जानें एग्जिट पोल में बिहार की चर्चित सीटों के परिणाम

लोकसभा चुनाव का शोर थमने के बाद अब हर जगह एग्जिट पोल की चर्चा है। एग्जिट पोल में ज्यादातर एजेंसियां एनडीए को बहुमत दे रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वापसी तयप्राय दिख रही है। बिहार की बात करें तो अधिकांश एग्जिट पोल में यहां की 40 सीटों में 30 से ज्यादा सीटें एनडीए को मिलती दिख रही हैं। चैनल आजतक ने तो 38 से 40 सीटें तक एनडीए के खाते में जाने की बात कही है। कुल मिलाकर मोदी-नीतीश-रामविलास की तिकड़ी यहां काम कर गई है, इसमें कोई दो राय नहीं। सीटें एग्जिट पोल से कुछ कम या ज्यादा भले रह जाएं पर इतना तय है कि आरजेडी, कांग्रेस, रालोसपा, हम और वीआईपी का गठबंधन बिहार की जनता को कुछ रास नहीं आया।

बहरहाल, यहां हम विभिन्न एग्जिट पोल के आधार पर बिहार की कुछ चर्चित सीटों के संभावित परिणाम से अवगत कराने जा रहे हैं। शुरू करते हैं मधेपुरा से जहां आरजेडी के टिकट पर लड़े लोजद नेता शरद यादव और एनडीए व यूपीए से गोटी बिठा पाने में नाकाम रहे जाप नेता और वर्तमान सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का मुकाबला बिहार सरकार के मंत्री और जदयू उम्मीदवार दिनेश चन्द्र यादव से है। एग्जिट पोल की मानें तो मधेपुरा की इस बहुचर्चित सीट से दिनेश चन्द्र यादव बाजी मार सकते हैं। जीत-हार का फासला चाहे जो हो, शरद और पप्पू की हार यहां तय मानी जा रही है। कोसी की दूसरी सीट सुपौल भी स्पष्ट तौर पर जदयू के खाते में जाती दिख रही है। यहां से वर्तमान सांसद और पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन को जदयू उम्मीदवार दिलेश्वर कामत मात देने जा रहे हैं।

अब रुख करते हैं बेगूसराय का जिसने इस चुनाव में देश भर का ध्यान आकृष्ट किया है। एग्जिट पोल के मुताबिक बेगूसराय में गिरिराज सिंह बाजी मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। वे कन्हैया कुमार और तनवीर हसन पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। एग्जिट पोल के अनुसार गिरिराज बेगूसराय पर भाजपा का विजय पताका फहरा सकते हैं और कन्हैया कुमार को मुंह की खानी पड़ सकती है।

राजधानी पटना से जुड़ी दोनों सीटें पटना साहिब और पाटलिपुत्र का मुकाबला भी कम दिलचस्प नहीं, लेकिन दोनों ही सीटें भाजपा को मिलती दिख रही हैं। पटना साहिब में जहां भाजपा के रविशंकर प्रसाद शत्रुघ्न सिन्हा को इस बार ‘खामोश’ करने जा रहे हैं, वहीं पाटलिपुत्र सीट पर आरजेडी की मीसा भारती पिता लालू प्रसाद यादव के नाम पर सहानुभूति जुटाने में विफल होती दिखाई पड़ रही हैं। यह सीट फिर भाजपा के राम कृपाल यादव के जीतने की पूरी संभावना है।

बिहार की जमुई लोकसभा सीट पर लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को मुश्किल मुकाबले में बताया जा रहा था, लेकिन एग्जिट पोल के अनुसार वे रालोसपा के भूदेव चौधरी पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। वहीं मुंगेर से जदयू के लिए अच्छी खबर है। वहां से राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी और कांग्रेस उम्मीदवार नीलम देवी को हराने जा रहे हैं।

वैशाली में आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह पार्टी के लिए जीत का सूखा खत्म करते दिख रहे हैं। एग्जिट पोल में वे लोजपा की वीणा देवी को हराते दिख रहे हैं। वहीं, आरजेडी के लिए प्रतिष्ठा की सीट सारण पर एक बार फिर भाजपा का परचम लहराने जा रहा है। यहां से राजीव प्रताप रूड़ी लालू प्रसाद यादव के समधी चंद्रिका राय को पटखनी देने जा रहे हैं।

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सातवें चरण के साथ खत्म हुआ दुनिया का सबसे खर्चीला चुनाव

