दुनिया को बदलेंगे ये तीन किशोर

ब्रिटिश समाचार वेबसाइट ‘द गार्जियन’ ने दुनिया भर के 25 किशोरों की सूची तैयार की है। ये किशोर कलाकार, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और उद्यमी हैं जो अपने कौशल से दुनिया में बदलाव ला सकते हैं। इन किशोरों में कुछ ने कम उम्र में ही महत्वपूर्ण आविष्कार किए हैं। हम भारतीयों के लिए गर्व की बात है कि इस विशिष्ट सूची में तीन भारतीय मूल के किशोर भी शामिल हैं। अमेरिका के पेंसिलवेनिया में रहने वाले मिहिर गारीमेला, कैलिफोर्निया में रह रहे शुभम बनर्जी और सुरे में रह रहे नित्यानंदम को उनके नायाब आविष्कारों के लिए सराहा गया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की छोटी बेटी साशा ओबामा की भी उनके सामाजिक कार्यों के लिए प्रशंसा की गई है।
मिहिर गारीमेला
10वीं में पढ़ने वाले 16 वर्षीय मिहिर ने एक रोबोट तैयार किया है। इस रोबोट में मधुमक्खियों की आवाज़ की तरह साउंड सिस्टम लगाया गया है। यह रोबोट मक्खियों की तरह ही हर बाधा को पार कर उड़ने में सक्षम है। इसका इस्तेमाल बचाव कार्यों और आपदा प्रबंधन में किया जा सकता है। मिहिर को उनके आविष्कार के लिए साल 2014 का गूगल कम्प्यूटर साइंस अवार्ड मिल चुका है। मिहिर एक गणितीय रोबोटिक वायलिन पर भी काम कर रहे हैं जो दिमाग के इलाज के समय डॉक्टरों की मदद कर सकता है।
शुभम बनर्जी
15 वर्षीय शुभम ने स्कूल साइंस प्रोजेक्ट के तहत खेल में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के लीगो ब्रिक्स से दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल प्रिंटर तैयार किया है। उनकी इस खोज ने दृष्टिबाधित लाखों लोगों के लिए कम्प्यूटर का इस्तेमाल आसान कर दिया। ब्रेल प्रिंटर से इंटरनेट या कम्प्यूटर पर टाइप की हुई चीजें ब्रेल लिपि में प्रिंट हो सकती हैं।
नित्यानंदम
15 साल के नित्यानंदम ने अल्जाइमर बीमारी का पता लगाने के लिए एक नया एंटीबायोटिक तैयार किया है। इस एंटीबायोटिक की मदद से 10 साल पहले ही अल्जाइमर का पता लग सकता है। एंटीबायोटिक में मौजूद फ्लूरोसेंट के कण दिमाग की परत को स्कैन कर भविष्य में होने वाले अल्जाइमर का पता लगा लेते हैं। नित्यानंदम के मुताबिक उनकी खोज उन माता-पिता के लिए कारगर है जिनके बच्चे को अल्जाइमर का खतरा हो सकता है। वे पहले ही अपने बच्चे का इलाज शुरू कर सकते हैं और समय रहते इस बीमारी से रक्षा हो सकती है। नित्यानंदम को इस खोज के लिए 2015 का गूगल साइंस फेयर प्राइज भी मिल चुका है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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इंग्लैंड को फिर धूल चटाई भारत ने

