विश्व-इतिहास की सबसे लंबी मानव-श्रृंखला..! बधाई बिहार..!!

आपने नशे में झूमना तो सुना होगा, लेकिन लोग नशे कि विरोध में झूमें ऐसा केवल बिहार में हो सकता है। जी हाँ, लोग झूमे और सैकड़ों, हजारों, लाखों में नहीं, करोड़ों की संख्या में झूमे… एक साथ झूमे… एक-दूसरे का हाथ पकड़कर झूमे… और ऐसा झूमे कि पूरे तीन करोड़ लोगों की 11, 292 किलोमीटर लंबी श्रृंखला बन गई। जी हाँ, ये विश्व की सबसे लंबी मानव-श्रृंखला है। अद्भुत, अभूतपूर्व, वर्णनातीत।

बिहार ने सचमुच इतिहास रच दिया। यह विश्व का अकेला ऐसा राज्य बन गया जिसने नशे को न कहने के लिए विश्व की सबसे लंबी मानव-श्रृंखला की परिकल्पना की और उसे अमलीजामा पहना दिया। इससे पहले 2004 में बांग्लादेश में प्रतिपक्ष ने सरकार के खिलाफ 1050 किमी मानव-श्रृंखला बनाई थी। देखा जाय तो तीन करोड़ लोगों का एक मकसद से एक दिन और एक समय एकजुट होना लगभग असंभव-सी बात थी, जिसे बिहार ने संभव कर दिखाया और शराबबंदी का ऐसा संदेश दिया जिसे पूरी दुनिया ने आश्चर्यचकित होकर देखा और सराहा।

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दिन में 12.15 से 1 बजे के बीच आयोजित इस ऐतिहासिक मानव-श्रृंखला की तस्वीर लेने के लिए तीन उपग्रहों तथा 40 ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया। तीन उपग्रहों में एक विदेशी तथा दो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के थे। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार के चार हेलीकॉप्टरों से भी एरियल फोटोग्राफी और विडियोग्राफी की गई। इस श्रृंखला को विश्व रिकॉर्ड में शामिल करने के लिए लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लोग भी पटना में मौजूद रहे।

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वैसे तो इस मानव-श्रृंखला का आयोजन बिहार सरकार ने किया लेकिन दलगत राजनीति से ऊपर उठकर तमाम दलों ने इसमें जिस तरह बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया वह काबिलेतारीफ है। इसको लेकर जितने उत्साह में जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता थे उतने ही भाजपा, लोजपा, रालोसपा समेत अन्य पार्टियों के लोग भी। विभिन्न राजनीतिक दलों के अधिकांश सांसद, विधायक एवं विधानपार्षद इस मौके के गवाह बने। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने पटना के गांधी मैदान में इस अभियान में हिस्सा लिया।

सरकारी कर्मचारी हों या स्कूली छात्र-छात्रा, विशिष्ट जन हों या आम नागरिक, स्त्री हों या पुरुष, बच्चे हों या बूढ़े सबके चेहरे पर अद्भुत उत्साह, सभी गर्व से ओतप्रोत। सभी जानते थे कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आह्वान पर वे सभी इतिहास रचने को निकले हैं। अपने मुख्यमंत्री के संकल्प को जिस तरह पूरे राज्य की जनता ने साकार किया वो पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया।

विश्व-इतिहास के इस महानतम आयोजन के लिए ‘मधेपुरा अबतक’ विकासपुरुष नीतीश कुमार, बिहार की महान जनता और राज्य के मुस्तैद प्रशासन को बधाई और साधुवाद देता है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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चलो अपने दर्द को मकसद दें युवराज की तरह!

कटक के बाराबती स्टेडियम में भारत ने इंग्लैंड को तीन मैचों के वनडे सीरीज के दूसरे मैच में 15 रन से हराकर सीरीज अपने नाम कर लिया। इस बेहद खास जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई वनडे टीम में तीन साल बाद वापसी कर रहे युवराज सिंह ने। मात्र 25 रन पर तीन विकेट खोकर दबाव में थी टीम इंडिया, तब युवराज ने पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह घोनी के साथ 256 रनों की यादगार साझेदारी की और कभी हार न मानने वाले अपने जज्बे से एक बार फिर करोड़ों दिलों को जीत लिया। बड़ी बात यह कि इस जांबाज खिलाड़ी ने अपने जुझारूपन से जिस तरह टीम इंडिया के हाथों से फिसलते कई मैचों को उसकी झोली में डाला है वैसे ही अपनी ज़िन्दगी का जंग भी जीता है, कैंसर जैसी बीमारी से लड़कर और जीत हासिल कर।

गुरुवार को खेले गए इस मैच में अपने वनडे करियर का 14वां शतक पूरा कर मैदान पर भावुक हो गए थे युवराज। उन्होंने भरी हुई आँखों से आसमान को देखा और भगवान का शुक्रिया अदा किया। इसके बाद बल्ला उठाकर दर्शकों और पैवेलियन में बैठे साथी खिलाड़ियों का अभिवादन किया। कहने की जरूरत नहीं कि उनके सम्मान में पूरी टीम खड़ी थी उस वक्त। यह सेंचुरी इसलिए भी खास थी कि उन्होंने 6 साल बाद यह शतक लगाया था। पर वे इतने पर नहीं रुके। इसके बाद उन्होंने इस पारी को अपने वनडे करियर के सबसे बड़े स्कोर में बदला और 150 रन कूट डाले, जिसमें 21 चौके और 3 छक्के शामिल थे।

