मधेपुरा पतंजलि योग समिति ने मनाया होली मिलन समारोह

रासबिहारी उच्च विद्यालय परिसर में चल रहे स्वामी रामदेव बाबा के स्थायी योग कक्षा का संचालन श्रीमती माया जायसवाल, सुश्री रूबी कुमारी, श्री रितेश कुमार आदि योग शिक्षकों द्वारा नियमित रूप से योग को समर्पित डॉ.एन.के.निराला की देख-रेख में होता है।

बता दें कि 19 मार्च सोमवार को मधेपुरा पतंजलि समिति द्वारा “योग होली मिलन समारोह 2019” का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपनी चंद पंक्तियाँ शहीदों के नाम करते हुए कहा-

“होली ईद मनाओ मिलकर, कभी रंग को भंग करो मत।

भारत की सुन्दरतम छवि को, मधेपुरी बदरंग करो मत।।”

आगे डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि होली सद्भाव एवं भाईचारे का पर्व है। शिकवे-शिकायत भूलकर एक दूसरे को गले लगाने का पर्व है। बुराइयों पर अच्छाइयों की जीत का पर्व है। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि होली केवल रंग का ही नहीं बल्कि उत्साह और उमंग का भी पर्व है और योग मनुष्य की बाहरी समस्याओं के निदान ही नहीं बल्कि आंतरिक विचारों को साफ करने का भी महापर्व है। डॉ.अमोल राय, डॉ.नंदकिशोर आदि ने भी संक्षेप में उद्गार व्यक्त किये।

Dr.N.K.Nirala, Dr.Madhepuri and Post Master Rajesh Kumar celebrating Holi Mila Samaroh.
Dr.N.K.Nirala, Dr.Madhepuri, Post Master Rajesh Kumar and Ritesh Kumar celebrating Holi Milan Samaroh.

दूसरे सत्र में बच्चे-बच्चियों द्वारा चम्मच-गोली दौड, फैंसी ड्रेस…… जैसे कई कार्यक्रमों में प्रथम – द्वितीय – तृतीय आये प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि डॉ.मधेपुरी, डॉ.अमोल राय , डॉ.गणेश प्रसाद, डॉ.नंदकिशोर, डॉ.एनके निराला……. पोस्ट मास्टर राजेश कुमार आदि द्वारा पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार पाने के बाद बच्चों ने सबों को जहाँ लाल-पीला गुलाल लगाया वहीं बड़ों ने अतिथियों को रंग-बिरंगी टोपियां पहनाई। योग कक्षा की योगी बहनों को पुआ-दहीबड़ा और रामानंद सागर को जलेबी परोसते हुए देखा गया। अंत में डॉ.एन.के. निराला ने जोगीरा गाकर कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

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चुनावी माहौल में भी मधेपुरा का नेहरू युवा केन्द्र है गतिशील

नेहरू युवा केंद्र मधेपुरा द्वारा स्थानीय शिवनंदन प्रसाद मंडल उच्च माध्यमिक विद्यालय के मैदान में फुटबॉल मैच का आयोजन रविवार को किया गया जिसका विधिवत उद्घाटन मधेपुरा के प्रखर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने दोनों टीमों- लायंस क्लब एवं न्यू टाउन क्लब मधेपुरा के खिलाड़ियों के बीच इस खेल के रेफरी अनिल राज की उपस्थिति में गेंद को उछाल कर किया। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि भारत की एकता व अखंडता के लिए खेल अहम भूमिका निभाता रहा है।

बता दें कि फुटबॉल प्रेमी दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच रोमांचक मुकाबले में लायंस क्लब ने तीन गोल दागे जबकि मधेपुरा न्यू टाउन क्लब द्वारा काफी मशक्कत के बावजूद भी 90 मिनट में दो गोल ही किया जा सका। जहाँ खेल को समर्पित जिला वॉलीबॉल संघ के सचिव अनिल राज सहित प्रदीप सिंह, रोहित कुमार इस रोमांचक मैच के निर्णायक रहे वहीं उद्घोषक के रूप में सूरज कुमार ने ध्वनि विस्तारक यंत्र से ऐसा मनभावन कमेंट्री किया कि दर्शक अंत तक डटे रहे।

