जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव आठ दिवसीय दौरे पर मधेपुरा आ रहे हैं। वे 16 से 23 जनवरी तक मधेपुरा संसदीय क्षेत्र का दौरा करेंगे। इस दौरान वे अपने विकास मद की राशि से पूरी की गई विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन और कुछ नई योजनाओं का शिलान्यास करेंगे।
बता दें कि शरद यादव 15 जनवरी को मकर संक्रान्ति के अवसर पर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह द्वारा दिए गए चूड़ा-दही भोज में शामिल होने पटना आए थे। 16 से 23 जनवरी तक मधेपुरा संसदीय क्षेत्र के सघन दौरे के उपरान्त वे 24 जनवरी को पटना में जननायक कर्पूरी ठाकुर की 93वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। पटना से ही वे दिल्ली के लिए प्रस्थान कर जाएंगे।
मधेपुरा एवं सहरसा जदयू के जिला अध्यक्षों ने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया है कि वे 16 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत व सम्मान के लिए सहरसा पहुँचें।
मधेपुरा के पूर्व सांसद, प्रखर समाजसेवी एवं शिवनंदन प्रसाद मंडल विधि विश्वविद्यालय के संस्थापक आर. पी. यादव के व्यक्तित्व व कृतित्व में आस्था एवं विश्वास रखने वाले समर्थकों व सहचरों द्वारा उनकी 83वीं जयंती श्रद्धापूर्वक और सादगीपूर्ण तरीके से मनाई गई। इस अवसर पर विधि महाविद्यालय में पुष्पांजलि कार्यक्रम के साथ-साथ विधि महाविद्यालय के प्राचार्य व आर.पी. साहब के पुत्र सत्यजीत यादव के निवास पर चूड़ा-दही-तिलकुट का भोज भी आयोजित था। मकर संक्रान्ति के दिन ही जयंती होने के कारण आयोजन में उत्सव-सा माहौल बन गया था।
उपरोक्त समारोह में बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री व स्थानीय विधायक प्रो. चन्द्रशेखर सहित विभिन्न दलों के नेताओं, भू.ना. मंडल विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों एवं बुद्धिजीवियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। प्रो. चन्द्रशेखर ने आर.पी. साहब के तैलचित्र पर माल्यार्पण के बाद उन्हें रचनात्मक प्रवृत्ति का सांसद बताते हुए कहा कि वे हमेशा अपने क्षेत्र के लोगों की सुधि रखने में तत्परता दिखाया करते थे। उन्हीं का अनुकरण करते हुए मैं अभी मधेपुरा वार्ड नं. 20 के प्रो. दिलीप कुमार यादव को चार लाख का चेक प्रदान करने आया हूँ जिनके 18 वर्षीय पुत्र मानस की मौत डूब जाने के कारण हुई थी।
इस अवसर पर डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि लम्बे समय तक संसद में मधेपुरा का प्रतिनिधित्व करने वाले आर.पी. साहब क्षेत्र के लोगों के बीच जितने मृदुभाषी थे, उच्चाधिकारियों के लिए उतने ही कठोर अनुशासन वाले। प्रो. श्यामल किशोर यादव ने कहा कि सांसद के रूप में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। जयंती सह भोज समारोह में पूर्व जिला परिषद् सदस्य अरविन्द कुमार यादव, शिक्षक नेता परमेश्वरी प्रसाद यादव, प्रो. निरोद कुमार निराला, पूर्व प्राचार्य प्रो. सच्चिदानन्द यादव, डॉ. आलोक कुमार, प्रो. देवेन्द्र यादव, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, प्रो. बिजेन्द्र नारायण यादव, तेजनारायण यादव, प्रो. गणेश कुमार, प्रो. अशोक कुमार, प्रो. अरुण कुमार, प्रो. सुजीत मेहता, बैद्यनाथ चौहान, पप्पू कुमार, युगल पटेल, आनंद मंडल, लोक अभियोजक इन्द्रकान्त चौधरी, राजद जिलाध्यक्ष देवकिशोर यादव आदि उपस्थित थे।
विश्वविद्यालय एवं शिक्षण-संस्थाओं से पुष्पांजलि व श्रद्धांजलि देने वालों की आवाजाही दिन भर देखी गई। इनमें कुलसचिव डॉ. कुमारेश प्रसाद सिंह, कुलानुशासक डॉ. विश्वनाथ विवेका, सम्पदा पदाधिकारी डॉ. शैलेन्द्र कुमार, सिंडिकेट सदस्य डॉ. परमानन्द यादव, डॉ. जवाहर पासवान, विद्यानन्द यादव, प्राचार्य डॉ. हजारी लाल साह जौहरी एवं विधि परामर्शी बीएनएमयू डॉ. शिवनारायण यादव प्रमुख थे।
