मधेपुरा के विद्युत रेल इंजन कारखाने के उप मुख्य अभियन्ता के.के.भार्गव ने मधेपुरा अबतक को बताया कि अक्टूबर से यहाँ इंजन बनाने का काम शुरू कर दिया जायगा | उन्होंने कहा कि पहले 5 विद्युत रेल इंजन तैयार करने के लिए फ्रांस से पुर्जे आ रहे हैं जो अक्टूबर के प्रथम सप्ताह के अन्दर ही सभी पहुंच जायेंगे | पहला रेल इंजन के लिए फ्रांस से पुर्जे भारत आ चुके हैं |
चर्चा के क्रम में उप मुख्य अभियन्ता श्री भार्गव ने कहा कि फरवरी तक पहला विद्युत रेल इंजन तैयार कर भारतीय रेल को सौंप दिया जायेगा | उन्होंने यह भी कहा कि पहला इंजन तैयार कर रेलवे को सौपने के बाद मधेपुरा रेल इंजन फैक्ट्री का विधिवत शुभारम्भ किया जायेगा | साथ ही यह भी जानकारी दी कि कारखाने के विधिवत उद्घाटन के लिए रेलवे द्वारा फ्रांस के राष्ट्रपति एवं पीएम नरेन्द्र मोदी को पत्र भेजा गया है |
श्री भार्गव ने खुलासा किया कि पीएम की महत्वाकांक्षी परियोजना होने के कारण प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा लगातार इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है | सितम्बर में रेलवे बोर्ड के सदस्यों द्वारा प्रगति का जायजा भी लिया गया | इससे पूर्व एल्सटॉम के एमडी सचिन गोयल द्वारा भी कारखाने के निरीक्षण के दरमियान टाटा प्रोजेक्ट्स के अधिकारियों को ससमय कार्य पूरा करने का ठोस निर्देश दिया गया था |
इन बातों की जानकारी दिये जाने के बाद मधेपुरा अबतक द्वारा जब समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से कुछ टिप्पणी करने को कहा गया तो उन्होंने कहा कि उच्च क्षमता के विद्युत रेल इंजन बनाने के लिए भारतीय रेल ने फ्रांस की प्रमुख ट्रांसपोर्ट कंपनी ‘एल्सटॉम’ से जो एकरारनामा किया इसके लिए ‘एल्सटॉम’ को तथा दोनों की संयुक्त साझेदारी में मधेपुरा में 800 विद्युत् रेल इंजन तैयार होगा जिसके लिए कारखाने के डिप्टी चीफ इंजीनियर के.के. भार्गव एवं डायनेमिक डीएम मो.सोहैल सहित उनकी टीमों को निष्ठा एवं समर्पण के साथ काम करने के लिए हृदय से कोटि-कोटि साधुवाद !!
मधेपुरा में विगत कई वर्षों से अंग्रेजी एवं हिन्दी में स्पेलिंग बी चैंपियनशिप प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता रहा है और जिले के सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूली छात्र-छात्राओं सहित शिक्षकों एवं अभिभावकों का भरपूर सहयोग मिलता रहा है | आयोजन समिति को संरक्षक सह पूर्व परीक्षा नियंत्रक व प्रखर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सहित प्राचार्य द्वय डॉ.विश्वनाथ विवेका एवं डॉ.के.पी. यादव का संपूर्ण सहयोग मिलता रहा है |
बता दें कि गिरिजा कपिलदेव इंटर कॉलेज में आयोजित पुरस्कार सम्मान समारोह में सचिव सावंत कुमार रवि ने सर्वप्रथम प्रतियोगिता से संबंधित जानकारी देते हुए अतिथियों का स्वागत किया |
The Patron of Spelling Bee Championship Dr.Bhupendra Madhepuri along with Pro.VC Farookh Ali , DSW Dr.AK Mishra , PRO Dr.Sudhanshu Shekhar , Pr.Sangeeta Yadav , Er.BK Munna and others conferring the Paramount Honour to Sana Yadav.