यह भी बता दें कि जिलास्तरीय कबड्डी खेल को समर्पित अध्यक्ष जयकांत यादव व सचिव अरुण कुमार, डीसीए के अध्यक्ष भारत भूषण, एमसीए के सचिव अमित कुमार मोनी एवं जिला टे.टे. सचिव प्रदीप कुमार श्रीवास्तव सहित विभिन्न  खेलों में गहरी अभिरुचि रखने वाले गोदई जैसे बुजुर्ग खिलाड़ियों एवं अतिथियों का स्वागत किया नेहरू युवा केंद्र के युवा एवं कर्मठ समन्वयक अजय कुमार गुप्ता ने।

चलते-चलते… जहाँ समन्वयक अजय कुमार गुप्ता ने बताया कि इसी मैदान पर आगामी सोमवार को महिला व पुरुष का वॉलीबॉल मैच होगा वहीं उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सवेरे में बच्चों के बीच दौर एवं साइकिल रेस प्रतियोगिता भी आयोजित की गई थी। समन्वयक श्री गुप्ता ने अंत में उदघोषणा की कि प्रखंड से लेकर पंचायत स्तर तक खिलाड़ी क्लब की स्थापना करें ताकि उस क्लब को नेहरू युवा केंद्र द्वारा खेल सामग्री उपलब्ध कराई जा सकेगी।

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मुफलिसी में शहीदों की ‘शहादत’ को मिले ‘सम्मान’ का सौदा करना पड़ता है परिजनों को

दो-दो हजार में ही बिक गये भारतीय शहीदों के वीरता पदक ! सैनिकों के वीरता पदकों का सौदा देश के लिए किसी विडंबना से कम है क्या ? इन पदकों को बेचने वाले कोई और नहीं बल्कि शहीदों के लाचार माता-पिता या फिर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए बेबस उनकी पत्नी या परिजन इस शर्त पर मेडल बेचते हैं कि खरीदने वाले कभी किसी को उनका नाम नहीं बताएंगे।

कितनी विडंबना है ! जो पिता अपने इकलौता सैनिक बेटे को बचपन में कंधे पर घुमाया करता वही लाचार बाप आज उस शहीद हुए सैनिक बेटे को कंधा देता है और 3 साल का शहीद-पुत्र अपने पिता को मुखाग्नि ! उसी लाचार बाप और अबोध सैनिक-पुत्र की परवरिश के लिए सैनिक की विधवा पत्नी लाचार होकर पति की ‘शहादत’ को मिले ‘सम्मान’ का सौदा करने, दुनिया की नजर से बचकर, किसी दुकान में जाती है। कोई रोटी के लिए तो कोई बच्चे की फीस के लिए सीने पर पत्थर का टुकड़ा रखकर उस अनमोल निशानी को बेमोल बेच देती है। देश कब जगेगा और सोचेगा उन शहीदों के लिए…..।

बता दें कि लुधियाना, पंजाब का एक शख्स है इंजीनियर नरिन्दर पाल सिंह। वह एक गैरतमंद इंसान है जो लुधियाना में ‘अकाली सहाय म्यूजियम’ चलाते हैं। वहीं विगत 5 साल में सैनिकों के 300 और स्वतंत्रता सेनानियों के लगभग 200 अनमोल मेडल 2-2 हजार तक में खरीदते और सहेजते आये हैं। वे ऐसे नेक दिल और प्रतिष्ठित इंसान हैं कि बेचने वालों का नाम किसी को नहीं बताते हैं।

यह भी बता दें कि सैन्य परिवारों के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव  मधेपुरी ने हाल ही में पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए 44 शहीदों के परिजनों के बैंक एकाउंट को सार्वजनिक करने हेतु प्रधानमंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को पत्र लिखा है ताकि बुद्ध – नानक – कबीर…. से लेकर भूपेन्द्र-भीम-कर्पूरी…. डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम सरीखे दानवीरों से प्रेरित भारतवासी यदि उनके खाते में एक-एक रुपए भी डालें तो करोड़ों रुपए… होंगे और शहीदों के परिजनों को ये दिन नहीं देखना पड़ेगा।