समाहरणालय सभा कक्ष में सिंहेश्वर मेला समिति की बैठक जिला पदाधिकारी सह समिति के अध्यक्ष मो. सोहैल की अध्यक्षता में हुई जिसमें समिति के सदस्यों, जिले के विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों एवं धार्मिक न्यास परिषद् सिंहेश्वर के वर्तमान व पूर्व सदस्यों की उपस्थिति देखी गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि मेले में चौबीसो घंटे बिजली, पानी के लिए पर्याप्त संख्या में चापाकल, समुचित साफ-सफाई एवं चाक-चौबंद सुरक्षा की व्यवस्था की जाएगी। मेले में आने वालों की सुविधा हेतु आवश्यकतानुसार शौचालय-निर्माण का निर्णय भी लिया गया। इसके अतिरिक्त मेले में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर दवा व चिकित्साकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ चौबीसो घंटे एम्बुलेंस तैनात रखने का निर्देश भी दिया गया।
मेले में मनोरंजन की चर्चा के दरम्यान डीएम सह अध्यक्ष मो. सोहैल द्वारा जब सिंहेश्वर न्यास के पूर्व एवं वर्तमान सदस्यों से एक-एक कर विगत मेलों में बंद किए गए थियेटर को पुन: चलाने पर विचार मांगा गया तो सबों ने थियेटर चलाने पर बल दिया – सिवाय शिक्षाविद्-साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी के। डॉ. मधेपुरी ने इस बाबत तत्कालीन डीएम गोपाल मीणा द्वारा लिए गए निर्णय की च्रर्चा करते हुए मैट्रिक परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों, अभिवावकों एवं हेल्परों की भीड़ के बीच मेले की ‘भयावह’ भीड़ को सम्भालने में प्रशासन को होने वाली परेशानियों की ओर ध्यान आकृष्ट किया। पूरी बात को विस्तार से सुनने के बाद कदाचार के कट्टर विरोधी डीएम मो. सोहैल ने कदाचाररहित परीक्षा के संकल्प को दुहराते हुए यह घोषणा कर दी कि सिंहेश्वर मेले में थियेटर लगेगा लेकिन मैट्रिक परीक्षा के समापन (19 मार्च) के बाद क्योंकि परीक्षा की पवित्रता के बाद ही मनोरंजन का स्थान आता है।
बैठक में सिंहेश्वर मेले का डाक 10 लाख 35 हजार की उच्चतम बोली लगाने वाली सिंहेश्वर न्यास समिति को दिया गया। बता दें कि गत साल न्यास द्वारा यह डाक 5 लाख 51 हजार में ही लिया गया था। समिति द्वारा एक अन्य निर्णय “सिंहेश्वर महोत्सव” के बाबत लिया गया कि 8, 9 एवं 10 मार्च को त्रि-दिवसीय महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए समिति ने बिहार सरकार के पर्यटन विभाग को विशेष रूप से साधुवाद दिया।
सम्पूर्ण कार्रवाई में सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ‘निराला’, सामान्य शाखा प्रभारी श्रीमती राखी, कार्यपालक पदाधिकारी विनय कुमार सिंह सहित कार्यपालक अभियंता पीएचईडी, विद्युत विभाग, वन विभाग सहित शिक्षा एवं चिकित्सा आदि अन्य विभागों के पदाधिकारीगण एवं न्याय समिति के पूर्व एवं वर्तमान सदस्य श्री हरि टेकरीवाल, विश्वनाथ प्राणसुक्खा, डॉ. दिवाकर सिंह, सरोज सिंह, डॉ. मधेपुरी सहित व्यवस्थापक महेश्वर प्रसाद सिंह आदि की उपस्थिति देखी गई।
विधानसभा चुनाव के ‘सदमे’ से उबरने में बेशक थोड़ा वक्त लगा हो लेकिन ‘हम’ ने बिहार में अपने ‘होने’ का अहसास नए सिरे से कराने की जद्दोजहद शुरू कर दी है। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा – सेक्युलर (‘हम’) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी के निर्देशन एवं प्रदेश अध्यक्ष वृषिण पटेल के आह्वान पर कल यानि सोमवार 12 जनवरी 2016 को पार्टी ने बिहार के सभी जिला मुख्यालयों पर ‘किसानविरोधी’ और ‘जनविरोधी’ सरकार के खिलाफ एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया। मधेपुरा में भी जिला अध्यक्ष अध्यक्ष शौकत अली के नेतृत्व में ‘हम’ ने किसानों की समस्या एवं हत्या, अपहरण आदि की बढ़ती घटनाओं को लेकर राज्य सरकार के प्रति आक्रोश जताया और इस बहाने लोगों से जुड़ने और पार्टी की जड़ जमाने की कोशिश की।
