बिहार के 40 में सिर्फ 4 हैं…. सौ फ़ीसदी उपस्थिति वाले सांसद

भारतीय संसद में लोकसभा के सांसदों की संख्या 545 है। इसमें दो मनोनीत होते हैं। कुल 543 सांसद विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के माध्यम से जनता द्वारा चुनकर संसद में प्रवेश करते हैं। संसद की बैठकों में वे कितने दिनों तक हाजिर अथवा गैर हाजिर रहते हैं…. संसद की इन गतिविधियों पर नजर रखने वाले संगठन का नाम है- पीआरएस  लेजिसलेटिव रिसर्च। यह संगठन पारदर्शिता के साथ संसदीय गतिविधियों को लोगों तक पहुंचाता है।

बता दें कि पीआरएस के अनुसार 17वीं लोकसभा के पहले सत्र में जितने भी सांसद सदन की बैठकों में रोज हाजिर रहे…. इस श्रेणी के लोकसभा सदस्यों की संख्या 79 है…. जिसमें बिहार के 40 सांसदों में सिर्फ 4 हैं। चार में एक भाजपा के पुराने सांसद हैं, एक जदयू के पुराने सांसद तथा दो जदयू के नवनिर्वाचित सांसद हैं।

यह भी जानिए कि इन चारों में हैं कौन-कौन ? पहला तो महाराजगंज से भाजपा टिकट पर दूसरी बार जीते सांसद हैं जनार्दन सिंह सिग्रीवाल जो नीतीश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। वही नालंदा के पुराने जदयू सांसद हैं कौशलेंद्र कुमार।

यह भी बता दें कि शेष दो नए सांसदों एक हैं झंझारपुर से जदयू टिकट पर पहली बार सांसद बने रामप्रीत मंडल जो सांसद बनने से पहले पंचायत समिति सदस्य एवं प्रखंड प्रमुख भी रहे हैं वही नवनिर्वाचित दूसरे सांसद हैं- आलोक कुमार सुमन, जो गोपालगंज से पहली बार जदयू टिकट पर जीते हैं… इससे पहले राजनीति के क्षेत्र में उनके नाम की चर्चा भी नहीं थी।

अंत में यही कि 100 फ़ीसदी हाजिरी वालों में कुल 79 सांसद हुए संपूर्ण देश में. जिसमें बिहार के 4 सांसद हैं। इन चार में दो नवनिर्वाचित हैं और दो पुराने हैं। एक भाजपा के हैं और तीन जदयू के हैं वहीं जदयू जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

 

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गंभीर बीमारियों से जुड़े इलाज की चर्चा वेदों में- पीएम नरेन्द्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश की जनता से यही कहा कि हमारे पास हजारों वर्ष पुराना वेदों का भंडार है जिसमें एक-से-एक गंभीर बीमारियों से जुड़े इलाज की चर्चा है। लोग उधर ध्यान नहीं दिए हैं।

बता दें कि पीएम मोदी के अनुसार हम अपने प्राचीन अनुसंधानों को आधुनिकता से जोड़ने में बहुत ज्यादा सफल नहीं हो पाए बल्कि आधुनिकता की चकाचौंध में उन्हें भूलते चले गए। नमो ने देशवासियों से कहा कि इसी स्थिति को बीते 5 वर्षों में हमने लगातार बदलते रहने का भरसक प्रयास किया है।

यह भी बता दें कि ये सारी बातें पीएम मोदी ने दिल्ली में आयोजित “योग पुरस्कार समारोह” को संबोधित करते हुए उपस्थित लोगों के बीच कहा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आयुष मंत्रालय के जरिए बीते 5 वर्षों से इस स्थिति को बदलने का काम अनवरत जारी है।

इस अवसर पर नमो द्वारा उद्घोषणा की गई कि प्राचीन शोधों को प्रयोगशालाओं में मान्यता दी जा रही है। साथ ही उन मान्यताओं को इस तरह पेश किया जा रहा है जिससे चिकित्सा विज्ञान भी उन्हें समझ सके। मोदी ने स्वीकार किया कि वेदों के पुराने ज्ञान को सफलतापूर्वक आधुनिकता के साथ जोड़ने में बहुत कम सफलता मिली है, फिर भी देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के विकास पर तेजी से काम चल रहा है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा कि केवल आधुनिक चिकित्सा ही नहीं, आयुष की शिक्षा में भी अधिक व बेहतर पेशेवर आएं, इसके लिए भी आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं। जब हम देश में और डेढ़ लाख स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र खोलने जा रहे हैं तो भला आयुष को कैसे भूलेंगे।

