चैत्र नवरात्रि पर अपने मन व शरीर को दें विश्राम

इस बार चैत्र नवरात्रि कल से यानि 13 अप्रैल (मंगलवार) से शुरू होकर 21 अप्रैल (बुधवार) को समाप्त होगी। इस अवधि में आप अपने मन और शरीर को विश्राम अवश्य दें। यह आपकी आत्मा के विश्राम का समय होता है। यह वह समय है जब आप खुद को सभी क्रियाओं से अलग कर लेते हैं।

मौके पर मधेपुरा के खेदन बाबा चौक स्थित चैती दुर्गा मंदिर परिसर में समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी से इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जब हम इंद्रियों की इन सभी क्रियाओं (खाना, बोलना, देखना, छूना, सुनना, सूंघना….) से अलग हो जाते हैं तब हम अंतर्मुखी होने लगते हैं….. जो वास्तविक रूप में सुख, आनंद व उत्साह का स्रोत बनने लगता है। परंतु, जब हम बाह्य जगत में उलझे रहते हैं तो हम आनंद-उत्साह का अनुभव नहीं कर पाते। नवरात्रि तो वह समय है, जब हम खुद को अपने मन के धरातल से अलग कर लेते हैं….. तभी हम अपनी आत्मा के धरातल पर विश्राम करने लगते हैं। वस्तुत: इस अवधि में मौन, उपवास, जाप व ध्यान के रास्ते आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत होती है।

 

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