मोहम्मद शौकत अली की अध्यक्षता में समाहरणालय गेट के सामने धरना देते हुए विभिन्न प्रखंडों के अध्यक्ष किसानों की धान की खरीद नहीं होने, बोनस नहीं दिए जाने और पूर्व बकाये का भुगतान नहीं किए जाने पर जमकर बरसे। मौके पर ‘हम’ के जिला छात्र अध्यक्ष नीतीश कुमार, उपाध्यक्ष रविन्द्र कुमार, जिला संगठन सचिव शिवदेव मंडल एवं जिला प्रवक्ता अशोक झा ने राज्य में अपराध व भ्रष्टाचार की बढ़ती घटनाओं को लेकर सरकार को घेरने की पुरजोर कोशिश की। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष शौकत अली के साथ प्रखंड अध्यक्ष मनिका देवी (सिंहेश्वर), पवन गुप्ता (चौसा), राजेन्द्र चौधरी (बिहारीगंज), नित्यानंद ऋषिदेव (कुमारखंड), गुद्दर ऋषिदेव (घैलाढ़) सहित बनिलाल, प्रयाग व रामचन्द्र ऋषिदेव ने जिला पदाधिकारी को पार्टी की ओर से ज्ञापन भी सौंपा।
धरना-प्रदर्शन के बहाने ‘हम’ ने मधेपुरा का ध्यान तो खींचा लेकिन इसकी एक दूसरी वजह भी रही। जी हाँ, इसी दिन पार्टी की अन्दरूनी तनातनी और खेमेबाजी भी सामने आई। मोहम्मद शौकत अली की अध्यक्षता में समाहरणालय के समक्ष दिए जा रहे धरना के समानान्तर स्थानीय कला भवन के समक्ष एक और धरना दिया गया जिसकी अध्यक्षता सिंहेश्वर से पार्टी की प्रत्याशी रही मंजू देवी ने की और धरने का संचालन ‘हम’ के नेता ध्यानी यादव ने किया। इस धरने में चन्द्रदेव पंकज, मनोज यादव, भूषण झा, चन्दन मंडल, संजय राय, गजेन्द्र पासवान, सुरेन्द्र सरदार आदि उपस्थित थे।
उद्देश्य भले ही दोनों खेमों का समान हो और दोनों ही खेमे शीर्ष नेतृत्व के प्रति समर्पण भी जता रहे हों लेकिन जिले में चुनाव के बाद हो रहे पहले बड़े आयोजन में पार्टी के इस तरह दो खेमे में बंट जाने से इसके समर्थक निराश देखे गए। दोनों खेमे को आज नहीं तो कल ये समझना ही होगा कि उद्देश्य बड़ा हो तो छोटे मतभेदों को दूर कर लेना ही श्रेयस्कर होता है।
शिक्षा विभाग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए प्राइमरी से प्लस टू तक के बच्चों एवं शिक्षकों के मूल्यांकन (एसेसमेंट) की घोषणा की है। मूल्यांकन का कार्य फरवरी 2016 से प्रारम्भ होगा। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को लेकर शिक्षा विभाग ने ये ‘भगीरथ’ संकल्प ले तो लिया है लेकिन मूल्यांकन की ‘गंगा’ आसानी से ‘धरती’ पर उतरने वाली नहीं हैं। जी हाँ, राह में कई मुश्किलें हैं और उनसे वाकिफ होने पर आप भी कुछ ऐसा ही सोचेंगे।
आगे बात करें उससे पहले मूल्यांकन की प्रक्रिया और उसके उद्देश्य को जानें। शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार जिले से प्रखंड स्तरीय सभी शिक्षा पदाधिकारी एक-एक स्कूल का निरीक्षण करेंगे और किए गए एसेसमेंट के आधार पर जिले के सभी पदाधिकारी यानि डीईओ, डीपीओ, बीईओ आदि की रैंकिंग की जाएगी। रैंकिंग के आधार पर ही इन पदाधिकारियों को वेतन व अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। कहने का मतलब ये कि शिक्षा विभाग ने बच्चों एवं शिक्षकों के मूल्यांकन के बहाने बड़ी सफाई से सभी अधिकारियों की नकेल भी कस दी है।