आज सातवें चरण की 59 सीटों पर मतदान के साथ भारतीय लोकतंत्र का यज्ञ पूरा हो गया। इस चरण में बिहार की आठ सीटों – नालंदा, काराकाट, जहानाबाद, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, बक्सर, आरा और सासाराम – के अलावा उत्तर प्रदेश की 13, पंजाब की 13, पश्चिम बंगाल की 9, मध्यप्रदेश की 8, हिमाचल प्रदेश की 4, झारखंड की 3 और चंडीगढ़ की 1 शामिल थी। इस चरण में प्रत्याशियों की कुल संख्या थी 918, जबकि मतदाताओं की संख्या थी 10.1 करोड़ और मतदान केन्द्रों की संख्या 1.02 लाख। अब सबकी निगाहें 23 मई की मतगणना पर जा टिकी है। हालांकि अपने-अपने एग्जिट पोल के साथ सारे टीवी चैनल शाम से ही आ डटे हैं।

बहरहाल, देश का निर्णय तो हम 23 मई को जान ही लेंगे। फिलहाल जानते हैं दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के 17वें लोकसभा चुनाव के संबंध में कुछ दिलचस्प बातें। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह चुनाव दुनिया का अब तक का सबसे खर्चीला चुनाव था। जी हाँ, नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (सीएमएस) के अनुसार सात चरणों में कराए गए इस चुनाव का कुल खर्च 50 हजार करोड़ रुपये (सात अरब डॉलर) है, जबकि 2016 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का खर्च इससे कम करीब 6.5 अरब डॉलर था।

आपको बता दें कि सीएमएस के अनुमान के अनुसार 2014 के लोकसभा चुनाव का खर्च करीब 5 अरब डॉलर था। पांच साल बाद 2019 में हो रहे 17वें लोकसभा चुनाव में इस खर्च में 40 फीसद इजाफा हो चुका है। जरा सोच कर देखिए कि जिस देश की साठ प्रतिशत आबादी महज तीन डॉलर प्रतिदिन पर गुजारा करती है, उसमें प्रति मतदाता औसतन आठ डॉलर का खर्च क्या लोकतंत्र को मुंह नहीं चिढ़ाता।

अगर आपको उत्सुकता हो रही हो कि सबसे अधिक खर्च किस मद में होता है तो बता दें कि सर्वाधिक खर्च सोशल मीडिया, यात्राएं और विज्ञापन के मद में किया जाता है। इस बार यह खर्च कितना बेहिसाब बढ़ा उसका अनुमान इसी से हो जाएगा कि 2014 में सोशल मीडिया पर जहां महज 250 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, वहीं इस बार यह खर्च बढ़कर पांच हजार करोड़ रुपये जा पहुंचा।

आज की तारीख में शायद आपको अविश्वसनीय लगे, लेकिन बकौल चुनाव आयोग, देश के पहले तीन लोकसभा चुनावों का खर्च 10 करोड़ रुपये से कम या उसके बराबर था। इसके बाद 1984-85 में हुए आठवें लोकसभा चुनाव तक कुल खर्च सौ करोड़ रुपये से कम था। 1996 में 11वें लोकसभा चुनाव में पहली बार खर्च ने पांच सौ करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया। 2004 में 15वें लोकसभा चुनाव तक यह खर्च एक हजार करोड़ रुपये को पार कर गया। 2014 में खर्च 3870 करोड़ रुपये 2009 के खर्च से करीब तीन गुना अधिक था।

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135वीं जयन्ती पर महर्षि मेंहीं मय हुआ मधेपुरा

समस्त समाज में शांति और सौहार्द कायम करने के लिए अहंकार को त्याग कर विनम्रता के मार्ग पर चलना सिखाने वाले महर्षि मेंहीं जी महाराज के जयकारे व जयघोष से शुक्रवार को सुबह-सवेरे से गुंजायमान होती रहीं मधेपुरा जिले की गलियाँ | प्रभातफेरी के दौरान वाहनों की लम्बी कतार वाली शोभायात्रा में पुरुषों से ज्यादे महिलाएं और बूढे से अधिक बच्चे शामिल थे | सत्संग, ध्यानाभ्यास व प्रवचन में शामिल हुए 50 हजार से कहीं ज्यादे भक्तजन !

बता दें कि जिले के सभी प्रखंडों में संतमत के संस्थापक ब्रह्मलीन संत महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की आकर्षक झांकियाँ गाजे-बाजे व बैंड-बाजे के साथ निकाली गईं | समाज को नई दिशा देने वाले महर्षि मेंहीं के तैलचित्र पर घर-परिवार से निकल-निकलकर जहाँ महिलाएं पुष्पांजलि करती एवं आरती उतारती देखी गईं वहीं बड़े-बुजुर्गों को चित्र पर माल्यार्पण करते देखा गया | प्रभातफेरी व शोभायात्रा या नगर-कीर्तन व मनोरम झांकी के दौरान संतो द्वारा श्रद्धालुओं को महर्षि मेंहीं के आदर्शों एवं उच्च विचारों को आत्मसात करने के लिए नारे लगाते देखे गये | इस दौरान पूरे जिले में भक्तिमय माहौल बना रहा क्योंकि महर्षि मेंहीं ने अपने उच्च सोच एवं विचारों से भटकते समाज को नई दिशा देने का काम किया था |