याद दिला दें कि युवराज ने इससे पहले 2011 वर्ल्ड कप में सेंचुरी लगाई थी और इसके बाद वे कैंसर के शिकार हो गए। कैंसर से लड़ने के बाद मैदान पर वापसी कतई आसान नहीं थी। इलाज के बाद कमजोर हो चुके शरीर में वह स्टेमिना नहीं रह गई थी, जिसके लिए युवराज जाने जाते थे। पर उन्होंने हार नहीं मानी और न केवल टीम में वापसी की, बल्कि बता दिया कि उनमें काफी क्रिकेट बाकी है अभी और साथ ही बाकी है उनके ‘सर्वश्रेष्ठ’ का आना।

मैच के बाद भी लगातार भावुक दिखे युवराज। उन्होंने कहा भी कि वे जिस लड़ाई को लड़कर आए हैं, उसके बारे में सिर्फ उन्हें ही पता है। अपने उस दर्द को आज भी नहीं भूले युवराज। सच तो यह है कि इस दर्द ने उन्हें जीने का एक नया मकसद दे दिया है। आपको हैरत होगी कि अपनी तूफानी पारी के बाद जश्न मनाने के बदले उन्होंने कटक के ही एक होटल में कैंसर और ऑटिज्म पीड़ित बच्चों के साथ समय बिताया, उनका दर्द बांटा और अपनी खुशी साझा की। इससे पहले भी क्रिसमस के मौके पर उन्होंने मुंबई के परेल में सेंट जूड इंडिया चाइल्ड केयर सेंटर में कैंसर पीड़ित बच्चों के साथ समय बिताया था।

क्रिकेट के इस योद्धा ने अपने दर्द से जीने का नया मकसद पा लिया है। इसे जब और जिस तरह मौका मिलता है, कैंसर से लड़ने वालों को जीने का हौसला देना नहीं भूलता। औरों के दर्द को कम करना ही अब ‘जश्न’ है भारतीय क्रिकेट के ‘युवराज’ का। क्या हम सब अपने-अपने दर्द को कुछ ऐसा ही मकसद नहीं दे सकते? क्या हम भी ‘युवराज’ नहीं बन सकते?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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‘ॐ शान्ति ॐ’ की अनुगूंज से गुंजायमान हुआ प्रजापिताब्रह्मा का संसार !

जहाँ विश्व के 143 देशों में प्रजापिता ब्रह्माबाबा की 48वीं पुण्यतिथि श्रद्धा एवं भक्ति सहित ‘ॐ शान्ति ॐ’  की अनुगूंज के साथ मनाई गई वही संसार के ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की 10,000 शाखाओं में से एक “शाखा मधेपुरा” में इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करती हुई शक्ति, स्वरूपा ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी द्वारा समस्त श्रद्धानुरागी नर-नारियों के बीच विस्तार से विषय प्रवेश करते हुए- ‘दादा लेखराज’ से ‘प्रजापिता ब्रह्मा’ तक के अलौकिक सफर की विस्तृत चर्चा की गई |

अध्यक्षा ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी ने प्रजापिता लेखराज के जीवन-सागर से ढेर सारे मोतियों को निकाल-निकालकर श्रद्धानुरागियों के समक्ष प्रज्ञापिता लेखराज के व्यक्तित्व एवं चरित्र को प्रभावशाली एवं शक्तिशाली साबित करते हुए एवं करीने से समझाते हुए कहा कि उज्जवल चरित्र एवं उदारचित्त वाले प्रजापिताब्रह्मा 18 से 20 घंटे तक जनहित में कार्यरत रहा करते थे |

यह भी बता दें कि प्रजापिता ब्रह्मा बाबा में अटूट आस्था रखनेवाले सिमराही (सुपौल) से पधारे मुख्य अतिथि ब्रह्माकुमार रामनगीना भाई ने विस्तार से ‘ॐ शान्ति ॐ’ के माध्यम से खुद के जीवन में आये परिवर्तन की घटनाओं का जिक्र करते हुए अपने संबोधन में कहा कि आज की तारीख में संसार के लगभग 10 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं प्रतिदिन ब्रम्हाकुमारी विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करते हैं | वर्तमान में जीवन की भाग-दौड़ में थक चुके सर्वाधिक लोग शांति की तलाश में अब तेजी से ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर कदम बढ़ाने लगे हैं |

Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri delivering inaugural speech.
Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri delivering inaugural speech at Prajapita Brahma Kumari Madhepura Branch.

बता दें कि कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता के रूप में समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने संबोधन में उपस्थित जन समुदाय से यही कहा कि बच्चा जब से जन्म लेता है, तब से अंतिम सांस लेने तक सदैव  षट विकार (काम-क्रोध, लोभ-मोह, ईर्ष्या-द्वेष) के अधीन होता है | दसों इंद्रियों का राजकुमार ‘मन’ होता है और तन को रोग तभी पकड़ता है जब ‘मन’ विकृत होता है | अब मन की शांति और स्वच्छता के लिए ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर तेजी से लोग अपना कदम बढ़ाने लगे हैं जहां नारी शक्ति को ब्रह्माबाबा ने जागृत किया है, प्रतिष्ठापित कर आगे बढ़ाने का काम किया है | डॉ.मधेपुरी ने नारी को प्रतिष्ठापूर्ण जीवन जीने के लिए समाजसुधारक राजाराम मोहन राय एवं नोबेल पुरस्कार विजेता रविन्द्र नाथ टैगोर की विस्तार से चर्चा की |

इस संस्था को गतिशील रखने वालों में पूर्व प्रमुख विनय वर्धन उर्फ खोखा बाबू, प्रो.निरोध कुमार, दिनेश सर्राफ, प्रो.अजय कुमार, प्रो.नरेश कुमार, प्रो.त्रिवेणी प्रसाद यादव, ओम बाबू, बैजनाथ यादव, विजय यादव, डॉ.विनय कुमार चौधरी, प्रो.श्यामल किशोर यादव, प्राचार्य सत्यजीत, डॉ.नीलाकान्त, प्रो.रवि कुमार, प्रो.अशोक पोद्दार एवं श्रीनाथ झा सहित ओम शांति परिवार के सदस्यों एवं माला बहन, दुर्गा बहन आदि सरीखे सभी माता एवं बहनें हैं | बाहर से आए रामनगीना बाबू सहित अन्य सभी को ब्रह्माकुमार किशोर जी ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

संस्थाप्रधान ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी जब सभी अतिथियों को टीका लगातीं और चरणामृत देतीं उससे पूर्व उन्होंने डॉ.मधेपुरी, सिविल सर्जन डॉ.गदाधर पांडे, दिनेश सर्राफ, प्राचार्य सत्यजीत यादव, प्रो.श्यामल किशोर यादव, ओम प्र.यादव, प्रो.निरोध कुमार निराला आदि के साथ सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर प्रजापिता ब्रह्मा बाबा एवं 1 दिन पूर्व नेपाल में अपनी दैहिकलीला समाप्त कर स्वर्गारोहण पर निकली मातृशक्ति गंगा देवी की पुण्यतिथि को प्रकाशमय बनाकर श्रद्धांजलि अर्पित की | अंत में सभी श्रद्धालुओं को इच्छापूर्ण सुस्वादु प्रसाद ग्रहण कराने के बाद ही श्रद्धांजलि सभा का समापन किया गया |

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‘सलमान कोर्ट में आते हैं जेल में नहीं’

ट्विटर पर बॉलीवुड स्टार सलमान खान को लेकर ट्वीट्स की जैसे बौछार हो रही है। कोई कह रहा है ‘सलमान कोर्ट में आते हैं जेल में नहीं’ तो किसी का कहना है ‘जज घूमया थारे जैसा ना कोई!’ भाई ऐसे कमेंट तो आएंगे ही, बात ही ऐसी है। जोधपुर सेशंस कोर्ट ने बॉलीवुड के इस ‘सुल्तान’ को 18 साल पुराने आर्म्स ऐक्ट केस में बरी जो कर दिया है। जी हाँ, कोर्ट ने सलमान को ‘संदेह’ का फायदा देकर बरी किया है। हालांकि ये अलग बात है कि कोर्ट के इस फैसले के बाद दुख, क्रोध, खीझ और इन सबके कारण उपजे व्यंग्य से भरे ट्वीट की भी कमी नहीं है जिनमें ये कहा जा रहा है कि ‘हिरण खुद ही गोली के सामने आ गया होगा’ या फिर ‘बेचारे ने खुद को ही गोली मार ली होगी!’

बहरहाल, सलमान खान के खिलाफ आर्म्स ऐक्ट के तहत जोधपुर सेशंस कोर्ट में मामला चल रहा था और बुधवार सुबह 10.30 बजे फैसला सुनाने का वक्त मुकर्रर किया गया था। मगर सलमान करीब घंटाभर देरी से पहुँचे। फैसले के मुताबिक सलमान को संदेह का लाभ दिया गया है क्योंकि अभियोजन पक्ष के वकील मामला साबित नहीं कर सके। फैसले के दौरान सलमान की बहन अलवीरा उनके साथ थीं। फैसला सुनाने में जज को महज 5 मिनट लगे, जिसके तत्काल बाद सलमान कोर्ट से चले गए। उधर सरकारी वकील का कहना है कि फैसले के विश्लेषण के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दलपत सिंह राजपुरोहित ने सलमान को फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया था। इस मामले में अंतिम दलीलों पर सुनवाई पिछले साल 9 दिसंबर को शुरू हुई थी। सलमान पर कांकणी गांव में दो काले हिरणों के कथित शिकार के दौरान कथित रूप से उन हथियारों का इस्तेमाल करने और रखने के सिलसिले में मामला दर्ज किया गया था जिनके लाइसेंस की अवधि समाप्त हो चुकी थी। मामला वन विभाग ने दर्ज कराया था।

गौरतलब है कि आर्म्स ऐक्ट का यह मामला जोधपुर में सलमान के खिलाफ दर्ज चार मामलों में एक है। बाकी तीन मामले चिंकारा और काले हिरणों के शिकार से जुड़े हुए हैं। दो मामलों में सलमान को हाईकोर्ट से बरी किया जा चुका है। अब आर्म्स ऐक्ट के मामले में फैसला आने के बाद शिकार से जुड़ा एक ही मामला उनके खिलाफ लंबित है। कानूनी जानकार मानते हैं कि उस मामले में भी सलमान को राहत मिलने की पूरी उम्मीद है क्योंकि बाकी सभी मामले अब खारिज हो चुके हैं। इससे पहले सलमान हिट एंड रन केस में भी बरी हो चुके हैं। लब्बोलुआब ये कि तुलसीदास जिस बात को सैकड़ों साल पहले समझ कर समझा गए, उसे हमें कम से कम अब तो समझ ही लेना चाहिए कि ‘समरथ को नहिं दोष गुसाईं।‘

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सपा-साइकिल अखिलेश की, अब बारी उत्तर प्रदेश की!