विजय-रथ पर सवार भारत ने इंग्लैंड को चेन्नै टेस्ट में एक पारी और 75 रन से हराकर 5 मैचों की टेस्ट सीरीज पर 4-0 से कब्जा कर लिया। इस मैच में तिहरा शतक जड़ने वाले करुण नायर को ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया, वहीं सीरीज में 655 रन बनाने वाले कप्तान विराट कोहली ‘मैन ऑफ द सीरीज’ घोषित किए गए।
भारत ने मंगलवार को इंग्लैंड की दूसरी पारी को महज 207 रनों पर समेट दिया। भारत की ओर से इस पारी में रवीन्द्र जडेजा ने 7 विकेट लिए। चेन्नै टेस्ट में जडेजा के नाम कुल 10 विकेट रहे। इससे पहले इस मैच में भारत ने अपनी पहली पारी 7 विकेट पर 759 रन बनाकर घोषित की थी। इस पारी में करुण नायर ने नॉट आउट 303 रन बनाए, वहीं एक रन से दोहरा शतक चूक गए ओपनर केएल राहुल ने 199 रन बनाकर भारत की मजबूत बुनियाद रखी।
इस मैच के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली टेस्ट मैचों में अजेय रहने के मामले में पूर्व कप्तान कपिल देव से आगे निकल गए हैं। कपिल की कप्तानी में टीम इंडिया सितंबर 1985 से मार्च 1987 के बीच 17 टेस्ट मैच तक अजेय बनी रही। जबकि विराट कोहली की यह टीम 18 मैचों से अजेय है। इसके साथ ही टीम इंडिया टेस्ट रैंकिंग में नंबर 1 के पायदान पर भी बुलंदी के साथ काबिज है।
भारत के लिए यह सीरीज हर लिहाज से शानदार रही। करुण नायर और जयंत यादव जैसे खिलाड़ी इसी सीरीज की खोज हैं। कोहली, नायर और राहुल की शानदार बल्लेबाजी, आर अश्विन के लाजवाब 28 विकेट और जडेजा एवं यादव के ऑलराउड खेल के लिए यह सीरीज लम्बे समय तक याद रखी जाएगी। वैसे इस सीरीज में टीम इंडिया का शायद ही कोई खिलाड़ी हो जिसने किसी-न-किसी पारी में यादगार योगदान न दिया हो।

“मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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पप्पू ने कहा पहले नीतीश लालू की संपत्ति की जांच कराएं

मधेपुरा के सांसद और जनअधिकार पार्टी के संरक्षक राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा है कि यदि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सही मायने में बेनामी संपत्ति को बाहर लाना चाहते हैं तो पहले आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार सहित अपनी पार्टी के विधायकों और सांसदों की संपत्ति की जांच कराएं। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो बेनामी संपत्ति के नाम पर उनका कुछ कहना लोगों की आँखों में धूल झोंकने के बराबर होगा। गौरतलब है कि पप्पू ने ये बातें रविवार को पटना में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में कही।

लालू-नीतीश पर निशाना साधने के साथ-साथ पप्पू ने भाजपा को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की कि भाजपा द्वारा विभिन्न जिलों में पार्टी कार्यालय खोले जाने के लिए खरीदी गई जमीन की जांच हो। उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से तमाम राजनीतिक पार्टी को आरटीआई के दायरे में लाने के लिए कानून बनाने और राजनीतिक दलों के खातों की निगरानी की भी मांग की।

नोटबंदी के मुद्दे पर जनअधिकार पार्टी के संरक्षक ने कहा कि केन्द्र सरकार ने कालाधन के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर 500 और 1000 रुपये पर रोक लगाकर आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि सरकार को नोटबंदी को लेकर हाईकोर्ट द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी के कारण उद्योग और व्यवसाय ठप्प पड़ गया और एक बड़ी आबादी बेरोजगार हो गई है। मधेपुरा के सांसद ने केन्द्र सरकार पर कैशलेस सोसाइटी बनाने के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि देश के कई अर्थशास्त्री ने नोटबंदी को अव्यावहारिक करार दिया है।

प्रेस कांफ्रेस में पप्पू ने घोषणा की कि उनकी पार्टी जनता के मुद्दों को लेकर आगामी 20 दिसंबर को रेल चक्का जाम और 22 दिसंबर को सड़का जाम करेगी।

चलते-चलते पप्पू यादवजी से एक बात पूछे बिना नहीं रहा जा रहा कि आज जिस लालू की सम्पत्ति की जांच कराने वो नीतीश से कह रहे हैं, आज भी उसी लालू की पार्टी से वो संसद में हैं और हाल-हाल तक खुद को उनका ‘राजनीतिक वारिस’ बताते नहीं थक रहे थे। नैतिकता का तकाजा यह है कि वे पहले संसद की सदस्यता से इस्तीफा दें और उसके बाद लालू के लिए जो चाहे बोलें। और जहाँ तक बात भाजपा की है, लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा से उनकी ‘नजदीकियां’ और उसके शीर्ष नेताओं से उनकी ‘मुलाकातें’ कोई छिपी हुई बात नहीं है।

