करीब छह दशक तक तमिलनाडु की सियासत के केन्द्र बिन्दु रहे, द्रविड़ अस्मिता के प्रतीक, डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि बुधवार शाम चेन्नई के मरीना बीच पर चिर निद्रा में सो गए। करुणानिधि को उनके लाखों चाहने वालों की मौजूदगी में उनके गुरु अन्नादुरई के समीप पूरे राजकीय सम्मान के साथ समाधि दी गई। करुणानिधि को द्रविड़ नेताओं द्वारा अपनाई परम्परा के मुताबिक एक ताबूत में रखकर दफनाया गया जिस पर 33 साल पहले खुद उन्हीं का लिखा हुआ स्मृति-लेख अंकित था। तमिल में लिखे इस स्मृति लेख का हिन्दी में अर्थ है – “एक शख्स जो बिना आराम किए काम करता रहा, अब वह आराम कर रहा है।” करुणानिधि के इस स्मृति लेख में उनके पूरे जीवन का सार छिपा हुआ है।
इससे पहले पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने एक नेता और कार्यकर्ता की भूमिका से आगे बढ़कर एक बेटे के नाते दिवंगत कलाईनार (कलाकार) से उन्हें ‘अप्पा’ कहने की इजाजत मांगते हुए बेहद मार्मिक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने करुणानिधि के स्मृति लेख का जिक्र करते हुए लिखा है – “आप जहां भी जाते थे ,वह जगह मुझे बताते थे। अब आप मुझे बिना बताए कहां चले गए? आप हमें लड़खड़ाता छोड़ कहां चले गए? 33 साल पहले आपने बताया था कि आपकी स्मृति में क्या लिखा जाना चाहिए – ‘यहां वह शख्स लेटा है जिसने सारी जिंदगी बिना थके काम किया।’ क्या अब आपने तय कर लिया है कि आप तमिल समाज के लिए काम कर चुके हैं?”
स्टालिन ने आगे लिखा – “या आप कहीं छिप कर देख रहे हैं कि क्या कोई आपके 80 साल के सामाजिक जीवन की उपलब्धियों को पीछे छोड़ सकता है? 3 जून को अपने जन्मदिन पर मैंने आपसे आपकी क्षमता का आधा मांगा था… क्या आप अपना दिल मुझे देंगे? क्योंकि उस बड़े दान से हम आपके अधूरे सपनों और आदर्शों को पूरा करेंगे।”
पत्र के अंत में स्टालिन ने करुणानिधि से उन्हें एक आखिरी बार ‘पिता’ कहने की इजाजत मांगी, तो जिसने भी इसे पढ़ा उसकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने लिखा “करोड़ों उडनपिरपुक्कलों (डीएमके काडर) की ओर से मैं आपसे अपील करता हूं कि बस एक बार ‘उडनपिरप्पे’ बोल दीजिए और हम एक सदी तक काम करते रहेंगे। मैं आपको अप्पा कहने की जगह अपने जीवन में ज्यादातर समय ‘थलाइवर’ (नेता) कहता रहा। क्या आपको आखिरी बार ‘अप्पा’ पुकार सकता हूँ?”
बता दें कि पांच बार तमिलनाडु के सीएम रहे एम करुणानिधि का मंगलवार देर शाम चेन्नई के कावेरी हॉस्पिटल में निधन हो गया था। तमिलनाडु की राजनीति में उनका करीब 6 दशकों तक दखल रहा। एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता के अलावा वह इकलौते ऐसे नेता थे जिन्होंने हर वर्ग में अपनी जगह बनाई। अनवरत साठ वर्षों तक विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री आदि पदों पर रहते हुए उन्होंने केन्द्र में प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र तक के कार्यकाल को देखा – ऐसा बिरला अवसर देश में किसी को नहीं मिला। करुणानिधि केवल एक दिग्गज नेता ही नहीं थे, वे एक आला दर्जे के कलाकार (कलाईनार), साहित्यकार और संपादक भी थे। उनकी शख्सियत एक संस्था में तब्दील हो चुकी थी, जिसने कई पीढ़ियों को संस्कारित और आंदोलित किया था। अखिल भारतीय ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति रखने वाले और 94 साल तक हम सबके बीच रहे उस हाड़-मांस वाले ‘आंदोलन’ को हमारा प्रणाम..!