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मधेपुरा में ‘प्रजापिता ब्रह्माबाबा’ की 47वीं पुण्यतिथि मनी

मधेपुरा; संसार के 137 देशों में ‘प्रजापिता ब्रह्माबाबा’ की 47 वीं पुण्य तिथि मनाई जा रही है | इस अवसर पर कार्यक्रम का श्री गणेश करते हुए नारी शक्ति स्वरूपा ब्रह्मा कुमारी रंजू दीदी ने विषय प्रवेश करते हुए कहा –

प्रजापिता ब्रहमाकुमारी ईश्वरीय वि.वि.की स्थापना (वर्ष 1930, राजस्थान में) करने वाले श्रद्धेय लेखराज कृपलानी जी हैं जो शिष्यों के बीच ‘ब्रह्मा बाबा’ के नाम से और आज की तारीख में ‘प्रजापिता ब्रह्मा’ के नाम से जाने जाते हैं |

यह वि.वि. विश्व के 137 देशों में अपनी 8500 से अधिक शाखाओं के साथ 10 लाख विद्यार्थियों को प्रतिदिन आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान कर रहा है और धर्म को नये मानदंडों के साथ परिभाषित कर रहा है |

ब्रह्मा कुमारी रंजू दीदी ने यह भी कहा कि जीवन की दौड़-धूप से थक चुके मनुष्य शांति की तलाश में आज इस संस्था की ओर तेजी से प्रवृत्त हो रहे हैं |

Dr. Madhepuri paying tributes to Prajapati Brahma Baba on his 47th Death anniversary.
Dr. Madhepuri paying tributes to Prajapita Brahma Baba on his 47th Death anniversary.

वहीँ मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षाविद् साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि आज हम सभी एकत्र होकर ‘ब्रह्मा बाबा’ के चित्र में ‘ओम शांति ’ वाला उज्जवल चरित्र एवं दिव्य व्यक्तित्व की तलाश कर रहे हैं तथा सम्मिलित होकर जीवन को उत्सवमय बना रहे हैं |

डॉ. मधेपुरी ने ऋषि तुल्य जीवन के धारक भारतरत्न डॉ.कलाम के संदेश को परोसते हुए कहा– ‘ये आँखे दुनियां को दोबारा नहीं देख पायेगी, अतएव आपके अन्दर जो बेहतरीन है उसे दुनिया को देकर जाइए |

डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि पहले व्यक्ति का मन विकृत होता है, तब तन को रोग पकड़ता है | उन्होंने साधना के माध्यम से मन को नियंत्रित करने तथा आत्मविश्वास को मन-प्राणों में उतारने की बात यह कहते हुए कही कि ‘आत्मविश्वास’ आदमी के जीवन में कोई भी चमत्कार ला सकता है |

विशिष्ट अतिथि के रूप में शांतिकुंज गायत्री परिवार से जुड़े चैतन्य कुमार वर्मा ने कहा कि संसार को सकारात्मक सोच से भरनेवाले जितने भी दिव्य पीठ हैं– सभी मिल-बैठकर निरंतर प्रयास में लगे रहेंगे तो अंधेरा से हमें एक-न-एक दिन मुक्ति मिलेगी ही मिलेगी |

मधेपुरा में इस संस्था के चौखम्भा के रूप में स्थापित सर्वश्री पूर्व प्रमुख विनयवर्धन उर्फ़ खोखा बाबू, प्रो. अजय कुमार, प्रो. निरोध कुमार निराला एवं दिनेश सर्राफ सहित प्रो. अनिल कुमार, डॉ.नरेश कुमार, प्रो. अभय कुमार, प्रो.त्रिवेणी यादव, प्रो.अशोक पोद्दार एवं ओम शांति परिवार के सभी सदस्यों कविता, पूजा, माला, अनिल, विजय, वैद्यनाथ, नगीना आदि की सार्थक उपस्थिति से ब्रह्मा बाबा की श्रद्धांजलि सभा श्रद्धापूर्वक सम्पन्नता की ओर बढ़ती रही |

