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नोटबंदी पर सरकार के नए निर्देश

सरकार ने आज नोटबंदी से जुड़े कई अहम निर्देश जारी किए। 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को अब 24 नवंबर की आधी रात के बाद बैंक काउंटरों से एक्सचेंज नहीं कराया जा सकेगा। इसका मतलब यह कि शुक्रवार से इन नोटों को अब सिर्फ बैंक में जमा कराया जा सकेगा। ऐसे नोटों को जमा कराने की अवधि 30 दिसंबर तक है।

बता दें कि आज जारी निर्देशों में सरकार ने 1000 रुपये के पुराने नोटों को पूरी तरह बैन कर दिया है, पर राहत की बात यह कि कई जरूरी सेवाओं में 500 रुपये के पुराने नोटों के उपयोग की अवधि 15 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दी गई है। इन नोटों के जरिए वर्तमान और बकाया बिजली और पानी के बिल भरे जा सकेंगे। साथ ही इनका इस्तेमाल पेट्रोल पम्पों, दवा दुकानों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों एवं हवाई अड्डों पर किया जा सकेगा। 500 के पुराने नोटों से 3 दिसंबर से 15 दिसंबर तक टोल टैक्स भी दिया जा सकेगा। 3 दिसंबर से इसलिए क्योंकि सरकार ने 2 दिसंबर तक टोल टैक्स फ्री कर दिया है।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक केन्द्र और राज्य सरकार के स्कूलों व म्युनिसिपैलिटी और स्थानीय निकाय के स्कूलों में भी प्रति छात्र 2000 तक की फीस 500 के पुराने नोटों के जरिए अदा की जा सकेगी। केन्द्र एवं राज्य सरकार के कॉलेजों की फीस भी इन नोटों से दी जा सकेगी। यही नहीं, उपभोक्ता सहकारी दुकानों से एक बार में अधिकतम 5000 की खरीद और 500 रुपये मूल्य तक के प्रीपेड मोबाइल फोन टॉप-अप में भी 15 दिसंबर तक 500 के पुराने नोट चलेंगे।

 

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लाइफ केयर क्लिनिक का भव्य उद्घाटन

राम रहीम रोड के पूर्वी किनारे पर “लाइफ केयर क्लिनिक” का उद्घाटन मधेपुरा के विशिष्ट समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी द्वारा स्थानीय साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों एवं व्यापारियों के बीच किया गया |

यह भी बता दें कि जहां एक ओर सर्जन डॉ.वरुण कुमार का वृंदावन नर्सिंग होम और दूसरी ओर सर्जन डॉ.डी.के. सिंह का द्रुवित हॉस्पिटल है, वहीं इन दोनों चिकित्सालयों के बीच मधेपुरा सदर अस्पताल में वर्षों अनुभव प्राप्त किये चिकित्सक डॉ.प्रिय रंजन भास्कर द्वारा स्थापित ‘लाइफ केयर क्लिनिक’ के व्यवस्थापक हैं सुनील कुमार एवं सहयोगी डॉ.विनीत कुमार |

उद्घाटन समारोह में उपस्थित डॉ.अमोल राय, पूर्व सीसीडीसी (बी.एन.एम.यू.), उनके सुपुत्र डॉ.प्रिय रंजन भास्कर, सहयोगी डॉ.विनीत कुमार, व्यवस्थापक सुनील कुमार सहित स्नातकोत्तर हिन्दी के विभागाध्यक्ष डॉ.इन्द्र नारायण यादव, डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप, पूर्व प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, प्रो.विजय कुमार, डॉ.अंजनी कुमार, डॉ.राज किशोर सिंह, डॉ.प्रियंका सिंह व अन्य चिकित्सकों सहित उपस्थित जनों के बीच उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी ने हर दिल अजीज भारतरत्न डॉ.कलाम को उद्धृत करते हुए इस बात की चर्चा की कि डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम अपने सिरहाने में कुछ ग्रंथों के साथ-साथ नोबेल पुरस्कार प्राप्त डॉ.ए.कैरॉल की पुस्तक “Man The Unknown” भी रखते थे जिस पुस्तक में इस बात की चर्चा की गई है कि चिकित्सक किसी भी मरीज के केवल शरीर का ही इलाज नहीं करें बल्कि शरीर के साथ-साथ उसके मन का भी इलाज करे | ऐसा करने पर चिकित्सक के  इलाज के प्रति मरीज का विश्वास गहराता है |

उद्घाटन कार्यक्रम में महिलाओं की उपस्थिति से ऐसा लगने लगा जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति आधी आबादी की जागरुकता दिनानुदिन गतिशील होती जा रही है |

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महाकवि जयशंकर प्रसाद के काव्य में विविध विमर्श

बी.एन.मंडल वि.वि. हिन्दी स्नातकोत्तर विभागाध्यक्ष डॉ.इन्द्र नारायण यादव की अध्यक्षता में बहुमुखी प्रतिभा के धनी, मानवता के प्रतिष्ठापक कवि एवं हिन्दी काव्य में छायावाद के संस्थापक महाकवि “जयशंकर प्रसाद के काव्य में विविध विमर्श” पर एक भव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें बी.आर.अंबेडकर वि.वि. में हिन्दी के विभागाध्यक्ष रह चुके डॉ.नन्द किशोर नंदन ने महाकवि प्रसाद के कला पक्ष एवं भाव पक्ष पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि श्रीप्रसाद मानवता की प्रतिष्ठा तो करते ही हैं साथ ही आधुनिक संदर्भों में मिथकों का प्रयोग भी करते हैं |

यह भी बता दें कि टी.एम. वि.वि. भागलपुर में पी.जी. हिन्दी के विभागाध्यक्ष रहे डॉ.एन.पी.वर्मा ने जयशंकर प्रसाद को जहाँ हिन्दी कविता में संस्कृति को स्वर देने वाले अन्यतम कवि कहा है वहीं मगध वि.वि. के डॉ.सुनील कुमार ने प्रसादजी को मूल्य एवं संस्कृति का प्रस्तोता माना है |

यूँ आरम्भ में मंडल वि.वि. के हिन्दी के वरीय प्राध्यापक एवं सिद्धहस्त गजलगो डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप ने जहाँ विस्तार से विषय-प्रवर्तन करते हुए यही कहा कि भावना प्रधान कहानी लेखक व महाकवि जयशंकर प्रसाद अपने समय की राष्ट्रीयता एवं राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतिष्ठापक कवि हैं वहीं विभागाध्यक्ष रह चुके डॉ.विनय कुमार चौधरी ने प्रसादजी को कविता, कहानी, नाटक, उपन्यासकार के साथ-साथ मनोविज्ञान के ज्ञाता कवि ही नहीं बल्कि मानव मनोवृत्तियों के चितेरा कवि माना है |

अंत में विभागाध्यक्ष डॉ.इन्द्र नारायण यादव ने अपने संक्षिप्त अध्यक्षीय भाषण में यही कहा कि महाकवि के रूप में सुविख्यात जयशंकर प्रसाद हिन्दी नाट्य जगत एवं कथा साहित्य में भी एक विशिष्ट स्थान रखते हैं और वे एक मानववादी कवि हैं | इस मौके पर डॉ.रेणुका मल्लिक, डॉ.मनोज विद्यासागर आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये |

सुधी श्रोता के रूप में प्रमुख रहे डॉ.एस.बी.प्रसाद, डॉ.के.डी.राय, डॉ.एस.एन.विश्वास, डॉ.मनोरंजन प्रसाद, प्रो.गोपाल कुमार झा, प्रो.योगेन्द्र, विकास, कृष्ण मुरारी, डॉ.राणा, राजकिशोर, सुनील आदि | धन्यवाद ज्ञापन कृष्ण मुरारी ने किया |

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मधेपुरा कॉलेज में राष्ट्रीय सेमिनार

कॉलेज मधेपुरा के विशाल सभागार में “सामाजिक परिवर्तन में शिक्षकों की भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन करते हुए बी.एन.मंडल वि.वि. के पूर्व परीक्षा नियंत्रक व समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने उद्घाटन भाषण में इस धरती पर सामाजिक परिवर्तन लाने वाले गुरुऔं, समाजसेवियों एवं जनप्रतिनिधियों की सप्रसंग व्याख्या विस्तार से की और सामने शांतिपूर्वक बैठे सुधी श्रोतागण रस लेते हुए बीच-बीच में तालियां बजा-बजा कर और बहुत कुछ कहने का संकेत देते रहे, प्रोत्साहित करते रहे |

उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में विस्तारपूर्वक सामाजिक परिवर्तन से सम्बद्ध बाबू रास बिहारी लाल मंडल, शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, बीपी मंडल, कीर्ति नारायण मंडल एवं कमलेश्वरी त्रय एवं झल्लू बाबू की चर्चा करते हुए कहा कि ये लोग समाजसेवी से अधिक सामाजिक परिवर्तन के योद्धाओं के रूप में अपनी पहचान बना-बनाकर दुनिया को अलविदा कह गये | डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि रास बिहारी बाबू ने जहां दहेज व बाल विवाह पर चोट किया वहीं शिवनंदन बाबू शिक्षा के बाबत यही कहते रहे- Not a single soul should remain uneducated on the Earth .

