जिले के लोगों ने उत्सव की तरह मनाया 43वाँ जिला स्थापना दिवस

आज 9 मई को जिले के लोगों ने 43वां स्थापना दिवस को उत्सव की तरह मनाया। प्रातः 7:00 बजे से सरकारी एवं गैर सरकारी स्कूलों के बच्चे प्रभात फेरी निकालकर बीएन मंडल स्टेडियम में जमा हुए। सभी स्कूली बच्चों को जिला पदाधिकारी विजय प्रकाश मीणा ने हरी झंडी दिखाई। सभी चौक-चौराहों पर स्काउट एंड गाइड के आयुक्त जयकृष्ण प्रसाद यादव, जय नारायण पंडित आदि ने स्काउट के बच्चों को ट्रैफिक कंट्रोल करने हेतु काम पर लगाया था।

दिन के 11:00 बजे बीपी मंडल इंडोर स्टेडियम में कबड्डी के लाइफलाइन माने जाने वाले जिला सचिव अरुण कुमार की देखरेख में कबड्डी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन आदि खेलों का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन जिला पदाधिकारी विजय प्रकाश मीणा, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, ओएसडी सुधीर रंजन, खेल पदाधिकारी चंदन कुमार आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर डीएम मीणा ने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए बस इतना ही कहा- खेलो इंडिया, जीतो इंडिया। पुरस्कार वितरण करते समय इन बच्चों को शिक्षाविद् डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि भारत की एकता और अखंडता को कायम रखने के लिए भारतीय रेल की तरह खेल की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। टेबल टेनिस में माही प्रथम, उर्वशी द्वितीय रही। बालक वर्ग में रमण गुप्ता प्रथम, मनोज गुप्ता द्वितीय रहे। बैडमिंटन बालिका वर्ग में माया विद्या निकेतन की राजलक्ष्मी प्रथम, द्वितीय ख्याति, तृतीय शंभवी सिंह ब्राइट एंजेल्स की। बालक वर्ग में प्रथम जगजीवन आश्रम स्कूल के देवराज, द्वितीय आदर्श चंदन माया विद्या निकेतन के एवं मोहम्मद कामरान तृतीय। बालिका कबड्डी में 39 अंक लाकर मधेपुरा टीम विजेता रही। बालक वर्ग में 43 अंक लाकर मधेपुरा टीम विजेता रही। द्वितीय स्थान पर उदाकिशुनगंज की टीम कायम रहे।

अंत तक निजी विद्यालय संघ के अध्यक्ष किशोर कुमार, टेबल टेनिस के सचिव प्रदीप श्रीवास्तव, सचिव दिलीप कुमार, विमल कुमार भारती, रितेश रंजन आदि उपस्थित रहे। निर्णायक की भूमिका में रोशन कुमार, गौरी शंकर, निशू कुमार, बंटी कुमार, प्रेम कुमार, नीरज कुमार, राखी राज, अंजू कुमारी ने अग्रणी भूमिका निभाई।

 

 

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आज है जिले का 43वां स्थापना दिवस, अतीत को याद करने का दिन

याद कीजिए 9 मई, 1981 का वह ऐतिहासिक दिन। स्थानीय रासबिहारी उच्च माध्यमिक विद्यालय का वह विशाल मैदान। दर्शकों से खचाखच भरी हुई भीड़। जिले का उद्घाटन कर रहे थे तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.जगन्नाथ मिश्र। अध्यक्षता कर रहे थे सामाजिक न्याय के पुरोधा एवं पूर्व मुख्यमंत्री बीपी मंडल। मुख्य अतिथि थे पूर्व कुलपति डॉ.केके मंडल, स्वागताध्यक्ष थे टीपी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. महावीर प्रसाद यादव और कार्यक्रम संयोजक नगरपालिका के तत्कालीन उपाध्यक्ष डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी।

प्रथम एसपी श्री अभयानंद का सम्मान करते हुए डॉ.मधेपुरी
प्रथम एसपी श्री अभयानंद का सम्मान करते हुए डॉ.मधेपुरी

जानिए कि 1845 में अनुमंडल बना था मधेपुरा। 136 वर्षों तक अनुमंडल बने रहने के बाद मधेपुरा को जिला का दर्जा देने आए थे मुख्यमंत्री डॉ.जगन्नाथ मिश्र। इस महादान के लिए महा सम्मान में जुटे थे- मधेपुरा के नर-नारियों, व्यापारियों, कर्मचारियों, बुद्धिजीवियों तथा बच्चे-बूढ़े-नौजवानों। मुख्यमंत्री डॉ.मिश्रा अपना दाहिना हाथ डीएम डॉ.एसपी सेठ (भाप्रसे) एवं बायाँ हाथ एसपी श्री अभयानंद (भापुसे) के कंधे पर रखते हुए मधेपुरा वासियों से यही कहा था- “युवा डीएम श्री एसपी सेठ आपके नए जिले का विकास एवं युवा एसपी श्री अभयानंद आपकी सुरक्षा ठीक से तभी कर पाएंगे जब आपका भरपूर सहयोग इन्हें मिलता रहेगा।”

आज भले ही 1989 में बने विशाल तीन मंजिले भवन में जिला मुख्यालय का डीएम, एसपी सहित अन्य कार्यालय जन कार्यों में लगा है, परंतु 9 मई, 1981 को यह जिला स्थानीय पुराने भवन वाले जीवन सदन की मात्र 2 कोठरियों में ही आरंभ हुआ था। उसी जीवन सदन के निकट प्रेमचंद हरनाथका के किराए वाले मकान में एसपी कार्यालय संचालित होता रहा। आरंभ में बीएन मंडल स्टेडियम की जगह सारे कार्यक्रम रासबिहारी विद्यालय के मैदान में हुआ करता था। स्वतंत्रता दिवस पर जिले का पहला ध्वजारोहण भी उसी मैदान में हुआ था।

उन दिनों डीएम का आवास तत्कालीन कोसी प्रोजेक्ट के इंस्पेक्शन बंगला (जो वर्तमान में भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यालय है) में हुआ करता था। और एसपी का आवास शहीद चुल्हाय मार्ग स्थित जिला परिषद के डाक बंगला में हुआ करता था।

अंत में कार्यक्रम संयोजक डॉ.मधेपुरी के अनुसार श्री बीपी मंडल के अध्यक्षीय भाषण के चंद शब्द जैसा उन्होंने अपने संबोधन में कहा था- “सर्वशक्तिमान ईश्वर को मैं धन्यवाद देता हूं कि मुझे इस जीवन में ही मधेपुरा को जिला होते देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ…… आज मैं मुख्यमंत्री डॉ.जगन्नाथ मिश्र को धन्यवाद देता हूं और बड़े भाई के नाते आशीर्वाद भी देता हूं कि उन्होंने मधेपुरा को जिला बनाकर साबित कर दिया कि वे जात-पात एवं संकुचित विचार से ऊपर हैं…… यूँ मुझे भी बिहार का मुख्यमंत्री रहने का मौका मिला, लेकिन अल्पावधि में ही सही मैं भी मधेपुरा को जिला नहीं बना सका।”

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