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हॉकी सम्राट ध्यानचंद की जयंती पर क्रिकेट एवं अन्य खिलाड़ियों को किया गया पुरस्कृत

आज बीपी मंडल इंडोर स्टेडियम में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के 115वीं जन्म जयंती पर मधेपुरा नेहरू युवा केन्द्र द्वारा खेलकूद से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन जिला खेल पदाधिकारी सच्चिदानंद, एनवाइसी समन्वयक अजय कुमार गुप्ता एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार के संयुक्त नेतृत्व में किया गया। सर्वप्रथम प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छ भारत के बाद ‘स्वस्थ भारत अभियान’ के तहत राष्ट्रीय खेल दिवस पर देश के खिलाड़ियों एवं नर-नारियों के लिए दिये गये प्रसारण “फिट होगा इंडिया तो हिट होगा इंडिया” को सबों ने सुना।

Dr.Madhepuri addressing players at BP Mandal Indoor Stadium.
Dr.Madhepuri addressing players at BP Mandal Indoor Stadium.

बता दें कि खिलाड़ियों को मेजर ध्यानचंद की जयंती पर सम्मानित करते हुए मुख्य अतिथि के रुप में समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि जब देश गुलाम था तब हाॅकी के इस जादूगर ध्यानचंद ने 4 वर्षों पर होने वाले ओलंपिक खेल में वर्ष 1928, 1932 एवं 1936 में गोल्ड मेडल जीतकर भारत को हॉकी विश्व गुरु का सम्मान दिलाया था। डॉ.मधेपुरी ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि यह कितनी बड़ी विडंबना है कि जिसने भारत को दुनिया में गौरवान्वित किया, भारत के उस रत्न को आज तक भारतरत्न सरीखे सम्मान से वंचित रखा जा रहा है…… क्या यही समुचित न्याय है ?

इस अवसर पर भौतिकी के विद्वान डॉ.मधेपुरी ने भौतिकी के प्रोफेसर व वैज्ञानिक डॉ.होमी जहांगीर भाभा को संदर्भित करते हुए अवरुद्ध कंठ से कहा कि जिस भाभा ने एशिया का पहला परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थापित कर भारत को “परमाणु युग” के शीर्ष तक ले गया….. तथा फादर ऑफ न्यूक्लियर पावर कहलाने वाला वह वैज्ञानिक डॉ.भाभा “Atom for Peace” के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करने हेतु जेनेवा जाने के क्रम में 24 जनवरी 1966 को कालकलवित हो गया…… आजतक भारत के वैसे रत्न को भी भारतरत्न हम सबों का भारत नहीं दे सका, जिसके लिए उन्होंने सर्वस्व निछावर कर दिया।

चलते-चलते यह भी बता दें कि आज ध्यानचंद जयंती पर बीपी मंडल स्टेडियम में मधेपुरा एवं खगड़िया जिला क्रिकेट टीमों के बीच एकदिवसीय मैच का शुभारंभ अध्यक्ष मुन्ना बाबू, जिला खेलकूद पदाधिकारी ध्यानी यादव, संतोष कुमार झा, अरुण कुमार आदि द्वारा किया गया जिसमें जीत मधेपुरा टीम की हुई। डॉ.मधेपुरी ने दोनों टीमों के खिलाड़ियों से यही कहा-

न हारना और….. न जीतना जरूरी है।

जीवन खुद खेल है, खेलना जरूरी है।।

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इस तरह कलक्टर आशीष सक्सेना बने उच्च कोटि के समाज सुधारक

वर्तमान में आशीष सक्सेना (IAS) बतौर अपर आयुक्त, नगरीय प्रशासन व विकास संचनालय, भोपाल (मध्य प्रदेश) में कार्यरत हैं | मध्यप्रदेश के झाबुआ में दहेज प्रथा पर अंकुश लगाने वाले तत्कालीन कलक्टर आशीष सक्सेना कुशल प्रशासक ही नहीं सर्वाधिक संवेदनशील हृदय के व्यक्ति हैं |

