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मधेपुरा में सुपर थर्टी के तर्ज पर सुपर सिक्सटी का शुभारम्भ

Madhepura को मुख्यमंत्री डॉ.जगन्नाथ मिश्र द्वारा 9 मई 1981 को जिला घोषित किया गया था – जिला के प्रथम डी.एम. श्री एस.पी.सेठ एवं प्रथम एस.पी. श्री अभयानंद के साथ रासबिहारी उच्च विद्यालय के मंच से | वही अभयानंद कालान्तर में बिहार के डी.जी.पी. तो बने ही, परन्तु उनकी ख्याति “सुपर थर्टी” को लेकर आकाश तक पहुँच गयी |

लगभग पैंतीस वर्षों के बाद भी अभयानंद का असर यहाँ बरक़रार है जिसके तर्ज पर वर्तमान शिवनंदन प्र.मंडल (एस.एन.पी.एम.) उच्च माध्यमिक विद्यालय मधेपुरा  के एच.एम. डॉ.निरंजन कुमार के नेतृत्व में स्कूल के शिक्षकों ने ‘सुपर सिक्सटी’ के चयन हेतु नवमी कक्षा के 200 छात्रों की परीक्षा ली | एक घंटे की परीक्षा में विभिन्न विषयों से सम्बंधित सवाल पूछे गये |

इन परीक्षार्थियों में से बिना किसी विभेद के सिक्सटी प्रतिभावान छात्र/छात्राओं को चयनित कर स्कूल के शिक्षकों द्वारा स्पेशल क्लास लिया जायगा | अब इन छात्रों को कहीँ टयूशन पढ़ने की जरुरत नहीं पड़ेगी | वे सुपर थर्टी में भी जगह पा लेंगे |

Madhepura Abtak द्वारा जब समाजसेवी–शिक्षाविद Dr.B.N. Madhepuri से इस बाबत कुछ प्रतिक्रिया माँगी गयी तो उन्होंने कहा कि पूर्व डी.जी.पी. अभयानंद, पूर्व डी.एम. गोपाल मीणा एवं वर्तमान डी.एम. मो.सोहैल के शिक्षा के उन्नयन के प्रति कटिबद्धता का असर अब दिखने लगा है |

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डी.एम. मो. सोहैल ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर किया एक दिवसीय चिन्तन शिविर का आयोजन

Madhepura  जिले के डायनेमिक जिला पदाधिकारी जनाव मो.सोहैल साहब के निदेशानुसार गुणवत्तापूर्ण प्रारम्भिक शिक्षा हेतु रविवार को बी.एन.मंडल स्टेडियम में जिले के तेरहो प्रखंड के सभी प्राथमिक, मध्य एवं नवसृजित स्कूलों के एच.एम. की बैठक आयोजित की गयी | इस एक दिवसीय चिंतन शिविर का मुख्यअतिथि कहिए, उद्घाटनकर्ता या सर्वेसर्वा सब कुछ डी.एम. मो.सोहैल थे और शिक्षा विभाग से जुड़े सारे पदाधिकारीगण |

इस चिन्तन शिविर में केवल एक ही शिक्षाविद् व जनसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी को मुख्यवक्ता के रूप में आमन्त्रित किया गया था जिन्होंने अपने लम्बे तकरीर में भारतरत्न डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को जीवन्त कर दिया और प्रधानाध्यापकों को जगा-जगा कर खूब तालियाँ बटोरी |

शिविर में डी.एम. मो. सोहैल ने प्रारम्भिक शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने एवं विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण पुनर्स्थापित करने को लेकर एक दर्जन ठोस निर्देश देते हुए यह भी चेतावनी दी कि या तो शिक्षक निर्देशों का अक्षरश: पालन करें व अपनी कार्यशैली में सुधार लायें या फिर कठोर कारवाई के लिए मानसिक रूप से अपने को तैयार करने में लग जायें |

Interaction between DM and HM regarding the problems of the Schools .
Interaction between DM and HM regarding the problems of the Schools .