यह भी बता दें कि महर्षि मेंहीं की जयंती पर दिनभर सम्पूर्ण जिले में और जिले से बाहर भी उत्सवी माहौल बना रहा | कहीं दिल्ली व कोलकाता से आये श्रद्धालुओं व भक्तों को भजन-कीर्तन में मशगूल देखा गया तो कहीं चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों को जीवन में आत्मसात करने की शपथ लेते हुए कैमरे में कैद किया गया |

इस अवसर पर सामूहिक भंडारे के साथ-साथ जहाँ सभी आश्रमों में भजन-कीर्तन, प्रवचन-पुष्पांजलि, सत्संग व वेदपाठ की धूम मची रही वहीं कई प्रमुख जगहों पर अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा के मंत्रियों व महामंत्रियों द्वारा महर्षि मेंहीं के व्यक्तित्व-कृतित्व, आदर्श-आचरण व उनके सद्विचारों पर प्रकाश डालते हुए यह भी कहा गया कि संत मेंहीं युग प्रवर्तक ही नहीं युगावतार थे, एक महान समन्वयकारी संत थे | उनके बताये रास्तों पर चलकर ही सद्ज्ञान और कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो पायेगा |

चलते-चलते यह भी कि महर्षि मेंहीं का जन्म मधेपुरा जिला अंतर्गत ग्वालपाड़ा प्रखंड के मझुआ श्याम गांव में उनके ननिहाल में हुआ था जो आज की तारीख में संतमत के लाखों अनुयायियों का प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है | फिलहाल परमहंस महर्षि मेंहीं की साधना स्थली भागलपुर के कुप्पाघाट के आचार्य स्वामी हरिनंदन बाबा द्वारा जयंती समारोह पर आयोजित प्रवचन के दौरान ये बातें कही गई-

श्रद्धालुजन ! संतों के बताये मार्ग को अपनाएं, क्योंकि संतों का अवतार भटके हुए लोगों के कल्याण के लिए ही होता है | गुरूवाणी उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि सबका ईश्वर एक है और उसकी प्राप्ति का रास्ता भी एक है जो बाहर नहीं…… मनुष्य के अंदर है |

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‘वर्ल्ड हाइपरटेंशन दिवस’ पर भी तो हों अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हम

भारत में हाइपरटेंशन के कारण प्रतिवर्ष लगभग ढाई लाख लोगों की मौत हो जाती है | आखिर है क्या यह हाइपरटेंशन ?

बता दें कि हाइपरटेंशन किडनी के लिए तो खतरनाक है ही…… यह हाइपरटेंशन प्रत्येक व्यक्ति की आंखों से लेकर हार्ट तक को भी बुरी तरह प्रभावित कर डालता है | हाइपरटेंशन को समझना इसलिए बहुत आसान है कि इसके दर्जनों लक्षण हैं |

यदि आपको नींद में कमी होने लगे….. साँसों की गति तेज होने लगे….. ब्लड प्रेशर बढ़ने लगे…… मांस पेशियों में दर्द होने लगे….. भूख में कमी होने लगे……. चिड़चिड़ापन बढ़ने लगे और कमजोरी के अतिरिक्त बदन दर्द….. सिर दर्द….. और थकान के साथ-साथ पाचन की समस्याएं भी होने लगे तो समझ लें कि आप हाइपरटेंसिव हो रहे हैं जबकि अधिकांश लोग इन सब चीजों को जीवनशैली से जोड़कर नजरअंदाज करते रहते हैं |

वर्ल्ड हाइपरटेंशन दिवस (17 मई) के दिन आम लोगों को भी अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना होगा | सबों को यह जानना होगा कि ब्लड प्रेशर एक साइलेंट किलर के तौर पर आम लोगों के जीवन में जहर घोल रहा है | ये सारे लक्षण बीमारियों की सीढ़ियाँ जैसी है…. इसे समझना होगा तभी हम अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाये रख सकेंगे |

स्थानीय वृंदावन नर्सिंग होम के चिकित्सक दंपति सर्जन डॉ.वरुण कुमार एवं डॉ.रश्मि भारती ने मधेपुरा अबतक द्वारा हाइपरटेंशन के बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में यही कहा- भले ही लोग तनाव को कोई बीमारी ना माने लेकिन यह किसी बड़ी बीमारी से कम भी नहीं है | यह रात की नींद छीन लेता है और दिन की भूख-प्यास | झूठी प्रतिष्ठा और धन संचय की होड़ में लोगों की खुशियां गायब होने लगी है | नकली खुशी और हंसी के लिए लोग लाफ्टर शो की शरण में जाने लगे हैं | ऐसा लगता है कि कुछ दिनों में लोग हंसना भी भूल जायेगा…..|