बता दें कि झाबुआ क्षेत्र में ‘वधू मूल्य प्रथा’ का चलन जोरों पर था  | वधू मूल्य प्रथा में होता यही है कि वर पक्ष लड़की के पिता को अच्छी खासी राशि देता है और लड़की के पिता राशि के लालच में कम उम्र में ही बेटी की शादी तय कर देता है | वर्षों पुरानी इस कुरीति से झाबुआ का समाज ग्रसित होता चला आ रहा था |

कलेक्टर आशीष बताते हैं कि झाबुआ की एक 13 वर्षीय रेखा नाम की आदिवासी लड़की की पीड़ा ने उनके संवेदनशील हृदय को इस कदर परेशान कर दिया कि उन्होंने अपने 28 महीने (सितंबर 2016 से दिसंबर 2018) तक के कार्यकाल में इस दहेज दापा के कलंक से हजारों-हजार बालिकाओं को मुक्ति दिलाने का सराहनीय काम कर दिखाया |

जानिए कि यह सब हो कैसे गया ? वह 13 वर्षीय रेखा भूरिया जब तमिलनाडु में आयोजित “राष्ट्रीय योग प्रतियोगिता” में पदक जीतकर लौटी और अपने प्रशिक्षक के साथ वह कलेक्टर आशीष सक्सेना से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंची तो सक्सेना ने रेखा से उसके भविष्य के बारे में कुछ बातें की और उसी दरमियान आशीष ने जब यह पूछा कि बड़ी होकर तुम क्या बनना चाहती हो ….. यह सुनते ही रेखा की आंखें डबडबा गईं |

खामोशी को तोड़ते हुए रेखा के प्रशिक्षक जितेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि इसकी शादी उसके पिताजी द्वारा तय कर दी गई है….. इसलिए वह दुखी है | कलक्टर आशीष रेखा के परिजनों से मिलकर उसकी शादी के शगुन के रूप में पिता ने जो राशि वर पक्ष से ली थी वह लौटाने के लिए उन्हें राजी कर लिया | रेखा को छात्रावास में भर्ती करवाया गया और उसने आगे की पढ़ाई शुरू कर दी | बस यहीं से कलेक्टर आशीष सक्सेना ने दहेज दफा के खिलाफ कमर कस ली |

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बी.पी.मंडल के 101वीं राजकीय जयंती समारोह पर लगा ब्रेक, लोगों ने मनाई जयंती

मंडल कमीशन के अध्यक्ष बी.पी.मंडल की 101वीं जयंती के मौके पर उनके पैतृक गाँव मुरहो में कोसी के विद्वतजनों, राजनीतिक महकमों के कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों ने समारोहपूर्वक जयंती मनाई। भला क्यों न मनाते…… सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े समाज के मजबूत स्तंभ थे बीपी मंडल। गरीबों एवं दलितों के नेता थे बीपी मंडल।

बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री रह चुके अरुण जेटली के निधन के फलस्वरूप दो दिवसीय राजकीय शोक (24-25 अगस्त) के कारण बी.पी.मंडल के 101 वीं राजकीय जयंती समारोह पर ब्रेक लग गया।

इस अवसर पर उनके पैतृक गाँव मुरहो स्थित उनकी समाधि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विस्तृत संबोधन में डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि 1 वर्ष 8 महीना 22 दिनों तक कश्मीर से कन्याकुमारी एवं राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक घड़ी की सूई की तरह चलते रहने वाले बीपी मंडल द्वारा समर्पित रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन पीएम बीपी सिंह के द्वारा इस रिपोर्ट को लागू किया गया…..  पिछड़ों को 27% आरक्षण का लाभ दिया गया….. जिसके फलस्वरूप देश के सभी धर्मों के 3743 जातियों के उपेक्षित लोगों को मंडल आयोग का लाभ मिला।