डी.एम. ने तन्मयतापूर्वक शिक्षकों की समस्याओं से रु-ब-रु होते हुए एक-एक का समाधान दिया और यह भी कहा कि समस्याएं कहाँ नहीं हैं | उन्हीं समस्याओं के बीच से ठोस रास्ता निकालना ही तो आपकी शैक्षणिक योग्यता की पहचान कराती है | उन्होंने खेद प्रकट करते हुए कहा कि हजार से अधिक शिक्षकों के पास स्कूल भवन निर्माण की राशि है किन्तु निर्माण कार्य अब तक अधुरा है | कई स्कूलों में घंटियाँ नहीं बजती | दस फीसदी एच.एम. को छोड़ शेष क्लास लेते ही नहीं |

डी.एम. मो. सोहैल ने शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि आप शिक्षक की गरीमा को वापस लायें | उन्होंने डॉ.मधेपुरी का नाम लेते हुए शिक्षकों को डॉ.कलाम एवं डॉ.मधेपुरी के बीच घटित संस्मरण की ओर इशारा करते हुए कहा कि शिक्षक का संसार में कितना सम्मान है- उसे सच्चा शिक्षक बनने के बाद ही आप महसूसेंगे |

DM Md.Sohail, Dr.Madhepuri and others standing in a Shapathgrahan Ceremony .
DM Md.Sohail, Dr.Madhepuri and others standing in a Shapathgrahan Ceremony .

भला क्यों नहीं, जब डॉ.मधेपुरी ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम से पहली बार पटना हवाई अड्डे पर (9 बजे रात, 30 दिसम्बर-2005) अपने मिलने की चर्चा की और यह कहा कि मेरे नाम के किनारे ‘शिक्षक’ लिखा देखते ही डॉ.कलाम खड़े होकर मेरा अभिवादन किये और लम्बे समय तक बैठे नहीं…… बल्कि यही बोले कि शिक्षक राष्ट्रनिर्माता होता है और उन्हें सम्मान दे रहा हूँ | यह सुनकर न जाने कितने प्रध्यानाध्यापकों की आँखें नम हो गई |

आरम्भ में शिविर का श्री गणेश करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी बद्री नारायण मंडल द्वारा एक-एक बुके देकर मुख्यअतिथि मो.सोहैल एवं मुख्यवक्ता डॉ.मधेपुरी का स्वागत किया गया | मंच संचालन जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं स्काउट गाइड के आयुक्त जयकृष्ण यादव ने संयुक्त रूप से किया | शिविर की सफलता के लिए शिक्षा विभाग के पदाधिकारीगण- सुरेन्द्र प्रसाद, शिवशंकर राय, चंद्र्शेखर राय, हरि झा, आदित्य प्रकाश एवं डॉ.यदुवंश सहित प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष वीरेन्द्र प्रसाद यादव आदि को सदैव मुस्तैद देखा गया |

All the Primary and Middle Schools HM attending Shapathgrahan Samaroh .
All the Primary and Middle Schools HM attending Shapathgrahan Samaroh .

अन्त में डी.एम. मो. सोहैल ने सभी प्रधानाध्यापकों को अपने शैक्षिक क्रियाकलापों के उन्नयन के बाबत शपथ दिलाई |

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चारो पहर हवा में घुल रहा जहर

भाई साब ! ठहरिये !! आप ही से कुछ कहना चाहता हूँ| आपने कभी यह जानने की कोशिश की है कि अपने बिहार राज्य की राजधानी ‘पटना’ तो वायु प्रदूषण के मामले में देश की राजधानी ‘नई दिल्ली’ के बाद दूसरे नंबर पर आ गया है ! अब तो पटनावासियों के साथ-साथ पटना आने-जाने वालों को भी प्रदूषण कम करने के उपायों पर गंभीरतापूर्वक चिंतन-मनन शुरू कर देना होगा |

प्रदूषणों से मुक्ति के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी प्रार्थना के वक्त ही प्रदूषण की भयावह स्थितियों से अवगत कराना होगा ताकि वे घर जाकर अपने माता-पिता एवं अभिभावकों से सारी बातें बोले और समाज को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने का माहौल हर घर में बनने लगे |

समस्त शिक्षकवृन्द अपने-अपने छात्रों को वायु प्रदूषण के बारे में बतायें कि दीपावली के बाद वायु प्रदूषण का विश्लेषण किये जाने पर पता चला कि पटना में जान लेवा प्रदूषित धुल-कण 400 माइक्रोन/घन मीटर तक पहूँच गया है जबकि वह 100 माइक्रोन/घन मीटर से ऊपर होना ही प्राणघातक माना जाता है |

सरकार दीपावली के अवसर पर मात्र यही अपील करके अपनी जवाबदेही का इतिश्री कर लेती है- बच्चों को पटाखों से दूर रखें ! सरकार गाँव से लेकर जिला स्तर तक बाल संरक्षण समिति बनाने को उत्सुक है परन्तु, पटाखे निर्माता कंपनियों के लायसेंस रद्द करना नहीं चाहती – जबकि चिकित्सकों के अनुसार वायु प्रदूषण से बच्चों के फेफड़ों में तेजी से संक्रमण हो रहा है | इसके साथ ही ब्रोंकाइटिस-अस्थामा जैसी बीमारियाँ, कान व नाक में कई प्रकार की खराबियों के साथ-साथ बच्चों के सुनने की शक्ति भी कमजोर पड़ने लगी है |

सड़कों पर अहर्निश धुआं उगलते सर्वाधिक वाहनों के बीच बच्चों का प्रतिदिन स्कूल आना-जाना और वैसे वाहनों के फिटनेस चेक करने के लिए परिवहन विभाग को फुर्सत का सर्वथा अभाव होना- भला बच्चों के फेफड़ों को खोखला नहीं तो क्या करेगा ?

भाई साहब ! क्या ये सब कुछ सरकार के भरोसे छोड़ देना उचित है ? जिस तरह महिलाएँ दवाब डालकर ‘शराबबंदी’ कराई उसी तरह सचेतन मर्दों को सरकार पर दवाब डालकर ‘पटाखेबन्दी’ के लिए कोशिश करनी होगी | स्वामी रामदेव महाराज को भी राष्ट्रनिर्माण के साथ स्वास्थ्यनिर्माण के लिए चर्चा आरम्भ करनी होगी | राष्ट्रीय समस्याओं से हम तभी निजात पा सकेंगे जब सारा राष्ट्र चारो पहर सजग रहेगा, लगा रहेगा और जगा रहेगा |

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आम जनों के स्वास्थ्य के लिए मुख्यमंत्री सहित अन्य अधिकारी व जिलापदाधिकारी भी चौकस

जहां एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव द्वारा हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के क्रम में सूबे के मधेपुरा , पूर्णिया, समस्तीपुर, छपरा एवं बिहटा आदि स्थानों पर पाँच नये मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा के साथ-साथ अगले सत्र से पढ़ाई आरम्भ करने की कवायद भी शुरू की गयी वहीं दूसरी ओर मधेपुरा के डायनेमिक जिलापदाधिकारी मो.सोहैल द्वारा सदर अस्पताल मधेपुरा का औचक निरीक्षण आरम्भ कर विभिन्न वार्डों का जायजा लिया गया तथा दिए गये आवश्यक निर्देशों को पालन करने के लिए हिदायत भी की गयी |

जिलापदाधिकारी मो.सोहैल ने कई ख़ास मामले को गंभीरतापूर्वक लेते हुए उपस्थित चिकित्सकों के बीच यह कहते हुए नाराजगी जताई कि आई.सी.यू. भवन निर्माण को पांच वर्ष पूरा होने के बावजूद भी उसे शुरू नहीं किया जाना – जनमानस के स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही नहीं तो क्या कहेंगे इसे ?

जिलापदाधिकारी मो.सोहैल ने प्रभारी सी.एस. से कहा कि तत्काल दो बेड को ही सुसज्जित कर आक्सीजन सिलेंडर के माध्यम से ही आई.सी.यू. शुरू करें | उन्होंने यह भी निदेश दिया कि आई.सी.यू. संचालन के लिए यदि एम.डी. डिग्रीधारी प्रशिक्षित डाक्टर का होना जरूरी है तो उसकी भी व्यवस्था तुरत कर ली जाय |

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पुनः बढ़ाई गयी एल.एल.बी. व प्री लॉ परीक्षा फार्म भरने की तिथि

भूपेन्द्र ना. मंडल वि.वि. के माननीय कुलपति डॉ. विनोद कुमार के निर्देश पर परीक्षा नियंत्रक डॉ.नवीन कुमार ने मधेपुरा अबतक  को बताया कि छात्र संगठन के शिष्टमंडल द्वारा परीक्षा प्रपत्र भरने की तिथि बढ़ाने की माँग पर पुनः एल.एल.बी. व प्री लॉ परीक्षा फॉर्म भरने की पूर्व निर्धारित तिथि को बढ़ा दी गई है |

अब एल.एल.बी. व प्री लॉ के छात्र बिना विलम्ब शुल्क के 04 जनवरी 2016 तक परीक्षा प्रपत्र भर सकते हैं, वहीं विलम्ब शुल्क के साथ 11 जनवरी 2016 तक इच्छुक छात्र परीक्षा फॉर्म भर सकेंगे |

ज्ञातव्य है कि छात्रहित में अवकाश के दिनों में भी फॉर्म जमा करने की सुविधा प्रदान की गयी है |

 

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आतंकवाद नहीं इस्लाम का विरोध करेंगे अमेरिका के अगले राष्ट्रपति..?

