शादियों पर बेलगाम होते खर्च से जितने हम परेशान हैं उतने ही हमारे पड़ोसी पाकिस्तान के लोग भी। ‘प्रतिष्ठा के पीछे प्राण गंवाने’ की कहावत जितनी भारत में लागू होती है उतनी ही पाकिस्तान में भी। लेकिन पाकिस्तान के पंजाब प्रांत ने इससे निजात पाने के लिए एक कड़ा और बड़ा कदम उठाया है। शादियों में अनावश्यक शाहखर्ची पर रोक लगाने के लिए वहाँ की सरकार ने शादी में एक से ज्यादा तरह के भोजन, आतिशबाजी और दहेज का सामान सार्वजनिक रूप से दिखाने पर रोक लगाने के लिए कानून पारित किया है। इस कानून का उल्लंघन करने पर एक महीने की जेल और 20 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।
वहाँ के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ ने इस कानून को सख्ती से लागू करने का संकल्प लेते हुए कहा कि इस कानून से शादियों में सादगी को बढ़ावा देने और अनावश्यक दिखावे को हतोत्साहित करने में मदद मिलेगी। बता दें कि राज्य की विधानसभा में बीते गुरुवार को ये कानून बहुमत के साथ पारित किया गया। इस कानून के तहत होटल, रेस्तरां और कैटरर्स को निर्देश दिया गया है कि शादी में वे एक से अधिक तरह का भोजन ना परोसें। यही नहीं, इस निर्देश में यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि शादी से जुड़ी तमाम रस्में रात 10 बजे से पहले पूरी कर ली जाएं।
भले ही इस कानून से राज्य में शादी पर होने वाली सारी फिजूलखर्ची एकदम से बन्द ना हो लेकिन उसमें कमी तो आएगी ही। ठीक वैसे ही जैसे बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद भी ‘पक्के’ शराबी भांति-भांति के उपायों से भले ही शराब का सेवन कर लेते हों लेकिन इस कानून के व्यापक असर से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे कानूनों से समाज में एक सार्थक संदेश तो जाता ही है।
कुरीतियां समाज में हमेशा रही हैं और रहेंगी भी। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि उसे हम अपनी नियति मान लें। मनुष्य ने अपनी लगातार की गई कोशिशों की बदौलत ही इस दुनिया को रहने के लायक बनाया है। पाकिस्तान के पंजाब में शादी में शाहखर्ची को लेकर बनाया गया कानून हो या हमारे बिहार में शराबबंदी का कानून, ये ऐसी ही कोशिशें हैं।
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप