बिहार के सभी जिलों में बनाए जाएंगे परमानेंट हेलीपैड

बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग के प्रधान सचिव चंचल कुमार ने सूबे के सभी जिलों के जिलाधिकारियों को स्थाई हेलीपैड निर्माण हेतु 100 मीटर लंबा एवं 100 मीटर चौड़ा स्थल चयन करने को कहा है। श्री कुमार ने जिलों को भेजे गए संदेश में कहा है कि संभव हो तो स्थाई हेलीपेड हेतु चयन किए जाने वाले स्थल पुलिस लाइन, स्टेडियम या किसी हाई स्कूल के मैदान में हो ताकि स्थाई हेलीपैड की समुचित देखभाल व सुरक्षा की जा सके।

बता दें कि स्थाई हेलीपैड निर्माण की बात नीतीश सरकार को इसलिए कुरेदती रहती है कि बिहार में प्रायः प्राकृतिक एवं कृत्रिम आपदाएं आती रहती हैं। सभी जानते हैं कि बाढ़, सुखाड़, भूकंप, चक्रवाती तूफान, अगलगी या शीतलहरी के मामले में बिहार एक संवेदनशील राज्य रहा है।

यह भी बता दें कि ऐसी विकट आपदाओं के समय लोगों को राहत दिलाने के लिए हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जाता है। उस घड़ी जिलाधिकारी को तुरंत अस्थाई हेलीपैड बनाने में सर्वाधिक परेशानी होती है। ऐसी स्थितियों की पुनरावृति रोकने के लिए तथा राजस्व के अपव्यय के साथ-साथ जल्दबाजी में हेलीपैड निर्माण में कई त्रुटियां रह जाने को ध्यान में रखते हुए स्थाई हेलीपैड निर्माण का निर्णय लिया गया है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि किसी भी प्रकार की आपदाएं आने पर खाद्य सामग्री या अन्य आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति हेतु या वीआईपी के सर्वेक्षण अथवा निरीक्षण हेतु आने-जाने को लेकर बार-बार जिला प्रशासन को मशक्कत नहीं करनी पड़े…… इसलिए प्रत्येक जिले में स्थाई हेलीपैड की सराहना सबों ने की है।

 

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जीवनदायी सूर्यदेव के प्रति श्रद्धा का पर्व है छठ

पृथ्वी पर जीवन का आधार है सूर्य क्योंकि सूर्य, को जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य के आलोक से पृथ्वी पर जीवन प्रकाशित हो उठता है। छठ व्रत इसी जीवनदायी सूर्य देव को आभार प्रकट करने का महापर्व है। ऐसा महापर्व जिसमें बिना किसी भेदभाव के समस्त समाज सामूहिक रूप से डूबते एवं उगते सूर्य को अर्घ्य देता है।

बता दें कि छठ एक अति प्राचीन महोत्सव है जिसे दिवाली के बाद छठे दिन मनाया जाता है। बिहार झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश… सहित देश के विभिन्न महानगरों में श्रद्धालुओं द्वारा इस प्रकृति प्रेम के प्रतीक छठ पर्व को सर्वाधिक निष्ठा पूर्वक मनाया जाता है। छठ में सभी श्रद्धालु नर-नारी जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। जल तो प्रेम का प्रतीक है चाहे नदी का हो या तालाब का या घर का ही क्यों ना हो।

यह भी जानिए कि यह पर्व सूर्य को आभार व्यक्त करने की परंपरा है। इस पर्व का उद्देश्य सूर्यदेव से अपनेपन को महसूस करना है। सूर्य देव को दूध या जल का अर्घ्य अर्पित किया जाना इस तथ्य को दर्शाता है कि श्रद्धालुओं का मन और हृदय दोनों पवित्र और स्वच्छ बना रहे। फिलहाल पद्मश्री शारदा सिन्हा का छठ गीत वातावरण को सरस बनाने में लग गया है।