2008 में जब बराक हुसैन ओबामा को दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका ने अपना राष्ट्रपति चुना तब से पूरी दुनिया ने अमेरिका को एक अलग नजरिये से देखना शुरू किया। ओबामा ना केवल अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति थे बल्कि उनके नाम के ‘बराक’ और ‘ओबामा’ के बीच ‘हुसैन’ भी मौजूद था। ओबामा को चुनकर अमेरिकी जनता ने सचमुच एक ऐतिहासिक फैसला लिया था। अब अमेरिका की छवि केवल वैभवशाली गोरी चमड़ी वाले देश की नहीं रही। ओबामा के रूप में उसने अपना उदारवादी चेहरा दुनिया के सामने रखा और ओबामा ने लगातार दो कार्यकाल में अपने अत्यन्त सहज आचरण से अमेरिकी जनता के उस फैसले को सही साबित किया।

अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में सम्पूर्ण विश्व की दिशा और दशा को प्रभावित करने की ताकत और क्षमता रखने के बावजूद ओबामा ने ना तो अपनी वाणी का संयम खोया ना अपने व्यवहार का। यहाँ तक कि ओसामा बिन लादेन के खिलाफ अपने बड़े और सफल अभियान के बाद भी उनकी ‘छवि’ नहीं बदली। उन्होंने जो किया वो आतंक का पर्याय बन चुके ओसामा के खिलाफ था। उसका इस्लाम से कोई लेना-देना ना तो होना चाहिए था, ना था। लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। कल का ओसामा आज आईएसआईएस के रूप में सामने है और ओबामा का दूसरा कार्यकाल पूरा होने को है। अमेरिकी संविधान के अनुसार तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं हुआ जा सकता इसीलिए तय है कि ओबामा की जगह कोई और आएगा। ऐसे में ये प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि ओबामा का उत्तराधिकारी उनकी नीति और छवि को विस्तार देगा या उसे किसी नई दिशा में मोड़ेगा..?

ओबामा के ‘उत्तराधिकारी’ के तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी से हिलेरी क्लिंटन और रिपब्लिकन पार्टी से डोनाल्ड ट्रंप के नाम खास तौर पर उभर कर सामने आए हैं। जहाँ तक हिलेरी की बात है उनके सौम्य पर सशक्त व्यक्तित्व से दुनिया पहले से वाकिफ है। हिलेरी की राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक व आर्थिक नीतियां कमोबेश ओबामा की तरह ही रहेंगी। पर रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप अगर सत्ता में आते हैं तब अमेरिका वो हरगिज नहीं रह जाएगा जो अभी है। आप पूछेंगे ऐसा क्यों..? चलिए जानने की कोशिश करते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप… न्यूयॉर्क रियल एस्टेट की दुनिया में ये नाम स्टेटस का पर्याय माना जाता है। अगर आप न्यूयॉर्क में हैं और आपके पते में ‘ट्रंप टावर’, ‘ट्रंप प्लेस’, ‘ट्रंप प्लाजा’ या ‘ट्रंप पार्क’ लिखा है तो आप ‘खुशनसीब’ हैं। न्यूयॉर्क समेत अमेरिका के कई शहरों की शानदार गगनचुंबी इमारतें डोनाल्ड ट्रंप की सफलता की कहानी कहती हैं। साइंस ग्रेजुएट और कॉलेज के दिनों में छात्र नेता रहे 69 वर्षीय डोनाल्ड को रियल एस्टेट का कारोबार अपने पिता फ्रेडरिक ट्रंप से 40 साल पहले विरासत में मिला और आज वो करीब 100 कम्पनियों के मालिक हैं। फ्लोरिडा के पाम बीच पर बने बेहद आलीशान ‘ट्रंप पैलेस’ में रहने वाले डोनाल्ड की नज़र अब ‘व्हाइट हाउस’ पर है। डोनाल्ड अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रबल दावेदार हैं और चुनाव मैदान में उतरने से पहले ही अपने बयानों की वजह से अमेरिका समेत पूरी दुनिया में जाना-पहचाना नाम बन चुके हैं।