प्रारम्भ में प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी संस्थान, मधेपुरा की ब्रह्मा कुमारी रंजू दीदी, मुख्य अतिथि-विशिष्ट अतिथि व अन्य के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया और अंत में इच्छापूर्ण प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही श्रद्धांजलि सभा में आये हुए श्रद्धालुओं को विदाकर समापन किया गया |

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करें तस्वीरों में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के अंतिम दर्शन

president pranav mukherjee paying homage to bharat-ratna-dr-apj-kalam-mortal-2भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के पार्थिव शरीर पर श्रधांजलि अर्पित करते हुए !
prime minister modi paying homage to dr kalam
प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी नम आँखों से श्रधांजलि देते हुए !
bharat-ratna-dr-Sachin Tendulkar paying homage to apj-kalam-mortal-image-1
एक भारतरत्न दूसरे भारतरत्न के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित करते हुए !
chief minister nitish kumar paying homage to bharat-ratna-dr-apj-kalam-mortal-image-4
मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने भी  भारतरत्न कलाम को श्रधासुमन अर्पित किया !
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सेना ने भारत रत्न डॉ. कलाम को गार्ड ऑफ ऑनर से नवाजा !
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तिरंगे में लिपटा हुआ भारत रत्न कलाम का पार्थिव शरीर रामेश्वरम की अंतिम  यात्रा पर , जहाँ उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को होगा !

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समाप्त हो मृत्युदंड : कलाम ने विधि आयोग को भेजी अपनी राय

मृत्युदंड समाप्त करने के बारे में विधि आयोग को भेजी गई अपनी राय में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा है कि हम सभी ईश्वर की कृति हैं और हमें किसी भी आधार पर किसी की जान लेने का हक नहीं है। उन्होंने इस सजा का स्पष्ट विरोध किया है। हालांकि विधि आयोग को अब तक मिली करीब 400 लोगों की राय में ज्यादातर लोग मृत्युदंड बनाए रखने के पक्ष में हैं। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के अलावा राय भेजने वाले विशिष्ट लोगों में डीएमके सांसद कनीमुई भी शामिल हैं।

बता दें कि विधि आयोग मृत्युदंड पर विचार कर रहा है। इसी संदर्भ में आयोग ने पिछले वर्ष परामर्श पत्र जारी कर लोगों से मृत्युदंड पर राय मांगी थी। भले ही अब तक मिली राय में ज्यादातर लोग इसे बनाए रखने के पक्ष में हों लेकिन पूर्व राष्ट्रपति का अपनी राय में मृत्युदंड का विरोध करना अलग महत्व रखता है। उन्होंने अपनी किताब टर्निंग प्वाइंट का हवाला देते हुए उन क्षणों का जिक्र किया है जब राष्ट्रपति के तौर पर उनके सामने मृत्युदंड की सजा पुष्टि के लिए आती थी। कलाम के अनुसार उनके लिए यह काम सबसे ज्यादा मुश्किल होता था। उनका कहना है कि जब उन्होंने मामलों को अपराध की गंभीरता तथा अपराधी के सामाजिक और आर्थिक पहलू के नजरिये से खंगाला तो पाया कि मृत्युदंड की पुष्टि के लिए आए लगभग सारे मामलों मे सामाजिक और आर्थिक पक्षपात था।

उम्मीद की जा सकती है कि कलाम के कद के विचारक व्यक्तित्व की इन टिप्पणियों और मृत्युदंड के स्पष्ट विरोध के बाद मृत्युदंड पर पुनर्विचार की सम्भावना बनेगी। ना केवल मानवीय आधार पर बल्कि जैसा कि पूर्व राष्ट्रपति ने संकेत किया है इसकी सजा पाए अपराधियों के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को भी ध्यान में रख इस अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर पूरी गम्भीरता से विचार किया जाना चाहिए।

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