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बिहार प्रदेश जदयू की नई कार्यकारिणी का गठन

बिहार प्रदेश जदयू अध्यक्ष व सांसद बशिष्ठ नारायण सिंह ने राज्य कार्यकारिणी का गठन किया। कार्यकारिणी में 12 उपाध्यक्ष, 19 महासचिव, 11 सचिव, 01 कोषाध्यक्ष, 38 संगठन प्रभारी और 59 सदस्य शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने 30 प्रकोष्ठों के अध्यक्षों का भी मनोनयन किया।
प्रदेश जदयू के 12 उपाध्यक्ष हैं: नवल किशोर राय, विश्वनाथ सिंह, एनएन शाही, लखन ठाकुर, रंजीत सिन्हा, श्यामबिहारी राम, रुदय राय, राजन मिश्रा, अंजली सिन्हा, मौलाना उमर नूरानी, प्रो. महेन्द्र प्रसाद सिंह और नरेन्द्र सिंह। जिन 19 नेताओं को महासचिव का दायित्व सौंपा गया है, वे हैं: डॉ. नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार, परमहंस कुमार, चन्दन कुमार सिंह, कामाख्या नारायण सिंह, मंजीत सिंह, अजय पासवान, प्रदीप सिंह, अरुण कुशवाहा, निहोरा प्रसाद यादव, अशोक कुमार बादल, अशोक कुमार सिंह, डॉ. सुहेली मेहता, डॉ. आसमां परवीन, दुर्गेश राय, विभूति गोस्वामी, आसिफ कमाल, डॉ. विपिन कुमार यादव और रामगुलाम राम। विधानपार्षद ललन कुमार सर्राफ को एक बार फिर कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
बशिष्ठ नारायण सिंह ने राज्य कार्यकारिणी का गठन करते हुए पार्टी के 30 प्रकोष्ठों के अध्यक्ष का भी मनोनयन किया। अभय कुशवाहा को एक बार फिर युवा प्रकोष्ठ, तन्वीर अख्तर को अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, प्रो. रामवचन राय को बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ, डॉ. अमरदीप को मीडिया प्रकोष्ठ एवं सुनील कुमार को प्रशिक्षण प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दूसरी ओर आधे से अधिक प्रकोष्ठों के अध्यक्ष बदले गए हैं। जिन प्रकोष्ठों में नए चेहरे सामने लाए गए हैं, उनमें महिला प्रकोष्ठ (श्वेता विश्वास), व्यावसायिक प्रकोष्ठ (मूलचन्द गोलछा), दलित प्रकोष्ठ (रामप्रवेश पासवान), महादलित प्रकोष्ठ (रुबेल रविदास) और शिक्षा प्रकोष्ठ (डॉ. कन्हैया सिंह) प्रमुख हैं।
चार जिलों में नए जिलाध्यक्ष भी मनोनीत किए गए हैं। सोनेलाल मेहता को खगड़िया, दामोदर रावत को जमुई, सलमान रागिब को नवादा और राकेश कुमार उर्फ पुतुल को आरा (नगर) की जिम्मेदारी दी गई है।

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मधेपुरा में राजकीय गोपाष्टमी महोत्सव की भव्य तैयारी अंतिम चरण में

मधेपुरा के श्री कृष्ण गौशाला में द्वितीय राजकीय गोपाष्टमी महोत्सव का आयोजन आगामी 5 से 7 नवंबर तक करने का निर्णय डीडीसी सह प्रभारी डीएम विनोद कुमार सिंह की अध्यक्षता में लिया गया। यह निर्णय जिला प्रशासन की स्थाई समिति के सदस्यों एवं अन्य गणमान्य की उपस्थिति में किया गया।

