मधेपुरा जिले के प्राय: सभी प्राइवेट एवं सरकारी स्कूलों से लेकर छोटे-बड़े चौक-चौराहों पर भी युवा क्लबों व संगठनों द्वारा सरस्वती वंदना के जयकारे से गुंजायमान होता रहा माहौल। भिन्न-भिन्न परिधानों से सजाई गई माँ शारदे की प्रतिमा के समक्ष पूजनोत्सव के दरमियान हो रहे मंत्रोच्चार से भक्तिमय होता रहा इलाका।
बता दें कि चतुर्दिक धूमधाम से एवं विधि-विधान से संपन्न हुई माँ शारदे की पूजा ! छात्र-छात्राओं में चारों ओर दिखा जबरदस्त उत्साह व उमंग ! भक्तिपूर्ण माहौल में लोगों ने पूजा-पंडाल में अर्पित की पुष्पांजलि ! बसंत पंचमी के मौके पर माँ शारदे के समक्ष बच्चों ने लिया पढ़ने-लिखने का संकल्प !
यह भी जानिए कि जहाँ शहर के माया विद्या निकेतन के छात्र-छात्राओं ने विज्ञान प्रदर्शनी में दिखाये अपने प्रयोग के कई नमूने वहीं इसी बसंत पंचमी के मौके पर शहर के जितेंद्र पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा भी साइंस एग्जीबिसन लगाया गया।
बता दें कि जिला मुख्यालय के शहीद चुल्हाय मार्ग एवं नया नगर (मदनपुर) स्थित माया विद्या निकेतन के दोनों परिसर में सरस्वती पूजनोत्सव के साथ-साथ विभिन्न वर्गों के भिन्न-भिन्न ग्रुपों में विज्ञान प्रदर्शनी का रोचक प्रदर्शन किया गया। विज्ञान प्रदर्शनी के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने वैज्ञानिक सुविधाओं से लैस गाँव, विद्युत रेल इंजन कारखाने के प्रभाव, रोबोट का परिचालन, वाई-फाई की उपयोगिता सहित कई अन्य आधुनिक प्रयोगों को प्रस्तुत किया। मौके पर उपस्थित अतिथियों समाजसेवी-साहित्यकार सह फिजिक्स के प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, पूर्व प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, बीएनमुस्टा के महासचिव, केमिस्ट्री के प्रोफेसर व सीनेटर डॉ.नरेश कुमार, ख्यातिप्राप्त साहित्यकार डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप को स्मृति चिह्न से सम्मानित करते हुए विद्यालय निदेशिका डॉ.चन्द्रिका यादव सहित सभी अतिथियों ने विज्ञान प्रदर्शनी की प्रशंसा की तथा बाल प्रतिभाओं की जमकर तारीफ भी की।
इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने सरस्वती पूजनोत्सव के महत्व को विस्तार से बताते हुए एवं भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम से हुई बातों को उद्धृत करते हुए विज्ञान प्रदर्शनी में मौजूद बच्चों से यही कहा कि विश्व में पहला वैज्ञानिक कोई-न-कोई बच्चा ही रहा होगा। उन्होंने बच्चों से यह भी कहा कि पहला मिसाइल मैन कलाम नहीं बल्कि हैदर अली का बेटा टीपू सुल्तान था। मंच संचालन राष्ट्रीय वक्ता हर्षवर्धन सिंह राठौर ने किया।