा-सुपौल – जोरशोर से तैयारी में जुटी है। इस सम्मेलन के अतिरिक्त भी मधेपुरा में जदयू के दो बड़े कार्यक्रम एक सप्ताह के भीतर होने हैं। गौरतलब है कि 18 नवंबर को जहां मधेपुरा के नगर भवन में जहां अल्पसंख्यक जिला सम्मेलन होगा, वहीं 24 नवंबर को स्थानीय जीवन सदन में जदयू महिला समागम का सम्मेलन होना तय है।
कहने की जरूरत नहीं कि 2019 का लोकसभा चुनाव निकट है और 2020 का विधानसभा चुनाव भी अधिक दूर नहीं। इन वजहों से मधेपुरा जदयू की इकाई इन सभी कार्यक्रमों, विशेषकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में होने वाले कार्यक्रम, को सफल बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। इस परिप्रेक्ष्य में 15 नवंबर को स्थानीय शिवनंदन प्रसाद मंडल विधि महाविद्यालय के सभागार में मधेपुरा जिला जदयू की तैयारी बैठक हुई, जिसमें आलमनगर के विधायक व पूर्व मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप, मधेपुरा के पूर्व विधायक मणीन्द्र कुमार मंडल उर्फ ओम बाबू, जिला प्रभारी अमर चौधरी उर्फ भगवान बाबू, प्रदेश प्रवक्ता निखिल मंडल, पूर्व प्रदेश महासचिव बीबी प्रभाकर, प्रदेश सलाहकार समिति के सदस्य सत्यजीत यादव, सुजीत कुमार मेहता, डॉ. नीलाकांत, राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य गुड्डी देवी एवं वरीय नेता गोवर्द्धन मेहता मुख्य रूप से उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रो. बिजेन्द्र नारायण यादव ने की।
इस बैठक के संबंध में ‘मधेपुरा अबतक’ से बात करते हुए जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने कहा कि न केवल बिहार बल्कि देश की राजनीति में मधेपुरा ने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है। समाजवाद को आकार देने की बात हो तो भूपेन्द्र नारायण मंडल, पिछड़ों को आवाज देने की बात हो तो मंडल कमीशन के जनक बीपी मंडल, भारतीय संविधान की रचना करने की बात हो तो संविधान सभा के सदस्य के रूप में चतरा के कमलेश्वरी प्रसाद यादव और राज्य की विधि व्यवस्था को सांचे में ढालना हो तो मधेपुरा के ही शिवनंदन प्रसाद मंडल याद किए गए। आज जबकि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार अपने विकास और वैभव की नई इबारत लिख रहा है, तब भी बिहार के अगुआ के साथ कदमताल करने में मधेपुरा ही सबसे आगे होगा। डॉ. अमरदीप ने कहा कि मधेपुरा के लोग अगर जग जाएं तो सहरसा का पटेल मैदान (जहां मुख्यमंत्री का कार्यक्रम हो रहा है) क्या, पटना का गांधी मैदान भी छोटा पड़ जाएगा। अल्पसंख्यक एवं महिला सम्मेलन भी अभूतपूर्व होगा।
तैयारी बैठक में सभी वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि चाहे महिलाओं की आधी आबादी हो, चाहे अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन सबके उत्थान में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यह हम सभी का नैतिक दायित्व है कि इन सभी कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कर अपने नेता का हौसला बढ़ाएं। बैठक में अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष प्रदीप साह, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष मो. आजाद, महिला जदयू की जिलाध्यक्ष मीना देवी, व्यवसायिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अशोक चौधरी, दलित प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष नरेश पासवान, युवा जदयू के जिलाध्यक्ष रूपेश कुमार गुलटेन, छात्र जदयू के जिलाध्यक्ष अमित आनंद मौजूद रहे। इनके अतिरिक्त कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज करने वालों में जदयू मीडिया सेल प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य यादव उमेश कुमार, जिला मीडिया संयोजक प्रो. मनोज भटनागर एवं युवा जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष युगल पटेल प्रमुख हैं।

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जदयू ने तेज की अल्पसंख्यकों को दल से जोड़ने की मुहिम

जदयू ने अल्पसंख्यकों को दल से जोड़ने और उनका विश्वास हासिल करने की मुहिम तेज करते हुए गुरुवार को सीवान, भागलपुर, रोहतास, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया, बेगूसराय, दरभंगा एवं मुंगेर में जदयू अल्पसंख्यक जिला कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया। सीवान में जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व संसदीय दल के नेता श्री आरसीपी सिंह तथा मुंगेर में बिहार सरकार के मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह एवं मंत्री श्री शैलेश कुमार सिंह उपस्थित रहे। वहीं भागलपुर में श्रीमती कहकशां परवीन, सांसद, राज्यसभा, रोहतास में श्री गुलाम रसूल बलियावी, राष्ट्रीय महासचिव सह विधानपार्षद, पूर्वी चंपारण में मो. खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद, मंत्री, अल्पसंख्यक कल्याण एवं गन्ना उद्योग, पूर्णिया में श्री नौशाद आलम, विधायक एवं पूर्व मंत्री, खगड़िया में श्री गुलाम गौस, पूर्व विधानपार्षद, दरभंगा में प्रो. युनूस हकीम, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मुंगेर में मो. सलाम, प्रदेश अध्यक्ष, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने मौजूदगी दर्ज की।
श्री आरसीपी सिंह ने सीवान में आयोजित सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यकों के विकास की नई इबारत लिखी है। उन्हें वोट की नहीं हमेशा वोटरों की चिन्ता रही है। आज उनके नेतृत्व में बिहार सरकार ने अल्पसंख्यक समाज के सर्वांगीण विकास के लिए जितने कार्य किए हैं उतने पहले कभी नहीं हुए। 2005-06 की तुलना में अल्पसंख्यक कल्याण का बजट आज सौ गुना से भी ज्यादा है।
मुंगेर की सभा में श्री ललन सिंह ने बिहार सरकार द्वारा अल्पसंख्यक कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्री नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यकों को समाज की मुख्यधारा में लाने का काम किया है। वहीं श्री शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि श्री नीतीश कुमार की सरकार के कारण आज मुसलमानों के लिए आगे बढ़ने के जितने अवसर हैं, उतने पहले कभी नहीं थे।
श्रीमती कहकशां परवीन, श्री गुलाम रसूल बलियावी, मो. खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद, श्री नौशाद आलम, श्री गुलाम गौस, मो. युनूस हकीम एवं मो. सलाम ने अपनी-अपनी सभाओं में जोर देकर कहा कि बिहार की महान जनता अब फिरकापरस्तों की बातों में आने वाली नहीं है। उन्हें सही और गलत का फर्क पता है। 2019 और 2020 के चुनाव में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

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एनडीए से कुशवाहा की ‘विदाई’ तय, मिले शरद से

लोकसभा चुनाव के लिए एनडीए में सीटों को लेकर मची खींचतान अब अपनी परिणति पर पहुंच रही है। जदयू और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्षों द्वारा बराबर-बराबर सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने की विधिवत घोषणा के बाद से लगातार ‘असहज’ चल रहे उपेन्द्र कुशवाहा एनडीए में अपनी मांग पूरी ना होते देख महागठबंधन की शरण में जाते दिख रहे हैं। इस सिलसिले में उन्होंने महागठबंधन के नेता शरद यादव से नई दिल्ली में बकायदा मुलाकात भी की है। उधर माना जा रहा है कि एनडीए ने सीट शेयरिंग का नया फॉर्मूला तय कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की एनडीए से छुट्टी होने की स्थिति में बिहार में भाजपा और जदयू 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं, रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा को छह सीटें दी जाएंगी।

बहरहाल, शरद यादव से मुलाकात के बाद रालोसपा ने नई रणनीति तैयार की है जिसके तहत अब कुशवाहा की पार्टी महागठबंधन का हिस्सा हो सकती है। बता दें कि एनडीए ने उपेंद्र कुशवाहा के सामने दो सीटों का प्रस्ताव रखा था, जिस पर कुशवाहा हरगिज तैयार ना थे। अपनी राजनीतिक ताकत को नीतीश कुमार से ज्‍यादा बताते हुए उन्होंने ज्यादा सीटें मांगी थीं और इस संबंध में वे लगातार अमित शाह से मिलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन भाजपा अध्यक्ष ने उन्हें वक्त नहीं दिया। वहीं, दूसरी ओर कुशवाहा लगातार ट्विटर के माध्यम से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोल रहे थे। जुबानी जंग तथाकथित ‘नीच’ प्रकरण तक पहुँची और फिर इस स्तर तक बढ़ गई कि उन्होंने नीतीश पर रालोसपा विधायकों को तोड़ने का भी गंभीर आरोप लगा दिया। ऐसे में ये अटकलें तेज हो गई थीं कि उपेंद्र कुशवाहा एनडीए से अलग हो सकते हैं।

बहरहाल, इस बीच माना जा रहा है कि शरद से मुलाकात के दौरान कुशवाहा ने छह सीटों की मांग की है। इस संबंध में शरद अगले हफ्ते लालू से रांची में अपनी प्रस्तावित मुलाकात के दौरान बात कर सकते हैं। आरजेडी सुप्रीमो से हरी झंडी मिलने के बाद कुशवाहा से उनकी अगले चरण की बात होगी।

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कोसी फिल्म फेस्टिवल की वैश्विक पहचान आगे बनेगी भारतीय सिनेमा की शान