बता दें कि बैठक में मुख्य रूप से प्रचार-प्रसार के साथ-साथ कलाकारों के चयन के लिए वरीय एडीएम शिव कुमार शैव की अध्यक्षता में एक कलाकार चयन समिति बनाई गई, जिसे समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, डॉ.शांति यादव, पृथ्वीराज यदुवंशी, डॉ.रवि रंजन, शशिप्रभा जायसवाल एवं हर्षवर्धन सिंह राठौर को जोड़ते हुए राजकीय स्तर से लेकर स्थानीय कलाकारों के चयन व सफल आयोजन हेतु जिला की कला संस्कृति की अस्थाई प्रशासनिक समिति का दर्जा दिया गया।

यह भी बता दें कि निर्णय अनुसार गोपाष्टमी महोत्सव के उद्घाटन के लिए सर्वप्रथम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह किया जाएगा। स्वीकृति नहीं प्राप्त होने पर कला संस्कृति या पर्यटन मंत्री या फिर स्थानीय मंत्री नरेंद्र नारायण यादव या डॉ.रमेश ऋषिदेव या फिर जिला प्रभारी मंत्री बिहार के ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को उद्घाटन हेतु अनुरोध किया जाएगा। यह भी निर्णय लिया गया कि समयाभाव के कारण स्मारिका प्रकाशन हेतु आने वाले वर्ष में पहले से ही तैयारी की जाएगी।

बैठक में एसडीएम शिव कुमार शैव, एनडीसी रजनीश कुमार राय, एएसपी, सदर बीडीओ, नगर परिषद कार्यालय पदाधिकारी, प्रभारी पदाधिकारी सामान्य शाखा, शौकत अली, कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार, पत्रकार प्रो.प्रदीप झा एवं तुर्वसू आदि उपस्थित थे।

बैठक के अंत में यह तय किया गया कि 5 नवंबर को विनोद ग्वार और मैथिली ठाकुर, 6 नवंबर को सपना अवस्थी और नालंदा संगीत अकादमी तथा 7 नवंबर को राधा कृष्ण की झांकी संग पूर्णिमा श्रेष्ठ की प्रस्तुति प्रतिदिन संध्या 7:00 बजे से 10:00 बजे रात तक होगी। वरिष्ठ सदस्य डॉ.मधेपुरी द्वारा को प्रदर्शनी वाले प्रस्ताव को भी शामिल कर स्वीकृति प्रदान की गई।

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क्या कहते हैं बिहार में उपचुनाव के परिणाम ?

बिहार में हुए उपचुनाव में एनडीए की अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं आए। उसे उम्मीद थी कि इस बार भी लोकसभा चुनाव जैसे परिणाम ही मिलेंगे, लेकिन स्पष्ट तौर पर इन चुनावों में बड़े नेता और बड़े नारों की जगह स्थानीय मुद्दे और समीकरण अधिक हावी रहे। विधानसभा की पांच सीटों में से जदयू ने चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सफलता केवल नाथनगर में मिली। आरजेडी ने भी चार सीटों पर अपने उम्मीदवार दिए थे, जिनमें बेलहर और सिमरी बख्तियारपुर के रूप में दो सीटें जीतने में वह सफल रही। वहीं, एक-एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार करणजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह और हैदराबाद के सांसद ओवैसी की पार्टी एमआईएमआईएम के कमरूल होदा ने जीत हासिल की। उधर समस्तीपुर लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में लोजपा उम्मीदवार प्रिंस राज ने कांग्रेस के डॉ. अशोक कुमार को 1,02,090 वोटों से मात दी।
नाथनगर विधानसभा क्षेत्र में जदयू के लक्ष्मीकांत मंडल ने आरजेडी की राबिया खातून को 5131 वोट से हराया। वहीं, सिमरी बख्तियारपुर सीट से आरजेडी के जफर आलम ने जदयू के डॉ. अरुण कुमार को 15505 वोट से और बेलहर में आरजेडी के रामदेव यादव ने जदयू के लालधारी यादव को 19231 वोट से हराया। उधर दरौंदा में भाजपा के बागी उम्मीदवार करणजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह ने जदयू के अजय कुमार सिंह को 27279 वोट से शिकस्त दी, जबकि किशनगंज में एमआईएमआईएम के कमरूल होदा ने भाजपा की स्वीटी सिंह को 10204 वोट से मात दी। ओवैसी की पार्टी का बिहार में सीट हासिल करना बिहार में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकता है।
बहरहाल, इन चुनावों में आए परिणाम भले ही एनडीए के अनुकूल न रहे हों, लेकिन बिहार में एनडीए के सर्वमान्य और सबसे बड़े चेहरे नीतीश कुमार के मनोबल पर कोई असर पड़ता नहीं दिखता। इन नतीजों के बाद उन्होंने कहा कि “जनता मालिक होती है। मैं पहले भी कह चुका हूँ। जब भी उपचुनाव में हम कम सीटों पर जीतते हैं तो चुनाव में ज्यादा सीटें जीतते हैं। यह पहले से होता रहा है। अगले चुनाव में हमारी बड़ी जीत होगी।”
नीतीश कुमार के आत्मविश्वास की दाद देनी होगी। लेकिन 2020 के लिए उन्हें अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम करना होगा और बाकी दल भी उपचुनाव के नतीजों के आधार पर जोड़-तोड़ में लग चुके होंगे, इसमें कोई दो राय नहीं।