वैसे तो डोनाल्ड ट्रंप के कई बयान इन दिनों चर्चा में हैं पर जिस बयान ने पूरी दुनिया में हंगामा बरपा दिया वो है मुसलमानों को अमेरिका आने से रोकने वाला बयान। उन्होंने कहा कि अगर वो सत्ता में आए तो अमेरिका में मुसलमानों के आने पर प्रतिबंध लगा देंगे। देश को आतंकवाद से बचाने के लिए अमेरिका में मुसलमानों के डेटाबेस की व्यवस्था लागू की जाएगी। ट्रंप के अनुसार अमेरिका के मुसलमानों पर अभूतपूर्व निगरानी जरूरी है। यहाँ तक कि वो मस्जिदों पर भी निगाह रखने की बात कर रहे हैं।

डोनाल्ड जिस एजेंडा को लेकर मैदान में उतरने जा रहे हैं उसमें अमेरिका और मैक्सिको के बीच एक बड़ी दीवार बनाना भी शामिल है ताकि प्रवासी और सीरियाई शरणार्थी अमेरिका में ना घुस सकें। इसके अलावा वो अमेरिका में रह रहे लगभग एक करोड़ ‘अवैध’ प्रवासियों को भी वापस भेजना चाहते हैं। उनका दावा है कि अगर वो अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो आतंकी संगठन आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट) पर इतनी कड़ी कार्रवाई करेंगे जितनी अब तक किसी ने नहीं की है।

आतंकवादियों का कोई ‘धर्म’ नहीं होता। उनके खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप चाहे जैसी कार्रवाई करें पर मुसलमानों को लेकर दिया गया उनका बयान अमेरिकी मूल्यों और संविधान के खिलाफ है। उनके बयान वैसे ही हैं जैसे भारत में ‘योगी आदित्यनाथ’ या ‘असदउद्दीन ओवैसी’ के होते हैं। हैरानी तो इस बात से होती है कि ऐसे बयानों से वो अमेरिका के एक बड़े तबके का भरोसा जीतने में सफल हो चुके हैं। इसकी पुष्टि हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण से होती है जिसमें 39% लोकप्रियता के साथ 11 अंक हासिल कर वो अपने बाकी प्रतिद्वंदियों टेड क्रूज, मार्को रूबियो और बेन कार्सन से काफी आगे निकल चुके हैं। उनकी बढ़ती लोकप्रियता के मूल में अमेरिका का वो कामकाजी तबका है जिसे मुसलमानों का ‘भय’ दिखाकर उन्होंने अपने पक्ष में कर लिया है। कट्टर विचारों वाले डोनाल्ड ट्रंप अत्यन्त कुशल वक्ता भी हैं और इसका उन्हें भरपूर लाभ मिल रहा है।

अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा, राष्ट्पति पद के लिए सम्भावित डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन, फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग, गूगल के सुंदर पिचाई समेत विश्व की कई जानी-मानी हस्तियों ने डोनाल्ड ट्रंप के बयानों की कड़ी आलोचना की है। अमेरिका की डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी के प्रमुख डेबी वासेरमैन शुल्ट्ज ने बिल्कुल सही कहा है कि यह एक खतरनाक और ‘गैरसमावेशी’ सोच है जिससे सात दशक पहले अमेरिका की महानतम पीढ़ी लड़ी और जीती थी। हो सकता है डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मुसलमानों का विरोध चुनाव जीतने का ‘ट्रिक’ मात्र हो लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ऐसी सोच का फिर से पनपना और अमेरिकी आवाम को इस्लाम-विरोध के रास्ते पर डालना अमेरिका समेत पूरी दुनिया के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बी.एन.एम.यू. के स्नातक तीनों पार्ट के फार्म भरने की तिथि घोषित

परीक्षा नियंत्रक डॉ.नवीन कुमार ने मधेपुरा अबतक  को बताया कि डिग्री पार्ट वन-2015 का परीक्षा-फार्म बिना विलम्ब शुल्क के 8 जनवरी 2016 तक भरा जाएगा तथा विलम्ब शुल्क के साथ 15 जनवरी 2016 तक |

