आये दिन विश्व भर में बच्चों द्वारा मोबाइल देखते रहने की और उससे होने वाले हानिकारक दुष्प्रभावों की प्रायः हर महकमें में चर्चाएं होती रहती हैं। प्रिंट मीडिया से लेकर सोशल मीडिया द्वारा एवं कथा वाचकों से लेकर लेखकों व कवि सम्मेलनों द्वारा मोबाइल देखते रहने से बच्चों में हो रहे डिप्रेशन, उन्माद, रेडिएशन के खतरे, ध्यान नहीं लगने तथा विभिन्न प्रकार के प्रॉब्लम इन चाइल्ड बिहेवियर आदि की चर्चाएं सभी मंचों से किए जा रहे हैं।
वर्षों से ऐसी चर्चाएं चारों ओर हो रही हैं फिर भी भारत के सांसदों को अपने देश के भविष्य की चिंता नहीं है। सत्तापक्ष हो अथवा विरोधी पक्ष उन्हें केवल चिंता है 2024-25 के चुनाव जीतने की। गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने देश के रहनुमाओं एवं सांसदों को स्मरण दिलाते हुए यही कहा कि वर्ष 2002 में डॉ.कलाम ने राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह में विभिन्न राज्यों के सौ किशोर-किशोरी छात्रों को पहली पंक्ति में बैठाकर शपथ ग्रहण संवाद के आरंभ में यही कहा था- “ये बच्चे भारत के भविष्य हैं इसीलिए इन्हें सबसे आगे जगह दी गई है।” आज उस संपूर्ण भारतीय डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की रूह कीआवाज सुनकर डॉ.मधेपुरी ने भारतीय सांसदों को देश के भविष्य की चिंता करने हेतु अनुरोध किया है।