पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का निधन

भारतीय चुनावी व्यवस्था में शुचिता और पारदर्शिता लाने में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का रविवार, 10 नवंबर 2019 को रात के करीब 9.30 बजे चेन्नई स्थित अपने घर में निधन हो गया। 86 वर्षीय शेषन पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने 1990 से 1996 के बीच चुनाव आयोग की कमान संभाली थी और अपनी निर्भीक कार्यशैली और अहम फैसलों से भारतीय चुनावी राजनीति की दिशा को निर्णायक मोड़ दिया था।
टीएन शेषन, जिनका पूरा नाम तिरुनेल्लई नारायण अय्यर शेषन था, तमिलनाडु कैडर के 1955 बैच के आईएएस ऑफिसर थे। उन्होंने 10वें चुनाव आयुक्त के तौर पर देश को अपनी सेवाएं दी थीं। उन्हीं के कार्यकाल में चुनावों में मतदाता पहचान पत्र के इस्तेमाल की शुरुआत हुई, लोगों ने आचार संहिता का मतलब समझा, पर्यवेक्षकों को काम की आजादी और वोटरों को सुरक्षा मिली, हौसला बढ़ा तो लोकतंत्र में भरोसा भी बढ़ा और चुनाव आयोग की शक्ति और सार्थकता से पूरा देश वाकिफ हुआ। उन्हें रेमन मैग्सेसे अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था।
एक वक्त ऐसा था जब देश भर के नेता टीएन शेषन से खौफ खाते थे। शांतिपूर्ण मतदान के लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश-बिहार में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करवा कर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त करवाए थे। 1995 के बिहार विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए तो उन्होंने चुनाव की तारीखों को चार बार आगे बढ़ा दिया था। शेषन थोड़ी-सी गड़बड़ होने पर भी चुनाव रद्द कर दिया करते थे। चुनाव-प्रचार को लेकर भी वे जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते। बड़े-से-बड़े नेता को भी चुनाव-प्रचार की सीमा खत्म होने पर वे सभा नहीं करने दिया करते। अधिकारियों के प्रति भी वे काफी सख्त थे। कर्तव्य-पालन में कोई चूक उन्हें बर्दाश्त नहीं हुआ करती।
बता दें कि टीएन शेषन का जन्म 15 दिसंबर 1932 को केरल के पलक्कड़ जिले के थिरुनेल्लई में हुआ था। पलक्कड़ से स्कूल की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से फिजिक्स में ग्रैजुएशन किया। मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में उन्होंने तीन साल डेमॉन्स्ट्रेटर के तौर पर भी काम किया और साथ ही साथ आईएस की तैयारी भी करते रहे। आईएएस की परीक्षा पास करने के उपरांत वे एक फेलोशिप पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पढ़ाई करने चले गए, जहां उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री हासिल की। 1989 में वे देश के 18वें कैबिनेट सचिव बने। मुख्य चुनाव आयुक्त का दायित्व उन्हें प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के कार्यकाल में मिला था।
देशसेवा, कर्तव्यपरायणता और दृढ़ इच्छाशक्ति के बेमिसाल प्रतीक टीएन शेषन को ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि..!

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