25 अगस्त 2022 को बीपी मंडल की 105वीं जयंती राजकीय सम्मान समारोह के साथ उनके पैतृक गांव मुरहो (मधेपुरा) में जिला प्रशासन के सहयोग से मनाई जाएगी। बीपी मंडल के साथ बिताए गए समय का स्मरण करते हुए समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने उनके संबंध में अपना विचार यूं व्यक्त किया।
इस संसार में न जाने कितने बच्चे रोज जन्म ग्रहण करते हैं, परंतु उनमें से कुछ ही बच्चे अपनी प्रतिभा, पुरुषार्थ एवं पराक्रम के साथ-साथ साहस भरे सतकर्मों के चलते दुनिया वालों को मजबूर करते हैं कि वे उन्हें याद करें कि वह बच्चा कौन था ? किस दिन जन्म लिया था ? उनके माता-पिता कौन थे….. ?
वैसे ही बच्चों में से एक हैं- मंडल कमीशन के अध्यक्ष एवं सामाजिक न्याय के पुरोधा श्री बिंध्येश्वरी प्रसाद मंडल, जिसे सारी दुनिया बीपी मंडल के नाम से जानती है।
वही बीपी मंडल जो आजादी के बाद मधेपुरा से विधायक, सांसद, मंत्री एवं मुख्यमंत्री बनकर ताजिंदगी हासिये पर खड़े अंतिम व्यक्ति की पीड़ाओं से रू-ब-रू होते रहे और गहराई से उनकी पीड़ाओं को महसूसते भी रहे। हासिये पर खड़े सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े, चाहे वे किसी भी जाति-धर्म के क्यों न हों, को आरक्षण का लाभ देकर खुद के जीवन गंगा को पवित्र बनाकर चले गए। तभी तो विगत वर्षों में सुलझे सोच कर दो निर्भीक इंसान- मंडल और मंडेला का नाम संपूर्ण दुनिया में एक साथ गूंजता रहा।
बीपी मंडल का जन्म 25 अगस्त, 1918 को काशी (उप्र) में हुआ था। पिता रास बिहारी लाल मंडल, माता सीतावती मंडल, ग्राम- मुरहो मधेपुरा। वे ब्रिटिश भारत में अवैतनिक दंडाधिकारी रहे। स्वतंत्र भारत में तीन बार विधायक, दो बार सांसद, एक बार बिहार विधान परिषद सदस्य और एक बार मुख्यमंत्री भी बने। वे पिछड़ा वर्ग आयोग-2 के अध्यक्ष एवं बिहार राज्य नागरिक परिषद के ताजिंदगी उपाध्यक्ष भी रहे। उन्होंने 4 देशों चेकोस्लोवाकिया, रोमानिया, बुल्गारिया, युगोस्लाविया की विदेश यात्रा भी की थी। अंत में 13 अप्रैल, 1982 को पटना में उन्होंने अंतिम सांस ली। पैतृक गांव में उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ। अब प्रतिवर्ष 25 अगस्त को बीपी मंडल की जयंती राजकीय समारोह के रूप में जिला प्रशासन मधेपुरा के सहयोग से आयोजित की जाती है।
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