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कैशलेस-कैशलेस चिल्लाकर क्या ‘ऑक्सीजन’ मिलता है मोदी को – लालू

नोटबंदी पर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का हमलावर रुख लगातार बना हुआ है। कल ही उन्होंने कहा था कि नोटबंदी का वही हश्र होगा जो कांग्रेस के नसबंदी अभियान का हुआ था और आज उन्होंने नोटबंदी पर व्यापक आंदोलन का ऐलान करते हुए कहा कि सभी गैर भाजपा और समाजवादी दलों को एकजुट किया जाएगा। सभी राष्ट्रीय व क्षेत्रीय पार्टियों को एकजुट कर इसके खिलाफ व्यापक रणनीति तैयार की जाएगी। बता दें कि लालू ने नोटबंदी के खिलाफ आंदोलन चलाने के लिए आज आरजेडी की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खुद के खोदे गड्ढ़े में गिर गए हैं। आज मजदूरों, किसानों, छात्रों समेत आमजनों की स्थिति बदतर हो गई है। भाजपा नेताओं के पास ही सारा कालाधन है और उनके पास से ही यह निकल रहा है।
केन्द्र के ‘कैशलेस अभियान’ पर लालू ने कहा कि मोदी कैशलेस-कैशलेस चिल्लाते रहते हैं, इस तरह की फालतू बातें बोलने से क्या उन्हें ‘ऑक्सीजन’ मिलता है? पे-टीएम के प्रचार पर उन्होंने सवाल उठाया कि गांव का गरीब कहां से पे-टीएम करेगा? उसके पास मोबाइल कहां है? प्रधानमंत्री और केन्द्र सरकार पर आरोपों की बौछार के बीच उन्होंने ये आरोप भी लगाया कि केन्द्र सरकार ने दो हजार के नोट पर गांधीजी के चश्मे के पीछे भाजपा का स्वच्छता का स्लोगन लिख दिया है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच हो और इसे तुरंत हटाया जाए।
नोटबंदी के मुद्दे पर नीतीश के साथ मतभेद को खारिज करते हुए लालू ने कहा कि जनता की समस्या पर हम और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक साथ हैं। महागठबंधन की सरकार में कोई टकराव नहीं है। गौरतलब है कि नीतीश पहले दिन से नोटबंदी का समर्थन कर रहे हैं, हालांकि इसे लागू करने के तरीके से उनकी असहमति जरूर थी।
बता दें कि इस मुद्दे को लेकर लालू के आवास पर सभी जिलों और प्रखंडों से कार्यकर्ता व नेता जुटे थे। इस कार्यक्रम में प्रख्यात अर्थशास्त्री मोहन गुरूमूर्ति को भी नोटबंदी से होने वाले ‘नुकसान’ और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इसके ‘कुप्रभावों’ को लेकर प्रस्तुतिकरण देने बुलाया गया था। गुरुमूर्ति ने आशंका जताई कि सरकार के इस कदम से देश की जीडीपी में 2.5 प्रतिशत का नुकसान हो सकता है।
बहरहाल, कार्यक्रम में तय किया गया कि केन्द्र के इस ‘जनविरोधी’ कदम के खिलाफ पटना में जल्द ही विशाल रैली आयोजित की जाएगी। उससे पहले 20 से 26 दिसंबर के बीच पंचायत से प्रखंड स्तर तक जनजागरुकता अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद 28 सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में लालू-राबड़ी के साथ-साथ रघुवंश प्रसाद सिंह, जगदानंद सिंह, अब्दुल बारी सिद्दीकी, रामचन्द्र पूर्वे आदि पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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अपने ‘निश्चय’ से मधेपुरा की ‘चेतना’ छू गए मुख्यमंत्री