यह संकल्प तो ले लें आज इस वर्ल्ड हाइपरटेंशन दिवस के दिन कि तनाव को खुद से दूर रखना है | हर हाल में खुश रहना है | क्योंकि, तनाव का खामियाजा पूरे परिवार को झेलना पड़ता है | वैवाहिक जिंदगी तबाह हो जाती है | बच्चों पर बुरा असर पड़ने लगता है | पारिवारिक कलह वाले घरों में तनाव एवं मानसिक रोगों की अधिकता देखी जाती है |

चलते-चलते यह भी जान लें कि तनाव मुक्त स्वस्थ जीवन जीने के लिए आहार, विहार के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाओं के रूप में अश्वगंधा, अर्जुना, ब्राह्मी, आवला व एलोवेरा जैसी प्रमुख वनस्पतियों का सेवन सर्वाधिक सहायक है | जहाँ दूध, संतरा और सूखे मेवे में पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है जो तनाव दूर करने में सहायक है वहीं हरी साग, सोयाबीन, मूंगफली तथा आम में मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होने के कारण ये हमारे शरीर को हाइपरटेंशन से लड़ने में सहायता करती है |

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कुलाधिपति करेंगे कार्यशाला का उद्घाटन

सूबे बिहार के विश्वविद्यालयों में शोध कार्यों की गुणवत्ता के विकास को लेकर पटना के होटल लेमन ट्री में 29 मई 2019 को एक कार्यशाला का वृहत आयोजन किया गया है | शोध गुणवत्ता को लेकर आयोजित इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति लालजी टंडन करेंगे |

बता दें कि इस अवसर पर ‘Key Notes’ देंगे स्पीकर भारतीय सामाजिक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ.बी.बी.कुमार एवं यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन के सेक्रेटरी रजनीश जैन | यूजीसी के वाइस चेयरमैन डॉ.बी.पटवर्धन एवं काउंसिल आफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के हेड डॉ.ए.के.चक्रवर्ती दोनों उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे |

यह भी बता दें कि मौके पर जहाँ गेस्ट आफ ऑनर होंगे- राजभवन के उच्च शिक्षा परामर्शी प्रो.आरसी सोबती एवं महामहिम के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह वहीं भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अवध किशोर राय विश्वविद्यालय के 20 प्रतिभा संपन्न शिक्षकों की टीम के साथ कार्यशाला में शिरकत करेंगे | जहाँ शोध-गुणवत्ता के विकास हेतु आवश्यक नीति निर्धारण, आधारभूत संरचना एवं व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु विचार-विमर्श किया जाएगा |

उद्घाटन सत्र के समापन के कुछ देर बाद तकनीकी सत्र को संबोधित करेंगे- सीएसआईआर के डॉ.हरिओम यादव, विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के परामर्शी डॉ.अखिलेश गुप्ता, अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.जे.कृष्णास्वामी, रिसर्च सेल के इंचार्ज डॉ.अखिलेश मिश्रा आदि अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक |

चलते-चलते यह भी बता दें कि बीएनएमयू के नामित 20 शिक्षकों में होंगे- स्नातकोत्तर रसायन के डॉ.ए.के.यादव एवं सीनेटर डॉ.नरेश कुमार, वनस्पति पीजी के डॉ.बीके दयाल एवं डॉ.अबुल फजल, पीजी जूलॉजी के डॉ.नरेंद्र श्रीवास्तव एवं डॉ.राजकुमार, मनोविज्ञान विभाग के डॉ.एम.आई.रहमान एवं डॉ.आनंद कुमार सिंह, दर्शनशास्त्र के धनंजय द्विवेदी एवं पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर सहित गृह विज्ञान की डॉ.प्रियंका, राजनीति विज्ञान के डॉ.आरके सिंह तथा वाणिज्य विभाग के डॉ.पी.एन.सिंह | इसके अलावा बीएसएस कॉलेज सुपौल से डॉ.संजीव, डॉ.नरेश….. MLT से डॉ.संयुक्ता- डॉ.संजीव आदि |

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बीएनएमयू में स्ट्रेस मैनेजमेंट व आपदा प्रबंधन की शुरुआत जल्द – कुलपति

बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के कुलपति कार्यालय सभाकक्ष में कुलपति डॉ.अवध किशोर राय की अध्यक्षता में व्यवसायिक कार्यक्रम के बोर्ड ऑफ़ स्टडीज की बैठक मंगलवार को आयोजित की गई | इस बोर्ड ऑफ़ स्टडीज की बैठक में विचार मंथन के बाद यह निर्णय लिया गया कि बीएनएमयू में स्ट्रेस मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन में डिप्लोमा कोर्स की शुरुआत जल्द किया जाय |

बता दें कि स्ट्रेस मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन के सिलसिले में पाठ्यक्रम एवं नियमावली तैयार करने हेतु स्नातकोत्तर भूगोल एवं पीजी मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्षों को निर्देश भी दिये गये | बैठक में यह भी तय किया गया कि यह स्ट्रेस मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स मात्र 1 वर्षीय पाठ्यक्रम होगा |