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महाराष्ट्र की पहली नेत्रहीन महिला प्रांजल पाटिल बनी आईएएस

जब 2016 में प्रांजल ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में 773वीं रैंक हासिल की तो उन्हें भारतीय रेल सर्विस में नौकरी करने का प्रस्ताव मिला, परंतु दृष्टि बाधित होने पर उन्हें नौकरी नहीं मिला भारतीय रेल में |

बता दें कि प्रांजल रेल विभाग के इस निर्णय से बेहद निराश हुई, परंतु वह हार मानने की जगह दोबारा संघर्षपूर्ण प्रयास करने लगी | प्रांजल पुनः UPSC की परीक्षा की तैयारी में जुट गई | अपने लक्ष्य के साथ वह प्रांजल खड़ी रही और अड़़ी रही | इस बार वह 124वीं रैंक लेकर प्रशिक्षणोंपरांत एर्नाकुलम सहायक कलेक्टर के पद पर नियुक्त हुई |

केरल कैडर की प्रांजल पाटिल उपजिलाधिकारी के पदभार संभालते हुए घोषणा की कि वह एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करना चाहती है जिसमें हर व्यक्ति को बिना भेदभाव के अवसर मिले | महाराष्ट्र के उल्लास नगर  में जन्मी 28 वर्षीया प्रांजल ने एक वाक्य में अपना संदेश दुनिया को यूँ दिया-

बिना किसी विराम के और बिना किसी थकान के मैं चलती रही…..मैंने कभी हार नहीं मानी …. बल्कि यही महसूसती रही कि जो गहराई में उतरता है…. वही मोती पाता है |

अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देती हुई आईएएस प्रांजल पाटिल ने यही कहा कि मुझे हरदम माता-पिता से प्रेरणाएं मिलती रही | उन्हीं की प्रेरणा से वह जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय से एमए करने के बाद एमफिल और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की | यद्यपि प्रांजल मात्र 6 साल की उम्र में नेत्रहीन हो गई जब खेल-खेल में ही प्रांजल की एक आंख में पेंसिल लग गई | यह हादसा इतना गंभीर रूप ले लिया कि कुछ ही दिनों बाद प्रांजल की दोनों आंखों की रोशनी चली गई | अचानक उजाले से अंधेरे में चली गई इस दुनिया से जूझना…… अब प्रांजल के लिए नेत्रहीन पर्वतारोही कंचन गाबा की तरह सबसे बड़ी चुनौती बन गई है |

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शिवानंद तिवारी: राजनीति से या आरजेडी से ‘छुट्टी’