निश्चय यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल मधेपुरा पहुँचे। उन्होंने यहाँ कई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया, अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की और स्थानीय बीएन मंडल स्टेडियम में ‘चेतना सभा’ को संबोधित किया। मधेपुरावासियों से अपने ‘विज़न’ को साझा करते हुए उन्होंने एक बार फिर विश्वास दिलाया कि उनके साहसिक और करिश्माई नेतृत्व में मधेपुरा समेत बिहार के सभी जिले विकास के पथ पर अबाध चलते रहेंगे।

गौरतलब है कि शुक्रवार से पूरे राज्य में युवा कौशल विकास कार्यक्रम की शुरुआत की गई। मधेपुरा में इसका शुभारंभ स्वयं मुख्यमंत्री ने किया। मधेपुरा बायपास रोड स्थित समिधा ग्रुप कम्प्यूटर संस्थान पहुंचकर उन्होंने कौशल विकास केन्द्र तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसके उपरान्त बीएन मंडल स्टेडियम में आयोजित चेतना सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं के कौशल से बिहार का विकास होगा। युवाओं को प्रतिभा निखारने के लिए कम्प्यूटर की समुचित जानकारी दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी मात्र 13 प्रतिशत छात्र ही उच्च शिक्षा ले पाते हैं। इसमें बढ़ोतरी के लिए सरकार प्रयासरत है। छात्रों को चार लाख रुपये का क्रेडिट कार्ड दिया जा रहा है। युवाओं को रोजगार खोजने के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये भी दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी कॉलेजों में वाई-फाई की सुविधा मिलेगी। हर जिले में इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक, आईटीआई व पारा मेडिकल कॉलेज तथा जीएनम व एएनएम स्कूल खोले जाएंगे।

सात निश्चय योजना की बाबत मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी सफलता से बिहार की 75 प्रतिशत समस्याएं खत्म हो जाएंगी। आने वाले चार वर्षों में हर घर में शौचालय होगा। हर घर नल का जल होगा। हर गांव की गली पक्की होगी और नालियों का निर्माण होगा। साथ ही हर घर में बिजली का कनेक्शन होगा। इसके लिए सर्वे अंतिम चरण में है और लोगों की सूची बनाई जा रही है।

शराबबंदी को मजबूत निर्णय बताते हुए नीतीश कुमार ने लोगों से समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि शराबबंदी से समाज का वातावरण बदल गया है। उन्होंने बड़े विश्वास के साथ कहा कि यदि पूरे देश में शराब बंद कर दी जाए तो भारत विकास में चीन को भी पीछे छोड़ देगा। आगे उन्होंने कहा कि 21 जनवरी को शराबबंदी के दूसरे चरण की शुरुआत विशाल मानव-श्रृंखला के साथ की जाएगी जिससे बिहार का संदेश पूरे विश्व में जाएगा।

अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने मधेपुरा में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया तथा सुखासन गांव में सात निश्चय के तहत हो रहे विकास कार्यों का जायजा लिया। सुखासन जाने के क्रम में वे मधेपुरा के पूर्व सांसद स्वर्गीय आरपी यादव के तुनियाही स्थित समाधि स्थल भी गए। शाम में उन्होंने स्थानीय झल्लू बाबू सभागार में अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की।

शुक्रवार के अतिव्यस्त कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने मधेपुरा में ही रात्रि विश्राम किया और आज सुबह 9 बजे देवाधिदेव महादेव के दर्शन हेतु सुप्रसिद्ध सिंहेश्वर स्थान गए। विगत कुछ वर्षों से आयोजित हो रहे और इस इलाके के आकर्षण का केन्द्र बन चुके ‘सिंहेश्वर महोत्सव’ का श्रेय उन्हें ही जाता है।