यह भी जानिए कि UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों एवं विषयों के निर्धारण व अनुमोदन से संबंधित विचार- विमर्श भी किया गया | बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक द्वारा यह भी निर्णय लिया गया कि सहरसा के रमेश झा महिला कॉलेज में सीएनडी का  त्रिवर्षीय कोर्स चलाया जाएगा | साथ ही सहरसा के ही राजेन्द्र मिश्र कॉलेज में चल रहे हेल्थकेयर कोर्स के बेहतर संचालन के लिए तथा इसके  पाठ्यक्रम एवं नियमावली में सुधार के लिए एक सब-कमिटी का भी गठन किया जाएगा |

चलते-चलते यह भी कि इस बैठक में वीसी डॉ.ए.के.राय के अलावे प्रो-वीसी डॉ.फारुक अली, डीएसडब्ल्यू डॉ.शिवमुनी यादव,सायंस डीन डॉ.अरुण कुमार मिस्र, कॉमर्स डीन डॉ.लंबोदर झा, डिप्टी रजिस्ट्रार (अकादमी) डॉ.एम.आई.रहमान सहित प्राचार्यगण डाॅ.अशोक कुमार, डॉ.माधवेंद्र झा एवं डॉ.अरुण कुमार खां आदि विचार-मंथन में भाग ले रहे थे |

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‘समान कार्य-समान वेतन’ पर कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह की बेबाक स्वीकारोक्ति !

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “समान कार्य – समान वेतन” पर दिनांक 10 मार्च 2019 को पारित न्यायनिर्णय के बाबत कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के शिक्षक प्रतिनिधि एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह ने मधेपुरा अबतक को दो दिन बाद यानि 13 मई 2019 को बेबाकी के साथ यही कहा- “शिक्षकों के सारे संगठनों की एकजुटता बनी रहे….. मैं शिक्षक संगठनों के द्वारा किये गये सभी संघर्षों की तरह इस संघर्ष में भी निष्ठापूर्वक साथ रहा हूँ…. और पूरी निष्ठा के साथ सदैव साथ रहूंगा….. शिक्षकों के हित के लिए सदा लड़ा हूँ और सदैव लडूंगा….. साथ दिया हूँ और सदा साथ दूंगा |”

सर्वोच्च न्यायालय के पारित न्यायनिर्णय के बाबत आप शिक्षकों के प्रिय प्रतिनिधि विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह द्वारा “जय शिक्षक, जय शिक्षक संघ” के प्रति अभिव्यक्त भावनाएं…. हू-ब-हू उन्हीं के शब्दों में-

“एक शिक्षक प्रतिनिधि के रूप में बेबाकी से स्वीकार करता हूँ कि ‘समान कार्य – समान वेतन’ के मामले में राज्य सरकार की बेरुखी के कारण ही विभिन्न शिक्षक संगठनों को अपेक्षित न्याय हेतु पटना उच्च न्यायालय जाना पड़ा | पुनः पटना उच्च न्यायालय द्वारा इसी मामले में सर्वोच्च न्यायालय के ही पूर्व पारित न्यायनिर्णय के आलोक में पूर्ण सकारात्मक फैसला सुनाया गया….. लेकिन राज्य सरकार द्वारा मुख्यरूप से अपने वित्तीय संसाधनों के अभाव एवं अन्य कतिपय कारणों का हवाला देते हुए शिक्षक हित के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने….. दूसरी तरफ विभिन्न शिक्षक संगठनों के नेतृत्व द्वारा इस चुनौती को स्वीकारने के पश्चात् बड़े-बड़े विद्वान एवं नामी-गिरामी अधिवक्ताओं से तथ्यात्मक सार्थक बहस कराने के उपरांत 10.05.2019 को पारित न्यायनिर्णय से स्वयं सर्वोच्च न्यायालय आज अपनी ही न्यायिक निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर विरोधाभासी स्थिति में है |

सच तो यह है कि ‘न्याय के साथ विकास’ के क्रम में आज संपूर्ण शिक्षक वर्ग ही पीछे छूट गया है….. चाहे नियोजित शिक्षक हों, वित्तरहित शिक्षक संस्थानों के शिक्षक हों, अल्पसंख्यक विद्यालय के शिक्षक हों या फिर मदरसा-संस्कृत शिक्षक हों | ऐसी स्थिति में शिक्षकों को अपने शैक्षिक दायित्व पर कम और अपनी हकमारी की लड़ाई पर ज्यादा ध्यान देना स्वाभाविक है |