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जानिए, एनडीए में किस पार्टी को मिली कौन-कौन-सी सीटें

ज्यों-ज्यों लोकसभा चुनाव का प्रथम चरण सामने आ रहा है, सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एनडीए और महागठबंधन से जुड़ी पार्टियों के खाते में कौन-कौन-सी सीटें गई हैं और उन सीटों से उम्मीदवार कौन-कौन होंगे। महागठबंधन की बात करें तो वहां अभी भी घमासान की स्थिति है जबकि एनडीए में चीजें सुलझती नजर आ रही हैं। हालांकि कुछ सीटों को लेकर एनडीए में भी ‘इफ-बट’ की स्थिति थी लेकिन तीनों दलों के नेताओं ने समझदारी दिखाते हुए मामले को सुलझा लिया है।

सूत्रों के मुताबिक एनडीए में वाल्मीकिनगर, झंझारपुर, सीतामढ़ी, सुपौल, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, मधेपुरा, भागलपुर, गोपालगंज, सिवान, मुंगेर, नालंदा, गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, और काराकाट की सीट जदयू के खाते में गई है, जबकि बेतिया, मोतिहारी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, उजियारपुर, बेगूसराय, दरभंगा, मधुबनी, अररिया, बांका, छपरा, महाराजगंज, आरा, बक्सर, सासाराम, पटना साहिब और पाटलिपुत्र की सीट पर भाजपा चुनाव लड़ेगी। जदयू दरभंगा सीट संजय झा के लिए चाहती थी लेकिन गठबंधन धर्म के तहत उसे यह सीट छोड़ना पड़ रहा है।

उधर लोजपा की बात करें तो उसे मुंगेर के बदले नवादा सीट दी गई है। जदयू ने जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को चुनाव लड़ाने के लिए लोजपा से मुंगेर सीट ली है। इसके अलावा हाजीपुर, वैशाली, समस्तीपुर, जमुई और खगडिय़ा उसकी सीटिंग सीटें हैं, जहां से उसके प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। उम्मीद है कि अगले 24 घंटों में सीटों की विधिवत घोषणा हो जाएगी।

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बीएनएमयू के 6 शिक्षक शरीक होंगे यूजीसी के इंडक्शन प्रोग्राम में – कुलपति

यूजीसी द्वारा आयोजित किये जा रहे इंडक्शन प्रोग्राम से शिक्षा का बेहतर माहौल बनेगा। शिक्षा की ज्ञान भूमि में प्रेरणा का बीज चतुर्दिक सृजन का काम करेगा। ऐसे शिक्षोन्मुखी कार्यक्रमों में विषय विशेषज्ञ के रुप में भाग लेने के लिए बीएन मंडल विश्वविद्यालय के 6 शिक्षकों का नाम कुलपति डॉ.अवध किशोर राय के निर्देशानुसार कुलसचिव कर्नल नीरज कुमार ने यूजीसी के अपर सचिव को पत्र के माध्यम से भेजा है।

बता दें कि कुलसचिव कर्नल नीरज ने बताया कि प्रेषित पत्र में जिन तीन वरिष्ठ प्राध्यापकों का नाम शिक्षक उन्मुखीकरण के लिए प्रस्तावित किया गया है- वे हैं- विश्वविद्यालय जंतु विज्ञान विभाग के प्रो.(डॉ.) नरेन्द्र श्रीवास्तव, मनोविज्ञान स्नातकोत्तर विभाग के प्रोफेसर सह डिप्टी रजिस्ट्रार एकेडमी प्रो.(डॉ.) एम आई रहमान एवं रसायन स्नातकोत्तर विभाग के प्रोफेसर, सीनेटर  सह बीएन मुस्टा के महासचिव प्रो.(डॉ) नरेश कुमार।