इस अवसर पर भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ.फारुख अली ने अपने संबोधन में यही कहा कि बच्चे शिक्षा की बुनियाद हैं और मजबूत बुनियाद पर उच्च शिक्षा की भव्य इमारत खड़ी की जा सकती है | उन्होंने अपने अनुभवों को विस्तार से बताते हुए कहा कि बचपन अनमोल है, वह लौटकर आता नहीं………अतः बचपन का सदुपयोग करें……. सतत प्रयास करते रहें…….. तो सफलता मिलेगी ही मिलेगी |
संरक्षक एवं समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि बच्चे ही नहीं शिक्षक भी डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श बनाएं……. तभी शिक्षकों का सम्मान बढ़ेगा और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलेगी | डॉ.मधेपुरी ने स्पेलिंग बी चैंपियनशिप के सफल छात्रों को जीवन में उत्तरोत्तर आगे बढ़ने के टिप्स देते हुए अंत में यही कहा- सूरज की तरह चमकने के लिए सूरज की तरह जलना पड़ता है……|
मौके पर मंडल विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ.अनिल कान्त मिश्र, पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर, प्रो.रीता कुमारी, ई.बलवंत कुमार मुन्ना, प्राचार्या संगीता यादव आदि सहित संरक्षक डॉ.मधेपुरी व प्रतिकुलपति डॉ.फारुख अली द्वारा मोमेंटो-सर्टिफिकेट देकर सफल प्रतिभागियों- खुशी गुप्ता, अन्नू प्रिया, हर्षराज, अनिषा, सिद्धांत, जिंदगी, अमृत, आस्था, अंजलि, आदित्य आदि सैकड़ों छात्र-छात्राओं एवं बेहतरीन शिक्षकों तथा मीडियाजनों को भी सम्मानित किया गया |
अंत में स्पेलिंग बी का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार छात्रा सना यादव को देते हुए उद्घाटनकर्ता एवं संरक्षक द्वारा स्पेलिंग चैंपियन 2 प्रतिभागियों को उत्साहवर्धन स्वरुप नगद राशि भी दी गई | सोनी राज, अमित अंशु ने धन्यवाद ज्ञापित किया |
मधेपुरा में 14 सितम्बर का दिन हिन्दी को समर्पित रहा | जहाँ एक ओर जिला मुख्यालय के समाहरणालय सभागार में डीएम मो.सोहैल (IAS) की अध्यक्षता में और बीएन मंडल विश्वविद्यालय के नये परिसर में कुलपति डॉ.अवध किशोर राय की अध्यक्षता में राष्ट्रीय हिन्दी दिवस मनाया गया वहीं दूसरी ओर भारतीय जन लेखक संघ के डॉ.मधेपुरी मार्ग स्थित केन्द्रीय कार्यालय में डॉ.अरुण कुमार साह की अध्यक्षता में हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी के उन्नयन के साथ-साथ पत्रकारिता जगत की गौरी लंकेश को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गयी | इसके अलावे नेहरु युवा केन्द्र के साथ-साथ सदर बीआरसी में बीईओ जनार्दन प्रसाद निराला की अध्यक्षता में बच्चों ने भाषण प्रतियोगिता में भाग लेकर हिन्दी दिवस के महत्व पर जमकर प्रकाश डाला |
समाहरणालय सभागार में एसपी, सीएस, एडीएम एवं अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों एवं गणमान्य जनसेवियों डॉ.भूपेंन्द्र मधेपुरी व प्रो.श्यामल किशोर यादव आदि को संबोधित करते हुए डीएम मो.सोहैल ने कहा-
“हिन्दी गंगा जैसी नदी है जिसमें हर नदी का जल समाहित है और गंगा हर नदी से जुड़ी भी है……. ठीक उसी प्रकार सभी भाषा में हिन्दी समाहित है…….. यदि हिन्दी नहीं होती तो भारत एक नहीं होता…..|”
इस अवसर पर एसपी विकास कुमार ने कहा कि पुलिस कार्यालयों में केस डायरी से लेकर न्यायालय से पत्राचार आदि सभी कार्यों में प्राय: हिन्दी के प्रयोग को प्राथमिकता दी जाती है | डॉ.गदाधर पाण्डेय सीएस एवं प्रो.श्यामल किशोर यादव ने भी हिन्दी के उन्नयन हेतु उद्गार व्यक्त किया |
इसी क्रम में समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विस्तार से कमाल पाशा तुर्क से लेकर डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की चर्चाएं करते हुए कहा कि इन लोगों ने अपनी संकल्प शक्तियों का ऐसा मिसाल दुनिया को दिया जिस रास्ते पर यदि हम भारतवासी चलें तो हिन्दी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा का गौरव पाने में अधिक देर नहीं लगेगी बशर्ते कि हम भारतीयों को अंग्रेजी के प्रति बढ़ रहे मोह को भंग करना होगा |
और अंत में डॉ.मधेपुरी ने समाजवादी मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल द्वारा साठ के दशक में भारतीय संसद में हिन्दी के लिए जो कुछ कहा गया था उसे संदेश के रूप में सुनाया-
“…………. अध्यक्ष महोदय ! मैं हिन्दी के लिए पागल नहीं हूँ, परन्तु भारत में अंग्रेजी को बनाये रखने की कोशिश भारतीय जनक्रान्ति के साथ विश्वासघात है |”
हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है, हिन्दी हमारी राजभाषा है, हिन्दी में हिन्दुस्तान की आत्मा बसती है, हिन्दी ही पहचान है हमारी और फिर भी विडंबना देखिए कि कुछ संस्थाओं द्वारा रस्मअदायगी करने और कुछ सरकारी आयोजनों के अलावा हिन्दी दिवस पर उतनी भी चहल-पहल और रौनक नहीं जितनी ‘वेलेंटाइन डे’ तक पर देखने को मिल जाती है। आखिर हम जा कहां रहे हैं? क्या पश्चिम से आयातित तौर-तरीकों में अपनी शान समझने वाले हम भारतवासी (माफ कीजिए, ‘इंडियन’) बहुत तेजी से सांस्कृतिक गुलामी की तरफ नहीं बढ़ रहे? और क्या ये गुलामी सदियों की उस गुलामी से अधिक भयावह नहीं जिससे हम 15 अगस्त 1947 को मुक्त हुए थे?