पिता मुलायम सिंह यादव से सपा और साइकिल की लड़ाई जीतने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि उनका अपने पिता से कोई झगड़ा नहीं था। उन्होंने कहा कि वह मेरे पिता हैं, उनसे कभी रिश्ता नहीं टूटेगा। उधर बेटे के हाथों मात खाने के बाद मुलायम भी ‘मुलायम’ दिख रहे हैं। सूत्रों की मानें तो पिता-पुत्र ने समझौते के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग से पार्टी और सिंबल का विधिवत अधिकार मिलने के बाद अखिलेश दो बार पिता से मिल चुके हैं। इसे रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने के तौर पर देखा जा रहा है। वैसे यह मानने वालों की भी कमी नहीं है कि इनके रिश्तों पर कभी बर्फ जमी ही नहीं थी। बहरहाल, ख़बर है कि मुलायम ने अखिलेश को अपने 38 उम्मीदवारों की सूची सौंपी है और वे चाहते हैं कि अखिलेश इन सभी को टिकट दें। बदले में वे सपा उम्मीदवारों के खिलाफ अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारेंगे। सूत्रों के मुताबिक इस सूची में शिवपाल यादव का नाम नहीं है लेकिन उनके बेटे आदित्य का नाम इसमें शामिल है। कहा जा रहा है कि बदली परिस्थितियों में शिवपाल चुनाव नहीं लड़ना चाहते।

उधर अखिलेश खेमे से मिल रहे संकेतों के अनुसार मुलायम की सूची पर जल्द ही कोई ‘सकारात्मक’ जवाब मिलेगा। अखिलेश ने सोमवार को चुनाव आयोग से सिंबल मिलने के बाद पिता मुलायम से मिलकर उनका आशीर्वाद लिया था और मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जोर देकर कहा कि पिता मुलायम के साथ कभी उनके मतभेद नहीं थे। उन्होंने कहा, सच तो यह है कि हमारी और उनकी लिस्ट में 90 प्रतिशत उम्मीदवार एक ही हैं।

देखा जाय तो पिछले कई हफ्तों से चल रहे समाजवादी संग्राम का अखिलेश के लिए इससे अच्छा अंत नहीं हो सकता था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद न केवल पिता की सींची पार्टी पर उनका एकाधिकार हो गया, बल्कि चुनाव से ठीक पहले के अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले समय में चौक-चौराहे से लेकर तमाम चैनलों की चर्चा के केन्द्र में वे रहे और अपने ‘स्टैंड’ व साफ-सुथरी छवि से आम जनता, जिनमें युवावर्ग को अलग से रेखांकित करना जरूरी है, की सहानुभूति और विश्वास भी अपनी झोली में भर ली। आज अखिलेश न केवल पार्टी के भीतर बल्कि बाहर भी इतनी मजबूत स्थिति में हैं कि कांग्रेस और आरएलडी जैसी पार्टियां उनसे गठबंधन को बांहें पसारे खड़ी हैं।

बता दें कि तेजी से आकार ले रही परिस्थितियों में अखिलेश-डिंपल, राहुल-प्रियंका और अजित सिंह के बेटे जयंत जैसे युवा चेहरों के एक मंच पर आने में अब औपचारिकता भर शेष है। न भूलें कि मुलायम और अजित भी संरक्षक की भूमिका में साथ खड़े होंगे। चुनाव निश्चित तौर पर अनिश्चितताओं का खेल है, पर इन सबके साथ आने पुर कुल मिलाकर जो तस्वीर उभर कर सामने आती है उससे भाजपा और बसपा के माथे पर बल पड़ रहे होंगे, इसमें कोई दो राय नहीं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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डीएम मो. सोहैल ने किया मानव श्रृंखला का सफल पूर्वाभ्यास

जहां बिहार की नीतीश सरकार ने प्रदेश में शराबबंदी की प्रथम वर्ष गांठ पर यानि 21 जनवरी 2017 (शनिवार) को सवा बारह बजे दोपहर से एक पंद्रह अपराहन तक बिहार के दो करोड़ जागरुक लोगों द्वारा 11000 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला के तहत हाथ से हाथ मिलाकर मानव कड़ी बनाये जाने का आह्वान किया है वहीं मानव श्रृंखला को ऐतिहासिक बनाने एवं मधेपुरा को बिहार में गौरवान्वित करने के लिए जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल एवं अनुभवी एसपी विकास कुमार, एडीएम  मुर्शीद आलम, डीडीसी मिथिलेश कुमार, एएसपी राजेश कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला,  एन.डी.सी. मुकेश कुमार, सीओ मिथिलेश कुमार,  थानाध्यक्ष मनीष कुमार   सहित शिक्षा विभाग के सभी पदाधिकारीगण अपने हिस्से के चार लाख लोगों की सफल मानव श्रृंखला बनाने हेतु पूरी टीम के साथ जबरदस्त पूर्वाभ्यास करने की बिगुल फूंक दी है |