इसमें कोई दो राय नहीं कि शिक्षा विभाग का ये कदम स्वागतयोग्य है लेकिन ये तमाम पदाधिकारी उन शिक्षकों के एसेसमेंट में क्या लिखेंगे जो वर्ष के बारहों महीने का नाम अंग्रेजी में नहीं बोल पाते या फिर भारत की राजधानी पटना और बिहार की राजधानी दिल्ली बोलते हैं। समस्या केवल शिक्षकों की ‘अशिक्षा’ की ही नहीं है। दूसरी बड़ी समस्या ये है कि सैकड़ों की तादाद में शिक्षक ‘कामचोरी’ भी करते हैं। जी हाँ, वैसे शिक्षकों की तादाद भी कम नहीं है जो ‘साधन-सम्पन्न’ और ‘दबंग’ हैं और उनकी हाजिरी बिना उनके आए बन जाया करती है। बिना सूचना के कई दिनों या कुछ हफ्तों के लिए ‘गायब’ हो जाना तो मामूली बात है।
‘मधेपुरा अबतक’ ने जब इस बाबत स्थानीय शिक्षाविदों से बात की तो ना केवल उनकी चिन्ता और आक्रोश से हम रू-ब-रू हुए बल्कि कई महत्वपूर्ण सुझाव भी सामने आए। इन बुद्धिजीवियों की राय है कि ‘कामचोर’ व बिना सूचना के गायब रहने वाले शिक्षकों पर अविलम्ब कार्रवाई होनी चाहिए। जो शिक्षक पढ़ने-पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं लें और उन्हें नौकरी में बनाए रखने की कोई ‘विवशता’ हो सरकार की तो उन्हें अन्य सरकारी कार्यों – पोलियो अभियान, जनगणना, चुनाव आदि – में स्थायी तौर लगा दिया जाना भी एक विकल्प हो सकता है। दूसरी ओर अच्छे शिक्षकों एवं अच्छी रैंकिंग वाले पदाधिकारियों को पर्याप्त सम्मान व सुविधा मिले, सरकार को ये सुनिश्चित करना चाहिए।
सच तो ये है कि संकल्पित और समन्वित प्रयास से ही शिक्षा की गुणवत्ता वापस लौट सकती है। केवल सरकार को कोसने से काम नहीं होगा। इसके लिए पहले हमें जागना होगा। एक जागरुक समाज में ‘अशिक्षित’ और ‘कामचोर’ शिक्षक की जगह ना तो होनी चाहिए, ना हो सकती है। और हाँ, जब शिक्षक ‘कसौटी’ पर खरे उतरने लगेंगे तब बच्चों की ‘कसौटी भी स्वत: तैयार हो जाएगी। पर क्या इस कार्य के लिए बच्चों और शिक्षकों से पहले हमें खुद का मूल्यांकन नहीं करना चाहिए..?
टी.पी. कॉलेज के विशाल सभा भवन में ठसमठस भरे दर्शकों के समक्ष मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल से प्रशिक्षण प्राप्त मो. शहंशाह ने मधेपुरा में ‘नवाचार रंग मंडल’ का गठन कर अपनी प्रथम प्रस्तुति – ‘कुमतिनगर का किस्सा’ – का सफल निर्देशन एवं मंचन कर खूब तालियाँ बटोरीं। कार्यक्रम की सफलता हॉल के अन्दर बारम्बार बज रही तालियों की अनुगूंज और बाहर खड़े दर्शकों द्वारा आँकी जाती रही।
संसाधनों की कमी के बावजूद भी हास्यशैली पर आधारित लेखक राजकमल नायककृत “कुमतिनगर का किस्सा” अपने उद्देश्य में सफल होता है और दर्शकों पर पूरा प्रभाव छोड़ता है।
एक राज्य है कुमतिनगर, जहाँ का राजा अपने राज्य में लोगों के शिक्षित होने पर पाबंदी लगा देता है। फिर भी गुरु की भूमिका निभाने वाले मो. शहंशाह अपने एक शिष्य ‘आनंद’ के साथ कुमतिनगर के लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। आरम्भ में शिष्य ‘आनंद’ गुरु एवं गुरु ग्रन्थ की अनदेखी कर और लोगों को ठग कर बस अच्छा-अच्छा भोजन ग्रहण करने में लग जाता है। इसके बावजूद राजा ‘आनंद’ को कोतवाल बना देता है। दूसरी तरफ शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने वाले गुरु (मो. शहंशाह) पर राजद्रोह करार कर सिर कलम करने की घोषणा कर देता है।
अचानक कोतवाल बने शिष्य ‘आनंद’ का अंतर्मन जागृत हो जाता है। वह गुरु को सूली पर नहीं चढ़ाने के लिए राजा से प्रार्थना करता है। इसी के साथ शिष्य के अंतर्मन में शिक्षा-शिक्षक एवं ग्रन्थ के प्रति सम्मान व संस्कार जाग उठता है। ऐसा लगता है जैसे शिष्य का स्वप्न टूट चुका हो।
Students & Guardians observing Play “Kumati Nagar ka Kissa” in T.P. College Sabha Bhawan
कालांतर में वह शिष्य ‘आनंद’ अपने गुरु (मो. शहंशाह) के साथ शिक्षा के प्रचार-प्रसार में अहर्निश इस कदर काम करने लगता है जैसे आधुनिक बिहार के निर्माता अमर स्वतंत्रता सेनानी एवं बिहार के प्रथम विधि मंत्री बाबू शिवनंदन प्र. मंडल के जीवन-दर्शन –
….Not a single soul should remain uneducated on the Earth.