लगभग 10 वर्षों के अंतराल में तो राज्य के सभी प्रमुख राजनीतिक दल मिलित में ही रहे लेकिन सफलता आंशिक ही मिली | इस मुद्दे पर आज राजनीति जितनी भी हो लेकिन जब तक शिक्षकों के विभिन्न सांगठनिक समूहों की कोई मिलित एवं कारगर रणनीति नहीं बनेगी तबतक संघर्ष भी सार्थक नहीं हो सकता | अपने संवैधानिक एवं मौलिक अधिकारों को हासिल करने हेतु अंततः हमें तरीके भी लोकतांत्रिक ही अपनाने होंगे ताकि सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति का झुकाव इस दिशा में हो |

इस आंदोलन में सभी कोटि के शिक्षकों द्वारा अपना हक प्राप्त करने की सामूहिक प्रतिबद्धता तथा उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण सभी संघ-संगठनों के साथ-साथ शिक्षकों की एकजुटता से ही सफलता संभव है | मैं भी इस संघर्ष में सदैव साथ रहा हूं और सदैव रहूंगा…… जय शिक्षक, जय शिक्षक संघ !!”

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस फैसले के बाबत जब समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से पूछा गया तो डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि इस फैसले के खिलाफ सभी शिक्षक-संगठनों को एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका अवश्य दायर करनी चाहिए क्योंकि यह फैसला भारतीय संविधान की आत्मा की आवाज को अनसुनी करने जैसा है | डॉ.मधेपुरी ने विधायकों एवं सांसदों को ₹500 प्रतिमाह मोबाइल चार्ज की जगह ₹15,000 प्रतिमाह दिये जाने पर प्रश्न उठाते हुए यही कहा कि प्रतिनिधियों को ऐसे अनाप-सनाप रूपये भुगतान करने के लिए सरकारी खजाने में पैसे कहाँ से आते हैं…..?

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अब वृक्षमाता कहलाने लगी है कर्नाटक की 106 वर्षीया पद्मश्री सालूमरदा थिमक्का

कर्नाटक की 106 वर्षीया थिमक्का जब शादी के 25 वर्ष बाद भी संतानहीन होने के कारण अहर्निश दुखी रहने लगी और उसका मन अवसाद से भरने लगा तो थिमक्का अपने पति बिकाला चिक्य्या से छिपकर खुदखुशी करने की सोचने लगी | यह महसूसने की बात है कि नारी के लिए मातृत्व कितना महत्वपूर्ण होता है |

बता दें कि इस दरमियान थिमक्का को अपने ही अंतर्मन से निकली कुछ देववाणी सुनाई देने लगी….. “आखिर जीने का कुछ तो मकसद होना चाहिए” | और अंततः यह मकसद बन गई- “हरियाली यानि पर्यावरण सुरक्षा |” तत्कालीन 50 वर्षीया थिमक्का ने अपने मन में यह ठान लिया कि अब वह गांव की सड़कों के दोनों किनारे बरगद आदि के पेड़ लगायेगी जो पेड़ एक बड़े क्षेत्र में हरियाली का एहसास करायेगा |

यह भी बता दें कि थिमक्का संपूर्ण समर्पण के साथ उन पेड़ों को अपने हाथों 4 किलोमीटर के परिक्षेत्रों में लगाती रही और अहर्निश अबोध संतान की तरह उसकी सही परवरिश, स्वस्थ देखभाल एवं सुदृढ़ पालन-पोषण करती रही-

थिमक्का सदैव वृक्षों के साथ माँ-बेटे की तरह एक अटूट रिश्ता कायम करने में लगी रही | उन पेड़ों से वह सदैव बातें करती….. उन्हें छूती रहती और उनके पत्तों को चुमती भी रहती…. हफ्ते में चार बार से अधिक……. कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर वह माँ थिमक्का दूर-दूर से अपने सिर पर पानी ढोकर लाती और पुत्रवत् उन पौधों की सिंचाई भी करती रहती |

यह भी जानिए कि थिमक्का द्वारा इन पेड़ों को ऐसी जमीन पर पंक्तिबंद्ध करके रोपे गये थे जिन जगहों पर बारिश बहुत कम हुआ करती है | थिमक्का द्वारा उठाये गये इस प्रेरणादायी कदमों के चलते उन्हें एक पर्यावरणविद्  के रूप में खूब ख्याति मिली और मिले ढेर सारे पुरस्कार भी | उस इलाके के सारे लोग थिमक्का को पर्यावरण का हीरो मानने लगे….. जिसके फलस्वरूप आस-पास के गाँवों में रहने वाले समस्त ग्रामीणों ने थिमक्का को “सालुमरदा” नामकरण करके सम्मानित भी किया …. यानि तब से लोग उन्हें  “सालुमारदा थिमक्का” कहने लगे | दरअसल कर्नाटक की भाषा ‘कन्नड़’ में ‘सालुमरदा’ का अर्थ होता है- ‘पेड़ों की पंक्ति’ |