सहरसा के कला भवन में पहली बार आयोजित दो दिवसीय कोसी फिल्म फेस्टिवल का आयोजन कोसी, मिथिलांचल और सीमांचल के लिए बहुत बड़ा आयोजन साबित होने जा रहा है। करीब 1 दर्जन से अधिक हिन्दी, मैथिली फिल्मों का प्रदर्शन जहाँ कोसी क्षेत्र की वैश्विक पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है वहीं आये हुए कलाकारों, गीतकारों, संगीतकारों एवं निर्देशकों ने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसे फिल्म फेस्टिवल का आयोजन एक क्रांतिकारी कदम है जिसका असर 5 साल बाद देखने को मिलेगा।
बता दें कि दो दिनों तक कोसी प्रमंडलीय मुख्यालय सहरसा शहर के मिजाज को फिल्मी बनाये रखनेवाले फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन जहाँ  प्रसिद्धि प्राप्त  बिहारी सिने अभिनेता अखिलेंद्र मिश्र द्वारा सुपर बाजार स्थित कला भवन में किया गया वहीं उसी फिल्म फेस्टिवल में शामिल हुए सभी चेहरे पर्दे पर जाने-पहचाने परंतु कुछ एक  को छोड़कर अधिकतर आज भी अपनों के बीच अनजाने हैं।
जानिए कि कई फिल्मों में अपनी भूमिकाओं से सुर्खियां बटोरने वाले नवहट्टा-मुरादपुर निवासी पंकज झा, सुपौल-कोशलीपट्टी निवासी राम बहादुर रेणु, सिमरी बख्तियारपुर के  चकभारो  निवासी शाहनवाज हनीफ, बलवाहाट निवासी मनीष सिंह राजपूत, पतरघट-भागवत गांव के विपुल आनंद, सत्तर कटैया-  बारा  गांव के नवनीत झा सहित अनेक लघु चलचित्रों, वृत्तचित्रों के निर्माताओं और निर्देशकों- अमृत सिन्हा, राहुल वर्मा, संदीप कुमार, शंकर आनंद झा , अमलेश आनंद, अहमद जमाल , आशुतोष सागर , गौतम आजाद आदि को मिथिला के परंपरागत पाग के साथ चादर एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान 15 लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया और समीक्षा भी…. जिनमें प्रमुख लघु फिल्में हैं- आत्म-ग्लानि, महाकुंभ, नई राह, तिरंगा, गलीकूची, मातृभूमि, चरस, केसर-कस्तूरी…… आदि। इनमें से कुछ टेली फिल्में  कोसी के ऐसे कलाकारों की देन है जो कोसी की माटी में जन्मे तो सही, परन्तु अपनी प्रतिभा के दम पर मुंबई में स्थापित हो चुके हैं।
दो दिवसीय कोसी फिल्म फेस्टिवल के सफल संचालन के लिए दर्शकों नेे हृदय से सहरसा ग्रुप के इन कलानुरागियों को हृदय से साधुवाद दिया जिनकी उपस्थिति और मेहनत चर्चा का विषय बना रहा। वे  हैं- संचालक आनंद झा, डॉ.शशि शेखर झा एवं रवि शंकर सहित रजनीश रंजन, मनीष रंजन, मुक्तेश्वर सिंह मुकेश, प्रो.गौतम कुमार सिंह…… कोएंकर शैली मिश्र, साकेत आनंद, शालिनी सिंह, मृत्युंजय तिवारी, मोनू झा, अजय चौहान, बिपिन सिंह, अमर कुमार, अभिषेक वर्धन, विपिन कुमार आदि।

 

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घर से घाट तक….. लोक आस्था का (चार दिवसीय) महापर्व छठ !

महापर्व छठ देखकर बिहार की ऊँचाई को देश ही नहीं विदेश के लोग भी महसूसते रहे हैं। सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है छठ जिसमें मुस्लिम और अन्य धर्मावलंबी भी बढ़-चढ़कर लेते हैं भाग…..। कहीं कोई कलह-कोलाहल नहीं…. कई जगह पर तो मुस्लिम महिलाएं भी करती हैं छठ। इस पर्व के अवसर पर दूर देशों में रहने वाले लोगों को भी खींच लाती है अपनी सरजमीन…..।

बता दें कि देश में ही नहीं…… विदेशों में भी एक दिन कद्दू भात, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य और चौथे दिन प्रातः उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा की अद्भुत छटा विखेरते रहे हैं सात समंदर पार के लोग। सिंगापुर से लेकर बहरीन…… मॉरीशस से लेकर कैलिफोर्निया में बसे बिहारियों में छठ पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। सूर्योपासना के इस महापर्व छठ के साथ-साथ पद्मश्री शारदा सिन्हा के कर्णप्रिय छठि मैया के गीतों पर देशी महिलाऔं के साथ-साथ विदेशी महिलाएं भी झूम उठती हैं।