बता दें कि उत्साही जिला प्रशासक मो.सोहैल के अदभुत उत्साह के कारण समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सहित व्यापारियों एवं विभिन्न संगठनों से जुड़े युवाओं के उत्साह – उमंग को देखकर 21 जनवरी को शराबबंदी के समर्थन में बनने वाली मानव श्रृंखला के बाबत डीएम ने कहा कि इस मानव श्रृंखला से हमें मान-सम्मान और प्रतिष्ठा के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाने का मौका मिलेगा जो देश-दुनिया के लिए मिशाल होगा | उन्होंने कहा कि जिले में 233 कि.मी. लंबी मानव श्रृंखला का आयोजन किया जा रहा है | पूर्वाभ्यास श्रृंखला यात्रा में चलते हुए डॉ.मधेपुरी ने कहा कि मधेपुरा जिन आधे दर्जन जिले से जुड़ा है उन में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा, अपनी अलग पहचान बनायेगा | उन्होंने यह भी कहा कि सेटेलाइट एवं हेलीकॉप्टर द्वारा खींची गयी तस्वीर सिद्ध कर देगा कि यह विश्व की सर्वाधिक लंबी मानव श्रृंखला साबित हुई |

यह भी जानिए कि जहां जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी, उपाध्यक्ष रघुनंदन दास, नप उपाध्यक्ष रामकृष्ण यादव, वार्ड पार्षद ध्यानी यादव अपनी टीम के साथ तैयार हो, वहीं बैंक ऑफिस संतोष कुमार झा, व्यापार मंडल अध्यक्ष योगेंद्र प्राणसुखका, सचिव रविन्द्र यादव, पेट्रोलियम संगठन के विजय सर्राफ व चंदन कुमार तन-मन-धन से संकल्पित हो तो भला मानव श्रृंखला में मधेपुरा ऊंचाई पायेगा ही पायेगा |

इसके अतिरिक्त जहां प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष सह दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल, डॉ. मधेपुरी मार्ग के निदेशक किशोर कुमार जैसे उत्साही हरफनमौला खेल प्रेमी हो, खेल गुरु संत कुमार हो, कबड्डी प्रेमी अरुण कुमार हो और डी.ई.ओ.शिव शंकर राय एवं कार्यपालक पदाधिकारी नप के पवन कुमार हो- तो वहाँ सफलता मिलनी ही मिलनी है |

यह भी बता दें कि आजू-बाजू के कई राज्यों ने इस मानव श्रृंखला में शामिल होने के लिए नीतीश सरकार के पास आग्रह पत्र भेजा है जिसके जवाब में यही कहा गया कि यह आयोजन बिहार का है | हां ! कोई श्रृंखला में शामिल होना चाहे तो रोका नहीं जायेगा | इस श्रृंखला के मॉनिटरिंग का भार शिक्षा विभाग को सौंपी गई है परंतु समस्त बिहार वासियों को तन्मयता के साथ मानव श्रृंखला का हिस्सा बनना है |

अंत में यह भी जानिए कि कलाभवन से निकलकर डी.एम. मो.सोहैल के नेतृत्व में हजारों की संख्या में नर-नारियों द्वारा बैनर-बाजे के साथ बी.पी.मंडल चौक, बी.एन.मंडल चौक एवं सुभाष चौक होते हुए कर्पूरी चौक से कला भवन तक श्रृंखला में लोग जुड़ते गये | रास्ते में डीएम, एसपी के साथ जिप अध्यक्षा मंजू देवी, डॉ.मधेपुरी, अस्फाक आलम, सीताराम पंडित, गंगादास सहित रविंद्र झा सहित शहर के तमाम गणमान्य श्रृंखला में चलते देखे गये | अंत तक कतार छोटी होने के बजाय लंबी होती चली गई |

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ये दुर्घटना नहीं, 25 लोगों की ‘हत्या’ है मेरी सरकार!

अभी-अभी सम्पन्न हुए ऐतिहासिक प्रकाशोत्सव के दौरान अपनी तैयारी और मुस्तैदी से देश और दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने वाली बिहार सरकार ने मकर संक्रान्ति की जैसी अनदेखी की, वह हैरान कर देने वाली है। प्रकाशोत्सव के दौरान देश और दुनिया के अलग-अलग कोनों से लगभग 8 लाख लोग पटना आए, पर क्या मजाल कि किसी को कोई चोट तक लगी हो। लेकिन 14 जनवरी को राजधानी पटना से लगे गंगा दियारा में पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित पतंग-उत्सव में महज कुछ हजार लोग जुटे और 25 लोग अपनी जान गंवा बैठे और कई लापता हैं! इस हादसे का वायरल हो चुका वीडियो देखें, प्रशासन का कोई आदमी आसपास भी नहीं दिखेगा आपको। क्या हमारा प्रशासन अब तक प्रकाश-पर्व की थकान मिटाने में लगा है और हमारी सरकार उस आयोजन के लिए मिली प्रशंसा के जश्न में खोई है?