कुलसचिव कर्नल नीरज ने यह भी कहा कि यूजीसी द्वारा छात्रों के लिए आयोजित होने वाले इंडक्शन प्रोग्राम के लिए जिन तीन युवा शिक्षकों का नाम प्रस्तावित किया गया है , वे हैं- मनोविज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सह संयुक्त सचिव क्रीड़ा एवं संस्कृति परिषद डॉ.शंकर कुमार मिश्र , दर्शनशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सह विश्वविद्यालय पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर एवं विश्वविद्यालय भूगोल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.अमित विश्वकर्मा।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस बाबत विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से पूछे जाने पर उन्होंने यही कहा कि कुलपति द्वारा वर्गों में छात्रों- शिक्षकों को पढ़ते-पढ़ाते हुए देखने का सपना अब यूजीसी द्वारा “शिक्षकों और छात्रों के उत्थान को लेकर आयोजित प्रशिक्षण” के माध्यम से पूरा होता दिखने लगा है। डॉ.मधेपुरी ने यूजीसी के इंडक्शन प्रोग्राम की खूब सराहना की।

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बीएनएमयू के डीन डॉ.शिवमुनि को मिला ‘राष्ट्रीय शिक्षा रत्न’ अवॉर्ड

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू एवं सोशल साइंस के डीन प्रो.(डॉ.) शिवमुनि यादव को राष्ट्रीय शिक्षारत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया-विगत सोमवार को नई दिल्ली में। उन्हें यह सम्मान राजधानी दिल्ली में आयोजित “ओरिएंटल हेरिटल हेरिटेज” पर भव्यरूप से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में दिया गया।

बता दें कि प्रो.(डॉ.) शिवमुनि यादव ने बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर से भूगोल स्नातकोत्तर में स्वर्ण पदक प्राप्त करने के बाद वहीं से भूगोल में ही पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। फिर कई महाविद्यालयों में भूगोल के विभगाध्यक्ष रहे। वे प्रतिभा संपन्न , लोकप्रिय व चर्चित प्राध्यापक बन कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं। उन्होंने छात्रहित में तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों की रचना भी की है। वे देश के कई अन्य बड़े-बड़े नामवर विश्वविद्यालयों की विभिन्न ज्योग्राफीकल कमिटियों के सदस्य भी रहे हैं। फ़िलहाल वे “एसोसिएशन ऑफ़ ज्योग्राफर्स आफ बिहार एंड झारखंड” के अध्यक्ष भी हैं।

यह भी जानिये कि शिक्षा के प्रति समर्पित डॉ.शिवमुनी यादव के मार्गदर्शन में लगभग ढाई दर्जन शोधार्थियों ने ज्योग्राफी के भिन्न-भिन्न टॉपिक्स पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। डॉ.यादव को ‘राष्ट्रीय शिक्षा रत्न अवार्ड’ से नवाजे जाने पर इन शोधार्थियों के अतिरिक्त स्नातकोत्तर विभागाध्यक्षों, प्राचार्यों, प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं के साथ-साथ विद्वान कुलपति डॉ.अवध किशोर राय, प्रति कुलपति डॉ.फारूक अली, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी आदि ने भी प्रसन्नता व्यक्त की है।

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क्या खत्म हो गया महागठबंधन ?

देश को नया विकल्प देने की बात करने वाला महागठबंधन क्या खत्म हो गया? जी हाँ, मायावती और ममता बनर्जी के अलग रास्ता अख्तियार करने के बाद लगता कुछ ऐसा ही है। तेजी से बदले घटनाक्रम में बसपा सुप्रीमो मायावती के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी मंगलवार को साफ कर दिया कि चुनाव में वे कांग्रेस से अलग हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी जंग न सिर्फ भाजपा की अगुआई वाले एनडीए से होगी, बल्कि कांग्रेस से भी होगी।

स्पष्ट है कि सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश और तीसरे बड़े राज्य पश्चिम बंगाल में संभावित सहयोगियों के रुख ने न सिर्फ महागठबंधन को खारिज कर दिया है बल्कि कांग्रेस के लिए दूसरे राज्यों में भी चुनौतियां बढ़ा दी हैं। खासकर बिहार में इसका असर दिख सकता है। इन सबसे भाजपा के खिलाफ विपक्ष का बड़ा धड़ा बनाने की कांग्रेस की मुहिम खतरे में पड़ती दिख रही है।