मौके पर पूर्व विधायक मणीन्द्र कुमार मंडल उर्फ ओमबाबू, प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.अरुण कुमार मंडल, डॉ.शान्ति यादव, आनंद मंडल, जदयू अध्यक्ष प्रो.बिजेन्द्र नारायण यादव, प्रो.सुजीत मेहता, डॉ.आलोक कुमार, नरेश पासवान , अशोक चौधरी, प्रो.नारायण प्रसाद यादव, डॉ.नीलाकांत, डॉ.नीरज कुमार, महानंद ठाकुर, शौकत अली , छठू ऋषिदेव, उमेश ऋषिदेव, सरोजिनी देवी, मुर्तुजा अली, शशि कुमार, वीरेंद्र सिंह, भानु प्रताप मंडल आदि ने कहा कि मंडल के आदर्शों पर चलकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो.श्यामल किशोर यादव ने की। अध्यक्ष श्री यादव ने कहा कि ग्रामीणों व अतिथियों की भारी संख्या में उपस्थिति इस बात का सबूत है कि अभी भी लोगों के दिलों में मंडल जी के लिए अगाध प्रेम है।

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पीवी सिंधु की ऐतिहासिक उपलब्धि

ओलंपिक रजत पदक विजेता पीवी सिंधु ने इतिहास रच दिया। रविवार को स्विट्जरलैंड में बीडब्ल्यूएफ बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप-2019 के फाइनल में उन्होंने जापान की खिलाड़ी नोजोमी ओकुहारा को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही सिंधु वर्ल्ड चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। गौरतलब है कि इससे पहले बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भारत के लिए महिला और पुरुष दोनों वर्गों में से किसी ने गोल्ड मेडल नहीं जीता था।
पीवी सिंधु ने नोजोमी ओकुहारा को सीधे गेमों में 21-7, 21-7 से पराजित किया। 38 मिनट तक चले इस मुकाबले को जीतने के साथ ही सिंधु ने 2017 के फाइनल में ओकुहारा से मिली हार का हिसाब बराबर कर लिया। ओकुहारा के खिलाफ सिंधु का कैरियर रिकार्ड अब 9-7 का हो गया है।
बता दें कि भारत ने इस टूर्नामेंट में अब तक तीन रजत और छह कांस्य पदक जीते थे। सिंधु इससे पहले इस टूर्नामेंट में 2017 और 2018 में लगातार दो बार फाइनल में हारी थीं। लेकिन इस बार उन्होंने इस सिलसिले को तोड़ दिया। इस टूर्नामेंट में 2013 से खेल रही सिंधु के नाम अब पांच पदक हो गए हैं। इनमें एक स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य शामिल हैं। विश्व की किसी भी महिला खिलाज़ी ने अब तक इतने पदक नहीं जीते। यह भी जानें कि फाइनल जीतने के साथ ही इस टूर्नामेंट में सिंधु द्वारा अब तक जीते मैचों की संख्या 21 हो गई है। उन्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से कोटिश: बधाई।

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बिहार का अमिताभ अब चाँद पर उतारेगा चन्द्रयान

शिक्षक दिवस 5 सितंबर के दो दिन बाद यानी 7 सितंबर को जब चन्द्रयान-2 चाँद की सतह पर उतरेगा तो धरती से लेकर अंतरिक्ष तक बिहार की प्रतिभा का पूरी दुनिया में डंका बजेगा | भारत के अति महत्वपूर्ण मिशन में बिहार के वरीय वैज्ञानिक (चन्द्रयान -2 के डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर एवं ऑपरेशन डायरेक्टर) अमिताभ की प्रमुख भागीदारी से समस्तीपुर जिला से लेकर सारे शिक्षण संस्थान (एएन कॉलेज पटना व बीआईटी मेसरा) जहाँ उन्होंने शिक्षा ग्रहण किया वे सभी गौरवान्वित हो रहे हैं |

बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक्स में गहरी अभिरुचि होने के कारण अमिताभ बचपन में रेडियो के पुर्जे खोलकर जोड़ने का अभ्यास करते-करते 1989 में एएन कॉलेज से एमएससी इन इलेक्ट्रॉनिक्स तक की पढ़ाई पूरी कर ली और एमटेक की पढ़ाई बीआईटी मेसरा से पूरी की | फिर 2002 में इसरो से जुड़े और चन्द्रयान -1 और चंद्रयान-2 मिशन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन्हें दी गई | वर्ष 2008 में सर्वप्रथम वे चन्द्रयान -1 मिशन में प्रोजेक्ट मैनेजर की भूमिका का निर्वहन सर्वाधिक सफलतापूर्वक करते रहे |