जी हाँ, प्रशासनिक लापरवाही इस दुर्घटना की सबसे बड़ी वजह है। गौरतलब है कि प्रकाश-पर्व से जुड़ी तमाम तैयारियों की निगरानी मुख्य सचिव और डीजीपी स्तर के अधिकारियों के अलावा खुद मुख्यमंत्री कर रहे थे, जबकि मकर संक्रान्ति के लिए उसकी चौथाई तत्परता भी न थी। आखिर मकर संक्रान्ति के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों? क्या सरकार का समूचा तंत्र इस दिन मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित चूड़ा-दही भोज में व्यस्त था? अगर नहीं, तो प्रकाशोत्सव पर इतनी चुस्ती और पतंगोत्सव पर ऐसी चूक क्यों? कहीं ऐसा तो नहीं कि वो अंतर्राष्ट्रीय आयोजन था और उसमें शामिल होने वाले लोग उसका प्रचार दूर-दूर तक करते, जबकि पतंगोत्सव में शामिल होनेवाले अधिकांश लोग राजधानी पटना और आसपास के थे? ये चिराग तले अंधेरा नहीं तो और क्या है?

बता दें कि आयोजन-स्थल के पास ही बना डॉल्फिन आइलैंड अम्यूजमेंट पार्क इस हादसे की दूसरी बड़ी वजह है। जिस जगह इस पतंगबाजी का आयोजन किया गया था उससे थोड़ी ही दूरी पर ये अम्यूजमेंट पार्क भी है, जहाँ लोग काफी संख्या में जुटे थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक जो नाव डूबी, उस पर सवार लोगों में बड़ी संख्या इसी पार्क में घूमने आए लोगों की थी। जबकि आप आश्चर्य करेंगे कि इस अम्यूजमेंट का निर्माण ही अवैध है। इसे बिना किसी सरकारी या प्रशासनिक मंजूरी के ही बनाया गया है।

इस दर्दनाक घटना की तीसरी वजह थी नाव पर क्षमता से अधिक लोगों की मौजूदगी। इस नाव पर 50 से ज्यादा लोग मौजूद थे, जबकि होने चाहिएं थे आधे से भी कम। स्थानीय लोग बताते हैं कि शाम होने पर सब वापस लौटने की जल्दी में थे, पर प्रश्न उठता है कि उन्हें रोकने-टोकने और भीड़ को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी जिनके ऊपर थी, वो कहाँ थे? पर्याप्त संख्या में नाव और स्टीमर क्यों नहीं थे? और ऐसी आपातस्थिति से निबटने के लिए पर्याप्त गोताखोर क्यों नहीं थे?

बहरहाल, अनहोनी तो हो गई। पर क्या इसे दुर्घटना कहेंगे? क्या सरकार और प्रशासन की लापरवाही के कारण, अनजाने में ही हुई, ‘हत्या’ नहीं है ये? राज्य और केन्द्र सरकार अब मृतकों पर मुआवजों की बारिश करेगी। पर इससे होगा क्या? जिन लोगों ने अपनी जानें गंवाईं उनके घरों की ‘मकर संक्रान्ति’ क्या फिर लौटेगी कभी?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मकर संक्रांति का ऐतिहासिक महत्व ! 

लोक मान्यता है कि आज के ही दिन भगवान ‘भास्कर’ अपने पुत्र ‘शनि’ से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं | चूँकि ‘शनिदेव’ मकर राशि के स्वामी हैं, अतः इस दिन को तब से ही मकर संक्रांति के नाम से पुकारा जाता है | यह पर्व स्नान और दान के रुप में प्रसिद्धि प्राप्त पर्व के नाम जाना जाता है |

यह भी बता दें कि महाभारत काल में भीष्म पितामह ने प्राण त्यागने के लिए मकर संक्रांति का दिन ही चयन किया था | क्योंकि इसी दिन गंगाजी भगीरथ मुनि के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर (यानी गंगासागर) में जाकर मिली थी | तब से ही बंगाल के गंगासागर में ‘मकर संक्रांति’ के दिन लोगों की अपार भीड़ होती है | स्नान के बाद ‘तिल’ दान करते हुए लोग यही कहते हैं- “सारे तीरथ बार-बार गंगा सागर एक बार |

यह भी जानिए कि मकर संक्रांति को तिल संक्रांति या खिचड़ी पर्व अथवा पोंगल भी कहा जाता है | मकर संक्रांति पूरे भारत, बांग्लादेश एवं नेपाल में धूमधाम से मनाया जाता है | पंजाब एवं हरियाणा में इसे ‘लोहडी’ के रूप में एक दिन पूर्व 13 जनवरी को ही बनाया जाता है | अग्निदेव की पूजा करते हुए तिलचौली ( तिल-गुड़-चावल-मक्का ) की आहुति दी जाती है | संपूर्ण उत्तर प्रदेश में तो इस पर्व को ‘खिचड़ी’ के नाम से जाना जाता है | इस दिन खिचड़ी खाने एवं दान देने का बहुत महत्व होता है | गुजरात में आज के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा है |

गौरतलब है कि यह पर्व प्रायः जनवरी के 14 वें दिन या यदकदा 15 वें दिन पड़ता है | इसी दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है | मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारंभ होती है | यही कारण है कि गुजरात व उत्तराखंड में इस पर्व को ‘उत्तरायणी’ भी कहते हैं | जहां तमिलनाडु में ‘पोंगल’ और केरल व कर्नाटक में इसे ‘मकर संक्रांति’ कहते हैं वहीं नेपाल में ‘सूर्योत्तरायण’ के साथ-साथ थारू समुदाय द्वारा इस पर्व को ‘माघी’ भी कहा जाता है | इस दिन नेपाल सरकार सार्वजनिक छुट्टी देती है और लोग तीर्थस्थल में स्नान कर अन्न-वस्त्र दान करते हैं |