बता दें कि कुछ दिनों पहले कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में 10 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया था। इसके पीछे सीधा संदेश था कि बसपा-सपा गठबंधन इन सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी माने या फिर कांग्रेस की अलग चुनौती के लिए तैयार रहे। पर कांग्रेस का दांव उसी के गले पड़ गया। मायावती ने दो कदम आगे जाकर स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस के साथ किसी भी राज्य में कोई समझौता नहीं होगा। यही नहीं, बसपा-सपा गठबंधन ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में भी दावा ठोक दिया है। उधर पिछले एक साल से लगातार विपक्षी दलों की बैठक में शामिल हो रहीं और अपने मंच पर कांग्रेस समेत दूसरे दलों को आने के लिए बाध्य कर रहीं ममता बनर्जी ने बंगाल की सभी 42 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।

रही बात बिहार की तो यहां भी आरजेडी-कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने सहयोगी दलों को साफ लहजे में बोल दिया है कि वे अपनी राजनीतिक हैसियत से ज्यादा न मांगे। यह बयान कांग्रेस के लिहाज से खासतौर पर अहम है क्योंकि पार्टी ने यहां अपने कद से बड़ा मुंह खोल रखा है।

अन्य राज्यों की बात करें तो तेलंगाना विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से साथ मिलकर लड़े आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू का रुख भी अब बदला-बदला है। प्रदेश की जनता को वह बताते फिर रहे हैं कि कांग्रेस के साथ केंद्र की रणनीति अलग है, लेकिन राज्य विधानसभा चुनाव में उनका कांग्रेस के साथ कोई लेना-देना नहीं है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच समझौते को भी खारिज ही किया जा रहा है।

ऐसे में सवाल उठता है कि विपक्षी दलों का एक साझा घोषणापत्र तैयार करने की जो कवायद शुरू हुई थी अब उसका क्या होगा। ध्यान रहे कि अब तक विपक्षी दलों के जमावड़े में 21 दलों को गिना जाता था और इसमें बसपा, सपा, तृणमूल कांग्रेस, टीडीपी और आप भी शामिल हुआ करती थीं। इन दलों के बिना क्या महागठबंधन का कोई अस्तित्व रह जाएगा?

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सीट शेयरिंग में देरी के कारण लालू कांग्रेस से खफा

कांग्रेस की बढ़ी हुई महत्वाकांक्षा और नखरे से खफा आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने सीटों के तालमेल और आखिरी दौर की बातचीत के लिए उसे तीन-चार दिनों का अल्टीमेटम दिया है। लालू ने साफ कहा है कि सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस हवा में दावा न करे। क्षेत्रीय दलों का सम्मान करते हुए हैसियत के हिसाब से बात करे। आरजेडी सुप्रीमो ने अपना संदेश कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तक पहुंचा दिया है। उम्मीद है कि लालू के इस कड़े रुख के बाद आज अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इस पर कोई निर्णय हो। इसमें भाग लेने बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल भी गए हुए हैं। लालू को आश्वस्त किया गया है कि इसके बाद आरजेडी एवं अन्य सहयोगी दलों के साथ बैठकर बिहार के मसले को सुलझा लिया जाएगा।

बिहार में पहले चरण में चार सीटों के लिए 18 मार्च से पर्चे भरे जाने हैं। ऐसे में मौजूदा हालात को देखते हुए आरजेडी और कांग्रेस के लिए आने वाले दो-तीन दिन काफी महत्वपूर्ण हैं। बातचीत बनी तो ठीक, नहीं तो दूसरे विकल्पों पर भी दोनों दल बढ़ सकते हैं। दरअसल, महागठबंधन में सीट बंटवारे के मसले पर पिछले ढाई महीने से घटक दलों में लगातार बातचीत हो रही है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं निकल सका है, जबकि रांची के रिम्स में इलाज करा रहे लालू ने स्वयं इसके लिए कई बार पहल की है। इधर तेजस्वी यादव भी दिल्ली के कई दौरे कर चुके हैं। प्रदेश के नेताओं से भी बात हो रही है। किंतु नतीजा आज भी वही है, जो ढाई महीने पहले था। अब जबकि चुनाव की घोषणा हो चुकी है, आरजेडी की बेसब्री समझी जा सकती है। इन परिस्थितियों में महागठबंधन के छोटे घटक दल भी लालू पर दबाव बढ़ा रहे हैं। उधर एनडीए में सीटों की हिस्सेदारी तय हो जाने के कारण भी लालू पर दबाव बढ़ रहा है।