और हाँ ! हाल ही में सालुमरदा थिमक्का को महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा राष्ट्रपति भवन में ‘पद्मश्री’ सम्मान से सम्मानित किए जाने के बाबत समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी से कुछ पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जिस अद्भुत काम को एक अनपढ़ माँ के रूप में पद्मश्री सालुमरदा थिमक्का ने समाज को समर्पित किया है वह कोई आसान काम नहीं है | इस काम को बड़े-बड़े डिग्रीधारी भी नहीं कर सकते | पौधे उपलब्ध करना, गड्ढे खोदना, पौधे लगाना….. कई-कई किलोमीटर दूर से माथे पर पानी लाना तथा पौधों की निरंतर सिंचाई करना…… ये कोई आसान काम नहीं है। सृजन का यह काम आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायी काम होगा |

आगे अंतरराष्ट्रीय मदर्स डे के अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने यही कहा-

पद्मश्री सालुमरदा थिमक्का पेड़ों की ऐसी माँ है जो सभी माँओं से अलग है, सर्वोपरि है और वैसी माँ को दुनिया का पर्याय कहने में भी कोई अतिशयोक्ति नहीं ! ऐसी माँ के बिना इन पेड़ों के जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल है | भगवान की बनाई गई अद्वितीय रचना है यह माँ थिमक्का जो मानव को ऐसी जिंदगी जीने का हौसला देती है जिसके ऋण को आनेवाली कई पीढ़ियां भी नहीं चुका सकेंगी….. वह अनपढ़ माँ पद्मश्री ही नहीं भारतरत्न सरीखे सर्वोच्च सम्मान का भी हकदार है…..!

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सत्तर वर्षों में मात्र 3 महिलाएं निर्दलीय चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंच पाई

अब तक लोकसभा चुनाव में हजार से अधिक महिलाएं निर्दलीय चुनाव लड़ी है। परन्तु, केवल तीन महिलाएं 4 बार निर्दलीय चुनाव जीत पाई हैं…. जिसमें मेनका गांधी ही 2 बार निर्दलीय जीत कर लोकसभा पहुंची है।

बता दें कि मेनका गांधी ‘पीलीभीत’ संसदीय क्षेत्र से लगातार दो बार (यानि वर्ष 1998 एवं 1999 में) निर्दलीय महिला उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंची। पहली बार वर्ष 1998 में मेनका ने बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी अनीश खान को 2 लाख मतों से पराजित कर निर्दलीय के रूप में अपनी जीत दर्ज कराई और लोकसभा में प्रवेश की….. और दूसरी बार 1999 में ही अपने विरोधी को पुनः निर्दलीय लड़कर ही 2 लाख 39 हज़ार वोटों पराजित कर लोकसभा सदस्य बनी। फिलहाल 2004 से वह  भाजपा से चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंच रही है। और हाँ ! यह भी जान लीजिए कि 2004 से अबतक कुल 528 महिलाएं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ चुकी है परन्तु एक भी जीत नहीं पाई। जबकि विगत 3 चुनावों में (2004, 2009 & 2014) में अलग-अलग दलों से महिला सांसदों की संख्या कुल 165 रही है।

यह भी बता दें कि देश के पहले लोकसभा चुनाव में यानि 1952 में दो महिलाएं निर्दलीय जीत कर लोकसभा सदस्य बनी जिसमें एक थी… टिहरी राजपरिवार की राजमाता कमलेन्दुमती शाह,  जिन्होंने कांग्रेस के कृष्ण सिंह को 13982 वोटों से पराजित किया था।

और दूसरी महिला थी…. कुमारी एनी मस्कारीन जो देश के पहले चुनाव में त्रावणकोर- कोचीन राज्य के ‘त्रिवेंद्रम’ लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय खड़ी होकर सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी सह मुख्यमंत्री टी.के.नारायण पिल्ले को 68117 वोटों से हराकर 1952 में ही लोकसभा सदस्य के रूप में चुनी गई थी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि विगत 20 वर्षों से कोई भी महिला निर्दलीय चुनाव लड़ कर लोकसभा में प्रवेश नहीं कर पाई है जबकि 2014 में 204 महिलाएं निर्दलीय चुनाव लड़़ी परन्तु कोई भी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाई।

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हर्षोल्लास पूर्वक मना 38वाँ मधेपुरा जिला स्थापना वर्षगांठ समारोह

जिलेभर में 9 मई को सुबह से देर शाम तक धूमधाम से प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय तक मनाया गया 38वाँ जिला स्थापना वर्षगाँठ | जहाँ एक ओर स्कूली बच्चे-बच्चियों द्वारा स्कूली ड्रम दल के साथ प्रभात फेरी निकाला गया वहीं दूसरी ओर बीएनएमयू गेट से बीएन मंडल स्टेडियम तक युवाओं द्वारा विकास दौड़ का आयोजन किया गया | इतना ही नहीं, बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम में जहाँ एक ओर हॉल में शतरंज खिलाड़ियों के बीच प्रतियोगिता आयोजित की गई वहीं दूसरी ओर बड़े हॉल में बालिका कबड्डी खेल का आयोजन जिलासचिव अरुण कुमार की देखरेख में आयोजित किया गया |