डॉ.मधेपुरी ने पुनः कहा कि जहाँ भूपेन्द्र बाबू ने छुआछूत पर चोट किया वहीं बी.पी. मंडल ने दुनिया में सामाजिक न्याय का परचम लहराया और जहां कीर्तिनारायण मंडल व कमलेश्वरी त्रय ने शिक्षा संस्थानों का निर्माण किया वही रामानंद मंडल उर्फ झल्लू बाबू ने नारी शिक्षा का दीप जलाया |

Audience attending the National Seminal Inaugural Function at Madhepura College Hall.
Audience attending the National Seminar Inaugural Function at Madhepura College Hall.

अंत में डॉ.मधेपुरी ने डॉ.कलाम को उद्धृत करते हुए कहा कि भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम महामहिम राष्ट्रपति बनने से पूर्व भी शिक्षक थे और बाद भी शिक्षक ही बने | जीवन के अंतिम सांस तक उन्होंने शिक्षक धर्म का पालन किया तथा विश्व के शिक्षकों को अपने कर्तव्य बोध की सीख देते-देते अनायास ही दुनिया को अलविदा कह दिया | ताजिंदगी डॉ.कलाम सामाजिक परिवर्तन में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन करते रहे |

यह भी बता दें कि समारोह के मुख्य अतिथि के रुप में सरकारी बीएड कॉलेज सहरसा के विद्वान प्राचार्य डॉ.राणा जयराम सिंह ने कहा कि शिक्षकों को सदैव अपनी विरासत को याद करते हुए सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन हेतु सर्वश्रेष्ठ भूमिका का निर्वहन करना चाहिए | डॉ.राणा ने यह भी कहा कि अब कोसी के युवाओं को एम.एड. करने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा | अब सहरसा को एमएड की पढ़ाई करने की अनुमति NCTE से प्राप्त हो गयी है | उन्होंने डॉ.मधेपुरी को उद्धृत करते हुए प्रशिक्षुओं को ढेर सारे जीवनोपयोगी टिप्स भी दिये |

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि द्वय टी.पी.कालेज के शिक्षा संकायाध्यक्ष डॉ.विनोद शुक्ल एवं डॉ.राजीव कुमार सहित प्राचार्य डॉ.पूनम कुमारी , डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप, डॉ.आलोक कुमार ने भी अपने-अपने विचार से प्रशिक्षुओं को लाभांवित किया |

आरंभ में इस उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मधेपुरा कॉलेज के प्राचार्य सह समारोह के अध्यक्ष डॉ.अशोक कुमार ने यह कहते हुए किया कि शिक्षा वह प्रणाली है जो समाज को अपने अनुरूप ढालता है | इसके बाद अध्यक्ष के निदेशानुसार डॉ.मधेपुरी, डॉ.राणा एवं अध्यक्ष सहित सभी गण्यमान्यों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का उद्घाटन किया और लगे हाथ अतिथियों द्वारा स्मारिका का विमोचन भी किया गया |

जहां अतिथियों का स्वागत बीएड की छात्रा मधुलिका-श्वेता आदि ने की वहीं बीएड के सर्वेसर्वा व संयोजक विज्ञानानंद सिंह ने अतिथियों को अंगवस्त्रम , पाग व पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया | सुधी श्रोता के रूप में प्रो.मनोज भटनागर, प्रो.मुस्ताक मोहम्मद, प्रो.संजय परमार, प्रो.विनोद आदि अंत तक रहे | अंत में मंच संचालक प्रो.गौतम कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित कर अध्यक्ष के निदेशानुसार लंच के लिए मंच के कार्यक्रम-समाप्ति की घोषणा की |

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दो दिवसीय युवा उत्सव का भव्य समापन

नीतीश सरकार के कला संस्कृति एवं युवा विभाग और जिला प्रशासन मधेपुरा के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय बी.एन.मंडल कला भवन में दो दिवसीय युवा-उत्सव को महोत्सव का स्वरूप स्थाई कला-समिति के सदस्यों- डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, डॉ.शांति यादव, शौकत अली एवं कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार द्वारा दिये जाने की सराहना तो की गई परंतु कुछ विधाओं में अकारण प्रतिभागियों की उपस्थिति में कमी इस ओर संकेत करता है कि जिले के सभी 13 प्रखंडों में जितना प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए था वह भी अकारण नहीं किया जा सका |

यह भी बता दें कि विभिन्न विधाओं में प्रथम-द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वाले प्रतिभागी इस प्रकार हैं- चित्रकला में प्रथम- हिमांशु कुमार, द्वितीय- अभिषेक कुमार एवं तृतीय (दो) हिमांशु कुमार एवं आफरीन उद्दीन | लोकगीत में प्रथम स्थान पाई है सोनी कुमारी, द्वितीय आलोक कुमार एवं तृतीय (दो) अंकित राज व नंदन कुमारी | जहां फोटोग्राफी में प्रथम रहा सुमित कुमार वहीँ दूसरे नंबर पर आई समीक्षा यदुवंशी |