भीतरी-बाहरी परेशानियों से एक साथ जूझ रही आरजेडी को मंगलवार को एक और झटका लगा। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाने वाले पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने मंगलवार को राजनीति से ‘छुट्टी’ पर जाने की घोषणा कर दी। शिवानंद ने खुद को थका हुआ बताते हुए कहा कि अब थकान अनुभव कर रहा हूं और साथ ही स्पष्ट किया कि शरीर से ज्यादा मन की थकान है। उन्होंने संस्मरण लिखने की भी इच्छा जताई है।

बहरहाल, शिवानंद ने मंगलवार को अपने फेसबुक वॉल पर लिखा, ‘अब थकान अनुभव कर रहा हूं। शरीर से ज्यादा मन की थकान है। संस्मरण लिखना चाहता था, वह भी नहीं कर पा रहा हूं, इसलिए जो कर रहा हूं, उससे छुट्टी पाना चाहता हूं। संस्मरण लिखने का प्रयास करूंगा, लिख ही दूंगा, ऐसा भरोसा भी नहीं है लेकिन प्रयास करूंगा। इसलिए आरजेडी की ओर से जिस भूमिका का निर्वहन अब तक मैं कर रहा था, उससे छुट्टी ले रहा हूं।’

हालांकि, शिवानंद तिवारी ने आरजेडी छोड़ने से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि वे पार्टी नहीं छोड़ रहे, केवल राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहेंगे। लेकिन सूत्रों का कहना है कि शिवानंद तिवारी इन दिनों आरजेडी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। पार्टी के कई फैसलों को लेकर उनसे पूछा तक नहीं गया और कई मौकों पर उनकी सलाह को नेतृत्व द्वारा नजरअंदाज किया गया, जिससे वे नाराज चल रहे हैं। बहरहाल, वे अपने निर्णय पर कायम रहेंगे या उनकी राजनीति कोई नया मोड़ लेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

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हिन्दी साहित्य में भी लोकप्रिय हो रही है गज़ल- डॉ.मधेपुरी

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अंबिका सभागार में सुकवि सियाराम यादव मयंक के एकल काव्य पाठ का आयोजन वरिष्ठ साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ की अध्यक्षता में किया गया। विषय प्रवेश करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि मयंक की गजलें हिन्दी गीति काव्य की एक महत्वपूर्ण विधा के रूप में हृदय के मनभावों को अभिव्यक्त करती हैं। पहले गजलों में कोमल भावों की अभिव्यक्ति मिलती थी, किन्तु अब मयंक सरीखे सचेतन गज़लकारों की गजलें श्रृंगार रस की अनुभूतियों की अपेक्षा जीवन के यथार्थ से जुड़कर अपनी व्यापकता से हमारी संवेदनाओं को स्पर्श करती हैं।

इस अवसर पर सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि गज़ल अरबी साहित्य की प्रसिद्ध काव्य विधा है जो बाद में फारसी, उर्दू और हिन्दी साहित्य में पर्याप्त लोकप्रिय हुई। डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि हिन्दी के दुष्यंत कुमार सहित अनेक रचनाकारों ने इस विधा को अपनाया। इसी परंपरा में सुकवि मयंक का नाम आता है। अब तो मयंक की गजलें सामान्य श्रोताओं के सिर चढ़कर बोलने लगी है।

उद्गार व्यक्त करते हुए डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप, डॉ.विनय कुमार चौधरी, प्रो.सचिन्द्र, प्रो मणिभूषण वर्मा, रघुनाथ यादव आदि ने यही कहा कि गज़लें व्यक्ति चेतना, सामाजिक चेतना, राजनीतिक असमानता एवं जीवन के विविध आयामों को उकेरती हैं। गज़ल के चिंतन पक्ष को मौलिक ढंग से ऊंचाई देने में मयंक ने कामयाबी भी हासिल की है। सबों ने मयंक की कामयाबी की सराहना की।

मयंक ने अपनी लगभग बीस गजलों का सस्वर पाठ किया। हाल में ही प्रकाशित गज़ल की पुस्तक “मोहब्बत के चिराग” से भी उन्होंने अनेक गजलें तरन्नुम में सुना श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर खूब तालियाँ बटोरी। धन्यवाद ज्ञापन सचिव डॉ.मधेपुरी ने किया।

इस अवसर पर साहित्यानुरागी उल्लास मुखर्जी, शिवजी साह, डॉ.अशोक कुमार, फर्जी कवि डॉ.अरुण कुमार, डाक अध्यक्ष राजेश कुमार, डॉ.एन.के. निराला, नीरज कुमार, निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र, प्राचार्य डॉ.हरिनंदन यादव आदि ने संस्थापक युगल शास्त्री प्रेम की स्मृति में कविता पाठ किया।

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बिहार में उपचुनाव के लिए प्रचार थमा, 21 अक्टूबर को होगा मतदान

बिहार में विधानसभा की पांच सीटों – सिमरी बख्तियारपुर, नाथनगर, बेलहर, दरौंदा और किशनगंज – तथा एक लोकसभा सीट समस्तीपुर के लिए उपचुनाव के प्रचार का शोर शनिवार शाम को थम गया। इसके बाद रविवार को उम्मीदवार घर-घर जाकर वोट मांगेंगे। इन सभी सीटों के लिए 21 अक्टूबर को मतदान होना है। चुनाव आयोग ने इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान के लिए सुरक्षा बलों का पुख्ता इंतजाम किया गया है। बता दें कि विधानसभा की इन पांच और लोकसभा की एक सीट के लिए कुल 51 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और इन सभी सीटों के लिए कुल 3258 बूथों पर वोट डाले जाएंगे।

बिहार के इस उपचुनाव में एनडीए ने जहां इसी साल संपन्न हुए लोकसभा चुनावों की तरह एक बार फिर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की है और पूरे उत्साह में दिख रहा है, वहीं महागठबंधन पिछले चुनावी सदमे से अभी तक पूरी तरह उबरा नहीं दिख रहा। 24 अक्टूबर को आने वाले परिणामों में 2020 के संकेत छिपे होंगे, इसमें कोई दो राय नहीं।

बहरहाल, इन उपचुनावों में नाथनगर से जदयू के प्रत्याशी लक्ष्मीकांत मंडल हैं। उनका मुकाबला राजद की राबिया खातून और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी हम के अजय कुमार राय से है। वहीं, सिमरी बख्तियारपुर से जदयू के डॉ. अरुण कुमार उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला राजद के जफर आलम और महागठबंधन में रहे मुकेश सहनी की पार्टी वीआइपी के उम्मीदवार से है। बेलहर से जदयू के उम्मीदवार लालधारी यादव हैं। उनका मुकाबला राजद के रामदेव यादव से है। दरौंदा से जदयू के उम्मीदवार अजय सिंह हैं। उनका मुकाबला राजद के उमेश सिंह से है। वहीं, किशनगंज सीट पर भाजपा उम्मीदवार स्वीटी सिंह का मुकाबला कांग्रेस की शाइदा बानो से है। समस्तीपुर लोकसभा सीट पर एनडीए की ओर से लोजपा के प्रिंसराज चुनाव मैदान में हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के डॉ. अशोक कुमार से है।

चलते-चलते बता दें कि समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में सुबह सात से शाम पांच बजे तक वोटिंग होगी, जबकि एक विधानसभा कुशेश्वरस्थान में सुबह सात से शाम चार बजे तक मतदान का समय तय किया गया है। वहीं, विधानसभा उपचुनाव वाले क्षेत्रों में किशनगंज, दरौंदा, नाथनगर में सुबह सात से शाम पांच बजे तक वोटिंग होगी, जबकि, सिमरी बख्तियारपुर और बेलहर में सुबह सात से शाम चार बजे तक मतदान का समय चुनाव आयोग तय किया है।