जरा सोचकर देखिए, आज 14 सितंबर यानि हिन्दी दिवस है, क्या आप बता सकते हैं कि आज हम हिन्दी दिवस क्यों मनाते हैं? और अगर आप जानते हैं तो क्या विश्वास के साथ यह कह पाने की स्थिति में हैं कि आपने अपने बच्चों को भी इस दिन और इसके महत्व से अवगत कराया है? अगर पहले सवाल का जवाब आप ‘हां’ में दे भी दें तो दूसरे सवाल का जवाब (जैसा कि स्कूलों के सर्वे से पता चलता है) सौ में सत्तर फीसदी लोगों का ‘ना’ में होगा।
बहरहाल, 14 सितंबर के ही दिन 1949 में हिन्दी को राजभाषा का दर्जा मिला था। संविधान के अनुच्छेद 343 में यह प्रावधान किया गया है कि देवनागरी लिपि के साथ हिन्दी भारत की राजभाषा होगी। हिन्दी को लेकर एक गौरवशाली तथ्य बिहार से जुड़ा है। जी हां, बिहारवासियों को इस बात का गर्व होना चाहिए कि 1881 में बिहार ही वो पहला राज्य था, जिसने हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में चुना था।
आज की पीढ़ी को ये जरूर जानना चाहिए कि ‘हिन्दी’ शब्द फारसी शब्द ‘हिन्द’ से बना है, जिसका अर्थ ‘सिंधु नदी की भूमि’ है। 11वीं सदी में जब तुर्कों ने पंजाब और गंगा के मैदानों पर हमला किया, तब हिन्द शब्द का इस्तेमाल यहां रहने वाले लोगों के लिए किया गया था। हमें यह भी पता होना चाहिए कि दुनिया भर में 64 करोड़ लोगों की मातृभाषा हिन्दी है। 2015 के आंकड़ो के मुताबिक हिन्दी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है। यही नहीं, एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि जहां 70 प्रतिशत चीनी ही मंदारिन बोलते हैं, वहां भारत के 77 प्रतिशत लोग हिन्दी बोलते हैं।
इंटरनेट की दीवाने युवाओं को यह जानकर खुशी होगी कि दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति हिन्दी में इंटरनेट का उपयोग करता है। यही नहीं, हिन्दी भारत की उन सात भाषाओं में एक है, जिसका इस्तेमाल वेब एड्रेस बनाने में भी किया जाता है। हिन्दी की एक और खूबी जिससे आपको वाकिफ होना चाहिए, वो यह कि सीखने के लिहाज से यह विश्व की अन्य भाषाओं की तुलना में अधिक आसान है। इसमें शब्दों का वही उच्चारण होता है, जो लिखा जाता है।
चलते-चलते यह भी जानें कि विश्व हिन्दी दिवस 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत महाराष्ट्र के नागपुर से 1975 में हुई थी और 2006 में इस दिन को आधिकारिक दर्जा के साथ वैश्विक पहचान मिली।
अब जबकि चुनाव आयोग ने साफ कर दिया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला दल ही असली जेडीयू है और उनकी राज्यसभा सदस्यता जाने में औपचारिकता भर शेष है, फिर भी शरद यादव यह मानने को तैयार नहीं कि पार्टी के भीतर की लड़ाई वे हार चुके हैं। हां, उन्होंने इतना जरूर कहा कि हम पहाड़ से लड़ रहे हैं तो यह सोच कर ही लड़ रहे हैं कि चोट लगेगी ही।
दरअसल, जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता पर मंडराते संकट पर अपना पक्ष रख रहे थे। कल चुनाव आयोग द्वारा पार्टी पर शरद गुट के दावे पर संज्ञान नहीं लेने और राज्यसभा का नोटिस मिलने के बाद अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा कि इन पहलुओं को उनके वकील देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे देश की साझी विरासत पर आधारित संविधान की लड़ाई बचाने की बड़ी लड़ाई के लिए निकल पड़े हैं। बकौल शरद राज्यसभा की सदस्यता बचाना छोटी बात है, उनकी लड़ाई साझी विरासत बचाने की है। सिद्धांत के लिए वे पहले भी संसद की सदस्यता से दो बार इस्तीफा दे चुके हैं।
भविष्य की रणनीति के बारे में शरद ने कहा कि 17 सितंबर को पार्टी कार्यकारिणी और 8 अक्टूबर को राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद जेडीयू बड़े रूप में सामने आएगी। हालांकि कैसे आएगी, इस पर फिलहाल वे कुछ बताने की स्थिति में नहीं। आगे नीतीश पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री मित्र ने खुद राजद प्रमुख लालू प्रसाद से जब महागठबंधन बनाने की पहल की थी, तब भी वह भ्रष्टाचार के आरोपों से बाहर नहीं थे। जबकि महागठबंधन की सरकार बनने के बाद अचानक शुचिता के नाम पर गठजोड़ तोड़ दिया। यह बिहार के 11 करोड़ मतदाताओं के साथ धोखा है। हमने सिद्धांत के आधार पर ही इसका विरोध किया।
समाजवाद के इस पुराने नेता ने आगे की लड़ाई साझी विरासत के मंच से लड़ने की बात कही। वे लड़ेंगे भी, क्योंकि वे शुरू से धूल झाड़कर फिर से खड़े होने वालों में रहे हैं। लेकिन क्या तमाम आरोपों और मुकदमों से घिरे लालू और उनके परिवार की ‘बैसाखी’ से उनके ‘सिद्धांत’ को कोई गुरेज नहीं है? क्या वे प्रकारान्तर से यह कहना चाहते हैं कि लालू पुत्रों का ‘मॉल’ और मीसा का ‘फॉर्म हाउस’ गरीबों को ‘सामाजिक न्याय’ दिलाने के लिए है? या फिर यह मान लिया जाए कि भारतीय राजनीति में अब भ्रष्टाचार कोई मुद्दा ही नहीं?