डिग्री पार्ट टू का परीक्षा-फार्म बिना विलम्ब शुल्क के 4 फरवरी 2016 से 16 फरवरी 2016 तक तथा विलम्ब शुल्क के साथ 17 फरवरी 2016 से 23 फरवरी 2016 तक फार्म भरने की तिथि रखी गई है |

डिग्री पार्ट थर्ड का परीक्षा फार्म 18 जनवरी 2016 से 28 जनवरी 2016 तक तथा विलम्ब शुल्क के साथ 29 जनवरी 2016 से 3 फरवरी 2016 तक भरा जाएगा |

इसके साथ ही मेडिकल, लॉ, वोकेशनल कोर्सेस आदि की परीक्षाओं के फार्म भरने की तिथियाँ भी घोषित कर दी गयी हैं |

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हिन्दी के लिए कोई पागल ना बने, परन्तु अंग्रेजी को बनाये रखने की कोशिश भारतीय जनतंत्र के साथ विश्वासघात है

यहाँ के सामाजिक, शैक्षिक, एवं राजनीतिक क्षेत्र के आदि पुरुष रहे हैं- बाबू रासबिहारी लाल मंडल जिन्हें लोग हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, बंगला, नेपाली आदि भाषाओं के अच्छे व गहरे जानकार मानते रहे हैं | वहीं आजाद भारत के प्रथम विधि मंत्री रह चुके शिवनंदन प्रसाद मंडल हिन्दी, अंग्रेजी व संस्कृत के तथा प्रथम एम.एल.सी. मो.कुदरतुल्लाह काजमी इस धरती के हिन्दी, उर्दू एवं मैथिली के विद्वान माने जाते रहे | तभी तो मो.काजमी साहब 12 वर्षों तक बिहार राज्य हिन्दी प्रगति समिति के सक्रिय सदस्य रहे तथा वर्षों रहे थे- बिहार मैथिली महासंघ के उपाध्यक्ष भी |

समाजवादी चिन्तक एवं हिन्दी-अंग्रेजी के मर्मज्ञ भूपेन्द्र नारायण मंडल की विद्वता तो भारतीय संसद में अंग्रेजी के सम्बन्ध में हो रही चर्चा के दरमियान दिए गये वक्तव्य से आंकी जा सकती है- अध्यक्ष महोदय ! मैं हिन्दी के लिए पागल नहीं हूँ, परन्तु भारत में ‘अंग्रेजी’ को बनाये रखने की कोशिश भारतीय जनतंत्र के साथ विश्वासघात है |

Sanrakshak Dr. Madhepuri inspecting Spelling Bee Championship Exam at Parvati College Madhepura.
Sanrakshak Dr. Madhepuri inspecting Spelling Bee Championship Exam at Parvati College Madhepura.

उसी हिन्दी को प्रतिस्थापित करने के लिए ‘हिन्दी शब्द स्पर्धा’ का आयोजन क्यों किया जा रहा है- यह भी जानिये | गत वर्ष ‘स्पेलिंग बी.एसोसिएशन’  मधेपुरा द्वारा अंग्रेजी में चैंपियनशिप के पारितोषिक वितरण समारोह में आये एस.पी. आशीष कुमार ने संरक्षक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी व अध्यक्ष डॉ.विश्वनाथ विवेका से हिन्दी में इसे आयोजित करने हेतु जिज्ञासा व्यक्त की थी | फलस्वरूप संरक्षक की सहमति से सचिव ने 20 दिसम्बर को एक दर्जन स्कूल के वर्ग 1 से 10 तक के लगभग 450 छात्र-छात्राओं की ‘हिन्दी शब्द प्रतिस्पर्धा परीक्षा’ पार्वती कॉलेज में आयोजित की जिसकी फाइनल परीक्षा 27 दिसम्बर को इसी कॉलेज में होगी |

इस ‘हिन्दी शब्द प्रतिस्पर्धा’ चैंपियनशिप में शहर के शिखर के स्कूल- हाली क्रास, किरण पब्लिक, जितेन्द्र पब्लिक, साउथ पॉइंट, डी.एस.एकेडेमी सहित अन्य विद्यालयों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और इसे संपन्न कराने में संरक्षक डॉ.मधेपुरी, सचिव सावंत रवि सहित सोनीराज, मो.शंहशाह, अमित, रजाउल, रवि कुमार, मनीष, राहुल, ऋतुराज, दीपक, मो.कैशर, मो.आतिफ आदि सक्रिय देखे गये |

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हमें पता है हाफिज सईद और शाहरुख खान में फर्क, फिर ‘दिलवाले’ पर मुर्दाबाद क्यों..?