मुख्यमंत्री की यात्रा के दौरान उनके साथ जिले के प्रभारी सह ऊर्जा मंत्री विजेन्द्र यादव, आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो. चन्द्रशेखर, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अब्दुल गफूर, विधान परिषद के उपसभापति हारून रसीद, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, डीजीपी पीके ठाकुर, डीएम मो. सोहैल आदि मौजूद रहे। अपने ‘निश्चय’ से मधेपुरा की ‘चेतना’ को छूकर मुख्यमंत्री निश्चय यात्रा के अगले पड़ाव सहरसा के लिए रवाना हो गए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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जेडीयू ने कहा रघुवंश को कंट्रोल में रखें लालू

जेडीयू और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए अपने तल्ख तेवर और बयानों से चर्चा में रहने वाले आरजेडी के वरिष्ठ नेता व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह को जेडीयू ने बड़े सख्त लहजे में कहा कि वे ‘महागठबंधन धर्म’ से बाहर निकल रहे हैं और साथ में ये भी कि अगर पार्टी सुप्रीमो लालू ने अपने इस नेता को ‘कंट्रोल’ नहीं किया तो ‘कार्रवाई’ की बात भी सोची जा सकती है।
गौरतलब है कि रघुवंश ने बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर बयान दिया था कि इन दिनों नीतीश की नजदीकी भाजपा से बढ़ रही है और इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। पहले भी नीतीश भाजपा के साथ थे। ये बयान देकर रघुवंश ने जो ‘आग’ लगाई उसमें भाजपा नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने ये कहकर और ‘घी’ डाल दिया कि जो व्यक्ति 17 साल तक साथ रहने के बाद भाजपा को धोखा दे सकता है, वो किसी को भी दे सकता है। रघुवंश प्रसाद को लगता होगा कि जो भाजपा का नहीं हुआ वो लालू के साथ कब तक रहेगा?
इन बयानों के बाद तिलमिलाए जेडीयू के प्रवक्ता संजय सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि रघुवंश प्रसाद सिंह अपना दिमागी संतुलन खो चुके हैं और आजकल वे ‘पॉलिटिकल कोमा’ में हैं। आगे उन्होंने लालू से रघुवंश पर लगाम लगाने की अपील करते हुए कहा कि लालूजी हमारे महागठबंधन के वरिष्ठ नेता हैं और मैं उनसे अपील करता हूँ कि वो अपने नेता पर लगाम लगाएं।
पर रघुवंश तो रघुवंश ठहरे। वे कहाँ चुप रहने वाले थे। उन्होंने उल्टा जेडीयू से सवाल किया कि मुझे ‘महागठबंधन धर्म’ वाले लोग बताएं कि नोटबंदी पर अलग स्टैंड लेना कौन-सा गठबंधन धर्म है। इतना ही नहीं, उन्होंने एक बार फिर नीतीश पर आरोप लगाते हुए कहा कि नीतीश कुमार जानबूझकर मुझे गाली दिलवा रहे हैं।
बहरहाल, जेडीयू-आरजेडी के बीच आए दिन नोक-झोंक होती ही रहती है और ज्यादातर अवसरों पर कारण रघुवंश बाबू ही होते हैं। पार्टी ने उन्हें कई बार चेतावनी भी दी है लेकिन उनके बयानों की तल्खी घटने की जगह बढ़ती ही जा रही है। उन जैसे वरिष्ठ, अनुभवी व कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे नेता ऐसा ‘अगंभीर’ बर्ताव करेंगे यह बात पचती नहीं। ऐसे में एक सवाल यह उठ खड़ा होता है कि कहीं यह सब ‘प्रायोजित’ और ‘सोची-समझी रणनीति’ के तहत तो नहीं हो रहा? खैर, ये राजनीति है और राजनीति में ‘रघुवंश की रीत’ सदा से चली आई है। इन दांव-पेंचों में ज्यादा न ही उलझें तो बेहतर है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश की शराबबंदी पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

सुप्रीम कोर्ट ने आज एक अहम फैसले के तहत सभी हाइवे पर शराब की बिक्री पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की बेंच द्वारा दिए गए इस फैसले में कहा गया है कि सभी राज्यों में नेशनल हाइवे पर या उसके आसपास पड़ने वाली शराब की दुकानों के लाइसेंस खत्म कर दिए जाएंगे। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से बिहार के सत्तारूढ़ महागठबंधन में खुशी की लहर है। खास तौर पर जेडीयू के नेताओं का उत्साह देखते ही बनता है। पार्टी इसे अपने मुखिया नीतीश कुमार की शराबबंदी मुहिम पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर मान रही है।