मधेपुरा के पुराने जिला मुख्यालय भागलपुर (प्रमंडल) के वर्तमान बांका जिले के बौंसी में स्थित मंदार-पर्वत पौराणिक समुद्र-मंथन की गाथा का साक्षी रहा है | ऐसी धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु श्री देवी लक्ष्मी के साथ मंदार पर्वत पर विराजमान रखकर अंगवासियों पर अपनी कृपादृष्टि अनुग्रहित करते रहे हैं | लोक आस्था के अनुसार मकर संक्रांति के दिन स्वर्ग के समस्त देवगण भगवान विष्णु को अपनी श्रद्धा निवेदित करने हेतु मंदार पर्वत पर आते हैं | उस दिन वहां एक बहुत बड़ा मेला लगता है जिसमें निकटवर्ती बंगाल एवं झारखंड राज्यों के भी दर्शनार्थियों की और विशेषरूप से आदिवासियों की अच्छी-खासी संख्या रहती है | यह मेला सोनपुर और सिंहेश्वर जैसा बड़ा मेला होता है | यह भी बता दें कि 16 वीं शताब्दी के महान वैष्णव संत चैतन्य महाप्रभु के 1505 ई.  के मंदार-परिदर्शन की स्मृति आज भी मंदार पर्वत के पीछे उनके चरण-चिन्ह के रूप में एक छोटे से मंदिर में मौजूद है |

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क्या वासना सर्वथा निर्मूल हो सकती है  !

विश्व को एक परिवार और सभी धर्मों के प्रत्येक व्यक्ति को परमात्मा का मंदिर मानने वाले स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए चिर स्मरणीय, आदरणीय एवं अनुकरणीय बने रहेंगे |

अपने जीवन में 39 बार सूर्य की परिक्रमा करने वाले स्वामी विवेकानंद ने संसार को अगणित कल्याणकारी योजनाओं से जागृत किया | आज उनकी 154वीं जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मधेपुरा के हर डगर, हर मोड़ पर तथा हर संस्था, हर छोड़ पर स्वामी जी द्वारा दिये गये संदेशों को आत्मसात करना- प्रत्येक युवजन का परम कर्तव्य एवं सर्वोत्कृष्ट धर्म माना जा रहा है |

मधेपुरा के युवजनों द्वारा उसी धर्म का पालन करते हुए आज प्रायः सभी राजनैतिक संगठनों एवं संस्थानों द्वारा स्वामी विवेकानंद के जीवन-दर्शन एवं आदर्शों को याद किया जा रहा है | जहां एक ओर मधेपुरा कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार की टीम ने स्वामी विवेकानंद को युगपुरुष कहा वहीं दूसरी ओर पी.एस.कॉलेज के प्राचार्य डॉ.राजीव कुमार सिन्हा सहित एन.एस.एस. टीम के सर्वेसर्वा डॉ.अभय कुमार ने स्वामी जी को युवाओं के प्रेरणा स्रोत बताया | और जहां एक ओर आभास आनंद झा के आवास पर- ‘उठो जागो और तब तक मत रुको, जब तक आगे बढ़कर अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर लो ‘ के वेद वाक्य के साथ स्वामी जी को याद किया गया वहीं दूसरी ओर समिधा ग्रुप परिसर में संदीप सांडिल्य की टीम द्वारा विवेकानंद को स्मरण करने हेतु दिनभर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया |

यह भी जानिये कि युवाओं के जहां स्वामी विवेकानंद ने ऐसी सारगर्भित बातें कही है- “विवेक और वैराग्य से कदाचित काम की अभिलाषा जा भी सकती है, लेकिन कामवासना सर्वथा निर्मूल नहीं हो सकती |” वही अनुभव की गहराई में उतरने के बाद उन्होंने इस तरह अपनी अनुभूति को अभिव्यक्ति दी है- “यदि कोई व्यक्ति किसी काम के प्रति ध्यान मग्न होकर उसकी गहराई में उतरता है या अपने प्राणों में उसे उतर जाने देता है तो उसकी कामवासना कुछ विशेष कालावधि के लिए कदाचित लुप्त हो भी सकती है, क्योंकि तभी सारी ऊर्जा ऊंचे उद्देश्य प्राप्ति के केंद्रों में समाहित हो रही होती है |

बता दें कि चन्द शब्दों में इस युवा वेदांती विवेकानंद के आदर्शों की व्याख्या संभव नहीं, लेकिन केवल इतना ही बताता हूं कि विवेकानंद ही वह पहला शख्स था जिन्होंने भारत को ‘माता’ माना | तभी तो भारत के प्रायः ऋषि-मुनियों ने हिमालय पर यानि सिर पर बैठकर तपस्या की और स्वामी जी मां के चरणों यानी कन्याकुमारी में बैठकर अपनी तपस्या करते दिखे |

यह भी कि जब समाज अनपढ़ था तब आयरलैंड से ‘सिस्टर निवेदिता’ को लाकर लड़कियों का पहला स्कूल खुलवाये थे | बंगाल में दरिद्र नारायण भोज की परंपरा शुरू की थी, क्योंकि स्वामी जी समाज के सर्वांगीन विकास की बात किया करते थे | स्वस्थ रहने और दूसरों के लिए काम करने की बातें करते थे | स्वामी जी सदा यही कहते कि मुझे केवल 100 ईमानदार और चरित्रवान व्यक्ति मिल जाय तो मैं पूरे संसार में क्रांति ला दूंगा |

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बनें श्रृंखला के भागीदार……. नशामुक्त बने बिहार !