चुनाव आयोग ने जेडीयू विवाद पर अपना निर्णय दे दिया। आयोग ने बिना किसी द्वंद्व के बड़े स्पष्ट शब्दों में पार्टी और उसके सिंबल पर शरद यादव की दावेदारी को खारिज कर दिया। इसके साथ ही ‘असली-नकली’ की जबरदस्ती लड़ी जा रही लड़ाई खत्म हुई और पार्टी विधिवत नीतीश कुमार की हो गई। हालांकि, शरद खेमे के अली अनवर ने आयोग के फैसले पर असंतोष जताते हुए कानूनी राय लेने और जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाने की बात कही, लेकिन वे इस बात से अच्छी तरह वाकिफ होंगे की आगे की लड़ाई कितनी मुश्किल हो गई है।
गौरतलब है कि शरद खेमे ने बीते 25 अगस्त को पार्टी सिंबल पर अपना अधिकार जताया था, लेकिन शरद यादव अपने दावे के पक्ष में अपेक्षित कागजात जमा करने में विफल रहे। जबकि दूसरी ओर शुक्रवार को सांसद आरसीपी सिंह के नेतृत्व में चुनाव आयोग से मिलने गया जेडीयू का प्रतिनिधिमंडल सांसदों, विधायकों और 145 राष्ट्रीय परिषद सदस्यों के समर्थन की सूची से लैस था। ऐसे में आयोग को एक आसान फैसला लेना था, जो उसने ले लिया।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट तौर पर कहा कि शरद खेमे के दावे के साथ पर्याप्त समर्थन का दस्तावेज नहीं है। ऐसे में इस आवेदन पर कोई विचार ही नहीं किया जा सकता है। जबकि दूसरी ओर नीतीश खेमे के पास पर्याप्त से भी अधिक समर्थन है। हालांकि शरद यादव के पास फिर से आवेदन देने का अधिकार है, लेकिन यह जानते हुए कि जरूरी समर्थन और उसके लिए हस्ताक्षर जुटाना लगभग नामुमकिन है, शायद वो अपनी और किरकिरी न कराना चाहें।
उधर आयोग के इस फैसले के बाद जेडीयू महासचिव संजय झा ने कहा कि अब आयोग के फैसले की यह प्रति राज्यसभा में दी जाएगी ताकि इस आलोक में शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता को लेकर भी आसानी से फैसला लिया जा सके। बता दें कि पार्टी लाईन से अलग चल रहे शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए भी जेडीयू ने राज्यसभा के सभापति से आग्रह किया है और इसके बाद राज्यसभा सचिवालय ने नोटिस भेजकर शरद से स्पष्टीकरण भी मांगा है। हालांकि चुनाव आयोग के फैसले के बाद अब राज्यसभा के सभापति को निर्णय लेने में कोई दुविधा होगी, इसका कोई आधार नहीं दिखता।
मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (IAS) जहाँ एक ओर स्वतंत्रता सेनानियों एवं उनके परिजनों के लिए सर्वाधिक संवेदनशील रहे हैं और हाल ही में कई प्रखंडों के बाढ़ पीड़ितों के लिए 24 घंटे में कोलकाता से प्लेन द्वारा प्लास्टिक व त्रिपाल आदि मंगाकर टेंट के अंदर ही माताओं एवं बहनों के लिए चुड़ी-सिन्दुर से लेकर टी.वी. तक की व्यवस्था करने में रात-रात भर जगे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिले को अपना घर और जिलेवासियों को पारिवारिक सदस्य माननेवाले डीएम मो.सोहैल द्वारा यदि अकारण सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के लिए नारियल की तरह कठोर बनकर जिले के अन्दर शांतिपूर्ण ढंग से चल रही सामाजिक सौहार्द की गाड़ी को बेपटरी होने से बचाने में 2-4 निर्दोष फूलों की पंखुड़ियाँ झड़ भी गई हों तो उसे अभिभावकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों एवं बुद्धिजीवियों व व्यापारी भाइयों द्वारा उसी तरह स्वीकारना लाजमी होगा-