भारत की सफलतम फिल्मों में शुमार ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में राज (शाहरुख) और सिमरन (काजोल) की प्रेम कहानी ने पर्दे पर जैसे जादू-सा रच डाला था। उम्मीद की जा रही थी कि 20 साल बाद ‘दिलवाले’ में ये जोड़ी एक बार फिर कुछ वैसा ही कमाल दिखाएगी। उनके चाहनेवाले बेसब्री से इंतजार कर रहे थे शुक्रवार 18 दिसम्बर का। फिल्म तय दिन पर रिलीज भी हुई लेकिन ‘शाहरुख मुर्दाबाद’ के नारे के साथ। बिहार समेत भारत के कई राज्यों में इस फिल्म का विरोध किया जा रहा है। कहीं फिल्म के पोस्टर फाड़े जा रहे हैं तो कहीं शाहरुख का पुतला जल रहा है। लोगों से फिल्म नहीं देखने की अपील की जा रही है। कुछ जगहों पर विरोध-प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ा।

सबसे पहले तो ये जान लें कि देश के कई सिनेमाघरों में जिस ‘दिलवाले’ के शो स्थगित किये जा रहे हैं उसके कंटेंट से प्रदर्शनकारियों का कोई लेना-देना नहीं। फिल्म आज के हिट डायरेक्टर रोहित शेट्टी के निर्देशन में बनी है और शाहरुख-काजोल के अलावे वरुण धवन और कीर्ति सेनन ने भी इसमें अभिनय किया है। फिल्म का विरोध वास्तव में इसके नायक शाहरुख खान को लेकर है। अभिनय के अलावे शाहरुख इस फिल्म के निर्माण से भी जुड़े हैं और इसकी सफलता-असफलता पर बहुत कुछ टिका है उनका। सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या कर दिया शाहरुख ने..? ‘दिलवाले’ का विरोध कर किस जुर्म की सजा दी जा रही है उन्हें..?

आज एक ओर विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, हिन्दू सेना, शिवराष्ट्र सेना जैसे हिन्दूवादी संगठन और दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ता जिस वजह से शाहरुख की फिल्म का बहिष्कार कर रहे हैं उसके मूल में है पिछले कुछ महीने से भारतीय समाज और राजनीति के पटल पर धब्बे की तरह उभरा असहिष्णुता (Intolerance) का मुद्दा। पहले कन्नड़ लेखक कलबुर्गी और कुछ समय बाद यूपी के दादरी में गोमांस रखने के शक में अखलाक नामक शख्स की हत्या के बाद ये मुद्दा भड़का और पूरे देश में फैल गया। कई लेखकों, फिल्मकारों और वैज्ञानिकों ने देश में बढ़ रहे तथाकथित इन्टॉलरेंस के विरोध में अपने पुरस्कार लौटा दिए। इसी दौरान आमिर खान का देश छोड़ने वाला बयान सामने आया और शाहरुख उनके समर्थन में दिखे। 2 नवम्बर को अपने 50वें जन्मदिन पर एक चैनल से उन्होंने कहा कि “देश में इन्टॉलरेंस बढ़ रहा है। अगर मुझसे कहा जाता है तो एक सिम्बॉलिक जेस्चर के तहत मैं भी अवार्ड लौटा सकता हूँ। देश में तेजी से कट्टरता बढ़ी है।“

हालांकि ‘दिलवाले’ के रिलीज से पहले 16 दिसम्बर को शाहरुख ने कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया। देश में कोई इन्टॉलरेंस नहीं है। अगर उन्होंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है तो वह माफी मांगते हैं। पर उन्हें ‘माफी’ नहीं मिली। खासकर उन राज्यों से जहाँ सत्ता में बीजेपी है। मसलन गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और झारखंड। वैसे विरोध-प्रदर्शन राजधानी दिल्ली और बिहार, यूपी जैसे राज्यों में भी हुए जहाँ बीजेपी का शासन नहीं है। पर विरोध करने वाले लोग हर जगह ‘समान विचार’ वाले  हैं।