और यह भी जानिये कि जहां एकांकी नाटक में नवाचार रंगमंच के अमित आनंद एवं साथी प्रथम हुए, वहीं इप्टा के सोनू कुमार एवं साथी दूसरे स्थान पर रहे |

इसके अलावे हस्तशिल्प में प्रथम आई पूजा कुमारी वहीं मूर्ति कला में प्रथम स्थान पर रहे दिलीप कुमार | लोकगाथा में जहां शंकर कुमार प्रथम स्थान पाये वहीं हारमोनियम वादन मे आलोक कुमार नंबर वन रहे | आगे एक ओर जहां समूह लोकगीत में निशू प्रिया एवं साथी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया वहीं समूह लोकनृत्य में स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय की अनुष्का दास व गणेश दास की टीम ने प्रथम स्थान पाया |

और तो और शास्त्रीय नृत्य में प्रथम स्थान पर रही रुचिका सिन्हा तथा शास्त्रीय वादन (तबला) में प्रथम स्थान पर रहे ओम आनंद | जहां भाषण में प्रथम- हर्षवर्धन सिंह, द्वितीय- समीक्षा यदुवंशी एवं तृतीय आशीष कुमार मिश्र रहे वही सुगम संगीत में प्रथम आलोक कुमार, द्वितीय सचिन कुमार एवं तृतीय चाँदनी ऋषिदेव रही तथा शास्त्रीय गायन में कुमारी पुष्पलता प्रथम, रवि प्रकाश द्वितीय एवं चांदनी कुमारी तृतीय स्थान पर रहे |

अंत में इस द्वि-दिवसीय युवा-उत्सव समारोह के समापन सत्र में पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र वितरण करने हेतु जिला प्रशासन की ओर से आये एस.डी.एम. संजय कुमार निराला ने युवाओं, अभिभावकों एवं बुद्धिजीवियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में हार-जीत तो लगा ही रहता है | यदि जीत हुई तो सराहना मिलती है और हार हुई तो पुनः आगे की तैयारी करने हेतु जज्बा पैदा होता है | वही साहित्यकार व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने प्रतिभागियों को राज्य स्तर से चयनित होकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में भाग लेने की शुभकामनाएं देते हुए यही कहा कि सूरज की तरह चमकने के लिए सूरज की तरह जलना पड़ता है |

सभी विजेताओं को पुरस्कार व प्रमाण-पत्र दिया अनुमंडलाधिकारी संजय कुमार निराला, स्थाई कला समिति के सदस्यगण- डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, डॉ.शांति यादव, शौकत अली, अरुण कुमार मंच संचालक के साथ-साथ वार्ड पार्षद ध्यानी यादव, निर्णायकगण उपेन्द्र प्रसाद यादव, डॉ.रवि रंजन, प्रो.अविनाश, स्काउट एंड गाइड आयुक्त जयकृष्ण यादव, प्रो.रामअवध सिंह, स्वर शोभिता की प्राचार्या हेमा कुमारी एवं पीटीआई मनोज कुमार व रितेश रंजन आदि |

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मधेपुरा में दो दिवसीय युवा-उत्सव आयोजित

जिला प्रशासन एवं बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा दो दिवसीय युवा-उत्सव को महोत्सव का स्वरूप प्रदान किया गया | जिले के तेरहो प्रखंड के 15 से 35 वर्ष आयु वाले विभिन्न कलाओं से लैश 100 से अधिक निबंधित हुनरमंद युवाओं को सरकारी स्तर पर प्रोत्साहित किये जाने हेतु यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है |

इस अवसर पर भीड़ भरे कला भवन में दो दिवसीय युवा उत्सव का उद्घाटन उपविकास आयुक्त मिथिलेश कुमार,  एडीएम मो.मुर्शीद आलम, समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, शौकत अली, जिला उपनिर्वाची पदाधिकारी महेश पासवान द्वारा निर्णायक मंडल के सदस्य डॉ.शान्ति यादव, प्रो.अविनाश, डॉ.रविरंजन, उपेन्द्र प्रसाद यादव एवं किशोर कुमार  की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर किया गया | मौके पर डीडीसी श्री कुमार ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों एवं साहित्यकारों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा अवसर मिलेगा | वहीं एडीएम मुर्शीद आलम ने कहा कि कला एवं संस्कृति को ऊंचाई प्रदान करने के लिए प्रशासन का पूरा सहयोग मिलेगा |

Dr.Madhepuri addressing the artists and Yava Sahityakar at BN Mandal Kala Bhawan Madhepura on the eve of Yuva Utsav .
Dr.Madhepuri addressing the artists and Yava Sahityakar at BN Mandal Kala Bhawan Madhepura on the eve of Yuva Utsav .