जैसे नदी में स्नान करने के बाद किसी वृक्ष से सटकर सोये हुए व्यक्ति की पीठ पर चढ़ रही पंक्तिबद्ध चीटियों की अगली चीटीं गर्दन के पास पहुँचकर, ऊपर जाने का सुगम रास्ता नहीं मिलने पर, अकारण काट लेती है और वह व्यक्ति जगते ही तुरंत पीठ पर उल्टे हाथ चलाकर दर्जनों निर्दोष चीटियों को मौत के घाट उतार देता है………..| सोचिये तो सही ! काटने वाली चींटी तो बच जाती है, सुरक्षित रहकर घने बालों में छिप जाती है…….. सभी निर्दोष चीटियाँ ही मारी चली जाती हैं |
ऐसे ही संकट कालीन स्थिति में कुछ दिन कबल बिहारीगंज और फिलहाल मुरलीगंज में सामाजिक सौहार्द कायम रखने के लिए डीएम मो.सोहैल एवं एसपी बिकास कुमार की पूरी टीम द्वारा उठाये गये कदम को सराहनीय कहकर सबों को स्वीकारना चाहिए……..| भला क्यों नहीं, सामाजिक शांति एवं सौहार्द को बिगाड़नेवाले दिशाहीन विस्फोट को रोकने में डीएम मो.सोहैल ने अपनी टीम को दिन-रात सोने नहीं दिया…….. सभी जूझते रहे….. वरना जानवरों के……. जगह आज लोगों की……… होती |
बाप-बेटे और गदहे की कहानी तो हम सभी जानते ही हैं | किसी भी स्थिति में लोगों ने उनके कृत्यों को सही नहीं कहा……. और सही होता क्या है ? यह भी कोई नहीं बताया……… !
सही में डीएम मो.सोहैल है क्या चीज……….. यह तो जानने की कोशिश करें हम ! आना-जाना तो हर किसी का लगा ही रहता है……..!
सोचिए ! मुरलीगंज की स्थिति ज्यों ही ठीक होती नजर आई कि 10 सितम्बर (रविवार) को ही दिनभर केन्द्रीय विद्यालय, मोटर व्हीकल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट, जवाहर नवोदय विद्यालय हेतु स्टेडियम और जिले के किसानों के लिए कोल्ड स्टोरेज के वास्ते जमीन की तलाश में डीसीएलआर रविशंकर शर्मा, अंचलाधिकारी नवीन भूषण एवं शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के साथ केशव कन्या उच्च विद्यालय और कन्या मध्य विद्यालय की चक्कर लगाते रहे डीएम मो.सोहैल | उन्होंने तय किया कि अस्थायी रुप से केन्द्रीय विद्यालय का शुभारंभ केशव कन्या उच्च विद्यालय में तथा स्थायीरूप से कन्या मध्य विद्यालय परिसर की भूमि को चयनित किया गया |
Dynamic DM Md.Sohail (IAS) discussing with Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri regarding land for Navoday Stadium , Vivah Bhawan , Yoga Bhawan & Cold Storage for the farmers in presence of L.R.D.C. Ravi Shankar Sharma and others at Ram Janki Thakurbadi Campus Sukhasan , Madhepura.
मधेपुरा के बाद उमस भरी गर्मी में काफिले के साथ निकल पड़े डीएम मो.सोहैल और पहुंच गये जवाहर नवोदय विद्यालय सुखासन जहाँ के राम जानकी ठाकुरबाड़ी में, पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, उन्हें मिल गये समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी | प्रखर स्वतंत्रता सेनानी एवं नवोदय विद्यालय के भूमि दाता कमलेश्वरी प्रसाद मंडल के पौत्र पूर्व मुखिया जनार्दन प्रसाद यादव, उपेन्द्र प्रसाद यादव व अन्य गणमान्य भी मौजूद थे | डीएम ने विवाह भवन, योग भवन, नवोदय छात्रों के लिए स्टेडियम…….. आदि निर्माण हेतु जमीन की चर्चा करने के दरमियान बताया कि मोटर व्हीकल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट हेतु गम्हरिया प्रखंड में जमीन मिली है |
डॉ.मधेपुरी ने कहा कि- “डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने ‘आराम हराम है’ के तर्ज पर भीषण उमस भरी गर्मी की परवाह किये बगैर 10:00 बजे पूर्वाहन से 3:00 बजे अपराहन तक पूरी टीम के साथ मधेपुरा, सिंघेश्वर और गम्हरिया की चक्कर लगाते रहे प्रखंड बार……….. क्या सभी डी.एम. के लिए आपके डीएम जैसा ही होता है- रविवार !!”