को कुमतिनगर की घरती पर जन-जन तक ले जाने के बाद ही दम लेंगे दोनों। दोनों गुरु-शिष्य मिलकर ज्ञान के तिरस्कार को खत्म करते हैं और विनाश के द्वार को बंद कर देते हैं।
टी.पी. कालेज के विशाल सभागार में “नवाचार रंग मंडल” की प्रथम प्रस्तुति ‘कुमतिनगर का किस्सा’ का उद्घाटन प्रधानाचार्य डॉ. एस.एल.एस. जौहरी, डॉ. मधेपुरी, प्रो. एस. के. यादव, डॉ. जे. पासवान, डॉ. के.डी. यादव, दशरथ प्र. सिंह, ध्यानी यादव आदि ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर डॉ. विश्वनाथ विवेका, डॉ. अरुण, प्रो. अद्री, डॉ. अरविन्द एवं रुपेश कुमार आदि की उपस्थिति में किया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य डॉ. जौहरी ने कहा कि कला और संस्कृति जीवन को संस्कारित करती है। जीवन का अहम हिस्सा बनकर उसे आगे बढाती है। मौके पर अन्य वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ भी प्रतिभाओं के सामने बाधा बनकर खड़ा नहीं रह सकता।
वहीँ डॉ. मधेपुरी ने कहा कि मधेपुरा के नाम को रोशन करने वाली प्रतिभाओं के प्रतीक – सोनी, पायल, रियांशी, रवि, हर्षवर्धन सिंह राठौड़, मो. शहंशाह आदि – को आर्थिक मदद देते रहने के लिए वे हमेशा खड़े रहे हैं और भविष्य में भी प्रतिभाओं के रास्ते में पैसे की बाधा को दूर करने के लिए वे हमेशा तत्पर व मुस्तैद रहेंगे। नाटक की सफलता के लिए मो. आतिफ, इमरान, दीपक, राहुल, रवि, बमबम, श्रीकांत, संदीप, कैसर, आनंद, सुमित, निशा, कार्तिक के साथ-साथ गायक रोशन कुमार, अंशु, गुड्डू, प्रिया, कशिश, परवीण आदि ने अपनी अच्छी उपस्थिति दर्ज करायी।
वस्त्र-रूप व मंच सज्जा सहित विभिन्न प्रकार के सहयोग के लिए सोनी राज, प्रीति, शिवानी, दिलखुश, अंजलि, आदित्य, शुभम-अमल-मिथुन सहित शहनवाज-शकील एवं उज्ज्वल-हर्षवर्धन-रिजवान-विजय आदि पताका फहराते रहे। मंच संचालन अंशु एवं हर्षवर्धन सिंह राठौड़ ने किया।
बाल कल्याण समिति मधेपुरा द्वारा विगत एक्स-मास की छुट्टी में 10 बच्चों को मजदूरी कराने के लिए दिल्ली-पंजाब ले जा रहे गिरोह से छुटकारा दिलाकर उन्हें उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया |
‘Madhepura Abtak’ को प्राप्त जानकारी के अनुसार ऐसे घृणित अपराध के तीन ठीकेदारों द्वारा मधेपुरा जिले के विभिन्न गाँवों के दस किशोरों को माँ की ममतामयी छांव से दूर ले जाने का प्लान रचा गया | फलस्वरूप उन दसो-बालकिशोरों –आलमनगर के एक मुकेश कुमार, रतवाड़ा के तीन- ध्रुव-मिथुन-सौरभ कुमार, खुरहान के दो- राधे और रिपन, चिरौरी के कन्हैया, गंगापुर के पवन, मोरसंडा के गौरव कुमार एवं घुरगाँव के रविन्द्र कुमार को वे तीनो घृणित अपराध कर्मी अपने कब्जे में कर लिये |
ये सभी किशोर सरकारी स्कूल के वर्ग 3 से 8 में पढने की बात कहते रहे जिनमें से चार तो मधेपुरा अबतक को स्कूली ड्रेस में ही दिखे | ऐसे उन्मुक्त बचपन को बाल मजदूरी की खाई में गिरने से पहले ही जी.आर.पी. की सूचना पर चाईल्ड लाइन सहरसा के अधिकारियों ने छापेमारी कर अपने कब्जे में ले लिया और माँ-बाप के ममत्व भरे मंदिर में पूजा-अर्चना करने हेतु वापस करने के लिए बाल कल्याण समिति (सी.डब्लू.सी.) सहरसा को हस्तगत करा दिया |