यह भी बता दें कि जिले के स्थायी कला समिति के सदस्य डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की देख-रेख में आयोजित इस युवा महोत्सव में उन्होंने जिले भर के युवाओं से डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के संदेश को विस्तार से कहते हुए अंत में यही कहा- “ये आँखें दुनिया को दुबारा नहीं देख पायेंगी, इसलिए तुम्हारे अंदर जो बेहतरीन है वह दुनिया को देकर जाना, बच्चों को देकर जाना !”

डॉ.मधेपुरी ने जिला पदाधिकारी मो.सोहैल की पूरी टीम द्वारा जिले के विकास के बाबत कई मामले में राज्य में नंबर वन स्थान पाने के लिए, युवाओं की जोरदार तालियों के बीच, स्वागत किया और बधाई भी दी |

युवा उत्सव के प्रथम दिन यानि 12 नवंबर, 2016 को शास्त्रीय नृत्य, शास्त्रीय गायन, सुगम संगीत और भाषण प्रतियोगिता का आयोजन पूरा कर लिया गया | कार्यक्रम का संचालन जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार ने किया |

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मधेपुरा में बिहार स्टेट इंटर डिस्ट्रीक्ट टेबल टेनिस टूर्नामेंट

बिहार स्टेट टेबल टेनिस चैंपियनशिप का उद्घाटन डायनेमिक डीएम मो.सोहैल, समाजसेवी डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी, आजीवन खेल को समर्पित विनय कुमार झा, प्रदीप श्रीवास्तव, अरुण कुमार, प्रशांत कुमार, ऋषिकेश कुमार ने खेल पदाधिकारी मुकेश कुमार, अशफाक आलम, पुष्पेंद्र कुमार, विकास कुमार, पारसमल सोनी, थानाध्यक्ष मनीष कुमार, चंद्रिका यादव, वंदना घोष, संदीप शांडिल्य एवं अधिवक्ता धीरेंद्र कुमार झा आदि की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर किया | और हाँ ! इससे पूर्व इन अतिथियों सहित मीडिया के ब्यूरो चीफ अमिताभ, रुपेश कुमार, दिलखुश व सुभाषचंद्र आदि का स्वागत पुष्पगुच्छ देकर किया गया |

संक्षिप्त उद्घाटन भाषण में जिलाधिकारी मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने कहा कि यहां खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं | टेबल टेनिस के खिलाड़ी यदि मेहनत करें और राष्ट्रीय स्तर के कोच का उन्हें मार्गदर्शन मिलता रहे तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना कर मधेपुरा का नाम संसार के खेल जगत में रौशन कर सकते हैं |

इस अवसर पर समाजसेवी डॉ. मधेपुरी ने जिलाधिकारी मो.सोहैल को डायनेमिक डीएम बताते हुए कहा कि विकास के कार्यों में एक नहीं कई विधाओं में इन्होंने जिले को राज्य सरकार की सूची में एक नंबर पर लाकर जिले का सम्मान तो बढाया ही है, साथ ही कुछ दिन पूर्व राज्यस्तरीय कबड्डी को राष्ट्रीय स्तर की ऊंचाई प्रदान कर मधेपुरा वासियों के दिल में जगह पा लिया है | डॉ.मधेपुरी ने इंडोर स्टेडियम एवं बी.पी.मंडल नगर भवन के बाबत जिलाधिकारी से खेल को प्रोत्साहित करने हेतु की गई बातों की चर्चाएं विस्तार से की- जिसे सुनकर राज्य के विभिन्न जिलों से आये खिलाड़ियों एवं स्थानीय प्रबुद्धजनों व शहर के प्रमुख व्यवसायीयों द्वारा तालियों की गड़गड़ाहट से हर दिल अजीज डीएम मो.सोहैल को सम्मान दिया गया, बारंबार अभिनंदन किया गया | अंत में उन्होंने मधेपुरा के टेबल टेनिस नेशनल खिलाड़ी रियांशी-पायल-रिया………… शिवम् आदि का नाम लेते हुए कहा कि ऐसे आयोजन से इन खिलाड़ियों का हौसला और बुलन्द होगा |

अंत में मंच संचालक टेबल टेनिस को समर्पित प्रदीप श्रीवास्तव धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों से डेढ़ सौ से अधिक खिलाड़ियों का आगमन हुआ है | उन्होंने कहा कि इस राज्य स्तरीय टूर्नामेंट में बाहर से आये नामचीन पुराने खिलाड़ियों तपन कांति दास, राहुल दास, संजय कुमार आदि को भी सम्मानित किया गया | साथ ही यह भी जानकारी दी कि पहले दिन के खेल में पटना ने बाजी मारी | निर्णायक मंडली में पटना के पंकज पांडेय, सोमनाथ राय, बेगूसराय के प्रदीप मिश्रा एवं मधेपुरा के उदय झा शामिल थे |

 

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मधेपुरा में दस दिवसीय गोपाष्टमी समारोह आयोजित