मधेपुरा जिला लोक शिक्षा समिति के बैनर तले जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) के निदेशानुसार प्रखंड मुख्यालय से जिला मुख्यालय तक स्कूली बच्चों के साथ-साथ प्रेरक, स्वयं सेवक, तालीमी मरकज आदि ने प्रत्येक प्रखंड में प्रभात फेरी निकाली तथा प्रखंड प्रमुखों द्वारा साक्षरता झंडा फहराया गया | कहीं-कहीं तो स्वच्छता मिशन के बाबत स्कूली बच्चे-बच्चियों के बीच वाद-विवाद प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गई तथा पारितोषिक देकर प्रोत्साहित भी किया गया |
यह भी बता दें कि जिला मुख्यालय मधेपुरा में भी इस अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किये गये | कार्यक्रम के प्रथम चरण में बी.एन. मंडल स्टेडियम से केशव कन्या उच्च विद्यालय तक गाजे-बाजे के साथ साक्षरता मार्च निकाला गया तथा निरक्षरता दूर करने के नारे लगाये गये |
Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri addressing the highly educated gentlemen and Shakshartakarmi on the occasion of International Literacy Day (8th September) at Keshew Kanya High School, Madhepura.
राजकीयकृत केशव कन्या उच्च विद्यालय में आयोजित सेमिनार को संबोधित किया डीपीओ गिरीश कुमार, प्रो.सच्चिदानंद, डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, प्रो.श्यामल किशोर यादव, प्रो.सचिंद्र आदि ने |
बता दें कि जहाँ आरम्भ से ही साक्षरता में लगे प्रो.सच्चिदानंद एवं प्रो.श्यामल किशोर ने जिला साक्षरता को लक्ष्य से काफी पीछे बताया वहीं जिला परिषद के उपाध्यक्ष रघुनंदन दास एवं डीपीओ गिरीश कुमार ने कहा कि समाज तभी समृद्ध होगा जब अशिक्षा से मुक्ति मिलेगी और समाज अपने अधिकार के लिए जागृत होगा |
समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विस्तार से शिक्षा के अभाव में फैल रही सामाजिक भ्रांतियों एवं प्रतिदिन जन्म ले रहे नये-नये अंधविश्वासों को उकेरते हुए यही कहा कि हमें व्यक्तिगत, सामुदायिक एवं सामाजिक रुप से साक्षरता के महत्व को गहराई से समझना होगा |
डॉ.मधेपुरी ने आधुनिक बिहार के निर्माता एवं बिहार के प्रथम विधि मंत्री शिवनन्दन प्रसाद मंडल की पुस्तक “Free & Compulsory Primary Education” की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय संविधान के 96वाँ संशोधन में हमें इसी पुस्तक के कारण शिक्षा का मौलिक अधिकार प्राप्त हुआ जिसके Article -21 में यह अंकित किया गया कि हर प्रदेश के 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को “मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा” का प्रावधान होगा |
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri conferring certificate & momento to the best performer Shakshartakarmi .
कार्यक्रम के संचालन और सांस्कृतिक परिचालन के माहिर मुरलीधर द्वारा बेहतर करने वाले साक्षरता कर्मियों को डॉ.मधेपुरी सहित अन्य अतिथियों द्वारा मोमेंटो एवं सर्टिफिकेट प्रदान कराया गया | अंत में धन्यवाद ज्ञापित किया ज्ञानेश्वर शर्मा ने और कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की गई |
बी.पी. मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज मधेपुरा हो या शिवनन्दन प्रसाद मंडल इंटर स्तरीय उच्च विद्यालय या फिर बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय के संबद्ध एवं अंगीभूत कॉलेज ही क्यों न हो- यहाँ तक कि सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों में भी रही शिक्षक दिवस की धूम | कहीं छात्र-छात्राओं द्वारा केक काटते तो कहीं भारतरत्न डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि एवं श्रद्धांजलि करते देखे गये………| कहीं निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन तो कहीं किया गया छात्र-छात्राओं के बीच चित्रकारी या भाषण !! कुल मिलाकर सम्पूर्ण जिले में धूमधाम से छात्र-शिक्षकों एवं अभिभावकों द्वारा “शिक्षक दिवस” मनाया गया |
बता दें कि स्थानीय एस.एन.पी.एम. इंटरस्तरीय उच्च विद्यालय में ‘शिक्षक दिवस’ के साथ-साथ प्रधानाचार्य डॉ.निरंजन कुमार की विदाई का कार्यक्रम भी हुआ | 12:00 बजे दिन से 7:00 बजे संध्या तक चले विभिन्न कार्यक्रमों में भारी संख्या में छात्र-छात्राओं, गणमान्यों एवं अभिभावकों की उपस्थिति रही | स्कूल के संगीत शिक्षकद्वय नारायण और रजनी के मधुर संगीत के साथ-साथ मिनिरल वाटर और कोल्ड ड्रिंक्स की दौर हमेशा दर्शकों को तरोताजा बनाये रखा |
On the occasion of Teacher’s Day, the Outgoing Principal Dr.Niranjan Kumar along with his wife Mrs.Nirmala Rani and Udhghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri at SNPM+2 School Madhepura.