बहरहाल, बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे पर शराब की दुकानें पूरी तरह से बंद करवाने के लिए अगले साल एक अप्रैल तक की समयसीमा तय की गई है। इन शराब की दुकानों का एक अप्रैल के बाद रिन्युअल नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद जेडीयू में जैसे नई जान आ गई है। पार्टी के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि पार्टी ने शराबबंदी का फैसला किया और तमाम आलोचनाओं के बावजूद आज भी अडिग है। कोर्ट ने भी माना है कि शराबबंदी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की मुहिम रंग ला रही है और हम इस फैसले से बहुत ही खुश हैं। हमारे फैसले को संवैधानिक स्वीकृति मिली है।

उत्साह से लबरेज जेडीयू नेता व प्रवक्ता संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर कहा कि बिहार सरकार की नीतियों पर अब पूरे देश को चलना होगा। अब केन्द्र की सरकार को भी शराबबंदी पूरे देश में लागू करने के लिए सोचना होगा। आरजेडी नेता और बिहार सरकार के मंत्री आलोक मेहता ने भी फैसले की तारीफ की और कहा कि लोग शराब पीकर हाइवे पर गाड़ी चलाते थे और दुर्घटना के शिकार होते थे। शराब हाइवे पर होने वाली दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह थी। आज कोर्ट ने दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए अच्छा फैसला दिया है। अब बिहार सरकार की शराबबंदी की मुहिम आन्दोलन का रूप लेगी।

आगे जो भी हो, कोर्ट के इस फैसले के बाद नीतीश के हौसले में अनगिनत पर लग गए होंगे, इसमें कोई दो राय नहीं। अब अपनी भावी योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए वो दोगुनी ताकत से लगेंगे। कहने की जरूरत नहीं कि इसके बाद राज्य और देश में कई समीकरण बनेंगे और कई बिगड़ेंगे, जिन पर राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र होगी।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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क्या मोदी की नोटबंदी से देश को मिलेगी आर्थिक आजादी ?

8 नवम्बर 2016 से देश में 500 और 1000 के नोट पर जैसे ही मोदी सरकार द्वारा नोट ऑफ इंट्रोगेशन (?) लगायी गई, वैसे ही अखबार नबीसों द्वारा बुद्धिजीवियों, अर्थशास्त्रियों, व्यापारियों एवं शिक्षाशास्त्रियों की गोष्ठियां बुलाई जाने लगी- जिसमें लोगों द्वारा भोगी जा रही परेशानियों के बावजूद नोटबंदी के कारण “कालेधन” पर चोट और देश को मिलने वाली आर्थिक आजादी की चर्चाएं शुरु हो गई |

चन्द नेताओं को छोड़कर भारत के सवा सौ करोड़ लोग देश को आगे ले जाने के लिए परेशानियों की गठरियाँ माथे पर लिए और नोटबंदी की सराहना करते हुए एक दूसरे के पीछे सड़कों पर लाइन में खड़े दिखाई देने लगे |

यह भी बता दें कि 5 हफ्ते बीत जाने के बाद भी यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा | तभी तो स्थानीय पार्वती सायंस कॉलेज में- “नोटबंदी एक आर्थिक क्रान्ति” विषय पर नवगठित “उड़ान फाउंडेशन” के बैनर तले रविवार को एक परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसका उद्घाटन अध्यक्ष डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, पी.एस. कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य सह संयोजक डॉ.रामचन्द्र प्रसाद मंडल एवं मुख्य अतिथि मंडल विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री प्रो.प्रज्ञा प्रसाद ने सम्मिलितरुप से किया |