बता दें कि इस बालिका कबड्डी का उद्घाटन डीडीसी विनोद कुमार सिंह द्वारा एडीएम उपेन्द्र कुमार, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, जिला नजारत उपसमाहर्ता रजनीश कुमार राय आदि की उपस्थिति में नारियल फोड़ कर किया गया | मौके पर उपविकास आयुक्त एवं एडीएम उपेन्द्र कुमार ने जिले में विकास की बुनियाद की चर्चा करते हुए कहा कि जिले के सभी क्षेत्रों में बालक-बालिकाएं एकजुट होकर विकास में अपनी भागीदारी दें |

इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने पत्रकार बंधुओं से जिला स्थापना (9 मई 1981) के उद्घाटन कार्यक्रमों का आंखों देखा हाल बताते हुए यही कहा कि जिला का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.जगन्नाथ मिश्र के कर कमलों द्वारा रासबिहारी विद्यालय के ऐतिहासिक मैदान में किया गया था | अध्यक्षता कर रहे थे पूर्व मुख्यमंत्री बी.पी.मंडल एवं मुख्य अतिथि थे कुलपति डॉ.के.के.मंडल | आयोजन के संयोजक थे प्राचार्य डॉ.महावीर प्रसाद यादव एवं सहसंयोजक तत्कालीन नगरपालिका उपाध्यक्ष प्रो.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी | सीएम डॉ.मिश्र ने युवा डीएम एसपी सेठ एवं एसपी अभयानंद के बीच खड़े होकर मधेपुरा वासियों से यही कहा कि आपका भरपूर सहयोग मिलेगा तो ये दोनों आपको बेहतर प्रशासन व सुरक्षा प्रदान करेंगे |

बकौल डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी…… जिला कार्यालय सर्वप्रथम ‘जीवन सदन’ की दो कोठरियों में ही लगभग एक साल चला था और जीवन सदन के बगल के एक भाड़े के घर में एसपी कार्यालय वर्षो चला | बाद में डीएम कार्यालय सदर अनुमंडल कार्यालय परिसर में स्थानांतरित हुआ | उन दिनों डीएम निवास हुआ करता वर्तमान बीएनएमयू के कुलपति कार्यालय में जो उन दिनों कोसी प्रोजेक्ट का इंस्पेक्शन बंगलो था और एसपी निवास हुआ करता वर्तमान डाक बंगला परिसर, शहीद चुल्हाय मार्ग पर | वर्ष 1989 से अबतक वर्तमान समाहरणालय परिसर में जिले के दोनों आलाधिकारी डीएम व एसपी का कार्यालय क्रियाशील है….. जिसे प्रतिवर्ष स्थापना दिवस पर रंग-रोगन कर रंग-बिरंगी रोशनीयुक्त झालरों से सजाया जाता है….. प्रखंड कार्यालयों से लेकर एसडीएम व अन्य कार्यालयों को भी |

यह भी जानिए कि स्टेडियम में बच्चे व बुजुर्गों के लिए विभिन्न खेलों का भी आयोजन किया गया था | 5:00 बजे से 10:00 बजे रात तक स्थानीय किरण पब्लिक, हॉली क्रॉस, साउथ प्वाइंट, वाका ग्रुप, रंगकर्मी विकास के सृजन दर्पण की टीम सहित प्रो.रीता कुमारी, शशि प्रभा जयसवाल, शिवाली, तनुजा, कीर्ति एवं रोशन-रंजन जैसे मंजे हुए कलाकारों तथा बाहर से आये भागलपुर के नामदार कलाकारों की स्वर लहरियों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा व खूब सबों ने तालियाँ बटोरी |

चलते-चलते यह भी कि कबड्डी में जहां हाली क्रॉस व मलिया मध्य विद्यालय की बालिका विजेता बनी वहीं शतरंज में सुदर्शन-विशाल-सोनल व चंदा-रक्षा-जयश्री | विकास दौड़ में रंजीत-सूरज-जयकृष्ण अव्वल आये और पुरस्कृत किये गये | जहाँ विकास दौड़ को हरी-झंडी दिखाकर रवाना किया प्रोवीसी डॉ.फारूक अली व डीडीसी विनोद कुमार सिंह वहीं प्रभातफेरी को हरी झंडी दिखाकर विदा किया डीडीसी , एडीएम आदि |

पूरे कार्यक्रमों में लाइफ लाईन बनकर संचालित करते रहने वाले स्काउट एंड गाइड के आयुक्त जयकृष्ण यादव, खेल गुरु संत कुमार, कबड्डी सचिव अरुण कुमार, शशिप्रभा जायसवाल, डॉ.रंजन एवं एनडीसी रजनीश कुमार राय की पूरी टीम को दर्शकों की ओर से साधुवाद दिया गया |

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