बिंध्येश्वरी प्रसाद मंडल को दुनिया बीपी मंडल के नाम से जानती है। मुरहो के जमींदार और अंग्रेजों से निर्भीकता पूर्वक लड़ने वाले बाबू रास बिहारी लाल मंडल के तीन पुत्र रहे हैं- भुवनेश्वरी प्रसाद मंडल, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल और सबसे छोटे सामाजिक न्याय के पुरोधा बिंध्येश्वरी प्रसाद मंडल। पिछड़ा वर्ग आयोग- 2 के अध्यक्ष बने बीपी मंडल। दुनिया मंडल कमीशन के रूप में उन्हें सदा याद करती रहेगी। वे प्रतिभा संपन्न थे और उन्हें विरासत में निर्भीकता मिली थी। वे अंग्रेजी ऑनर्स के छात्र रहते हुए देश सेवा में कूद पड़े।
बीपी मंडल का जन्म 25 अगस्त 1918 है और जन्म स्थान कबीर की नगरी काशी, उत्तर प्रदेश है। उनकी शादी 1937 ईस्वी में सीता देवी के साथ हुई। उन्हें पांच पुत्र और दो पुत्रियाँ हुई। 1945 से 1951 तक मधेपुरा में ऑनरेरी मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत रहे। वे तीन बार विधायक चुने गए- 1952-57, 1962-67 और 1972-75। वे एक बार 1968 में एमएलसी भी बने।
बीपी मंडल लोकसभा के सांसद भी तीन बार चुने गए- वर्ष 1967-68, 1968-71 और 1977-80। वे 1967-68 में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री बने। अल्पकाल के लिए ही सही वे 47 दिनों के लिए बिहार के ऐसे मुख्यमंत्री रहे जिनकी प्रशासनिक क्षमता की गूंज आज भी सचिवालय के गलियारे में गूंजती हुई सुनाई देती है। वे एक वर्ष 8 महीना 22 दिनों तक घड़ी की सुई की तरह बिना रुके कश्मीर से कन्याकुमारी तक और राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक सभी धर्मों की 3743 जातियों को रेखांकित कर सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ों की सूची बनाई और उन्हें 27% आरक्षण देने की अनुशंसा की। उन्होंने 31-12-1980 को मंडल रिपोर्ट की प्रतियां तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी को समर्पित किया। फरवरी 1981 के 23 तारीख को मधेपुरा के सोशल क्लब में बीपी मंडल का भव्य नागरिक अभिनंदन तत्कालीन नगर पालिका उपाध्यक्ष डॉ۔भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। बिहार स्टेट सिटिजन काउंसिल के डिप्टी चेयरमैन रहते हुए उन्होंने 13 अप्रैल 1982 को पटना में अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव मुरहो में किया गया।