शहर के श्रीकृष्ण गौशाला परिसर में 10 दिवसीय गोपाष्टमी महोत्सव का उद्घाटन ए.डी.जे. रमण कुमार रमण, जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी , अध्यक्ष डॉ.सुरेश प्रसाद यादव द्वारा चिकित्सक डॉ.आर.के.पप्पू, पूर्व मुख्य पार्षद डॉ.विजय कुमार विमल, पूर्व रजिस्ट्रार सचिंद्र महतो, सचिव चंद्रशेखर, प्रमंडलीय शिक्षक नेता परमेश्वरी प्रसाद यादव आदि की पावन उपस्थिति में दीप प्रज्जवलित कर किया गया |

उद्गार व्यक्त करते हुए उद्घाटनकर्ता ए.डी.जे. रमण कुमार रमण एवं मुख्य अतिथि जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी व अध्यक्ष डॉ.सुरेश प्रसाद यादव सहित सभी वक्ताओं ने गौ संरक्षण पर ध्यान देते हुए इस गौशाला को सौन्दर्योपासना का अद्भुत स्थल बनाने पर बल दिया |

वर्तमान निर्माणाधीन श्री कृष्ण मंदिर के संरक्षक समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए यही कहा कि यदि भारतीय वांग्यमय से 16 कला से पूर्ण श्रीकृष्ण और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को अलग कर दिया जाए तो सामाजिक जीवन की सरसता और समरसता समाप्त हो जायेगी |

डॉ.मधेपुरी ने विश्व के महान समाजवादी चिंतक डॉ राम मनोहर लोहिया को उद्धृत करते हुए कहा कि इतिहासकारों ने राम और कृष्ण को अनुकरणीय की कोटी से बाहर रखकर सर्वथा पूजनीय बना दिया ऐसा करके इतिहासकारों ने भारतीय युवजनों को सर्वाधिक क्षति पहुंचाया है | उन्होंने कहा कि राम और कृष्ण भी तो मनुष्य की ही तरह हैं, जैसे हर आदमी जन्म से मृत्यु तक षटविकार से घिरा रहता है उसी तरह ये दोनों भी षटविकार से बिल्कुल मुक्त नहीं रहे हैं |

बकौल डॉ. मधेपुरी व्यापार मंडल के अध्यक्ष योगेन्द्र प्राणसुखका के दादाश्री रामेश्वर प्राणसुखका  सहित सागरमल प्राणसुखका और जीवन सर्राफ आदि जैसे दानवीरों द्वारा इस गौशाला को 300 बीघे  से अधिक जमीन दान में दी गई थी | तब पूरे शहर में गोपाष्टमी के दिन गायों की कतारें जिधर से गुजरती उधर ही बहनें और मातायें सजधज कर पूजा करने के लिए इंतजार कर रही होती थी और आज स्थिति यह है कि गौशाला की जमीन सिकुड़ती चली जा रही है और गौशाला केवल नाम का रह गया है, जहां गाय की कौन कहे पूंछ वाली बाछी तक नहीं दिखती |

यह भी बताया डॉ.मधेपुरी ने की गाय हमारी माता क्यों कहलाती है क्योंकि हिरोशिमा नागासाकी में जब बम विस्फोट किया गया था तो वहां वर्षों विकलांग बच्चे पैदा होते रहे जिस के निवारण हेतु उस रेडिएशन को निष्क्रिय करने के लिए गौ माता के ही गोबर से लोग अपने घर आंगन को बरसों लिपते रहे और अब तो गौ मूत्र पान करके लोग कैंसर से युद्ध लड़कर जीतने भी लगे हैं |

इस गोपाष्टमी समारोह के कर्ताधर्ता पृथ्वीराज यदुवंशी, स्वागताध्यक्ष अशोक आनंद एवं सर्वाधिक धन्यवाद की पात्र है समीक्षा यदुवंशी जिनके सद्प्रयास से यहां डिजनीलैंड जैसे झूले,  मौत के कुएं और कई तरह के खेल तमाशे के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के वृंदावनवासी भागवत कथा वाचकों एवं कृष्ण लीला-रासलीला की प्रस्तुति देने वालों को देख-सुनकर बच्चे-बूढ़े-नौजवान सभी सप्ताह भर रसास्वादन करते रहेंगे |

इस अवसर पर सुधी श्रोताओं में डॉ.सुरेश भूषण, शिक्षा प्रेमी मक्केश्वर यादव, स्काउट गाइड आयुक्त जय कृष्ण यादव, अधिवक्ता सारंगधर यादव छात्र नेता राहुल यादव, शिक्षक द्वय अमरेंद्र यादव, कामेश्वर यादव आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे |

 

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काले धन पर मोदी की चोट, 500 और 1000 के नोट आज से बंद

आज मध्य रात्रि से 500 और 1000 रुपये के नोट आधिकारिक तौर पर बंद हो जाएंगे। अगर आपके पास ईमानदारी से कमाए पैसे हैं तो आप उन्हें 30 दिसंबर तक बेहिचक बैंक या डाकघर में जमा करा सकते हैं लेकिन अगर आपने धन अनैतिक तरीके से कमाया है और वो 500 या 1000 रुपये के नोटों की शक्ल में है तो आज रात 12 बजे के बाद वो रद्दी में तब्दील हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज देर शाम स्वयं यह ऐतिहासिक घोषणा की। काले धन के काले इस्तेमाल पर रोक लगाने की खातिर ऐसा साहसिक निर्णय आज तक संसार के किसी देश ने नहीं लिया था। भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए नकली नोटों का इस्तेमाल जिस तरह बढ़ रहा था, उसे देखते हुए भी केन्द्र से एक बड़े निर्णय की अपेक्षा थी। लेकिन वो निर्णय इतना बड़ा और इतने बड़े पैमाने पर होगा, इसकी हवा प्रधानमंत्री ने अपने निकटतम लोगों को भी लगने नहीं दी थी।

बहरहाल, इस बड़ी ख़बर से जुड़ी पाँच बड़ी बातों पर निगाह डालना बेहद जरूरी है। पहली बात, 11 नवंबर की रात 12 बजे तक पेट्रोल पंप, सीएनजी स्टेशन, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, हवाई अड्डे, अस्पताल और दवा की दूकान पर 500 और 1000 रुपये के नोट स्वीकार किए जाएंगे। दूसरी बात, 9 नवंबर को सारे बैंक और एटीएम बंद रहेंगे। कुछ एटीएम 10 नवंबर को भी बंद रहेंगे। तीसरी बात, समुचित व्यवस्था होने तक जरूरी खर्चों के लिए शुरू में कुछ दिनों तक 2000 और उसके बाद 4000 तक के नोट आप बैंकों से बदल सकते हैं। चौथी बात, 10 नवंबर से 30 दिसंबर तक आप अपने पास रखे 500 और 1000 रुपये के नोट बैंक या डाकघर में जमा करा सकते हैं। और पाँचवीं बात, कल के बाद 500 के नए नोट तो आप देखेंगे, लेकिन 1000 के नोट अब इतिहास की चीज हो जाएंगे। इनकी जगह सरकार ने 2000 के नोट जारी करने का निर्णय लिया है।

याद रखें, आप इतिहास को बनते हुए रख रहे हैं। सरकार के इस बड़े निर्णय के बाद आपकी दिनचर्या से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक कई परिवर्तन आपको देखने को मिलेंगे, लेकिन आपकी धनराशि हर हाल में आपकी ही रहेगी। आपको चिन्ता करने की कोई जरूरत नहीं है। शर्त बस इतनी कि आपने वो धनराशि घोषित स्रोतों से और ईमानदारी से कमाई हो।

हमारे देश में भ्रष्टाचार और कालाधन जैसी बीमारियों ने जड़ जमा लिया था। देश से गरीबी हटाने की राह में सबसे बड़ी बाधा यही थी। इसकी वजह से आतंकी भी आसानी से भारत में पैर जमा लेते थे। हवाला के जरिए हथियारों की खरीद कोई छिपी हुई बात नहीं। चुनावों में काले धन के इस्तेमाल से भला कौन वाकिफ नहीं! देश आखिर पनपता तो कैसे?

करोड़ों भारतवासी जिनकी रगों में अब भी ईमानदारी दौड़ा करती है, बड़ी शिद्दत से भ्रष्टाचार, काले धन और आतंक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की प्रतीक्षा कर रहे थे। मोदी सरकार के इस शक्तिशाली और अभूतपूर्व कदम के बाद उनकी उम्मीदों को कितने पंख लग गए, उन्हें नंगी आंखों से शायद हम देख भी ना पाएं। प्रधानमंत्री को इस निर्णायक निर्णय के लिए बारंबार बधाई और साधुवाद!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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छठ महापर्व से विश्व को मिलता है मानवता का संदेश

विगत वर्ष की ही तो बात है- मधेपुरा लोकसभा चुनाव के दरमियान इलेक्शन कमीशन द्वारा पर्वतारोही-पर्यावरणविद-पद्मश्री संतोष यादव को मतदाता जागरूकता के निमित्त आइकॉन बनाया गया था और उसी क्रम में सात्विक जीवन शैली को आत्मसात करने वाली एवं एक ही वर्ष के दरमियान दो बार एवरेस्ट की चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराकर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली संतोष यादव मधेपुरा आई थी |