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राज्य निःशक्तता आयुक्त डॉ.शिवाजी दिव्यांगों के लिए दिनभर रासबिहारी स्कूल के मैदान में जूझते रहे

मधेपुरा के रासबिहारी उच्च विद्यालय के मैदान में दिव्यांग जनों की असहज भीड़ को देखकर आयुक्त डॉ.शिवाजी ने सहजरूप से अंदाजा लगा लिया कि ऐसे लोगों की कितनी सारी परेशानियां अब भी अनसुलझी हैं जिन्हें सुलझाने में निःशक्तता आयुक्त दिनभर जूझते रहे | वे विगत 3 दिनों से विभिन्न प्रखंडों एवं सरकारी संस्थानों में बैठक का आयोजन कर लोगों को जागरूक करवाते रहे तथा स्वयं सबों को उत्साहित, प्रोत्साहित व जागरूक करते रहे |

State Disability Commissioner Dr.Shivajee Kumar, ADM Upendra Kumar and others controlling the crowd of persons with disabilities.
State Disability Commissioner Dr.Shivajee Kumar, ADM Upendra Kumar and others controlling the crowd of persons with disabilities.

बता दें कि अंतिम दिन जिलेभर से अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे दिव्यांगों के बीच राज्य निःशक्तता आयुक्त डॉ.शिवाजी कुमार, डीएम नवदीप शुक्ला एवं एसपी संजय कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया | मौके पर आयुक्त ने दिव्यांग जनों से यही कहा कि आप लोग घबराएं नहीं…… काम तबतक चलता रहेगा जबतक अंतिम व्यक्ति के मामले का निष्पादन नहीं हो जाता | डीएम व एसपी ने कहा कि यदि कोई आपके साथ अन्याय या दुर्व्यवहार करे तो आप तुरंत इसकी शिकायत करें |

State Disability Commissioner Dr.Shivajee Kumar, Lead Bank Officer Ranjan Kumar Jha (Donor) & others giving a Hand Sewing Portable Machine to a disable girl under eighteen years.
State Disability Commissioner Dr.Shivajee Kumar, Lead Bank Officer Ranjan Kumar Jha (Donor) & others giving a Hand Sewing Portable Machine to a disable girl under eighteen years.

यह भी बता दें कि दिव्यांग जनों की समस्याओं के निदान हेतु आयोजित नीतीश सरकार के इस चलंत अदालत में 56 काउंटरों पर 2569 दिव्यांगों का हुआ रजिस्ट्रेशन, जिसमें मात्र 1270 मामलों का किया गया निष्पादन | आयुक्त डॉ.शिवाजी कुमार ने बाद में यही कहा कि आज के बाद से आप सभी दिव्यांग जनों को किसी भी कारण से जिला मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा | उन्होंने कहा कि सभी प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी को सख्त हिदायत दी गई है कि आपकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर वही करें | यदि कोई भी पदाधिकारी आपको परेशान करे तो आप इसकी सूचना तुरंत वरीय अधिकारी के पास करें |

चलते-चलते यह भी बता दें कि राज्य निःशक्तता आयुक्त डीएम, एसपी, एसडीएम उपेंद्र कुमार, शैलेंद्र कुमार शैव, लीड बैंक मैनेजर रंजन कुमार झा सहित अन्य सभी के सहयोग के बावजूद शिविर स्थल पर दिव्यांगजनों की भारी भीड़ रहने के कारण दर्जनों दिव्यांग अपनी समस्याओं से संबंधित फॉर्म जमा नहीं कर पाये | इस बाबत मधेपुरा जिला परिषद अध्यक्ष मंजू देवी , उपाध्यक्ष रघुनंदन दास, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, डॉ.श्यामानंद गिरी, शंभू शरण भारतीय आदि दर्जनों लोगों ने प्रखंडवार शिविर आयोजित करने की मांग की |

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