बिहार की नीतीश सरकार द्वारा शराबबंदी के समर्थन में यह आह्वान किया गया था कि राज्य के बच्चे-बूढ़े एवं माता-बहनें सभी 21 January को 10:00 से 10:30 तक अपने-अपने घर के सामने मानव श्रृंखला (Human Chain) का हिस्सा बनेंगे जिसका समय अब 12:15 से 1:00 बजे तक बदल दिया गया है |

यह भी बता दें कि मानव श्रृंखला को सफल बनाने हेतु जिले से लेकर पंचायत के गांव-गांव एवं टोले-टोले तक में संयोजक समितियां बनने लगी तथा श्रृंखला में शामिल होने के लिए घर-घर निमंत्रण दिया जाने लगा | हर डगर, हर मोड़ पर एक दूसरे से यही कहते सुने जाते हैं- बनें श्रृंखला के भागीदार……. नशामुक्त बने बिहार ! और अब तो चौक-चौराहों से लेकर चाय-पान की दुकानों पर लोग यही कहते हैं- ऐतिहासिक होगी मानव श्रृंखला ! और दो करोड़ से अधिक लोग होंगे समर्थन श्रृंखला में शामिल !!

यह भी जानिए कि 11 हजार किलोमीटर से भी अधिक लंबी बननी है शराबबंदी (Liquor  Ban in Bihar) के समर्थन में मानव श्रृंखला जिसमें होंगे दो करोड़ से अधिक जागरुक बिहारवासी के लगभग 5 करोड़ कर्मठ हाथ | गौरतलब है कि इस मानव श्रृंखला की सेटेलाइट से तस्वीर ली जानी  है | दो दिनों से राज्य के मुख्य सचिव ने इसरो(ISRO) की टीम के साथ ‘ तारामंडल ’ में बैठक की, विचार-विमर्श किया तथा ऐतिहासिक मानव श्रृंखला की तस्वीर सेटेलाइट द्वारा लेकर बिहार की इतनी लंबी मानव श्रृंखला का विश्व रिकॉर्ड ( World Record of Human Chain) बनाकर देश-दुनिया को एक नया संदेश देंगे |

बता दें कि 3 सेटेलाइट के जरिये मानव श्रृंखला की तस्वीर ली जायेगी | छह हेलीकॉप्टर बिहार के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण करेंगे जिससे निगरानी के साथ-साथ वीडियो रिकॉर्डिंग भी होगी | 30 मिनट की फिल्म भी बनेगी |

Madhepura SDM Sanjay Kumar Nirala motivating people at Kumarkhand.
Madhepura SDM Sanjay Kumar Nirala motivating people at Kumarkhand.

यूँ तो मधेपुरा जिले के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल (DM Md.Sohail) की टीम भी कमर कस ली है कि इस बार भी मधेपुरा इतिहास का हिस्सा बनेगा | तभी तो सदर अनुमंडलाधिकारी संजय कुमार निराला मानव श्रृंखला की सफलता हेतु कुमारखंड प्रखंड में पूर्वाभ्यास में मुस्तैद देखे गये | तमाम पदाधिकारियों के साथ, जो मानव श्रृंखला शंकरपुर से होकर कुमारखंड में जुड़ेगी, उसका स्थल निरीक्षण एस.डी.एम. संजय कुमार निराला ने किया | मौके पर डीसीएलआर रवि शंकर शर्मा, बीडीओ डॉ.मणिमाला कुमारी, सीओ मनोज वर्णवाल, एम ओ चंदन कुमार, पी.ओ. भोला दास, बीईओ अमरेन्द्र ठाकुर, जे.ई.पीके  प्रवीण एवं एलएस आदि पदाधिकारीगण मौजूद देखे गये | सभी अनुमंडलों एवं प्रखंडों में मानव श्रृंखला की तैयारी जोरों पर है |

सूबे के मुखिया नीतीश कुमार की “ सात निश्चय “ यात्रा भी तो युवाओं को जागृत करने में लगी है | हर जगह चर्चा हो रही है- सेटेलाइट ही श्रृंखला का फोटो खींचेगा, हेलीकॉप्टर निगरानी करेगा, श्रृंखला टूटने का भी चित्र ड्रोन द्वारा लिया जायगा | इसरो के वैज्ञानिकों- बी.नरेंद्र, पी श्रीनिवासन, डॉ.डी.गुप्ता, वाई के श्रीवास्तव आदि के निरीक्षण में कार्यक्रम संचालित होगा |

शराबबंदी की घोषणा के बाद से आपराधिक घटनाओं जैसे- हत्या, लूट, डकैती, फिरौती, बलात्कार आदि में आ रही कमी की चर्चाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा हैं | कुछ विपक्षी पार्टियों को छोड़कर शेष सभी राजनीतिक पार्टियां तो शराबबंदी को समाजिक क्रांति कहने लगी है |

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