इस अवसर पर परिचर्चा में भाग लेते हुए सभी शिक्षाविदों ने नोटबंदी के पक्ष में अपना विचार व्यक्त किया | जहां प्रखर वक्ता डॉ.रामचन्द्र प्रसाद मंडल सहित प्रो.प्रज्ञा प्रसाद, वेदव्यास कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आलोक कुमार, चर्चित समाजशास्त्री डॉ.आलोक कुमार, पूर्व प्राचार्य सोनेलाल कामत आदि ने कहा कि नोटबंदी का निर्णय आतंकवाद एवं नक्सलवाद सरीखे अन्य चरमपंथी मानवता विरोधी ताकतों को कमजोर करनेवाला है वहीँ प्रखर साहित्यकार डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप, प्रो.मणि भूषण वर्मा एवं दशरथ प्रसाद सिंह सहित डा.मधुसूदन यादव, प्रो.ऋषिदेव अद्री, राहुल यादव, मो.राही आदि ने नोटबंदी को कालेधन पर अंकुश बताया |

यह भी जानिये कि ग्रामीण परिवेश से आये बड़गांव के चाणक्य मिश्र ने तो नायाब विचार व्यक्त करते हुए यही कहा कि दवाई की तरह यदि नोट पर भी एक्सपाइरी डेट (10 वर्ष का) अंकित कर दिया जाय तो नोट सदा गतिशील रहेगा बल्कि पूर्व जैसा ठहरा हुआ कालाधन बनकर कभी मुंह काला नहीं होने देगा |

अंत में अपने अध्यक्षीय संबोधन के आरम्भ में जहां डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने “उड़ान फाउंडेशन” के लिए यही कहा कि तेरी उड़ान में कभी विराम ना हो वहीँ नोटबंदी के बाबत डॉ.मधेपुरी ने कहा- जहां नोटबंदी नमो की राष्ट्रीय क्रांति है वहीँ शराबबंदी नीतीश की समाजिक क्रान्ति |

मौके पर उपेन्द्र रजक, मो.राही, एस.एस.भारती, गणेश कुमार, आनंद कुमार, प्रो.विश्वमोहन प्रसाद, नंदन कुमार आदि की उपस्थिति देर तक बनी रही | अंत में रुद्र नारायण यादव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ विचार गोष्ठी के समापन की घोषणा कर दी गई |

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मधेपुरा चल पड़ा हिन्दी शब्द स्पर्धा की नई राह पर

हिन्दी को ऊंचाई प्रदान करने हेतु जिले के 27 स्कूलों के वर्ग- 1 से 10 तक के स्कूली बच्चों के बीच द्वितीय अन्तर विद्यालय हिन्दी शब्द स्पर्धा- 2016 का वृहत आयोजन पार्वती सायंस कॉलेज के बड़े-बड़े हॉल में किया गया जिसमें छोटे-बड़े 625 बच्चों के छह अलग-अलग ग्रुपों में अलग-अलग रोचक प्रश्न-पत्रों के साथ परीक्षाएं ली गई |

वे छह ग्रुप इस प्रकार हैं- किडोज-1, किडोज-2, सब-जूनियर (तृतीय-चतुर्थ वर्ग), जूनियर (पंचम-षष्टम वर्ग), सीनियर (सप्तम-अष्टम वर्ग) और सुपर सीनियर (नवम-दशम वर्ग) |

यह भी बता दें कि प्रारंभिक परीक्षा 11 दिसंबर को संपन्न हुई तथा फाइनल 18 दिसंबर को उन्हीं छात्रों की परीक्षा ली जायेगी जो इस परीक्षा में क्वालीफाय करेंगे | फाइनल परीक्षा में सभी छह कोटियों में टॉप 10 यानि कुल 60 प्रतिभागी छात्रों को मोमेंटो एवं प्रमाण-पत्रों के साथ निर्धारित की जानेवाली तिथि को उत्सवी माहौल में समारोहपूर्वक पुरस्कृत किया जायगा |