राजनीति के जानकार बताते हैं कि आरजेडी की परेशानी और चिढ़ की असली वजह कांग्रेस के बॉरो प्लेयर हैं। कांग्रेस ने दूसरे दलों से ‘प्लेयर’ बुलाकर आरजेडी के मजबूत आधार वाली सीटों पर दावेदारी ठोक रखी है। ऐसी सीटों में दरभंगा, मुंगेर, जहानाबाद, मोतिहारी, शिवहर, मधेपुरा, पूर्णिया और नवादा प्रमुख रूप से शामिल हैं। आरजेडी अपनी इन परंपरागत सीटों से समझौता करने के मूड में नहीं है। हो यह रहा है कि बातचीत के टेबल पर कांग्रेस कीर्ति झा आजाद, राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, अनंत सिंह, अरुण कुमार, लवली आनंद, उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह समेत वैसे प्रत्याशियों की सूची थमा देती है, जिन्हें दूसरे दलों से टिकट देने के लिए बुलाया गया है। एक-दो अपवाद को छोड़ लालू इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं हो रहे।

बताया जा रहा है कि लालू ने कांग्रेस को बॉरो प्लेयर को साइड करके बात करने की सलाह दी है। इसके पीछे एक वजह यह भी है कि कांग्रेस की देखादेखी रालोसपा भी कुछ वैसी सीटों के लिए मचल रही है, जहां आरजेडी का बढिय़ा आधार है। ऐसी सीटों में मोतिहारी और उजियारपुर शामिल हैं।

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त्रिदिवसीय राजकीय सिंहेश्वर महोत्सव को नृत्य एवं गीत ने बनाया यादगार

महाशिवरात्रि के अवसर पर त्रिदिवसीय राजकीय सिंहेश्वर महोत्सव के अंतिम दिन लखनऊ घराने के पंडित बिरजू महाराज की शिष्या एवं बिहार सरकार के 35वीं बैच की प्रशासनिक पदाधिकारी तथा लोकायुक्त कार्यालय में सचिव के पद पर कार्यरत नीलम चौधरी को कथक नृत्य सहयोगी सुब्रतो पंडित सहित अर्धनारेश्वर कार्यक्रम के साथ मंच पर देखते ही नृत्य व गीत प्रेमी दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका भरपूर स्वागत किया। इस मंच पर लगातार कई गीतों पर नृत्य की प्रस्तुति देने वाली नीलम चौधरी बिहार की पहली महिला नृत्यांगना हैं जो खजुराहो महोत्सव में भी भाग ले चुकी है। श्रीमती चौधरी द्वारा आंखों से शब्दों को कहने की खास शैली पर मंत्रमुग्ध होने के फलस्वरूप बीएन मंडल विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक, कुलसचिव व कुलानुशासक रह चुके डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं संगीतकार रोशन कुमार आदि ने उनसे ग्रीन रूम में मिलकर यहां के बच्चों को कथक की तालीम देने की चर्चा की तथा उनकी टीम में शामिल सुब्रत पंडित, शाहिद आलम, मो.सारिक, संदीप सरकार, संस्कृति सुमन व बिपाशा सेन की सराहना की।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri discussing with famous Kathak dancer Neelam Choudhary regarding the prospect & promotion of Kathak Dance in Kosi Region after her performance in Singheshwar Mahotsav.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri discussing with famous Kathak dancer Neelam Choudhary regarding the prospect & promotion of Kathak Dance in Kosi Region after her performance at Singheshwar Mahotsav.