यह भी बता दें कि वैज्ञानिक अमिताभ द्वारा चंद्रमा की सतह पर चन्द्रयान -2 को लैंड कराने के लिए काफी रिसर्च किया गया | चंद्रमा के किस ओर की सतह पर चन्द्रयान -2 उतरेगा…… पहले इस काम के लिए रूस का सहयोग लिया जाना था, लेकिन रूस की अकारण उदासीनता से चंद्रयान-2 के लेंडर को विकसित करने की पूरी जिम्मेदारी अमिताभ की टीम को ही दे दी गई है |

चलते-चलते यह भी बता दें कि बिहार के इस वैज्ञानिक अमिताभ को इंडियन सोसायटी आफ रिमोट सेंसिंग सेंटर देहरादून से यंग अंतरिक्ष अवार्ड दिया जा चुका है |

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पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का निधन

देश के पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली का लंबी बीमारी के बाद आज दोपहर 12 बजकर 07 मिनट पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे। उन्हें कुछ दिन पहले ही सांस लेने में दिक्‍कत के कारण एम्स में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक जगत में शोक की लहर व्याप्त है। उनका अंतिम संस्कार कल दोपहर बाद दिल्ली के निगम बोध घाट पर होगा।

28 दिसंबर 1952 को में दिल्ली में जन्मे अरुण जेटली की प्रारंभिक शिक्षा वहां के सेंट जेवियर स्कूल में हुई। दिल्ली के ही प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से उन्होंने ग्रैजुएट और लॉ फैकल्टी से कानून की पढ़ाई की। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत एबीवीपी से हुई और 1977 में वे दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। इसी साल उन्हें एबीवीपी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। आपातकाल के दौरान युवा जेटली जेपी के आंदोलन में शामिल हो गए। इस दौरान वे जेल भी गए और वहीं उनकी मुलाकात उस वक्त के वरिष्ठ नेताओं से हुई। जेल से निकलने के बाद भी उनका जनसंघ से संपर्क बना रहा और 1980 में उन्हें भाजपा के यूथ विंग का प्रभार सौंपा गया। इस समय भाजपा अटल-आडवाणी के नेतृत्व में आगे बढ़ रही थी और पार्टी के बढ़ने के साथ ही जेटली का कद भी लगातार बढ़ता गया। इस दौरान पार्टी के प्रवक्ता के तौर पर भी उन्होंने देश भर में प्रतिष्ठा और चर्चा हासिल की।

साल 1999 में अरुण जेटली वाजेपेयी सरकार में राज्यमंत्री बने। एक साल के भीतर ही उन्हें कैबिनेट में जगह दे दी गई। उन्हें कानून मंत्रालय के साथ ही विनिवेश मंत्रालय का भी जिम्मा सौंपा गया। 2009 में जेटली को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। नेता प्रतिपक्ष के रूप में जेटली बहुत तैयारी के साथ सरकार को घेरते थे। तीन बार राज्यसभा के सदस्य रहे जेटली ने 2014 में पहली बार अमृतसर से लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों चुनाव हार गए। इस हार के बावजूद उनके कद पर कोई असर नहीं पड़ा और मोदी कैबिनेट में उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया। साथ ही राज्यसभा में सदन का नेता भी। 2019 में वे स्वास्थ्य कारणों से न तो चुनाव लड़े, न ही सरकार में शामिल हुए।

विलक्षण प्रतिभा के धनी अरुण जेटली प्रतिष्ठित राजनेता होने के साथ ही देश के बेहतरीन वकीलों में भी शुमार किए जाते हैं। 80 के दशक में ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और देश के कई हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण केस लड़े। 1990 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट ने सीनियर वकील का दर्जा दिया। वीपी सिंह की सरकार में उन्हें मात्र 37 वर्ष की उम्र में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल का पद मिला। बोफोर्स घोटाला, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भी नाम था, उन्होंने 1989 में उस केस से संबंधित पेपरवर्क किया था। पेप्सीको बनाम कोका कोला केस में जेटली ने पेप्सी की तरफ से केस लड़ा था। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि..!

