रमजान का पाक महीना शनिवार, 25 अप्रैल से शुरू हो गया। इस्लाम को मानने वाले लोग इस महीने का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से नौवां महीना रमजान का होता है। चांद दिखने के साथ ही रमजान का महीना शुरू हो जाता है और मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखना शुरू कर देते हैं। इस बार दुनिया के तमाम मुल्क कोरोना की त्रासदी झेल रहे हैं, इसलिए रमजान भी लॉकडाउन के साये में ही होगा और लोग घरों में रहकर ही इबादत करेंगे।
रमजान के महीने में सबसे ज्यादा महत्व रोजा रखने का होता है। रोजा अल्लाह की मतलब सिर्फ भूखा-प्यासा रहना नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की इबादत करने का एक तरीका है। इसमें मन की शुद्धता भी उतनी ही जरूरी है। रोजा रखने के लिए सूर्योदय से पहले उठकर कुछ खाने-पीने का प्रावधान है। इसे सहरी कहा जाता है। सहरी का वक्त सूर्योदय से पहले का होता है और सुबह फज्र की नमाज के साथ खत्म हो जाता है। इस तरह रोजा फज्र की नमाज के साथ शुरू होता है और शाम के समय लोग मगरीब की नमाज के बाद सामूहिक रूप से इफ्तार करते हैं। इस बीच रोजा रखने वाले दिन भर रोजा रखने के साथ अपना दैनिक काम भी कर सकते हैं। साथ ही इस महीने विशेष नमाज भी की जाती है, जिसे तराबी कहते हैं।
इस बार लॉकडाउन की वजह से इफ्तार की रौनक गायब रहेगी और लोग मस्जिद की बजाय घरों में रहकर सजदा करेंगे। माना जाता है कि यह बरकतों और रहमतों का महीना होता है और सच्चे मन से की गई हर दुआ कबूल होती है। मधेपुरा अबतक आप सभी को इस पवित्र महीने की शुभकामनाएं देता है और ईश्वर से प्रार्थना करता है कि कोरोना से संसार को जल्द मुक्ति मिले।