सी.डब्ल्यु.सी के सदस्य डॉ.नरेश रमण एवं अध्यक्ष पूनम कुमारी दास ने मुक्त कराये गये इन बाल मजदूरों की सूचना सहरसा श्रम अधीक्षक को दे दी | बच्चों ने बताया कि बिना अभिभावकों की सहमति के वे इन मानव व्यापारियों द्वारा दिये गये लोभ के कारण उनके साथ जाने को तैयार हुए थे जबकि बच्चों ने ठीकेदारों के नाम तक नहीं जानने की बात स्वीकार की |
सी.बी.आई. के हालिया रिपोर्ट के अनुसार 8 हजार मासूम बच्चियों को दिल्ली के रास्ते दुबई भेजा गया – जिसमें अधिकांश किशोरियों के माता-पिता के बिहार,झारखंड और बंगाल से होने की बात कही गई है | जरा सोचिये तो सही, ममता को तरसता मासूम बच्चा अपने माँ-बाप से अलग होकर कैसे रहता होगा !!
प्रधानाचार्य, प्रतिकुलपति एवं कुलपति रह चुके कुशल राजनीतिज्ञ डॉ.महावीर प्रसाद यादव की 90वीं जयन्ती समारोह का आयोजन “डॉ.महावीर सामाजिक एवं सांस्कृतिक शोध संस्थान” ट्रस्ट के बैनर तले श्रद्धापूर्वक किया गया जिसकी सफलता के लिए उनके पुत्र डॉ.अरुण एवं पुलिस इन्स्पेक्टर मनोज कुमार की आकुल-व्याकुल उपस्थिति सराहनीय रही | बन्धु द्वय ने बिहार सरकार के वरिष्ठतम मंत्री व उद्घाटनकर्ता बिजेन्द्र प्रसाद यादव एवं विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव सहित मंचासीन सभी अतिथियों को पुष्प-गुच्छ के साथ चादर ओढ़ाकर सम्मानित किया |
कार्यक्रम का श्रीगणेश “महावीर द्वार” शिलान्यास से आरम्भ किया गया तथा सभागार में सर्वप्रथम उनके तैलचित्र पर उद्घाटनकर्ता माननीय मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, पूर्व कुलपति डॉ.जयकृष्ण प्रसाद यादव, डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, डॉ.के.एन.ठाकुर, प्राचार्य-अध्यक्ष डॉ.एच.एल.एस.जौहरी, विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, विधायक रमेश ऋषिदेव, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, प्रतिकुलपति डॉ.के.के.मंडल, पूर्व विधायक दिलकेश्वर मेहता सहित स्वागताध्यक्ष डॉ.शिवनारायण यादव, संयोजक डॉ.शैलेन्द्र कुमार, निवेदक डॉ.परमानन्द यादव, उद्घोषक डॉ.उदयकृष्ण व अंचलाधिकारी मिथिलेश कुमार आदि के साथ-साथ सभाभवन में महावीर बाबू के श्रद्धावनत शिष्यगण तथा उनमें आस्था रखनेवाले शिक्षानुरागी-बुद्धिजीवी, छात्र-छात्राओं द्वारा पुष्पांजलि अर्पित किया गया और संस्मरण, स्नेह एवं हृद्योदगार व्यक्त किया गया- जिनमें प्रमुख रूप से उपस्थित देखे गये सहरसा से गोपाल बाबू, डॉ.विद्यानंद मिश्र, सुपौल से केशर कुमार सिंह, डॉ.नरेश कुमार, आरक्षी निरीक्षक गजेन्द्र कुमार, प्रो.रीता कुमारी, शम्भू ना.यादव, प्रो.विजेन्द्र ना.यादव, पूर्व प्रमुख सिया शरण यादव, सीनेट सदस्य विद्यानन्द यादव आदि |
फिर उस महामना डॉ.महावीर की तरह चारो ओर शिक्षा के प्रकाश को फैलाने के लिए दीप प्रज्वलित कर सबों ने उनके प्रति उदगार व्यक्त किया | उदगार व्यक्त करने वालों में सहरसा के गोपाल बाबू ने एक मिनट में यही कहा- हरि अनंत हरि कथा अनंता……|
Intellectuals attending 90th Jayanti Samaroh of Dr.M.P.Yadav at T.P.College Sabha Bhavan Madhepura .
फिर डॉ. विद्यानंद मिश्र, सुपौल के केशर सिंह सहित प्रो.रीता कुमारी,डॉ.नरेश कुमार, प्रो. बिजेंद्र ….. आदि प्रमुख रहे जिन्होंने महावीर बाबू के विभिन्न स्वरूपों , संस्मरणों एवं कार्यों की चर्चाएँ की |
ज्योहिं अध्यक्ष – स्वागताध्यक्ष द्वारा वक्ताओं पर समय की पावंदी लगाई गई कि इसी बीच डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने संबोधन में बस इतना ही कहा – महानुभाव ! संस्थापक प्राचार्य श्रधेय रतनचन्द ने वट वृक्ष के जिस नन्हें से शिक्षा बीज ( टी.पी.कालेज) को मधेपुरा की माटी में खड़ा किया था और कालांतर में जिसे डॉ.महावीर विश्वकर्मा बनकर इतना विराट बना दिया उसे समय के दो मिनट वाली कटोरी में समा देना क्या संभव होगा – शिवनारायण बाबू ! क्या इस पुनीत अवसर पर उद्घाटनकर्ता महोदय को भी संबोधित न करूँ जो बिहार सरकार के हाथ-पैर जैसे मंत्री नहीं बल्कि सरकार की रीढ कहे जाने वाले वरीय मंत्री हैं – बिजेंद्र बाबू ! जिन्होंने मधेपुरा को शिक्षा का हब बनाने के लिए बी.एन.एम.यू.निर्माण से लेकर कर्पूरी मेडिकल कालेज, बी.पी. मंडल इंजिनियरिंग कालेज के लिए लगभग एक हजार करोड की राशि अपने वित्त मंत्रित्वकाल में दिया था | इसी क्रम में मंचासीन अतिथियों ने विस्तार से महावीर बाबू के गुणों की चर्चा की |
अंत में उद्घाटनकर्ता माननीय मंत्री बिजेंद्र प्र.यादव ने अपने संबोधन में कहा कि रतनचंद एवं महावीर बाबू जैसे पुरुखों को याद कर हम ज्ञान अर्जित करके आगे बढ़ने का रास्ता तलाश सकते हैं | ऐसे ही लोग काम के बल पर पद से ऊपर उठ जाते हैं | शिक्षक, शिक्षा एवं शिक्षालयों में सुधार लाने के बाबत उन्होंने महात्मा गाँधी एवं टैगोर के बीच के संस्मरण सुनाकर यही कहा कि सिर्फ कहने से ही नहीं बल्कि करने से ही काम होता है | अंत में सदाशिव टेम्पुल एवं माया निकेतन की शिक्षिका शशि प्रभा के निर्देशन में छात्राओं ने “महावीर–गीत” प्रस्तुत किया | प्रो.विष्णुदेव यादव ने धन्यवाद् ज्ञापन किया |
भूपेन्द्र चौक मधेपुरा स्थित शांति आदर्श मध्य विद्यालय में गुरुवार (31 दिसम्बर 2015) को सेवानिवृत होनेवाली प्रधानाध्यापिका श्रीमती सरला कुमारी की विदाई एवं पदभार ग्रहण करनेवाली प्रधानाध्यापिका श्रीमती लता कुमारी का स्वागत समारोह विद्यालय परिवार द्वारा आयोजित किया गया |
वक्ताओं की लम्बी सूची होने के बाबजूद सबों ने श्रीमती सरला के लम्बे कार्यकाल में किये गये कार्यों, स्कूल संचालनों से जुड़े तथ्यों को गागर में सागर भरने की कुशलता के साथ सम्पन्न किया | उनके सरल स्वभाव एवं अहंकार शून्य चरित्र की सराहना सबों ने की |
Teachers and Students attending Vidai Samaroh
विदाई समारोह जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार यादव की अध्यक्षता में हुई और विशेष रूप से संघ के पदाधिकारीगण की उपस्थिति देखी गई | शिक्षक संघ के सचिव लाल बहादुर यादव, राज्य प्रतिनिधि आशीष कुमार, पूर्व प्रधानाध्यापिका प्रभावती देवी, द्रौपदी कुमारी, शैल कुमारी, माधुरी कुमारी सिन्हा, धर्मशीला-रेखा सहित समाजसेवी शौकत अली, वरीय अधिवक्ता सी.डी.सिंह आदि द्वारा अपने उद्गार व्यक्त किये गये |
पूर्व सचिव बैद्यनाथ यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया |
मेरे सीने में नहीं, तेरे ही सीने में सही |
हो जहाँ भी आग लेकिन, आग जलनी चाहिए ||
– दुष्यन्त कुमार
हिन्दी फन के मशहूर शायर दुष्यन्त कुमार (त्यागी) जीवन के 45वें वसंत पूरा करने से पहले ही (31 दिसम्बर 1975) दुनिया को यही कहकर अलविदा कह दिया- “कुछ भी बन बस कायर मत बन……!”