यह भी बता दें कि भारतरत्न डॉ.राधाकृष्णन के जन्मोत्सव पर आयोजित शिक्षक दिवस समारोह के अवसर पर जहाँ बी.पी.मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ.मनोरंजन झा, डीईओ उग्रेश प्रसाद मंडल, एमएलटी कॉलेज सहरसा के प्राचार्य डॉ. के.पी. यादव, टीपी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ.सुरेश प्रसाद यादव, डीपीओ माध्यमिक नारद प्रसाद द्विवेदी, डीपीओ सर्वशिक्षा गिरीश प्रसाद एवं राज्य कार्यकारिणी के सदस्य राजेंद्र प्रसाद यादव आदि ने विस्तार से समाज और देश के लिए कर्तव्यनिष्ठ शिक्षकों, लगनशील छात्र एवं जागरुक अभिभावकों के मजबूत इरादों पर बल दिया वहीं जिला माध्यमिक संघ के अध्यक्ष कृष्ण कुमार, पूर्व प्राचार्य वीरेंद्र प्रसाद यादव, शिक्षक आलोक कुमार, पूर्व प्रधानाध्यापक द्वय सत्येन्द्र कुमार, डॉ.सुरेश कुमार भूषण, एच.एम. यकिन्द्र कुमार मंडल, पूर्व प्राचार्य कमलेश्वरी प्रसाद बैजनाथपूरी, केशव कन्या की प्राचार्या विभा कुमारी, रासबिहारी उच्च विद्यालय की प्राचार्या रंजना झा सहित शिक्षक द्वय डॉ.संतोष कुमार व रमेश कुमार, डॉ.विजेंद्र कुमार, डॉ.नीलाकान्त, प्रो.बिजेंद्र नारायण यादव (जदयू अध्यक्ष), प्रधान जी आदि ने शिक्षक के लिए शिक्षा को ही महत्वपूर्ण बताते हुए अपने अनुभवों एवं उदाहरणों को शामिल करते हुए विस्तार से यही कहा कि बेहतरीन गुरु यानि अच्छा शिक्षक वही है जो जीवन पर्यंत विद्यार्थी बना रहता है, वे केवल किताबों से ही नहीं बल्कि अपने विद्यार्थियों से भी बहुत कुछ सीखता रहता है |
समारोह की अध्यक्षता एवं मंच संचालन करते हुए वर्तमान प्राचार्य मो.शकील अहमद ने समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी को उद्घाटनकर्ता, मुख्यवक्ता एवं कर्ताधर्ता बताते हुए श्रोताओं को धैर्य से सुनने का अनुरोध किया और कहा कि डॉ.मधेपुरी सरीखे विज्ञानवेत्ता को साहित्यकार से बढ़कर इतिहासकार कहना ही बेहतर होगा……|
बता दूँ कि डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में यही कहा कि आज संपूर्ण देश में शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है | राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा बिहार के 8 शिक्षकों को, पटना के एस.के. मेमोरियल हॉल में सीएम, डिप्टी सीएम एवं शिक्षा मंत्री द्वारा बिहार के 14 शिक्षकों को और मधेपुरा के एस.एन.पी.एम. स्कूल में निवर्तमान प्राचार्य डॉ.निरंजन सहित उनकी अर्धांगिनी श्रीमती निर्मला रानी को हम सभी सम्मानित कर रहे हैं |
डॉ.मधेपुरी ने बच्चों से यही कहा कि जहां भारत में शिक्षक दिवस महामहिम डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन (5 सितंबर) को मनाया जाता है वहीं अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को | भिन्न-भिन्न देशों में भिन्न-भिन्न तिथियों को शिक्षक दिवस मनाये जाते हैं | कुछ देशों में अवकाश के दिन तो कुछ में कामकाज के दिन | रूस में अक्टूबर के प्रथम रविवार को तो अमेरिका में मई के प्रथम मंगलवार को | कई देश तो शिक्षक दिवस मनाने की इन तिथियों को बदल भी लेते हैं………|
गुरु की महिमा का बखान करते हुए देर तक डॉ.मधेपुरी ने डॉ.राजेन्द्र प्रसाद, डॉ.भीमराव अम्बेडकर, डॉ.जाकिर हुसैन, डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम आदि को उद्घृत करते हुए कहा कि जब डॉ.कलाम से उनकी पहली मुलाकात हुई थी तो महामहिम के पद पर आसीन मिसाइल मैन डॉ.कलाम उठ कर खड़े हो गये थे और बैठने हेतु अनुरोध करने पर उन्होंने डॉ.मधेपुरी से यही कहा था- “मैं…… आपके लिए खड़ा नहीं हूं…… बल्कि एक शिक्षक के सम्मान में खड़ा हुआ हूँ जो राष्ट्र निर्माता होता है……|”
अंत में निवर्तमान प्राचार्य डॉ.निरंजन कुमार ने डॉ.मधेपुरी के सामने जीवन के बचे हुए वर्षों को शिक्षक के रूप में बिताने का संकल्प दोहराया और आगे समाज के उन्नयन के लिए समस्त सकारात्मक सोच वाले योग-प्रणायाम को अमलीजामा पहनाने के लिए अपनी धर्मपत्नी श्रीमती निर्मला रानी के साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया |
कार्यक्रम के समापन का उद्घोष छात्रों, शिक्षकों एवं अभिभावकों के सम्मिलित सहभोज के बाद ही प्राचार्य सह अध्यक्ष मो.शकील अहमद द्वारा किया गया |
इस टाइटल को पढ़ने के बाद आप में से ज्यादा लोग यही सोचेंगे कि लक, किस्मत, नसीब ने नरेन्द्र मोदी को भारत का प्रधानमंत्री बनाया, साईकिल पर चढ़ कर चूरन बेचने वाले रामदेव को फ़र्स से अर्श तक पहुचाया और भारत का बिज़नस टायकुन बनाया | क्या सच में होता है किस्मत ? किस्मत या फिर लक इस दुनिया की सबसे रहस्यमयी शक्ति है | ऐसा क्यों होता है हम में से कुछ लोगों के साथ हमेशा अच्छी चीजें होती है और किसी-किसी के साथ हमेशा बुरी | तो किस्मत या लक या फिर नसीब कहलें- क्या यह सब एक ‘इत्तेफाक’ है | कोई अगर लगातार 10 बार लौटरी जीत जाये तो क्या हम इसे उसका लक कहेंगे या फिर ‘इत्तेफाक’ | अगर लक कहेंगे तो क्या सबकुछ पहले से तय है जिससे कोई बार-बार लौटरी जीत रहा है तो कोई चाय बेचते-बेचते प्रधानमंत्री बन जाता है | या फिर ये सब एक इत्तेफाक है ! क्या ये इत्तेफाक (Randomness) हमारे ब्रह्मांड पर राज करता है ??