बता दें कि आरम्भ में जब इंगलिश स्पेलिंग बी. चैंपियनशिप का यहां आयोजन किया गया था तभी पुरस्कार वितरण के दरमियान मधेपुरा के तत्कालीन एस.पी.  कुमार आशीष (भा.पु.से.) ने समाजसेवी-साहित्यकार व संरक्षक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सहित अध्यक्ष व कुलानुशासक डॉ.विश्वनाथ विवेका एवं सचिव सावंत कुमार रवि – सोनीराज आदि से इसे हिन्दी में भी कराने की पुरजोर चर्चाएं की  थी और तभी से इसकी लोकप्रियता बढ़ती चली जा रही है- यानि हिन्दी शब्दों के प्रति जागरूकता आने से वे शुद्ध-शुद्ध लिखने-पढ़ने और शुद्ध उच्चारण के साथ बोलने लगे हैं |

हिन्दी शब्द स्पर्धा की इस द्वितीय प्रारंभिक परीक्षा को संपन्न करने में अन्त तक देखे गये- संरक्षक डॉ.मधेपुरी, पीएस कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ.रामचंद्र प्रसाद मंडल, सचिव सावंत कुमार रवि सहित कोषाध्यक्ष सोनी राज, अमित कुमार अंशु, विजय कुमार, रजाउल आलम, मनीष राज, रवि कुमार, अजय कुमार गोविंद एवं रियांशी-शिल्पी-कोमल-शिल्पा आदि |

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भूख मानवाधिकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती

बिहार मानवाधिकार आयोग एवं मधेपुरा जिला प्रशासन के तत्वावधान में समाहरणालय सभा-भवन में आयोजित “अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस” का उद्घाटन मधेपुरा के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल, मुख्य अतिथि जिला परिषद अध्यक्षा श्रीमती मंजू देवी, अध्यक्षता एडीएम मो.मुर्शीद आलम एवं संचालन समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने किया |

यह भी बता दें कि विषय प्रवेश करते हुए सर्वप्रथम डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में “भूख” को मानवाधिकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि यू.एन.ओ. द्वारा सर्वप्रथम 10 दिसंबर, 1948 को मानवाधिकारों की घोषणा की गई-

“प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्र पैदा होता है और उसे गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए समान अधिकारों की जरूरत होती है |” 

Dr.Bhupendra Madhepuri delivering speech at Samaharnalaya Sabha Bhawan Madhepura.
Dr.Bhupendra Madhepuri delivering speech at Samaharnalaya Sabha Bhawan Madhepura.

उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक समानता के लिए संघर्ष के साथ-साथ दासता-वेदना एवं अमानुषिक अत्याचार को निर्मूल करने हेतु आज के दिन हमें संकल्प लेना होगा |

आगे कोशी वूमन डिग्नीटी फोरम की अध्यक्षा डॉ.शांति यादव ने विस्तार से मानवाधिकारों पर चर्चा करते हुए अंत में कहा कि भोजन का अधिकार, काम करने का अधिकार तथा शिक्षा का अधिकार भी मानवाधिकार के अंतर्गत समाहित है | डॉ.यादव ने यह भी कहा कि मानवाधिकार मूलतः एक पाश्चात्य संकल्पना है जिसकी जड़ें भारत में भी गहराती गई हैं |

जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी ने गरीबों के कार्यो को जल्द निष्पादित करने हेतु कार्यालय कर्मियों को सलाह दी और साधुवाद भी | समाजसेवी मो.शौकत अली, मो.महताब, विजय कुमार झा सहित कई अधिकारी-पदाधिकारी ने इस अवसर पर प्रत्येक व्यक्ति को कम-से-कम दस-दस व्यक्तियों को जागरुक करने हेतु संकल्प लेने की बातें कही |

अंत में जिलाधिकारी मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने उदघाटित करते हुए अपने संबोधन में यही कहा कि ‘मनुष्याधिकार’ की जगह ‘मानवाधिकार’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि स्त्री, पुरुष व नपुंसक तीनों मिलाकर मानव कहलाता है | उन्हीं तीनों यानी मानव के लिए सेवा के अधिकार की, सम्मान की रक्षा करना ही मानवाधिकार के दायरे में आता है |

अंत में डॉ.मधेपुरी द्वारा धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अल्पाहार पैक के साथ समारोह समाप्ति की घोषणा की गई |

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