यह भी जानिए कि छठ ही एक ऐसा पर्व है, जिसकी पूरी सत्ता मातृ प्रधान है। इस पर्व में महिलाएं स्वामिनी की भूमिका में होती हैं और पुरुष सेवक भाव में खड़ा दिखता है। महिलाएं अर्घ्य – गीत गाती हुई घाटों की ओर जा रही होती हैं तो पुरुष अपने माथे पर पूजन सामग्रियों की टोकरी लिए हुए चलते दिखते हैं…… यानी घर से घाट तक यह पुरुष प्रकृति के सामने नतमस्तक दिखता है। तभी तो प्राचीन भारतीय समाज में पुत्र अपनी मां के नाम से जाना जाता था।

बच्चों को यह जानना जरूरी है कि यह छठ पर्व हमें देता है- प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश। सूर्योपासना का यह पर्व हमें प्रकृति के करीब तो लाता ही है साथ ही किसी भी प्रतिकूल परिणाम को अनुकूल बना देता है। जब लोग जल में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं तो हानिकारक पराबैंगनी किरणें अवशोषित होकर ऑक्सीजन में परिणत हो जाती है और लोग उन किरणों के कुप्रभावों से बचते हैं। यह भी सच है कि सूर्य ही जल के स्रोत को राह देता है।

आगे यह भी जानिए कि इस पर्व के केंद्र में कृषि, किसान और मिट्टी है। हर फल व सब्जी इस पर्व का प्रसाद है। मिट्टी के बने चूल्हे पर हर तरह का प्रसाद बनाया जाता है तथा बांस से बनी सूप में पूजन सामग्री रखकर अर्घ्य दिया जाता है। बाट से लेकर घाट तक की सफाई की जाती है। आपदा प्रबंधन व सुरक्षा व्यवस्था हेतु प्रशासन एवं पब्लिक दोनों सचेत दिखते हैं।

छठ पर्व पर गाए जाने वाले गीतों में एक गीत बेटी मांगने वाला भी है। हमारे बिहार के  ग्राम्य जीवन में ‘कुंवारे आंगन’ जैसे शब्द भी हैं यानी जिस आंगन में बेटी के विवाह के फेरे नहीं पड़े तो वह आंगन कुंवारा रह गया…. ऐसा माना जाता है। परंतु सरकार द्वारा प्रायोजित ‘बेटी बचाओ…… बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम अब इस महापर्व के जरिये प्रखरता से ऊंचाई ग्रहण करता जा रहा है…..!

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नीतीश को ब्रिटिश पार्लियामेंट करेगा सम्मानित

बिहार राज्य के मुंगेर जिले के छोटे से गाँव कल्याणपुर से निकलकर भारत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले डॉ.नीतीश दुबे को होम्योपैथ चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान एवं किये गये शोध के लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट द्वारा सम्मानित किया जाएगा। भारत से पहली बार किसी होम्योपैथ चिकित्सक को सम्मानित करने के लिए डॉ.नीतीश को 24-26 नवंबर के बीच आयोजित होने वाले भारत कॉन्क्लेव में आमंत्रित किया गया है।
बता दें कि इस प्रकार का आयोजन भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसदों द्वारा किया जा रहा है जिसमें वैसी हस्तियों को आमंत्रित किया गया है जो भारतीय संस्कृति, फैशन, वेद और आयुष जैसे क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले भारतीयों में शुमार किये जाते हैं।
जानिए कि होम्योपैथ क्षेत्र से पहली बार ब्रिटिश पार्लियामेंट में किसी डॉक्टर को सम्मानित किया जाएगा। यूँ तो इस सम्मान के लिए चयनित डॉ.दुबे को पहले भी जर्मनी में दुनिया के सबसे बड़े होम्योपैथ रिसर्च संस्थान (DHU) जैसी बड़ी संस्था ने  सम्मानित किया है। जेनेवा में WHO के कार्यक्रम में भी सम्मानित हुए हैं।
यह भी बता दें कि डॉ.नीतीश दुबे हरि ओम होमियो (कल्याणपुर) के मैनेजिंग डायरेक्टर तो हैं ही , साथ ही बर्नेट होम्योपैथी प्राइवेट लिमिटेड नामक दवा कंपनी के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। हरिओम होमियो की शाखाएं बेगूसराय , भागलपुर , पटना और दिल्ली में भी है।
चलते-चलते बता दें कि डॉ.नीतीश दुबे के साथ-साथ प्रसिद्ध अभिनेता मनोज वाजपेयी, फिल्म निर्माता बोनी कपूर, पद्मश्री शाहनवाज हुसैन , ग्रीन मैन ऑफ़ इंडिया अब्दुल गनी एवं अनुराधा गोयल जैसी हस्तियों को भी ब्रिटिश पार्लियामेंट के इस कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।

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