जब हमारी जिंदगी में सारी परिस्थितियां अनुकूल होती है तो हम इसे अपना गुड-लक मानते हैं और जब परिस्थितियां बुरी होती है तो हम उसे अपना बैड-लक मानते हैं | पर आखिर ऐसा क्यों होता है हमारे साथ ? क्या कोई रहस्यमयी चीज़ है जो हमारी परिस्थितियों को नियंत्रित करती है ? तो आइये जानते हैं कि विज्ञान क्या कहता है- वो शक्ति जो हमारी गुड-लक और बैड-लक परिस्थितियों को तय करती है वो हमारी शरीर की एक अवस्था है जिसका जवाब Physics में है, जी हाँ Quantum Physics में | अगर हम Quantum Physics की बात मानें तो हम एक विशुद्ध शक्ति पुंज हैं | हम में भी ठीक उसी प्रकार कम्पन होता है जैसा की किसी भी Charged Particle में | बस सिर्फ हमें बाहर से हमारा शरीर नजर आता है | हम सबों ने अपने भीतर की उस उर्जा को कभी न कभी जरुर महसूस किया है |
तो आज हम आपको बतायेंगे कि एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री कैसे बन गया- Quantum Physics के वैज्ञानिकों ने फ्रीक्वेंसी मापक यंत्र द्वारा ये साबित कर दिया है कि एक साधारण स्वस्थ मनुष्य का शरीर 60-72 मेगाहर्ज़ पर कम्पन करता है | और गड़बड़ी तब हो जाती है जब आपके शरीर का कम्पन 60 मेगाहर्ज़ से नीचे हो जाये | इस अवस्था में आप किसी काम के नहीं होते हैं | चारों ओर असंतोष व्याप्त होने लगता है, आपके साथ हमेशा बुरा होता है, आपकी किस्मत आपको छोड़ के जा चुकी होती है, आपसे कोई प्यार नहीं करता है, आप नशे के गिरफ्त में आ चुके होते हैं, जिंदगी बोझ बन जाती है और आप बन जाते हो धरती के बोझ ! तभी तो हमारे क्रन्तिकारी मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बिहार में शराब बंदी करवाई जिससे की बिहार की जनता Low Frequency Zone में न जा सके…… और एक अच्छी जिंदगी बना सके |
बहरहाल अब हम बात करते हैं जब हमारे शरीर की फ्रीक्वेंसी 72 मेगाहर्ज़ से ऊपर यानि 75-80-82 हो तो हम एक खुशहाल जिंदगी की तरफ़ बढ़ रहे होते हैं, हमारा जीवन स्वस्थ होता है, लोग हमसे प्यार करते हैं, हमें एक कामयाब आदमी की पहचान मिलती है या कुल मिलाकर कहें हम एक बहुत ही कामयाब जिंदगी जी रहे होते है और अगर ये फ्रीक्वेंसी 90 मेगाहर्ज़ के पार चले जाये तो हम बहुत ही किस्मत वाले हो जाते हैं, हमारे सारे सपने सच होने लगते हैं, हमारा प्रभाव दिन-ब-दिन बढ़ने लगता है | ठीक यही बात हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ घटित हुई है उन्होंने अपने आप को Low Frequency Zone से High Frequency Zone में स्थापित किया और चाय बेचते-बेचते भारत के प्रधानमंत्री बन गये | वहीँ साईकिल पर चूरन बेचने वाला रामदेव- बिज़नस टायकुन चार्टर्ड प्लेन पर चढ़ने वाले बाबा रामदेव बन गये |
महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला ने कहा था- “If you want to understand this Universe then think in terms of Energy, Vibration and Frequency”
तो एक बात साबित हो ही गई कि किस्मत उनकी चमकती है, लक उनका साथ देता है,नसीब उनका बनता है, मुकद्दर का सिकंदर वो होता है जिनकी फ्रीक्वेंसी हाई होती है |