दो दशकों से साहित्यिक गतिविधियों को जारी रखने वाले मधेपुरा नागरिक संसद के सचिव शम्भु शरण भारतीय सदा दुष्यन्त कुमार को ओढ़ते-बिछाते रहे और उनकी स्मृति को तरोताजा बनाये रखने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के आधे दर्जन वैज्ञानिकों सर्वश्री डॉ.मिथिलेश कुमार राय, डॉ.सुनील कुमार सिंह, डॉ.आर.पी.शर्मा, डॉ.सुनील कुमार, डॉ.शशिप्रकाश विश्वकर्मा, (सभी कृषि अनुसंधान केंद्र में कार्यरत) एवं राजन बालन आत्मा के परियोजना निदेशक सहित प्रगतिशील कृषक राधेश्याम प्रसाद व आयुर्वेदिक महिला वैज्ञानिक सलाहकार श्रीमती मधुमाला कुमारी के साथ-साथ स्थानीय अखबारों के चार व्यूरो चीफ सर्वश्री अमिताभ (हिन्दुस्तान), धर्मेन्द्र भारद्वाज(जागरण), डॉ.रुपेश रूपक (प्रभात खबर) एवं राकेश सिंह(मधेपुरा टाइम्स) और अवकाशप्राप्त शिक्षक रमेश चन्द्र यादव को सम्मान समारोह के उद्घाटनकर्ता- पूर्व सांसद व मंडल वि.वि. के संस्थापक कुलपति एवं प्रखर साहित्यकार डॉ.रमेंद्र कुमार यादव रवि द्वारा अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया गया |
उद्घाटनकर्ता डॉ.रवि ने दुष्यन्त-साहित्य को संवेदना की कोख से जन्म ग्रहण करने के कई माकूल व मानक उदाहरण पेश कर दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया | उन्होंने विस्तार में जाकर कभी प्रेमचन्द की होरी की विकलता में काव्यत्व की गरिमा छिपे रहने की चर्चा की तो कभी आदि कवि वाल्मिकी के कामरत क्रोंच पंक्षियों का बिम्ब सामने खड़ाकर खूब तालियाँ बटोरी |
समारोह की अध्यक्षता कर रहे जनकवि शंभुनाथ अरुणाभ ने अपनी मिटटी की सौंधी महक से चतुर्दिक खुशबू फैला दी | वहीं मुख्यअतिथि के रूप में बी.एन.एम्.यू. के स्नातकोत्तर हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ.इन्द्र नारायण यादव ने दुष्यन्त के जीवनवृत्त पर प्रकाश डाला |
काव्य गोष्ठी में अनेक कवियों ने अपनी प्रतिनिधि रचना पढ़कर साहित्यानुरागियों के हृदय में जगह बना ली | अवकाशप्राप्त शिक्षक सियाराम यादव ‘मयंक’ की गजल की ये पंक्तियाँ-
जिंदगी को हवा दीजिये, बेहया को हया दीजिये छा रहा है अँधेरा मयंक, रौशनी तो जला दीजिये
खूब तालियाँ बटोरी |
कृषि पर आधारित गीत गाने वाले राजन बालन उससे इतर गीत गाकर लोगों को खूब गुदगुदाया | नागरिक संसद के स्थायी अद्यक्ष आध्यानंद यादव की ‘सड़क से सड़क पर’ लोगों को खूब भाया | सचिव शम्भु शरण भारतीय एवं सुकवि हरेराम भगत श्रोताओं के हृदय को छूने की भरपूर कोशिश की |
अन्त में शम्भु शरण भारतीय ने धन्यवाद ज्ञापित किया |