हजारों साल का इतिहास गवाह है कि इन्टॉलरेंस यानि असिष्णुता इस देश के संस्कार में ही नहीं है। अगर ये देश असहिष्णु होता तो तीनों खान (शाहरुख-आमिर-सलमान) हिन्दी सिनेमा पर राज नहीं कर रहे होते। इस देश में इन्हें पलकों पर बिठाने वाले करोड़ों लोग हैं और ऐसे में आमिर और शाहरुख के बयानों से कुछ लोगों के ‘आहत’ होने को भी गलत नहीं कहा जा सकता। पर भावनाओं को ठेस पहुँचना एक बात है और उसे राजनीति का रंग देना दूसरी। अगर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नकारकर मान भी लें कि शाहरुख ने गलत कहा था तो भी क्या बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का शाहरुख को देशद्रोही कहना या फिर बीजेपी के ही सांसद योगी आदित्यनाथ का शाहरुख की तुलना आतंकी हाफिज सईद से करना और साध्वी प्राची का ये कहना कि वे पाकिस्तान के एजेंट हैं कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता। इस तरह की प्रतिक्रिया ही अपने आप में ‘असहिष्णुता’ है।

ना जाने कितने ‘हाफिज सईद’ हर पल इस ताक में रहते हैं कि कब इस तरह का मौका आए और वे हमारे किसी ‘शाहरुख’ को ट्वीट कर पाकिस्तान आने का ‘निमंत्रण’ दे। शाहरुख के मामले में हाफिज सईद ने ठीक यही किया भी। जब तक हम अपने-अपने स्वार्थ में असहिष्णुता (Intolerance) जैसे मुद्दों को हवा देते रहेंगे तब तक हाफिज सईद जैसे लोगों को भारतीय मुसलमानों से ‘छद्म’ सहानुभूति दिखाने का मौका मिलता रहेगा। हमें पूरी दृढ़ता से ये बताना होगा कि भारत सदियों से ‘शरण’ देता आया है। यहाँ से किसी को कहीं जाकर ‘शरण’ लेने की नौबत ना तो कभी आई है, ना आएगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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पर्यावरण जागरूकता के लिए आयोजित निबंध प्रतियोगिता में शामिल छात्र हुए पुरस्कृत

पर्यावरण शब्द तो है पुराना,फिर भी नये बच्चों को इसे जान लेना जरुरी है | पर्यावरण को “ परि + आवरण ” द्वारा समझा जा सकता है यानी ‘परि’ का अर्थ ‘चारो ओर’ तथा ‘आवरण’ का अर्थ ‘परिवेश’ |

इस तरह ‘पर्यावरण’ – “धरती सहित मानव, जीव-जन्तु, हवा-पानी, पेड़-पौधा आदि सम्पूर्ण परिवेश की विविध गतिविधियों के परिणाम आदि का समावेश ही तो है |” इसके साथ ही, आधुनिकता की दौड़ में, वैज्ञानिक उपलब्धियों को हासिल करने की होड़ में हम प्राकृतिक संतुलन को तेजी से बिगाड़ने में जो लग गये हैं – वही तो (पर्यावरण का) प्रदूषण है|

पर्यावरण जागरूकता के लिए जिला स्तरीय निबंध प्रतियोगिता का आयोजन मनोहर उच्च वि.सिंहेश्वर में किया गया जिसमें जिले के विभिन्न विद्यालयों के तीन दर्जन छात्र-छात्राओं ने भाग लिया | निबंध का विषय रखा गया – ‘पर्यावरण संरक्षण बनाम प्लास्टिक युग’|

सफल प्रतियोगियों में प्रथम स्थान पर रही – केशव कन्या उच्च विद्यालय,  मधेपुरा की छात्रा ‘ कृतिका ’, द्वितीय स्थान पर रहे – शिवनंदन प्र.मंडल उ.मा.वि. के छात्र मंदीप कुमार एवं तीसरे स्थान पर रासबिहारी उ.मा.वि. का छात्र सुशांत कुमार |

इन तीनों सफल प्रतिभागियों को वन प्रमंडल पदाधिकारी श्री सुनील कुमार सिन्हा द्वारा पुरस्कार में – एक-एक प्रशस्ति-पत्र के साथ-साथ क्रमशः दो हजार, डेढ़ हजार एवं एक हजार नगद राशि देकर पुरस्कृत किया गया |

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