यह भी बता दें कि हरियाणा की बेटी संतोष यादव बहरहाल समता,समानता और सामाजिकता के प्रतीक छठ जैसे महापर्व को मनाने अपने ससुराल मुंगेर के गुलजार पोखर में आई हैं | इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से मुखातिब होकर यही कहा कि बिहार में हर जाति और धर्म के लोग मानवीय संवेदनाओं से भरपूर हैं | पद्मश्री संतोष यादव ने आत्मविश्वास के साथ पुनः कहा कि हिन्दू-मुस्लिम समुदाय की महिलाओं द्वारा बिना किसी भेद-भाव के एक साथ मिल-बैठकर भगवान भास्कर को अर्ध्य अर्पित करने वाली इसी धरती से पूरे विश्व को मानवता का संदेश मिलता रहेगा, क्योंकि मानवता से बड़ा कोई धर्म और जाति भी तो इस भू-मंडल पर नहीं है |

Padma Shree Santosh Yadav moving towards Mongher Ganga Ghat along with other devotee Chhathbraties from her Father-in-law's House at Guljar Pokhar, Mongher .
Padma Shree Santosh Yadav moving towards Mongher Ganga Ghat along with other devotee Chhathbraties from her Father-in-law’s House at Guljar Pokhar, Mongher .

जहां एक ओर सिंहेश्वर प्रखंड के जझहट सबैला के पंचायत समिति के सदस्य मोहम्मद इश्तियाक आलम द्वारा लगभग तीन दर्जन हिन्दू छठ व्रतियों के बीच श्रद्धावनत होकर केला, नारियल, टाब, नींबू और सेब-संतरादि दिये जाने पर आंतरिक खुशी का एहसास किया गया वहीं दूसरी ओर कटिहार के दिग्घी नया टोला में पिछले ढाई दशक से नियम-निष्ठा के साथ रेहाना भी तो करती आ रही है छठ- केवल इसीलिए कि उसकी शादी में अड़चन आ जाने के कारण उसकी मां ने छठ पर्व करने का संकल्प लिया था | शादी हो जाने पर पहले तो उसकी मां और अब रेहाना आम हिन्दू युवतियों की तरह हर विधि-विधान के साथ श्रद्धापूर्वक पानी में खड़ी होकर सूप उठाती है,रिश्तेदार अर्घ्य भी देते हैं और घर में छठ व्रत के गीत गाए जाते हैं | और तो और मधेपुरा नगर परिषद से सटे नयानगर की हसीना और सकीना की मन्नतें पूरी होने पर महापर्व छठ का व्रत आस्था के साथ करने लगी हैं | आस्था के आगे मजहब की सारी दीवारें भी टूटती जा रही हैं |

यह भी जानिए कि वर्मा यानी वर्तमान म्यांमार के लगभग तीन दर्जन शरणार्थी अब यहां की संस्कृति में पूरी तरह ढल चुके हैं और पिछले 40 साल से छठ महापर्व करते आ रहे हैं | अन्य पर्व-त्योहारों की तुलना में छठ महापर्व के प्रति लोगों की आस्था गहरी होती देखी जा रही है |

यही कारण है कि मुंबई जैसे महानगर में वर्षो से रहने वाले गीतकार राजशेखर भले ही होली-दिवाली वहीं मना लेते हैं परन्तु गांव ‘भेलवा’ की मिट्टी व पारंपरिक रिवाजों से लगाव रहने के कारण वे छठ सरीखे महापर्व में घर आना नहीं भूलते | राजशेखर के चुनावी चर्चित गीत-“बिहार में बहार हो नीतीशे कुमार हो………” की तरह ही अनेक छठ गीत-“गोबर से, मिट्टी से……” शारदा सिन्हा के गीतों के संग अब सुनते रहेंगे आप |

छठ इसलिए भी महापर्व है कि गंदगी जैसे महान अभिशाप को मिटाने के लिए न तो एक कदम स्वच्छता की ओर……कहने की जरूरत पड़ती है और न लोहिया स्वच्छता अभियान आयोजित करने की | बिहार की राजधानी पटना तो वर्षों से स्वच्छता का रिकॉर्ड बना रही है | क्या घर, क्या सड़क……. क्या घाट या पोखर चतुर्दिक स्वछता ही स्वच्छता ! इस अवसर पर कुछ श्रद्धालुओं द्वारा भगवान भास्कर की पूजा प्रतिमा स्थापित कर की जाने लगी है | दर्शनार्थियों की भीड़ को भव्य मेला में तब्दील किया जाने लगा है| वही मेला जिससे सामाजिक सौहार्द को बल मिलता है तथा समरसता कायम होती है |

सर्वमान्य मान्यता है कि अंग प्रदेश की धरती होकर बहने वाली चम्पा नदी के तट पर महाभारत काल के महान योद्धा कर्ण ने ही सबसे पहले छठ पर्व की शुरुआत की थी और चम्पानगर (वर्तमान नाथनगर) के ऊँचे टिल्हे से भगवान भास्कर को अर्ध्य देने का श्रीगणेश किया था | और आज यह छठ महापर्व सामाजिक चेतना को सामूहिकता की ओर ले जाने वाला त्योहार बन गया है |

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