बता दें कि महोत्सव में जहाँ बॉलीवुड के नामचीन प्लेबैक सिंगर शब्बीर कुमार की एक झलक पाने के लिए युवा वर्ग दिवाने हो गये तथा दर्जनों गाने गाकर शब्बीर ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया वहीं स्थानीय कलाकारों में वकील वाका अपने साथियों के साथ रक्त चरित्र ग्रुप डांस का जलवा बिखेरने एवं तालियां बटोरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा।

जहाँ एक ओर स्थानीय ओंकार नाथ संगीत संस्थान मधेपुरा के सना यादव के साथियों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को बांधे रखा वहीं दूसरी ओर ग्रीन फील्ड इंटरनेशनल स्कूल सिंहेश्वर के बच्चों ने “जाट-जटिन” लोक नृत्य पर कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

यह भी बता दें कि जहाँ सृजन दर्पण मधेपुरा के अध्यक्ष-सचिव ओम प्रकाश एवं विकास कुमार की टीम के सत्यम-निखिल-सुमन, राखी-रूपा-पुष्पा आदि ने “शिव होली खेले मसाने में” नृत्य नाटिका की बेहतरीन प्रस्तुति दी वहीं असम के बिहू कलाकारों की बांसुरी की धुन एवं ढोलक की थाप ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

चलते-चलते यह भी कि जिले के स्थापित कलाकारों में संजीव कुमार, प्रो.अरुण कुमार बच्चन, रोशन कुमार, मुकेश कुमार, शशिप्रभा जायसवाल एवं शिवाली ने सुगम संगीत तथा डॉ.रवि रंजन ने जहां शानदार तबला वादन प्रस्तुत किया वहीं चंदा रानी ने एकल नृत्य की बेहतरीन प्रस्तुति दी।

जहाँ इस राजकीय महोत्सव की सारी व्यवस्था डीएम नवदीप शुक्ला एवं एसपी संजय कुमार व एसडीएम वृंदा लाल की देखरेख में पीआरओ सह NDC रजनीश कुमार राय ने की वहीं मंच संचालन सौरभ सिंह एवं मनीषा ने किया। सहयोगी बने रहे- डॉ.रवि रंजन, रौशन एवं स्काउट प्रशिक्षक जयकृष्ण यादव…… आदि।

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जेल से ही एमपी उम्मीदवार चुनेंगे लालू और सिंबल भी बाटेंगे

राजद के राज्य एवं केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सभी लोकसभा एवं डेहरी सीट पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवारों के चयन से लेकर सिंबल बांटने का सारा काम राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ही करेंगे। साथ ही यह भी कि समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन की संभावनाओं को भी राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ही अंतिम रूप देंगे। यह जानकारी राज्यसभा सदस्य व पार्टी प्रवक्ता प्रो.मनोज झा द्वारा मीडिया को दी गयी।

बता दें कि चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू अभी राँची के रिम्स अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं। लालू की गैरमौजूदगी में राबरी देवी की अध्यक्षता में शनिवार को 10, सर्कुलर रोड वाले सरकारी आवास पर हुई बैठक के बाद राजद के राष्ट्रीय महासचिव कमर आलम व प्रवक्ता मनोज झा ने बताया कि अलग-अलग राज्य इकाइयों के प्रस्तावों पर सम्यक विचार करते हुए संसदीय बोर्ड ने उक्त निर्णय लिया है।

यह भी बता दें कि जेल से बाहर नहीं निकलने की स्थिति में सभी राजद प्रत्याशियों को सिंबल देने का विधान राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ही करेंगे जबकि पार्टी के सिंबल पर हस्ताक्षर को लेकर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यूँ राजद की ओर से सुप्रीम कोर्ट से जमानत लेने की कोशिश की जा रही है। बैठक में प्रतिपक्ष नेता तेजस्वी यादव, अवध बिहारी चौधरी, जगदानंद सिंह, कांति सिंह, मीसा भारती, रामचंद्र पूर्वे, अब्दुलवारी सिद्धकी, शिवानंद तिवारी, मंगनी लाल मंडल, शिवचंद्र राम, आलोक मेहता, चंद्रिका राय आदि मौजूद थे।

चलते-चलते यह भी बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले में हुए शहीदों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए राजद ने इस बार होली नहीं मनाने का फैसला किया है। साथ ही यह भी कि बैठक में तेज प्रताप यादव ने शिरकत नहीं की….. यहाँ तक कि उनकी पत्नी ऐश्वर्या राय फिलहाल राबड़ी के आवास पर ही रह रही है और तेजप्रताप पिछले 4 महीने से अपनी माँ की आवास पर पैर नहीं रखा है….. अलग सरकारी आवास आवंटित कराकर रह रहे हैं।

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