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तमिलनाडु के वैज्ञानिक के.शिवम को मिला डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पुरस्कार

इसरो प्रमुख यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष सह अंतरिक्ष विभाग के सचिव वैज्ञानिक के.शिवम को विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए मुख्यमंत्री के.पलानीस्वामी ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार के “डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम” पुरस्कार से सम्मानित किया |

बता दें कि कभी इसरो प्रमुख रह चुके डॉ.कलाम सूर्य की तरह दीप्तिमान और चंद्रमा की तरह शीतल रहकर भारत को मिसाइल देकर शक्तिशाली बनाया था और गांधीयन मिसाइल-मैन कहलाया था……. उसी महामहिम राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के निधन के बाद तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने उनके नाम पर पुरस्कार की घोषणा की थी | वर्ष 2015 में डॉ.कलाम के निधन के बाद से यह पुरस्कार दिया जाने लगा है |

यह भी बता दें कि इसरो प्रमुख के.शिवम को वर्ष 2019 के पुरस्कार स्वरूप प्रशंसा-पत्र के अतिरिक्त 8 ग्राम का गोल्ड मेडल और 5 लाख की राशि 73वें स्वतंत्रता दिवस के दिन अपरिहार्य कारणवश नहीं प्राप्त किये जाने के कारण मुख्यमंत्री कार्यालय में कल ससम्मान हस्तगत कराया गया |

यह भी जानिए कि डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पुरस्कार दिया किसे जाता है….. डॉ.कलाम पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी, मानवता और छात्र कल्याण को बढ़ावा देने के लिए काम करते हैं | साथ ही तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के द्वारा तमिलनाडु के ही वैज्ञानिक होने के कारण डॉ.कलाम के नामवाले पुरस्कार को पानेवालों में तमिलनाडु के ही वैज्ञानिक होने की शर्त लगा दी गई थी…. जबकि विज्ञान किसी व्यक्ति विशेष की धरोहर नहीं, उसके दरवाजे ऐसे हरेक व्यक्ति के लिए खुले रहने चाहिए जो मानवता की भलाई के लिए कार्यरत हैं |

 

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पूर्व सांसद व शिक्षा मंत्री रह चुके डॉ.महावीर के नाम बॉटनिकल गार्डन बनाने की स्वीकृति दी सिंडिकेट ने

मधेपुरा के सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक व प्रखर राजनीतिक गतिविधियों में अपनी भागीदारी निभाने के साथ-साथ शैक्षिक जगत में परचम लहराने वाले डॉ.महावीर प्रसाद यादव के नाम भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस स्थित विज्ञान भवन के पीछे खाली पड़ी भूमि पर उनके पुत्र डॉ.अरुण कुमार (विभागाध्यक्ष, स्नातकोत्तर जन्तु विभाग, बीएनएमयू) द्वारा दिये गये “डॉ.महावीर बॉटनिकल गार्डन व पार्क” बनाने के प्रस्ताव को सिंडिकेट द्वारा सर्वसम्मति से गत बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई ।

बता दें कि टी.पी.कॉलेज के विश्वकर्मा कहे जाने वाले प्राचार्य डॉ.महावीर प्रसाद यादव भिन्न-भिन्न रूपों में मधेपुरा की सेवा करते रहे। डॉ.यादव यहीं से विधायक बनकर राज्य शिक्षा मंत्री बने…… सांसद रहे और दो-दो विश्वविद्यालयों के प्रतिकुलपति और अंत में बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर सेवारत रहते हुए मधेपुरा को अलविदा कह दिये। ताजिंदगी प्राचार्य डॉ.महावीर बाबू छात्रों एवं उनके अभिभावकों से यही कहते रहे कि भोज-भगैत-भंडारा आदि से रिश्ता तोड़ो और शिक्षा से नाता जोड़ो।

ऐसे समाजसेवी-शिक्षाविद् डॉ.महावीर प्रसाद यादव के नाम पर बॉटनिकल गार्डन व पार्क निर्माण के बाबत सिंडिकेट द्वारा दी गई स्वीकृति पर उनके निकटतम सहकर्मी प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने यही कहा कि ऐसे शिक्षाविद डॉ.महावीर बाबू की स्मृति को कायम रखने हेतु कुलपति डॉ.ए.के.राय व उनकी पूरी टीम सहित सिंडिकेट के सभी सदस्य साधुवाद के पात्र हैं।

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